नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 10 (Part - 02) तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- कंप्यूटर नेटवर्किंग (Computer Networking)
- संचार माध्यम और केबल (Transmission Media & Cables)
- वायरलेस संचार (Wireless Communication)
- वाई-फाई और ब्लूटूथ मानक (Wi-Fi & Bluetooth Standards)
- नेटवर्किंग प्रोटोकॉल और पोर्ट नंबर (Protocols & Port Numbers)
- नेटवर्किंग डिवाइस (Networking Devices)
- सर्वर के प्रकार और होस्टिंग (Types of Servers & Hosting)
- इंटरनेट, वर्ल्ड वाइड वेब और ब्राउज़र (Internet, World Wide Web & Browsers)
- मोबाइल नेटवर्किंग (Mobile Networking)
- मोबाइल कंप्यूटिंग (Mobile Computing)
📌 महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सारणी (Important Notice & Schedule)
UPSSSC Lower PCS और आगामी परीक्षाओं के संपूर्ण Computer Syllabus को कवर करने के लिए हमने कुल 18 Practice Sets का एक विशेष प्लान तैयार किया है।
- शुरुआत और समापन (Schedule): यह प्रैक्टिस सेट सीरीज 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 20 अगस्त तक नियमित रूप से चलेगी।
- लक्ष्य (Goal): चूंकि आपका UPSSSC Lower PCS का एग्जाम 23 अगस्त को होना तय है, इसलिए हम 20 अगस्त तक पूरा सिलेबस समाप्त कर देंगे। इससे आपको परीक्षा से ठीक पहले 2-3 दिन खुद से अंतिम रिवीजन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन इस 👉 सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
अभिकथन (A): वेब ब्राउज़र में कुकीज़ (Cookies) का उपयोग उपयोगकर्ता की प्राथमिकताओं, शॉपिंग कार्ट की वस्तुओं और लॉगिन सत्र स्थिति (Session State) को बनाए रखने के लिए किया जाता है。
कारण (R): HTTP (Hypertext Transfer Protocol) एक स्टेटलेस (Stateless) प्रोटोकॉल है, जो डिफ़ॉल्ट रूप से एक वेब अनुरोध (Request) से दूसरे अनुरोध के बीच किसी भी उपयोगकर्ता डेटा को याद नहीं रखता है।||अभिकथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।|अभिकथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|इनमें से कोई नहीं||C||
सही उत्तर विकल्प C है। अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सटीक व्याख्या करता है。
व्याख्या:
- HTTP का स्टेटलेस स्वभाव: HTTP प्रोटोकॉल 'Stateless' होता है, जिसका अर्थ है कि वेब सर्वर प्रत्येक क्लाइंट रिक्वेस्ट को एक नया और स्वतंत्र अनुरोध मानता है। सर्वर यह याद नहीं रख पाता कि पिछला अनुरोध किस उपयोगकर्ता ने किया था।
- कुकीज़ की आवश्यकता: HTTP की इस सीमा को दूर करने के लिए वेब कुकीज़ (HTTP Cookies) तकनीक विकसित की गई। जब आप किसी वेबसाइट पर जाते हैं, तो सर्वर उपयोगकर्ता के ब्राउज़र पर एक छोटी टेक्स्ट फाइल स्टोर कर देता है। अगली बार जब ब्राउज़र सर्वर को अनुरोध भेजता है, तो वह इस कुकी को साथ भेजता है, जिससे सर्वर उपयोगकर्ता की पहचान और सत्र को बनाए रखता है।
कुकीज़ के प्रकार:
- Session Cookies: ये अस्थायी होती हैं और ब्राउज़र बंद करते ही नष्ट हो जाती हैं।
- Persistent Cookies: ये एक निश्चित समय सीमा तक उपयोगकर्ता की हार्ड ड्राइव पर संग्रहीत रहती हैं।
- Third-Party Cookies: ये उन डोमेन द्वारा सेट की जाती हैं जिन्हें आप सीधे नहीं देख रहे होते हैं।
