नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 09 (Part - 01) तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- कंप्यूटर नेटवर्किंग (Computer Networking)
- संचार माध्यम और केबल (Transmission Media & Cables)
- वायरलेस संचार (Wireless Communication)
- वाई-फाई और ब्लूटूथ मानक (Wi-Fi & Bluetooth Standards)
- नेटवर्किंग प्रोटोकॉल और पोर्ट नंबर (Protocols & Port Numbers)
- नेटवर्किंग डिवाइस (Networking Devices)
- सर्वर के प्रकार और होस्टिंग (Types of Servers & Hosting)
- इंटरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब और ब्राउज़र (Internet, World Wide Web & Browsers)
- मोबाइल नेटवर्किंग (Mobile Networking)
- मोबाइल कंप्यूटिंग (Mobile Computing)
📌 महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सारणी (Important Notice & Schedule)
UPSSSC Lower PCS और आगामी परीक्षाओं के संपूर्ण Computer Syllabus को कवर करने के लिए हमने कुल 18 Practice Sets का एक विशेष प्लान तैयार किया है।
- शुरुआत और समापन (Schedule): यह प्रैक्टिस सेट सीरीज 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 20 अगस्त तक नियमित रूप से चलेगी।
- लक्ष्य (Goal): चूंकि आपका UPSSSC Lower PCS का एग्जाम 23 अगस्त को होना तय है, इसलिए हम 20 अगस्त तक पूरा सिलेबस समाप्त कर देंगे। इससे आपको परीक्षा से ठीक पहले 2-3 दिन खुद से अंतिम रिवीजन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन इस 👉 सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
| सूची-I (प्रोटोकॉल) | सूची-II (पोर्ट नंबर) |
|---|---|
| a. FTP (File Transfer Protocol) | i. पोर्ट 25 |
| b. SMTP (Simple Mail Transfer Protocol) | ii. पोर्ट 21 |
| c. DNS (Domain Name System) | iii. पोर्ट 80 |
| d. HTTP (Hypertext Transfer Protocol) | iv. पोर्ट 53 |
सही मिलान a-ii, b-i, c-iv, d-iii है (विकल्प A):
- a. FTP (File Transfer Protocol) - पोर्ट 21: क्लाइंट और सर्वर के बीच फाइलों के हस्तांतरण तथा कंट्रोल कनेक्शन स्थापित करने के लिए TCP पोर्ट 21 का उपयोग किया जाता है। (डेटा ट्रांसफर के लिए पोर्ट 20 का प्रयोग होता है)।
- b. SMTP (Simple Mail Transfer Protocol) - पोर्ट 25: इंटरनेट पर सर्वर-टू-सर्वर ई-मेल भेजने और आउटगोइंग मेल ट्रांसमिशन के लिए पोर्ट 25 का उपयोग होता है।
- c. DNS (Domain Name System) - पोर्ट 53: डोमेन नामों (जैसे www.example.com) को उनके संबंधित IP पतों में अनुवादित करने के लिए पोर्ट 53 (UDP/TCP) का उपयोग किया जाता है।
- d. HTTP (Hypertext Transfer Protocol) - पोर्ट 80: वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) पर असुरक्षित वेब पेज ट्रांसफर के लिए पोर्ट 80 का उपयोग होता है।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण पोर्ट नंबर (परीक्षा हेतु उच्च उपयोगी तथ्य):
| प्रोटोकॉल | पोर्ट नंबर | विवरण |
|---|---|---|
| SSH (Secure Shell) | 22 | सुरक्षित रिमोट लॉगिन |
| Telnet | 23 | असुरक्षित टेक्स्ट-आधारित रिमोट लॉगिन |
| POP3 (Post Office Protocol 3) | 110 | ई-मेल प्राप्त/डाउनलोड करने के लिए |
| IMAP (Internet Message Access Protocol) | 143 | सर्वर पर ई-मेल प्रबंधित और सिंक्रनाइज़ करने हेतु |
| HTTPS (HTTP Secure) | 443 | एन्क्रिप्टेड/सुरक्षित वेब संचार |
