नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 06 तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System)
- ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य (Functions of Operating System)
📌 महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सारणी (Important Notice & Schedule)
UPSSSC Lower PCS और आगामी परीक्षाओं के संपूर्ण Computer Syllabus को कवर करने के लिए हमने कुल 18 Practice Sets का एक विशेष प्लान तैयार किया है।
- शुरुआत और समापन (Schedule): यह प्रैक्टिस सेट सीरीज 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 20 अगस्त तक नियमित रूप से चलेगी।
- लक्ष्य (Goal): चूंकि आपका UPSSSC Lower PCS का एग्जाम 23 अगस्त को होना तय है, इसलिए हम 20 अगस्त तक पूरा सिलेबस समाप्त कर देंगे। इससे आपको परीक्षा से ठीक पहले 2-3 दिन खुद से अंतिम रिवीजन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन इस 👉 सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
ऑपरेटिंग सिस्टम में जब भी कोई नया प्रोसेस निर्मित होता है, तो उसकी संपूर्ण जानकारी को प्रबंधित करने के लिए कर्नेल (Kernel) द्वारा एक डेटा संरचना बनाई जाती है, जिसे प्रोसेस कंट्रोल ब्लॉक (PCB) कहा जाता है। इसे 'प्रॉसेस डिस्क्रिप्टर' (Process Descriptor) भी कहते हैं।
PCB में निम्नलिखित महत्वपूर्ण घटक शामिल होते हैं:
- प्रोसेस आईडी (Process ID - PID): प्रत्येक प्रक्रिया की विशिष्ट पहचान संख्या।
- प्रोसेस स्टेट (Process State): प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति (New, Ready, Running, Waiting, Terminated)।
- प्रोग्राम काउंटर (Program Counter - PC): अगले निष्पादित (Execute) होने वाले निर्देश का पता।
- सीपीयू रजिस्टर्स (CPU Registers): निष्पादन के दौरान डेटा संग्रहीत करने वाले रजिस्टर।
- मेमोरी प्रबंधन जानकारी: पेज टेबल या सेगमेंट टेबल से संबंधित विवरण।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- मेमोरी मैनेजमेंट टेबल: इसका उपयोग केवल रैम (RAM) में एलोकेशन और डी-एलोकेशन को ट्रैक करने के लिए किया जाता है।
- सिस्टम कॉल इंटरफ़ेस: यह यूजर एप्लीकेशन और कर्नेल सेवाओं के बीच संचार माध्यम का काम करता है।
- थ्रेड कंट्रोल यूनिट: यह कोई मानक डेटा संरचना नहीं है; थ्रेड की जानकारी 'थ्रेड कंट्रोल ब्लॉक' (TCB) में होती है।
- 'शॉर्टेस्ट सीक टाइम फर्स्ट' (SSTF) एल्गोरिथ्म में भुखमरी (Starvation) की समस्या हो सकती है।
- 'स्कैन' (SCAN) एल्गोरिथ्म को 'एलिवेटर एल्गोरिथ्म' (Elevator Algorithm) भी कहा जाता है।
- 'फर्स्ट-कम, फर्स्ट-सर्व्ड' (FCFS) एल्गोरिथ्म डिस्क हेड को सदैव न्यूनतम दूरी (Seek Distance) तय करने की गारंटी देता है।
कथन I और II पूरी तरह सत्य हैं, जबकि कथन III असत्य है।