सही उत्तर फ़ायरवॉल (Firewall) है。
फ़ायरवॉल एक प्राथमिक सुरक्षा प्रणाली है जो एक विश्वसनीय आंतरिक नेटवर्क और अविश्वसनीय बाहरी नेटवर्क (जैसे इंटरनेट) के बीच स्थित होती है। यह पैकेट फ़िल्टरिंग, स्टेटफुल इंस्पेक्शन या प्रॉक्सी के माध्यम से पूर्व-निर्धारित एक्सेस कंट्रोल लिस्ट (ACL) के आधार पर संदिग्ध ट्रैफ़िक को ब्लॉक करती है और सुरक्षित ट्रैफ़िक को पास होने देती है。
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण:
- ब्रिज (Bridge): यह डेटा लिंक लेयर का उपकरण है जो एक ही प्रोटोकॉल पर काम करने वाले दो अलग-अलग LAN खंडों को जोड़ता है और नेटवर्क ट्रैफ़िक को विभाजित करके भीड़ कम करता है।
- मॉडेम (Modem): यह एनालॉग सिग्नल को डिजिटल में और डिजिटल सिग्नल को एनालॉग में बदलता है ताकि टेलीफोन या केबल लाइनों द्वारा इंटरनेट चलाया जा सके।
- गेटवे (Gateway): यह दो अलग-अलग प्रोटोकॉल संरचनाओं पर काम करने वाले नेटवर्कों को आपस में जोड़ता है और प्रोटोकॉल रूपांतरण का कार्य करता है।
सही उत्तर IEEE 802.11ax है, जिसे वाई-फाई एलायंस द्वारा आधिकारिक रूप से Wi-Fi 6 नाम दिया गया है。
Wi-Fi 6 (802.11ax) उच्च घनत्व वाले वातावरण में कई उपकरणों को एक साथ उच्च गति और कम लेटेंसी से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसमें OFDMA तकनीक का प्रयोग किया गया है जो एक ही वाई-फाई चैनल को छोटे उप-चैनलों में विभाजित करके एक साथ कई उपकरणों को डेटा प्रेषित करने की अनुमति देती है。
Wi-Fi मानकों का नामकरण और विकास क्रम:
| Wi-Fi पीढ़ी का नाम | IEEE मानक | फ्रीक्वेंसी बैंड | अधिकतम सैद्धांतिक गति |
|---|---|---|---|
| Wi-Fi 4 | IEEE 802.11n | 2.4 GHz और 5 GHz | 600 Mbps तक |
| Wi-Fi 5 | IEEE 802.11ac | केवल 5 GHz | 3.5 Gbps तक |
| Wi-Fi 6 | IEEE 802.11ax | 2.4 GHz और 5 GHz | 9.6 Gbps तक |
| Wi-Fi 6E | IEEE 802.11ax | 6 GHz बैंड जोड़ा गया | 9.6 Gbps तक |
| Wi-Fi 7 | IEEE 802.11be | 2.4, 5 और 6 GHz | 46 Gbps तक |
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि SSH (Secure Shell) प्रोटोकॉल का मानक डिफ़ॉल्ट पोर्ट नंबर 22 होता है。
SSH एक नेटवर्क प्रोटोकॉल है जो असुरक्षित नेटवर्क पर दो कंप्यूटरों के बीच सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड डेटा संचार स्थापित करता है। इसका उपयोग नेटवर्क प्रशासकों द्वारा रिमोट सर्वर को लॉगिन करने, कमांड निष्पादित करने और फाइलों को सुरक्षित स्थानांतरित करने (SFTP) के लिए किया जाता है。
विकल्पों में दिए गए पोर्ट नंबरों का विश्लेषण:
- पोर्ट 21: FTP (File Transfer Protocol) - फाइल ट्रांसफर कंट्रोल हेतु।
- पोर्ट 23: Telnet - यह SSH का पुराना और असुरक्षित रूप है जो अन-एन्क्रिप्टेड प्लेन टेक्स्ट में डेटा भेजता है। SSH ने सुरक्षा कारणों से Telnet (पोर्ट 23) को प्रतिस्थापित किया।
- पोर्ट 25: SMTP (Simple Mail Transfer Protocol) - आउटगोइंग ईमेल हेतु।
- पोर्ट 80: HTTP (Hypertext Transfer Protocol) - अन-एन्क्रिप्टेड वेब कंटेंट हेतु।
सही उत्तर जियो-फेंसिंग (Geo-fencing) है。