सही उत्तर स्विच (Switch) है। नेटवर्क स्विच एक इंटेलिजेंट नेटवर्किंग डिवाइस है जो OSI मॉडल की दूसरी परत यानी डेटा लिंक लेयर (Data Link Layer) पर काम करता है। यह नेटवर्क में जुड़े उपकरणों के भौतिक पते यानी मैक एड्रेस (MAC Address) की एक तालिका (MAC Address Table) बनाता है। जब कोई डेटा फ़्रेम स्विच के पास पहुँचता है, तो स्विच केवल उसी विशिष्ट पोर्ट पर डेटा भेजता है जिससे लक्षित उपकरण जुड़ा होता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- हब (Hub): यह एक नॉन-इंटेलिजेंट उपकरण है जो OSI की फिजिकल लेयर (Layer 1) पर कार्य करता है। यह ब्रॉडकास्टिंग तकनीक पर काम करता है, यानी आने वाले डेटा को सभी जुड़े हुए पोर्ट्स पर भेज देता है, जिससे नेटवर्क में टकराव बढ़ता है।
- रिपीटर (Repeater): यह भी फिजिकल लेयर (Layer 1) का उपकरण है, जिसका मुख्य कार्य कमजोर होते हुए सिग्नलों को एम्पलीफाई करके सिग्नल की दूरी बढ़ाना है।
- राउटर (Router): यह OSI मॉडल की नेटवर्क लेयर (Layer 3) पर काम करता है और IP एड्रेस के आधार पर दो या दो से अधिक अलग-अलग नेटवर्कों के बीच डेटा पैकेट्स को रूट करता है।
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि ब्लूटूथ तकनीक का आधिकारिक IEEE मानक IEEE 802.15.1 है।
ब्लूटूथ एक कम दूरी की वायरलेस संचार तकनीक है जो 2.4 GHz के बिना लाइसेंस वाले ISM (Industrial, Scientific, and Medical) रेडियो फ्रीक्वेंसी बैंड पर कार्य करती है। इसकी सहायता से व्यक्तिगत उपकरणों जैसे मोबाइल फोन, हेडफोन, स्मार्टवॉच और लैपटॉप के बीच WPAN स्थापित किया जाता है।
दिए गए अन्य IEEE मानकों का विवरण:
- IEEE 802.3: यह ईथरनेट (Ethernet) यानी वायर्ड लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) का मानक है।
- IEEE 802.11: यह वाई-फाई (Wi-Fi) यानी वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क (WLAN) का मानक है।
- IEEE 802.5: यह टोकन रिंग (Token Ring) नेटवर्क संरचना का मानक है।
- IEEE 802.16: यह WiMAX (Worldwide Interoperability for Microwave Access) यानी ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस का मानक है।
परीक्षा के लिए अतिरिक्त तथ्य: ब्लूटूथ नाम 10वीं शताब्दी के डेनमार्क के राजा हैरार्ड ब्लूटूथ (Harald Blåtand) के नाम पर रखा गया है। ब्लूटूथ तकनीक में डेटा सुरक्षा के लिए फ्रीक्वेंसी-हॉपिंग स्प्रेड स्पेक्ट्रम (FHSS) विधि का उपयोग किया जाता है।
||Easy Q4||नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) के रूप में अंकित किया गया है:अभिकथन (A): ट्रांसपोर्ट लेयर (Transport Layer) पर कार्य करने वाला TCP (Transmission Control Protocol) एक कनेक्शन-ओरिएंटेड (Connection-oriented) और विश्वसनीय प्रोटोकॉल है।
कारण (R): TCP डेटा ट्रांसमिशन से पहले थ्री-वे हैंडशेक (Three-way Handshake) प्रक्रिया द्वारा कनेक्शन स्थापित करता है और पावती (Acknowledgement) तंत्र का उपयोग करता है।||अभिकथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।|अभिकथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|इनमें से कोई नहीं||C||
सही उत्तर विकल्प C है। अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सटीक व्याख्या करता है।
व्याख्या एवं तर्क: TCP (Transmission Control Protocol) OSI मॉडल की ट्रांसपोर्ट लेयर (Layer 4) पर कार्य करने वाला एक प्रमुख प्रोटोकॉल है।
- थ्री-वे हैंडशेक प्रक्रिया: प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच डेटा भेजने से पहले TCP तीन चरणों में कनेक्शन स्थापित करता है: SYN → SYN-ACK → ACK। इसी कारण इसे कनेक्शन-ओरिएंटेड कहा जाता है।