- कथन I (सत्य): SSTF एल्गोरिथ्म वर्तमान हेड स्थिति से सबसे निकटतम सीक टाइम वाले अनुरोध को पहले संसाधित करता है। यदि लगातार पास के अनुरोध आते रहें, तो दूर स्थित अनुरोधों को लंबे समय तक संसाधित नहीं किया जाता, जिससे Starvation (भुखमरी) की समस्या उत्पन्न होती है।
- कथन II (सत्य): SCAN एल्गोरिथ्म में डिस्क हेड एक दिशा में अंत तक जाता है और फिर वापस मुड़ता है। यह लिफ्ट (Elevator) की तरह काम करता है, इसीलिए इसे Elevator Algorithm कहा जाता है।
- कथन III (असत्य): FCFS सबसे सरल शेड्यूलिंग है जो अनुरोधों को उसी क्रम में संसाधित करता है जिसमें वे आते हैं। यह सीक टाइम को कम करने का प्रयास नहीं करता, अतः यह न्यूनतम सीक दूरी की कोई गारंटी नहीं देता।
विभिन्न डिस्क शेड्यूलिंग एल्गोरिथ्म का तुलनात्मक विवरण:
| एल्गोरिथ्म | कार्यप्रणाली | मुख्य विशेषता/दोष |
|---|---|---|
| FCFS | आगमन क्रम के आधार पर सेवा | निष्पक्ष लेकिन सीक टाइम अधिक होता है |
| SSTF | न्यूनतम सीक दूरी प्राथमिकता | औसत सीक टाइम कम, भुखमरी (Starvation) संभव |
| SCAN | एक सिरे से दूसरे सिरे तक आवाजाही | Elevator एल्गोरिथ्म, Starvation नहीं |
| LOOK | SCAN की तरह, पर केवल अंतिम अनुरोध तक जाता है | अनावश्यक यात्रा समय बचता है |
उपर्युक्त दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर मौजूद नहीं है, इसलिए विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) सही है। सही उत्तर सिस्टम कॉल (System Call) है।
सिस्टम कॉल (System Call):
यह एक ऐसा प्रोग्रामेटिक इंटरफ़ेस है जो यूजर-मोड (User Mode) एप्लीकेशन को कर्नेल-मोड (Kernel Mode) में स्थित ऑपरेटिंग सिस्टम की सेवाओं तक पहुँचने की अनुमति देता है। जब भी किसी एप्लीकेशन को डिस्क से डेटा पढ़ना हो, नया प्रोसेस बनाना हो, या नेटवर्क से कनेक्ट होना हो, तो वह 'सिस्टम कॉल' निष्पादित करती है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- कंपाइलर (Compiler): यह उच्च-स्तरीय भाषा के कोड को मशीन कोड में बदलता है।
- डिवाइस ड्राइवर (Device Driver): यह ऑपरेटिंग सिस्टम को किसी विशिष्ट हार्डवेयर उपकरण के साथ संचार करने में मदद करता है।
- असेंबलर (Assembler): यह असेंबली भाषा को मशीन कोड में परिवर्तित करता है।
- स्पूलर (Spooler): यह प्रिंटिंग आदि कार्यों के लिए डेटा को डिस्क में कतारबद्ध करता है।
अतिरिक्त महत्वपूर्ण तथ्य:
प्रमुख सिस्टम कॉल के उदाहरण: fork() (नया प्रोसेस बनाने के लिए), read() (फ़ाइल पढ़ने के लिए), write() (डेटा लिखने के लिए), और exit() (प्रोसेस समाप्त करने के लिए)।
अभिकथन (A): वर्चुअल मेमोरी (Virtual Memory) कंप्यूटर को उसकी भौतिक रैम (RAM) की वास्तविक क्षमता से अधिक बड़े प्रोग्रामों को निष्पादित करने की अनुमति देती है।