जियो-फेंसिंग मोबाइल कंप्यूटिंग का एक स्थान-आधारित अनुप्रयोग है। इसमें सॉफ़्टवेयर या ऐप द्वारा जीपीएस, आरएफआईडी, वाई-फाई या सेल्युलर डेटा का उपयोग करके एक काल्पनिक भौगोलिक परिधि (Virtual Fence) स्थापित की जाती है। जब कोई अधिकृत या ट्रैक किया जा रहा मोबाइल उपकरण इस क्षेत्र में प्रवेश करता है या बाहर जाता है, तो सिस्टम स्वतः ही पुश नोटिफिकेशन, एसएमएस, सुरक्षा चेतावनी या ऐप एक्शन ट्रिगर कर देता है。
अन्य समान दिखने वाली शब्दावलियों का अर्थ:
- जियो-टैगिंग (Geo-tagging): किसी डिजिटल मीडिया फ़ाइल में भौगोलिक स्थिति का अक्षांश और देशांतर (Latitude & Longitude) डेटा जोड़ना।
- जियो-ब्लॉकिंग (Geo-blocking): उपयोगकर्ता की भौगोलिक स्थिति के आधार पर इंटरनेट सामग्री या वेबसाइटों तक पहुंच को प्रतिबंधित करना।
- जियो-लोकेशन (Geo-location): किसी इंटरनेट से जुड़े उपकरण का वास्तविक दुनिया में सटीक भौगोलिक स्थान निर्धारित करने की प्रक्रिया।
सही उत्तर विकल्प A है。
सिंगल मोड बनाम मल्टी-मोड फाइबर का विस्तृत तुलनात्मक विश्लेषण:
| विशेषता | सिंगल मोड फाइबर (SMF) | मल्टी-मोड फाइबर (MMF) |
|---|---|---|
| कोर व्यास | अत्यंत छोटा (लगभग 8 से 10 माइक्रोन) | बड़ा (लगभग 50 से 62.5 माइक्रोन) |
| प्रकाश स्रोत | लेज़र डायोड (Laser Diode) | LED (Light Emitting Diode) |
| प्रकाश पथ | केवल एक ही सीधी रेखा/मोड | एक साथ कई प्रकाश तरंगें/मोड |
| मोडल डिस्पर्शन | लगभग शून्य (नगण्य) | उच्च (मोडल डिस्पर्शन के कारण डेटा बिखरता है) |
| दूरी एवं उपयोग | लंबी दूरी (5 किमी से 100+ किमी), जैसे टेलिकॉम व सबमरीन केबल | कम दूरी (< 2 किमी), जैसे डेटा सेंटर व LAN केबलिंग |
| लागत | केबल सस्ती, परंतु ट्रांसमीटर/रिसीवर उपकरण महंगे | केबल महंगी, परंतु उपकरण सस्ते |
- विकल्प B गलत है क्योंकि सिंगल मोड में लेज़र और मल्टी-मोड में LED का प्रयोग होता है।
- विकल्प C गलत है क्योंकि सिंगल मोड में मोडल डिस्पर्शन सबसे कम होता है।
- विकल्प D गलत है क्योंकि सबमरीन केबलों में केवल सिंगल मोड फाइबर का उपयोग किया जाता है।
सही उत्तर वेब कैश (Web Cache / Browser Cache) है。
जब आप कोई वेब पेज देखते हैं, तो वेब ब्राउज़र उस पेज के स्टैटिक कंपोनेंट्स (जैसे लोगो, इमेज, जावास्क्रिप्ट, CSS फाइलों) की एक प्रति कंप्यूटर की लोकल हार्ड ड्राइव के 'कैश फ़ोल्डर' में सेव कर लेता है। जब आप उसी वेबसाइट पर दोबारा जाते हैं, तो ब्राउज़र नेटवर्क से उन फाइलों को दोबारा डाउनलोड करने के बजाय स्थानीय कैश से लोड करता है, जिससे बैंडविड्थ की बचत होती है और पेज लोड टाइम अत्यधिक कम हो जाता है।
अन्य विकल्पों का स्पष्टीकरण:
- कुकीज़ (Cookies): यह ब्राउज़र में सहेजी गई एक छोटी टेक्स्ट फाइल होती है जो केवल उपयोगकर्ता के लॉगिन स्टेटस, प्राथमिकताओं और शॉपिंग कार्ट डेटा को याद रखती है।
- सत्र (Session): यह सर्वर-साइड पर सहेजा गया डेटा होता है जो केवल तब तक सक्रिय रहता है जब तक उपयोगकर्ता वेबसाइट का उपयोग कर रहा है।
- बुकमार्क (Bookmark): यह किसी वेब पेज के URL को भविष्य में आसानी से एक्सेस करने के लिए सेव करने की एक यूज़र सुविधा है।
| सूची-I (OSI लेयर) | सूची-II (Protocol Data Unit - PDU) |
|---|---|
| a. एप्लीकेशन लेयर (Application Layer) | i. डेटा (Data) |
| b. ट्रांसपोर्ट लेयर (Transport Layer) | ii. सेगमेंट (Segment / Datagram) |