- विश्वसनीयता (Reliability): ट्रांसमिशन के दौरान यदि कोई डेटा पैकेट नष्ट हो जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो प्राप्तकर्ता उसकी पावती (ACK) नहीं भेजता, जिससे TCP उस पैकेट को पुनः प्रेषित करता है।
TCP बनाम UDP की तुलना (परीक्षा दृष्टि से महत्वपूर्ण):
| विशेषता | TCP (Transmission Control Protocol) | UDP (User Datagram Protocol) |
|---|---|---|
| प्रकार | कनेक्शन-ओरिएंटेड | कनेक्शन-लेस (Connection-less) |
| गति | धीमी (ओवरहेड के कारण) | अत्यधिक तीव्र |
| विश्वसनीयता | उच्च (Error checking & ACK मौजूद) | कम (No ACK / No Retransmission) |
| उपयोग | वेब पेज (HTTP/HTTPS), ई-मेल (SMTP), फाइल ट्रांसफर (FTP) | ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग, VoIP, DNS, ऑनलाइन गेमिंग |
सही उत्तर विकल्प D है, क्योंकि कथन 4 फाइबर ऑप्टिक केबल के बारे में गलत है।
वास्तव में, फाइबर ऑप्टिक केबल की बैंडविड्थ (Bandwidth) ट्विस्टेड पेयर (Twisted Pair) और कोएक्सियल (Coaxial) केबलों की तुलना में अत्यधिक उच्च होती है और लंबी दूरी के ट्रांसमिशन में इसमें डेटा हानि (Signal Attenuation) सबसे कम होती है।
अन्य कथनों का विश्लेषण:
- कथन 1 सही है: फाइबर ऑप्टिक में डेटा ग्लास या प्लास्टिक के पतले धागों (Core) के माध्यम से प्रकाश के पल्स के रूप में यात्रा करता है।
- कथन 2 सही है: चूंकि इसमें धातु का उपयोग नहीं होता और डेटा प्रकाश के रूप में चलता है, इसलिए यह बाहरी इलेक्ट्रिकल या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) और रेडियो फ्रीक्वेंसी इंटरफेरेंस (RFI) से प्रभावित नहीं होता।
- कथन 3 सही है: फाइबर ऑप्टिक केबल प्रकाशिकी के भौतिक सिद्धांत पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) पर काम करती है, जहाँ केबल के 'कोर' (Core) का अपवर्तनांक उसके बाहरी आवरण 'क्लैडिंग' (Cladding) से अधिक रखा जाता है।
फाइबर ऑप्टिक केबल की मुख्य संरचना:
- Core: केंद्रीय भाग जहाँ से प्रकाश गुजरता है।
- Cladding: कोर को घेरने वाला भाग जो प्रकाश को अंदर परावर्तित करता है।
- Buffer Coating: बाहरी नमी और भौतिक क्षति से सुरक्षा देने वाली परत।
सही उत्तर यूआरएल (Uniform Resource Locator - URL) है। URL इंटरनेट या वर्ल्ड वाइड वेब पर स्थित किसी भी संसाधन (जैसे वेब पेज, इमेज, फाइल) का वैश्विक और अद्वितीय पता होता है।
URL का उदाहरण और इसके घटक:https://www.example.com:443/index.html
https://→ प्रोटोकॉल (Protocol)www.example.com→ डोमेन नेम (Domain Name):443→ पोर्ट नंबर (Port Number)/index.html→ फाइल पाथ (File Path)
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण:
- IP एड्रेस (Internet Protocol Address): यह नेटवर्क से जुड़े उपकरण का पहचान करने वाला एक न्यूमेरिक पता होता है (जैसे 192.168.1.1)।
- MAC एड्रेस (Media Access Control Address): यह नेटवर्क इंटरफेस कार्ड (NIC) का 48-बिट का स्थायी भौतिक पता होता है।
- डोमेन नेम (Domain Name): यह IP एड्रेस का मानव-पठनीय रूप होता है, जैसे google.com।
- 1G (प्रथम पीढ़ी) नेटवर्क में केवल एनालॉग वॉइस कॉल (Analog Voice Calls) की सुविधा उपलब्ध थी।
- 2G तकनीक ने डिजिटल सिग्नलिंग की शुरुआत की और एसएमएस (SMS) व एमएमएस (MMS) सेवाओं को संभव बनाया।
- 4G LTE नेटवर्क पूरी तरह से IP-आधारित (Packet Switched) नेटवर्क आर्किटेक्चर पर कार्य करता है।