कारण (R): वर्चुअल मेमोरी प्रबंधन में सेकेंडरी स्टोरेज (जैसे हार्ड डिस्क) के एक भाग को मुख्य मेमोरी के विस्तार के रूप में उपयोग किया जाता है तथा डेटा का आदान-प्रदान स्वैप फ़ाइल (Swap File/Paging) द्वारा होता है।
सही विकल्प का चयन कीजिए:||(A) सही है, लेकिन (R) गलत है।|(A) गलत है, लेकिन (R) सही है।|(A) और (R) दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है।|(A) और (R) दोनों सही हैं, लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|इनमें से कोई नहीं||C||
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं, और कारण (R) इस बात का सही स्पष्टीकरण प्रदान करता है कि वर्चुअल मेमोरी किस प्रकार कार्य करती है।
विस्तृत व्याख्या:
- वर्चुअल मेमोरी का सिद्धांत: कंप्यूटर की प्राथमिक मेमोरी (RAM) सीमित होती है। जब किसी बड़े सॉफ़्टवेयर को चलाने के लिए RAM अपर्याप्त होती है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम पेजिंग (Paging) या सेगमेंटेशन (Segmentation) तकनीकों का उपयोग करके हार्ड डिस्क पर एक अभासी स्थान बनाता है।
- स्वैपिंग और पेज फ़ॉल्ट: जब आवश्यक डेटा रैम में मौजूद नहीं होता है, तो पेज फ़ॉल्ट (Page Fault) उत्पन्न होता है। इसके बाद OS आवश्यक डेटा को सेकेंडरी मेमोरी से रैम में लाता है (Page In) और अप्रयुक्त डेटा को वापस हार्ड डिस्क में भेजता है (Page Out)। इस प्रक्रिया को स्वैपिंग (Swapping) कहा जाता है और इस्तेमाल की जाने वाली फ़ाइल को Swap File या Pagefile.sys कहते हैं।
RAM बनाम वर्चुअल मेमोरी:
| विशेषता | RAM (भौतिक मेमोरी) | वर्चुअल मेमोरी (आभासी मेमोरी) |
|---|---|---|
| प्रकृति | भौतिक सेमीकंडक्टर चिप | हार्ड डिस्क का लॉजिकल हिस्सा |
| गति | अत्यधिक तीव्र | RAM की तुलना में धीमी |
| लागत | महंगी | मुफ़्त (हार्ड डिस्क स्पेस का प्रयोग) |
सही उत्तर विकल्प 2 है।
स्पूलिंग (SPOOLING):
SPOOLING का पूर्ण रूप Simultaneous Peripheral Operations On-Line है। यह एक ऐसी इनपुट/आउटपुट प्रबंधन तकनीक है जिसमें I/O कार्यों का डेटा सीपीयू द्वारा सीधे डिवाइस को भेजने के बजाय सेकेंडरी स्टोरेज (जैसे डिस्क) के एक विशेष क्षेत्र में संग्रहीत कर दिया जाता है।
स्पूलिंग का मुख्य उद्देश्य और कार्यप्रणाली:
- प्रिंटर जैसे उपकरण अत्यधिक धीमे होते हैं जबकि सीपीयू अत्यंत तीव्र होता है। यदि सीपीयू प्रिंटर के सीधे प्रिंट करने का इंतज़ार करे, तो सिस्टम की दक्षता खराब होगी।
- स्पूलिंग के माध्यम से सभी प्रिंट जॉब्स डिस्क में स्पूल बफ़र (Spool Queue) में जमा हो जाती हैं और सीपीयू तुरंत अगले कार्य के लिए स्वतंत्र हो जाता है। प्रिंटर अपनी गति से एक-एक करके डेटा प्रिंट करता रहता है।
स्पूलिंग (Spooling) और बफ़रिंग (Buffering) में अंतर:
| गुण | स्पूलिंग (Spooling) | बफ़रिंग (Buffering) |
|---|---|---|
| स्टोरेज का स्थान | सेकेंडरी स्टोरेज (हार्ड डिस्क) | प्राथमिक मेमोरी (RAM) |
| उपकरणों का अंतर | अलग-अलग गति वाले स्वतंत्र I/O उपकरण | डेटा ट्रांसफर के दौरान दो प्रक्रियाओं का अंतर |
| ओवरलैपिंग | I/O और सीपीयू निष्पादन दोनों समानांतर | एक समय में केवल एक कार्य का बफ़र भरना |
उपर्युक्त विकल्पों में सही नाम सम्मिलित नहीं है, इसलिए सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है। इस प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम को रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (Real-Time Operating System - RTOS) कहा जाता है।
रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (RTOS) की विशेषताएं:
- निश्चित समय-सीमा (Strict Deadlines): इसमें इनपुट मिलने और आउटपुट जनरेट होने के बीच का समय (Response Time) बहुत छोटा और निश्चित होता है।
- प्रकार:
- हार्ड रियल-टाइम (Hard RTOS): इसमें समय-सीमा का थोड़ा भी उल्लंघन सिस्टम की विफलता का कारण बन सकता है (उदा. मिसाइल कंट्रोल, एयरबैग सिस्टम)।
- सॉफ्ट रियल-टाइम (Soft RTOS): इसमें थोड़ी देरी से सिस्टम पूरी तरह क्रैश नहीं होता, पर गुणवत्ता घट जाती है (उदा. लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग)।
अन्य दिए गए विकल्पों की व्याख्या:
- टाइम-शेयरिंग OS: यह सीपीयू समय को कई उपयोगकर्ताओं/प्रक्रियाओं के बीच छोटे-छोटे टाइम स्लाइस (Quantum) में बाँटता है (उदा. Unix)।
- बैच प्रोसेसिंग OS: इसमें समान प्रकार के कार्यों को एक समूह (Batch) में बनाकर पंच कार्ड द्वारा निष्पादित किया जाता था।
- नेटवर्क OS: यह सर्वर पर चलता है और नेटवर्क पर उपयोगकर्ताओं, फ़ाइलों तथा सुरक्षा का प्रबंधन करता है।
- कर्नेल ऑपरेटिंग सिस्टम का मुख्य/केंद्रीय घटक (Core Component) है, जो सिस्टम बूट होने के बाद लगातार प्राथमिक मेमोरी (RAM) में बना रहता है।
- मोनोलिथिक कर्नेल (Monolithic Kernel) में सभी मुख्य OS सेवाएं (जैसे प्रोसेस प्रबंधन, फाइल सिस्टम, डिवाइस ड्राइवर्स) एक ही वर्चुअल एड्रेस स्पेस में निष्पादित होती हैं।
- माइक्रोकर्नेल (Microkernel) में केवल न्यूनतम आवश्यक सेवाएं (जैसे आईपीसी, बेसिक मेमोरी) ही कर्नेल स्पेस में चलती हैं और बाकी सेवाएं यूजर स्पेस में चलती हैं।
उपर्युक्त दिए गए तीनों कथन (I, II, और III) ऑपरेटिंग सिस्टम कर्नेल की बनावट और सिद्धांतों के अनुसार पूर्णतः सही हैं।
- कथन I (सत्य): कर्नेल कंप्यूटर स्टार्ट (Booting) होते ही मेमोरी में लोड हो जाता है और जब तक कंप्यूटर बंद नहीं होता, तब तक रैम (RAM) में रहता है। यह यूजर और हार्डवेयर के बीच की मुख्य कड़ी है।