| c. नेटवर्क लेयर (Network Layer) | iii. पैकेट (Packet) |
| d. डेटा लिंक लेयर (Data Link Layer) | iv. फ़्रेम (Frame) |
सही मिलान a-i, b-ii, c-iii, d-iv है (विकल्प B):
OSI मॉडल में जब डेटा ऊपरी लेयर से निचली लेयर की ओर बढ़ता है (Encapsulation), तो प्रत्येक लेयर पर डेटा को एक विशिष्ट नाम दिया जाता है जिसे Protocol Data Unit (PDU) कहते हैं:
- a. एप्लीकेशन / प्रेजेंटेशन / सेशन लेयर (Layers 7, 6, 5) - i. Data: यहाँ उपयोगकर्ता का मूल संदेश 'डेटा' (User Data) कहलाता है।
- b. ट्रांसपोर्ट लेयर (Layer 4) - ii. Segment / Datagram: TCP का उपयोग करने पर डेटा छोटे भागों में बटकर 'सेगमेंट' कहलाता है, जबकि UDP में इसे 'डेटाग्राम' कहा जाता है।
- c. नेटवर्क लेयर (Layer 3) - iii. Packet: सेगमेंट में लॉजिकल IP एड्रेस जुड़ने पर यह 'पैकेट' बन जाता है।
- d. डेटा लिंक लेयर (Layer 2) - iv. Frame: पैकेट में भौतिक पते (MAC Address) और एरर चेकिंग ट्रेलर (CRC) जुड़ने पर यह 'फ़्रेम' कहलाता है।
- फिजिकल लेयर (Layer 1): फ़्रेम को अंततः डिजिटल बिट्स (Bits - 0s and 1s) के रूप में केबल या हवा में प्रेषित किया जाता है।
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि प्रतिस्थापित किया गया शुरुआती प्रोटोकॉल NCP (Network Control Protocol) था。
1 जनवरी 1983 को, ARPANET ने अपने पुराने संचार प्रोटोकॉल NCP (Network Control Protocol) को पूरी तरह से बंद करके TCP/IP (Transmission Control Protocol / Internet Protocol) को अपनाया। इस घटना को "Flag Day" कहा जाता है, और इसी दिन को आधुनिक 'इंटरनेट' का आधिकारिक जन्म माना जाता है। NCP केवल एक ही नेटवर्क के भीतर संचार सीमित रखता था, जबकि TCP/IP ने भिन्न-भिन्न नेटवर्कों को आपस में जोड़ने की क्षमता प्रदान की。
विकल्पों में दिए गए अन्य प्रोटोकॉल:
- NetBEUI: माइक्रोसॉफ्ट और IBM द्वारा LAN नेटवर्क के लिए विकसित पुराना छोटा प्रोटोकॉल।
- IPX/SPX: नोवेल (Novell NetWare) ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा प्रयुक्त नेटवर्क प्रोटोकॉल।
- AppleTalk: एप्पल द्वारा अपने मैकिंटोश कंप्यूटरों के लिए विकसित नेटवर्क प्रोटोकॉल सूट।
- X.25: टेलीफोन लाइनों पर पैकेट-स्विच्ड WAN संचार का शुरुआती अंतर्राष्ट्रीय मानक।
- ब्रिज (Bridge) केवल एक ही प्रकार के प्रोटोकॉल पर काम करने वाले दो LAN नेटवर्कों को जोड़ता है और मैक (MAC) एड्रेस के आधार पर फ़िल्टरिंग करता है।
- गेटवे (Gateway) दो अलग-अलग प्रोटोकॉल आर्किटेक्चर (Heterogeneous Networks) का उपयोग करने वाले नेटवर्कों के बीच डेटा ट्रांसलेशन करता है।
- नेटवर्क में स्विच (Switch) ब्रॉडकास्ट डोमेन (Broadcast Domain) को विभाजित करता है, जबकि राउटर केवल कोलिजन डोमेन (Collision Domain) को विभाजित करता है।
सही उत्तर विकल्प A (केवल I और II सही हैं) है。
कथनों का विस्तृत विश्लेषण:
- कथन I सही है: ब्रिज (Bridge) Layer 2 (Data Link Layer) का उपकरण है। यह समान प्रोटोकॉल वाले दो LAN सेग्मेंट्स को जोड़ता है और MAC एड्रेस टेबल का उपयोग करके अनावश्यक ट्रैफ़िक को ब्लॉक या फ़िल्टर करता है।
- कथन II सही है: गेटवे (Gateway) OSI की सभी 7 परतों पर काम कर सकता है। यह अलग-अलग प्रोटोकॉल वाले नेटवर्कों के बीच अनुवादक (Protocol Converter) का कार्य करता है।