सही उत्तर विकल्प C (I, II और III सभी सही हैं) है।
तीनों कथनों की व्याख्या:
- कथन I सही है: 1G (First Generation) मोबाइल नेटवर्क 1980 के दशक में शुरू हुआ था, जो पूर्णतः एनालॉग सिग्नल पर आधारित था। इसमें केवल वॉइस कॉल की जा सकती थी और सुरक्षा व स्पीड अत्यंत कम थी।
- कथन II सही है: 2G (Second Generation) की शुरुआत 1990 के दशक में हुई, जिसने एनालॉग को डिजिटल सिग्नलिंग (GSM/CDMA) से बदला। 2G ने पहली बार टेक्स्ट मैसेजिंग (SMS) और मल्टीमीडिया मैसेजिंग (MMS) की सुविधा दी।
- कथन III सही है: 4G LTE (Long Term Evolution) पूरी तरह से ऑल-आईपी (All-IP) पैकेट-स्विच्ड नेटवर्क पर आधारित है। इसमें वॉइस कॉल भी IP नेटवर्क पर ही की जाती है, जिसे VoLTE (Voice over LTE) कहा जाता है।
मोबाइल पीढ़ियों का त्वरित सारांश:
| पीढ़ी | प्राथमिक तकनीक | प्रमुख विशेषता | स्पीड रेंज |
|---|---|---|---|
| 1G | AMPS / NMT | केवल एनालॉग वॉइस | ~2.4 Kbps |
| 2G | GSM / CDMA | डिजिटल वॉइस, SMS | ~64 Kbps (GPRS/EDGE) |
| 3G | UMTS / WCDMA | मोबाइल इंटरनेट, वीडियो कॉल | ~2 Mbps |
| 4G | LTE / WiMAX | HD वीडियो, VoLTE, ऑल-IP | 100 Mbps - 1 Gbps |
| 5G | NR (New Radio) | अति-निम्न लेटेंसी, IoT, mMTC | 1 - 20 Gbps |
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि HTTPS का मानक डिफ़ॉल्ट पोर्ट नंबर 443 है。
HTTPS (Hypertext Transfer Protocol Secure) सामान्य HTTP का एक सुरक्षित रूप है। यह क्लाइंट (वेब ब्राउज़र) और वेब सर्वर के बीच भेजे जाने वाले डेटा को एन्क्रिप्ट करने के लिए SSL (Secure Sockets Layer) या इसके आधुनिक रूप TLS (Transport Layer Security) प्रोटोकॉल का उपयोग करता है। पोर्ट 443 पर डेटा का आदान-प्रदान एन्क्रिप्टेड प्रारूप में होता है, जिससे बीच में डेटा चुराने या बदलने की संभावना समाप्त हो जाती है।
विकल्पों में दिए गए पोर्ट नंबरों के वास्तविक उपयोग:
- पोर्ट 21: FTP (File Transfer Protocol) - कंट्रोल कनेक्शन हेतु।
- पोर्ट 25: SMTP (Simple Mail Transfer Protocol) - ई-मेल भेजने हेतु।
- पोर्ट 80: HTTP (Hypertext Transfer Protocol) - अन-एन्क्रिप्टेड वेब पेज हेतु।
- पोर्ट 110: POP3 (Post Office Protocol v3) - ई-मेल डाउनलोड करने हेतु।
सही उत्तर विकल्प A है। NFC और RFID दोनों रेडियो तरंगों पर आधारित हैं, लेकिन उनके कार्यक्षेत्र और अनुप्रयोगों में महत्वपूर्ण अंतर हैं।
मुख्य अंतरों का विश्लेषण:
- सम्पर्क दूरी (Range): NFC की कार्य सीमा अत्यंत कम (< 10 सेमी या कुछ इंच) होती है, जो इसे अत्यधिक सुरक्षित बनाती है। वहीं, RFID की सीमा कुछ मीटर से लेकर 100 मीटर तक हो सकती है।
- संचार दिशा (Communication Direction): NFC द्वि-मार्गी (Two-way / Peer-to-Peer) संचार का समर्थन करता है, यानी दो NFC उपकरण आपस में डेटा साझा कर सकते हैं। इसके विपरीत, RFID आमतौर पर एक-मार्गी (One-way) होता है जहाँ एक RFID रीडर केवल पैसिव RFID टैग का डेटा पढ़ता है।
- ऑपरेटिंग फ्रीक्वेंसी: NFC विशिष्ट रूप से 13.56 MHz फ्रीक्वेंसी पर काम करता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग:
- NFC: Google Pay/Apple Pay द्वारा कॉन्टैक्टलेस क्रेडिट/डेबिट कार्ड पेमेंट्स, स्मार्टफोन पेयरिंग, मेट्रो टिकट कार्ड।
- RFID: फास्टैग (FASTag) टोल प्लाजा कलेक्शन, वेयरहाउस में इन्वेंट्री मैनेजमेंट, ऑटोमैटिक एसेट ट्रैकिंग।