- कथन II (सत्य): मोनोलिथिक कर्नेल (Monolithic Kernel) में संपूर्ण OS एक ही बड़े प्रोग्राम के रूप में काम करता है। इसमें सभी सेवाएं कर्नेल स्पेस में चलती हैं, जिससे कार्य निष्पादन तेज़ होता है (उदा. Linux, MS-DOS)।
- कथन III (सत्य): माइक्रोकर्नेल (Microkernel) में कर्नेल का आकार छोटा रखा जाता है। केवल इंटर-प्रोसेस कम्यूनिकेशन (IPC) और बेसिक शेड्यूलिंग ही कर्नेल मोड में रहती है, जबकि फाइल सिस्टम और ड्राइवर्स 'यूजर मोड' में चलते हैं (उदा. MINIX, QNX)।
मोनोलिथिक बनाम माइक्रोकर्नेल:
| मापदंड | मोनोलिथिक कर्नेल (Monolithic) | माइक्रोकर्नेल (Microkernel) |
|---|---|---|
| आकार | बड़ा (Large) | छोटा (Small) |
| गति | अत्यधिक तीव्र निष्पादन | मोनोलिथिक की तुलना में थोड़ा धीमा |
| सुरक्षा/स्थिरता | यदि कोई ड्राइवर क्रैश हो, तो पूरा OS क्रैश हो सकता है | यदि कोई सर्विस क्रैश हो, तो भी कर्नेल सुरक्षित रहता है |
| उदाहरण | Linux, Unix, Windows 9x | MINIX, QNX |
ऑपरेटिंग सिस्टम में थ्रैशिंग (Thrashing) एक ऐसी गंभीर स्थिति है जहाँ सिस्टम का अधिकांश समय पेज फ़ॉल्ट (Page Faults) को संभालने और वर्चुअल मेमोरी से पेजों की स्वैपिंग करने में बीतता है, न कि प्रक्रियाओं के वास्तविक निष्पादन में।
थ्रैशिंग के मुख्य कारण और निवारण:
- कारण: जब मल्टीप्रोग्रामिंग की डिग्री (Degree of Multiprogramming) अत्यधिक बढ़ा दी जाती है, तो प्रत्येक प्रोसेस को मिलने वाली भौतिक मेमोरी (Frame) बहुत कम हो जाती है। परिणामतः, प्रक्रियाओं को निष्पादित होने के लिए आवश्यक 'वर्किंग सेट' (Working Set) रैम में नहीं मिल पाता और बार-बार पेज फ़ॉल्ट होते हैं।
- निदान: मल्टीप्रोग्रामिंग की डिग्री को कम करना, रैम (RAM) का आकार बढ़ाना, या वर्किंग सेट मॉडल (Working Set Model) लागू करना।
अन्य विकल्पों का विवरण:
- फ्रेगमेंटेशन (Fragmentation): यह मेमोरी में स्थान बर्बाद होने की प्रक्रिया है (आंतरिक एवं बाह्य)।
- डेडलॉक (Deadlock): जब दो या दो से अधिक प्रक्रियाएं एक-दूसरे के संसाधनों का अनिश्चित काल तक इंतज़ार करती हैं।
- स्टार्वेशन (Starvation): जब किसी कम प्राथमिकता वाली प्रक्रिया को अनिश्चित काल तक संसाधन नहीं मिलते।
- राउंड-रॉबिन (Round-Robin) शेड्यूलिंग
- शॉर्टेस्ट रिमेनिंग टाइम फर्स्ट (SRTF)
- फर्स्ट-कम, फर्स्ट-सर्व्ड (FCFS)
प्रीएम्प्टिव शेड्यूलिंग में, सीपीयू को किसी चलती हुई प्रक्रिया (Running Process) से जबरन छीनकर उच्च प्राथमिकता वाली या कतार में अगली प्रक्रिया को सौंपा जा सकता है।
- कथन I (सत्य): राउंड-रॉबिन (Round-Robin) अनिवार्य रूप से प्रीएम्प्टिव है। इसमें प्रत्येक प्रक्रिया को टाइम स्लाइस (Time Quantum) दिया जाता है। समय समाप्त होते ही प्रक्रिया से सीपीयू वापस ले लिया जाता है।