- कथन III गलत है (विपरीत लिखा गया है): वास्तव में, स्विच (Switch) केवल कोलिजन डोमेन (Collision Domain) को विभाजित करता है (हर पोर्ट का अलग कोलिजन डोमेन होता है, लेकिन ब्रॉडकास्ट डोमेन एक ही रहता है)। जबकि राउटर (Router) ब्रॉडकास्ट डोमेन (Broadcast Domain) को विभाजित करता है।
सही उत्तर वीपीएस होस्टिंग (Virtual Private Server - VPS Hosting) है。
VPS होस्टिंग हाइपरवाइज़र (Hypervisor) वर्चुअलाइजेशन तकनीक का उपयोग करती है। इसमें एक शक्तिशाली भौतिक सर्वर को कई वर्चुअलाइज्ड सर्वरों में बांट दिया जाता है। यद्यपि सर्वर हार्डवेयर साझा होता है, लेकिन प्रत्येक VPS को अपनी अलग समर्पित रैम (RAM), सीपीयू (CPU), डिस्क स्पेस और पूर्ण रूट/एडमिनिस्ट्रेटर एक्सेस प्राप्त होता है। इससे एक वेबसाइट की ट्रैफ़िक का प्रभाव दूसरी वेबसाइट पर नहीं पड़ता。
अन्य वेब होस्टिंग प्रकारों की तुलना:
| होस्टिंग प्रकार | सर्वर संसाधन | नियंत्रण व सुरक्षा | लागत | उपयुक्तता |
|---|---|---|---|---|
| Shared Hosting | कई वेबसाइटें एक ही सर्वर संसाधन साझा करती हैं | बहुत कम (Root access नहीं) | सबसे सस्ती | शुरुआती ब्लॉग व छोटी वेबसाइटें |
| VPS Hosting | वर्चुअली समर्पित संसाधन | उच्च (Dedicated Root access) | मध्यम | मध्यम ट्रैफ़िक व ई-कॉमर्स साइटें |
| Dedicated Hosting | पूरा का पूरा भौतिक सर्वर एक ही ग्राहक का | पूर्ण नियंत्रण व उच्चतम सुरक्षा | अत्यधिक महंगी | बड़े उद्यम, बैंक व भारी ट्रैफ़िक साइटें |
| Cloud Hosting | कई इंटरकनेक्टेड सर्वरों का नेटवर्क | अत्यधिक उच्च विश्वसनीयता | Pay-as-you-go | अनिश्चित ट्रैफ़िक वाली आधुनिक ऐप्स |
सही उत्तर ICMP (Internet Control Message Protocol) है。
ICMP नेटवर्क लेयर (Layer 3) का एक सहयोगी प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग डेटा भेजने के लिए नहीं, बल्कि नेटवर्क उपकरणों द्वारा त्रुटियों (Error Reporting) और संचालन सूचनाओं को भेजने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, जब कोई राउटर किसी पैकेट को गंतव्य तक नहीं पहुँचा पाता, तो वह प्रेषक को ICMP मैसेज (उदा. "Destination Unreachable" या "Time Exceeded") भेजता है。
ping कमांड ICMP Echo Request (Type 8) भेजता है और उत्तर में ICMP Echo Reply (Type 0) प्राप्त करता है。
अन्य विकल्पों के कार्य:
- ARP (Address Resolution Protocol): यह लॉजिकल IP एड्रेस को भौतिक MAC एड्रेस में बदलता है।
- IGMP (Internet Group Management Protocol): यह IP मल्टिकास्टिंग का प्रबंधन करता है, ताकि राउटर मल्टिकास्ट ग्रुप के सदस्यों की पहचान कर सकें।
- SNMP (Simple Network Management Protocol): यह एप्लीकेशन लेयर प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग नेटवर्क उपकरणों की दूरस्थ निगरानी के लिए किया जाता है।
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि Li-Fi का पूर्ण रूप Light Fidelity (लाइट फिडेलिटी) होता है。
Li-Fi तकनीक का आविष्कार प्रोफेसर हेराल्ड हास (Harald Haas) द्वारा 2011 में किया गया था। यह Wi-Fi की तरह रेडियो तरंगों के स्थान पर दृश्यमान प्रकाश (Visible Light - 400 to 800 THz) का उपयोग डेटा संचरण के लिए करती है। इसमें LED बल्बों को बहुत उच्च गति से ऑन/ऑफ करके 0s और 1s के रूप में डेटा भेजा जाता है。