सही उत्तर विकल्प D है। नेटवर्किंग में जिटर (Jitter) से तात्पर्य डेटा पैकेटों के नेटवर्क से गुजरते समय उनकी लेटेंसी (Latency/Delay) में होने वाले उतार-चढ़ाव या भिन्नता (Variation in Delay) से है।
जब डेटा पैकेट इंटरनेट पर भेजे जाते हैं, तो वे एक समान समय अंतराल पर पहुँचने चाहिए। यदि पहला पैकेट 20ms में पहुँचता है, दूसरा 80ms में, और तीसरा 10ms में पहुँचता है, तो इस समय के असंतुलन (Variance) को 'जिटर' कहा जाता है। उच्च जिटर के कारण VoIP (इंटरनेट कॉल), लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, और ऑनलाइन गेमिंग में आवाज कटती है या वीडियो रुक-रुक कर चलता है।
नेटवर्क प्रदर्शन के प्रमुख मापदंड:
| मापदंड | परिभाषा / अर्थ |
|---|---|
| बैंडविड्थ (Bandwidth) | किसी नेटवर्क लिंक की अधिकतम डेटा ट्रांसफर क्षमता (bps)। |
| थ्रूपुट (Throughput) | किसी निश्चित समय में नेटवर्क पर वास्तव में प्रेषित सफल डेटा की दर। |
| लेटेंसी (Latency) | डेटा पैकेट को स्रोत से गंतव्य तक पहुँचने में लगने वाला कुल समय। |
| जिटर (Jitter) | लेटेंसी/देरी के समय में होने वाला परिवर्तन (Packet Delay Variation)। |
| पैकेट लॉस (Packet Loss) | ट्रांसमिशन के दौरान गंतव्य तक न पहुँच पाने वाले पैकेटों का प्रतिशत। |
| सूची-I (टोपोलॉजी) | सूची-II (विशेषता) |
|---|---|
| a. स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) | i. एक मुख्य केबल (Backbone) और सिरों पर टर्मिनेटर का उपयोग |
| b. बस टोपोलॉजी (Bus Topology) | ii. केंद्रीय उपकरण (Central Hub/Switch) से सभी नोड्स का जुड़ाव |
| c. रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) | iii. उच्चतम फॉल्ट टॉलरेंस और सभी नोड्स के बीच डेडिकेटेड प्वाइंट-टू-प्वाइंट लिंक |
| d. मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology) | iv. डेटा का संचरण केवल एक दिशा में 'टोकन पासिंग' (Token Passing) द्वारा |
सही मिलान a-ii, b-i, c-iv, d-iii है (विकल्प A):
- a. स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) - ii: इसमें सभी कंप्यूटर एक केंद्रीय उपकरण (हब या स्विच) से जुड़े होते हैं। यदि कोई एक क्लाइंट कंप्यूटर खराब होता है, तो पूरा नेटवर्क प्रभावित नहीं होता।
- b. बस टोपोलॉजी (Bus Topology) - i: इसमें सभी उपकरण एक ही केंद्रीय केबल से जुड़े होते हैं। केबल के दोनों सिरों पर 'टर्मिनेटर' लगे होते हैं जो सिग्नल परावर्तन को रोकते हैं।
- c. रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) - iv: डेटा एक गोलाकार लूप में केवल एक ही दिशा में यात्रा करता है। इसमें डेटा टकराव को रोकने के लिए 'टोकन पासिंग' तकनीक का प्रयोग होता है।
- d. मेश टोपोलॉजी (Mesh Topology) - iii: इसमें प्रत्येक नोड अन्य सभी नोड्स से सीधे जुड़ा होता है। N नोड्स वाले नेटवर्क में N(N-1)/2 भौतिक लिंक की आवश्यकता होती है। यह सबसे सुरक्षित और उच्च फॉल्ट टॉलरेंस वाली टोपोलॉजी है।
सही उत्तर DHCP सर्वर (Dynamic Host Configuration Protocol Server) है।
DHCP सर्वर एक नेटवर्क मैनेजमेंट प्रोटोकॉल सर्वर है जो नेटवर्क से जुड़ने वाले किसी भी उपकरण को स्वचालित रूप से एक IP एड्रेस, सबनेट मास्क, डिफ़ॉल्ट गेटवे और DNS सर्वर का पता आवंटित करता है। इससे नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर को हर उपकरण में मैन्युअल रूप से IP एड्रेस डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती। DHCP सर्वर UDP पोर्ट 67 (सर्वर) और पोर्ट 68 (क्लाइंट) पर कार्य करता है。