Wi-Fi बनाम Li-Fi की तुलना:
| विशेषता | Wi-Fi (Wireless Fidelity) | Li-Fi (Light Fidelity) |
|---|---|---|
| संचरण माध्यम | रेडियो तरंगें (Radio Waves) | दृश्यमान प्रकाश तरंगें (Visible Light) |
| गति (Speed) | लगभग 1 Gbps तक | 100 Gbps से अधिक (Wi-Fi से 100 गुना तेज़) |
| कवरेज सीमा | दीवारों के पार जा सकता है | दीवारों के पार नहीं जा सकता (केवल कमरे तक सीमित) |
| सुरक्षा | कम (दीवार पार होने से हैकिंग संभव) | अत्यधिक उच्च (प्रकाश कमरे से बाहर नहीं जाता) |
| हस्तक्षेप | अस्पतालों/विमानों में समस्या | विद्युत-चुंबकीय हस्तक्षेप से मुक्त (अस्पतालों व उड़ानों हेतु सुरक्षित) |
सही उत्तर स्पूफ़िंग (Spoofing) है。
स्पूफ़िंग एक पहचान छिपाने/बदलने की तकनीक है। इसमें हमलावर नेटवर्क पैकेट के सोर्स IP एड्रेस को बदलकर ऐसा दिखाता है मानो वह पैकेट किसी विश्वसनीय आंतरिक सर्वर से आ रहा हो (IP Spoofing), या किसी नेटवर्क कार्ड के मैक एड्रेस को बदल देता है (MAC Spoofing)। इसी प्रकार ईमेल में फर्जी प्रेषक का नाम दिखाना Email Spoofing कहलाता है。
संबंधित साइबर सुरक्षा शब्दावलियों में अंतर:
- फ़िशिंग (Phishing): यह एक सामाजिक इंजीनियरिंग हमला है जहाँ नकली ई-मेल, SMS या वेबसाइटों के माध्यम से उपयोगकर्ता को धोखे से संवेदनशील क्रेडेंशियल्स प्रकट करने के लिए उकसाया जाता है।
- मैन-इन-द-मिडल (MitM): इसमें हमलावर दो संचार करने वाले पक्षों के बीच गुप्त रूप से बैठकर डेटा को सुनता या परिवर्तित करता है।
- रैनसमवेयर (Ransomware): यह दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर है जो उपयोगकर्ता की फाइलों को एन्क्रिप्ट कर देता है और उन्हें अनलॉक करने के लिए फिरौती की मांग करता है।
सही उत्तर साइक्लिक रिडंडेंसी चेक (Cyclic Redundancy Check - CRC) है。
CRC एक अत्यधिक शक्तिशाली और व्यापक रूप से उपयोग की जाने वाली एरर-डिटेक्शन तकनीक है जो डेटा लिंक लेयर (Layer 2) के फ़्रेम चेकिंग सीक्वेंस (FCS) में लागू होती है।
CRC की गणितीय कार्यप्रणाली और तथ्य:
- पॉलीनोमियल डिवीज़न: इसमें प्रेषित किए जाने वाले डेटा बिट्स के समूह को एक पूर्व-निर्धारित जनरेटर पॉलीनोमियल (Divisor) से बाइनरी मॉड्युलो-2 डिवीज़न (XOR ऑपरेशन) द्वारा विभाजित किया जाता है।
- रिडंडेंट बिट्स: इस विभाजन से प्राप्त शेषफल (Remainder) को ही CRC कहा जाता है, जिसे डेटा फ़्रेम के अंत में जोड़कर प्रेषित कर दिया जाता है।
- प्राप्ति पर जांच: प्राप्तकर्ता उसी जनरेटर पॉलीनोमियल से पुनः भाग देता है। यदि शेषफल 0 आता है, तो डेटा एरर-मुक्त माना जाता है; अन्यथा फ़्रेम को निरस्त कर दिया जाता है।
अन्य एरर-डिटेक्शन तकनीकों की सीमाएं:
- Simple Parity Check: केवल विषम संख्या में बिट एरर (Single Bit Errors) का पता लगा सकती है, सम संख्या में बिट बदलने पर विफल हो जाती है।
- Checksum: यह मुख्य रूप से नेटवर्क लेयर (IP Header Checksum) और ट्रांसपोर्ट लेयर (TCP/UDP Checksum) पर प्रयुक्त होने वाली जोड़-आधारित तकनीक है।
Assertion (A): Cookies in web browsers are used to maintain user preferences, shopping cart items, and login session state.
Reason (R): HTTP (Hypertext Transfer Protocol) is a Stateless protocol that, by default, does not remember any user data between web requests.||Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|None of these||C||N/A||Hard Q17||In the context of network security, what is the hardware device or software program called that analyzes incoming and outgoing network traffic based on predefined security rules and blocks unauthorized access?||Bridge|Firewall|Modem|Gateway|None of these||B||N/A||Moderate Q18||In the evolution of Wi-Fi technologies, which of the following Wi-Fi standards is officially known as 'Wi-Fi 6' and utilizes OFDMA (Orthogonal Frequency Division Multiple Access) technology on both 2.4 GHz and 5 GHz frequency bands?||IEEE 802.11ax|IEEE 802.11ac|IEEE 802.11n|IEEE 802.11g|None of these||A||N/A||Hard Q19||What is the default port number of the SSH (Secure Shell) protocol used to gain secure, encrypted, and command-line based access to a remote computer or network server?||Port 21|Port 23|Port 25|Port 80|None of these||E||N/A||Easy Q20||In mobile computing and location-based services (LBS), what is the technology called that creates a virtual boundary around a geographic area using GPS, Wi-Fi, or cellular data and triggers an automatic alert or action when a device enters or exits that boundary?||Geo-blocking|Geo-tagging|Geo-fencing|Geo-location|None of these||C||N/A||Moderate Q21||Which of the following statements is true regarding the two major types of optical fiber cables - Single Mode Fiber (SMF) and Multi-Mode Fiber (MMF)?||Single Mode Fiber has a very small core diameter (~9 microns), carries only a single mode/path of light, and is suitable for very long distances.|Multi-Mode Fiber uses only laser light, whereas Single Mode uses cheaper LED light.|Modal dispersion of light in Single Mode Fiber is much higher than in Multi-Mode Fiber.|Multi-Mode Fiber has a smaller core and is primarily used in transoceanic submarine cables connecting continents.|None of these||A||N/A||Hard Q22||When you open a website in a web browser for the first time, the browser saves its images, stylesheets (CSS), and scripts locally on the local disk to load that website faster in the future. What is this process/storage called?||Cookies|Session|Web Cache / Browser Cache|Bookmark|None of these||C||N/A||Moderate Q23||Match List-I (OSI Layer) with List-II (Corresponding Data Unit / PDU) and select the correct answer using the codes given below:
| List-I (OSI Layer) | List-II (Protocol Data Unit - PDU) |
|---|---|
| a. Application Layer | i. Data |
| b. Transport Layer | ii. Segment / Datagram |
| c. Network Layer | iii. Packet |
| d. Data Link Layer | iv. Frame |
- A Bridge connects two LAN networks operating on the same protocol and performs filtering based on MAC addresses.
- A Gateway performs data translation between networks using different protocol architectures (Heterogeneous Networks).
- In a network, a Switch divides the Broadcast Domain, whereas a Router only divides the Collision Domain.
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 10 (Part - 02)
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निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
Thanks for Reading! / पढ़ने के लिए धन्यवाद! 🙏
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