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण:
- DNS सर्वर: यह डोमेन नेम को उनके संबंधित IP एड्रेस में बदलता है। इसे 'इंटरनेट की फोनबुक' भी कहा जाता है।
- वेब सर्वर: यह HTTP/HTTPS प्रोटोकॉल के माध्यम से वेब पेज को संग्रहीत करता है और क्लाइंट के अनुरोध पर उन्हें प्रस्तुत करता है।
- प्रॉक्सि सर्वर: यह क्लाइंट और इंटरनेट के बीच एक मध्यस्थ के रूप में कार्य करता है जो सुरक्षा, गोपनीयता, सामग्री फ़िल्टरिंग और कैचिंग प्रदान करता है।
- IPv4 एड्रेस 32-बिट का होता है और इसे 4 ऑक्टेट में दशमलव (Dotted Decimal) प्रारूप द्वारा व्यक्त किया जाता है।
- IPv6 एड्रेस 128-बिट का होता है और इसे 8 हेक्साडेसिमल (Hexadecimal) ब्लॉक्स में कोलन (:) द्वारा अलग करके व्यक्त किया जाता है।
- जब नेटवर्क में DHCP सर्वर अनुपलब्ध होता है, तो विंडोज सिस्टम द्वारा स्वचालित रूप से असाइन की गई APIPA (Automatic Private IP Addressing) की रेंज 169.254.0.0 से 169.254.255.255 होती है।
सही उत्तर विकल्प B (I, II और III सभी सही हैं) है。
तीनों कथनों का विस्तृत विश्लेषण:
- कथन I सही है: IPv4 32-बिट लंबा होता है। इसमें 8-बिट के 4 ब्लॉक (ऑक्टेट) होते हैं, जिन्हें बिंदुओं से अलग किया जाता है (उदा. 192.168.1.1)। इसके द्वारा कुल 232 (लगभग 4.3 बिलियन) यूनिक एड्रेस बनाए जा सकते हैं।
- कथन II सही है: IPv6 128-बिट लंबा होता है। इसमें 16-बिट के 8 हेक्साडेसिमल ब्लॉक होते हैं जिन्हें कोलन से अलग किया जाता है (उदा. 2001:0db8:85a3:0000:0000:8a2e:0370:7334)। यह 2128 यूनिक एड्रेस प्रदान करता है।
- कथन III सही है: APIPA एक विंडोज फीचर है। जब कोई कंप्यूटर DHCP सर्वर से IP प्राप्त करने में विफल रहता है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम स्वयं ही अपने आप को 169.254.0.1 से 169.254.255.254 की रेंज का एक लिंक-लोकल IP एड्रेस असाइन कर लेता है।
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि SIM का आधिकारिक पूर्ण रूप Subscriber Identity Module होता है。
SIM एक एकीकृत परिपथ या स्मार्ट कार्ड होता है जो सेलुलर नेटवर्क पर मोबाइल फोन ग्राहक की सुरक्षित रूप से पहचान करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल ग्राहक पहचान (IMSI) संख्या और उससे संबंधित क्रिप्टोग्राफिक कुंजी को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करता है।
सिम कार्ड से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी तथ्य:
- SIM के प्रकार: मिनी-सिम, माइक्रो-सिम, नैनो-सिम और eSIM (Embedded SIM - जो डिवाइस के मदरबोर्ड में पहले से सोल्डर की गई चिप होती है)।
- PIN और PUK: सिम कार्ड की सुरक्षा के लिए PIN होता है। गलत PIN तीन बार दर्ज करने पर सिम लॉक हो जाता है, जिसे खोलने के लिए 8-अंकों के PUK कोड की आवश्यकता होती है।
सही उत्तर विकल्प D है, क्योंकि कथन 4 पूर्णतः गलत है。
गलत कथन का कारण: ट्विस्टेड पेयर केबल में डेटा विद्युत संकेतों (Electrical Signals) के रूप में प्रेषित होता है, न कि प्रकाश की गति से (प्रकाश के रूप में संचरण केवल फाइबर ऑप्टिक केबल में होता है)। इसके अलावा, दूरी बढ़ने के साथ इसमें सिग्नल कमजोर होता है जिसे एटेन्यूएशन (Attenuation) कहा जाता है, और इसे दूर करने के लिए रिपीटर्स की आवश्यकता होती है।
अन्य सही कथनों का विवरण:
- कथन 1 सही है: तारों को आपस में ऐंठने से आसपास के तारों से होने वाला सिग्नल ओवरलैप जिसे क्रॉस-टॉक (Crosstalk) कहते हैं, काफी हद तक कम हो जाता है।
- कथन 2 सही है: UTP (Unshielded) में बाहरी धात्विक सुरक्षा जाली नहीं होती, जिससे यह लचीला व सस्ता होता है। STP (Shielded) में एल्युमीनियम फॉयल की शील्ड होती है जो उच्च शोर वाले औद्योगिक वातावरण में EMI से अतिरिक्त सुरक्षा देती है।
- कथन 3 सही है: LAN केबलिंग में मानकीकृत RJ-45 कनेक्टर ही उपयोग किया जाता है।
| List-I (Protocol) | List-II (Port Number) |
|---|---|
| a. FTP (File Transfer Protocol) | i. Port 25 |
| b. SMTP (Simple Mail Transfer Protocol) | ii. Port 21 |
| c. DNS (Domain Name System) | iii. Port 80 |
| d. HTTP (Hypertext Transfer Protocol) | iv. Port 53 |
Assertion (A): TCP (Transmission Control Protocol), operating at the Transport Layer, is a connection-oriented and reliable protocol.
Reason (R): TCP establishes a connection using a Three-way Handshake process before data transmission and utilizes an Acknowledgement mechanism.||Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|None of these||C||N/A||Hard Q5||Which of the following statements is incorrect regarding Fiber Optic Cable?||It transmits data as light waves instead of electrical signals.|It is completely immune to Electromagnetic Interference (EMI).|It works on the principle of Total Internal Reflection.|Its bandwidth is significantly lower and data loss is higher compared to Twisted Pair cable.|None of these||D||N/A||Moderate Q6||In the architecture of the World Wide Web (WWW), what is the unique address of a web page or online resource on the Internet called?||IP Address|URL (Uniform Resource Locator)|MAC Address|Domain Name|None of these||B||N/A||Easy Q7||Consider the following statements regarding Mobile Network Generations:
- 1G (First Generation) networks only supported analog voice calls.
- 2G technology introduced digital signaling and enabled SMS and MMS services.
- 4G LTE networks operate entirely on an IP-based (Packet Switched) network architecture.
| List-I (Topology) | List-II (Feature) |
|---|---|
| a. Star Topology | i. Uses a single central cable (Backbone) with terminators at the ends |
| b. Bus Topology | ii. Connection of all nodes to a Central Device (Hub/Switch) |
| c. Ring Topology | iii. Highest fault tolerance with dedicated point-to-point links between all nodes |
| d. Mesh Topology | iv. Data transmission in only one direction via 'Token Passing' |
- An IPv4 address is 32-bit and expressed in Dotted Decimal format across 4 octets.
- An IPv6 address is 128-bit and expressed in 8 Hexadecimal blocks separated by colons (:).
- When a DHCP server is unavailable, the APIPA (Automatic Private IP Addressing) range automatically assigned by Windows systems is 169.254.0.0 to 169.254.255.255.
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 09 (Part - 01)
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निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
Thanks for Reading! / पढ़ने के लिए धन्यवाद! 🙏
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