- कथन II (सत्य): SRTF (Shortest Remaining Time First), शॉर्टेस्ट जॉब फर्स्ट (SJF) का प्रीएम्प्टिव संस्करण है। जब भी नई प्रक्रिया आती है और उसका बचा हुआ समय वर्तमान प्रक्रिया से कम होता है, तो वर्तमान प्रक्रिया को प्रीएम्प्ट कर दिया जाता है।
- कथन III (असत्य): FCFS (First-Come, First-Served) एक गैर-प्रीएम्प्टिव (Non-Preemptive) शेड्यूलिंग एल्गोरिथ्म है।
सीपीयू शेड्यूलिंग एल्गोरिथ्म का वर्गीकरण:
| शेड्यूलिंग प्रकार | Preemptive (प्रीएम्प्टिव) | Non-Preemptive (गैर-प्रीएम्प्टिव) |
|---|---|---|
| विशेषता | सीपीयू निष्पादन के बीच में छीना जा सकता है | प्रक्रिया स्वयं सीपीयू छोड़ती है |
| उदाहरण | Round-Robin, SRTF, Priority (Preemptive) | FCFS, SJF (Non-Preemptive), Priority (Non-Preemptive) |
| सूची-I (फ़ाइल सिस्टम) | सूची-II (विशेषता) |
|---|---|
| a. FAT32 | I. फ़ाइल-लेवल एन्क्रिप्शन, एक्सेस कंट्रोल लिस्ट (ACL) एवं जर्नलिंग |
| b. NTFS | II. लिनक्स में वर्चुअल मेमोरी विस्तार के लिए समर्पित डिस्क क्षेत्र |
| c. ext4 | III. मुख्य रूप से आधुनिक लिनक्स वितरणों का डिफ़ॉल्ट फ़ाइल सिस्टम |
| d. स्वैप विभाजन (Swap Partition) | IV. 4GB से बड़ी एकल फ़ाइल आकार को सपोर्ट न करने वाला पुराना मानक |
सही मिलान a-IV, b-I, c-III, d-II है।
व्याख्या:
| फ़ाइल सिस्टम | मुख्य विशेषताएँ |
|---|---|
| FAT32 | माइक्रोसॉफ्ट का पुराना फ़ाइल सिस्टम। एकल फ़ाइल का अधिकतम आकार 4GB तक सीमित। |
| NTFS | विंडोज़ का आधुनिक फ़ाइल सिस्टम। इसमें जर्नलिंग (Journaling), एन्क्रिप्शन (EFS), और ACL सुरक्षा शामिल है। |
| ext4 | लिनक्स (Linux) का मानक फ़ाइल सिस्टम जो उच्च प्रदर्शन और विशाल स्टोरेज का समर्थन करता है। |
| Swap Partition | लिनक्स में हार्ड डिस्क के हिस्से को वर्चुअल मेमोरी के रूप में प्रयोग करने हेतु समर्पित पार्टिशन। |
लिनक्स में फ़ाइल अनुमतियाँ (File Permissions) बदलने के लिए chmod (Change Mode) कमांड का उपयोग किया जाता है।
chmod की कार्यप्रणाली:
लिनक्स में तीन प्रकार के उपयोगकर्ता वर्ग होते हैं: Owner (u), Group (g), और Others (o)। अनुमतियों के संख्यात्मक कोड:
- Read (r) = 4
- Write (w) = 2
- Execute (x) = 1
उदाहरण के लिए, chmod 755 filename फ़ाइल के मालिक को पूर्ण अधिकार (7 = 4+2+1) तथा अन्य को केवल पढ़ने और चलाने का अधिकार (5 = 4+0+1) देती है।
अन्य कमांड्स का विवरण:
chown(Change Owner): फ़ाइल या डायरेक्टरी के स्वामित्व को बदलने के लिए।mkdir(Make Directory): नया फ़ोल्डर बनाने के लिए।grep(Global Regular Expression Print): फ़ाइलों में टेक्स्ट पैटर्न खोजने के लिए।
उपर्युक्त विकल्पों में सही उत्तर शामिल नहीं है, अतः सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है। 'बैंकर्स एल्गोरिथ्म' का प्रतिपादन डच कंप्यूटर वैज्ञानिक एड्सगर डब्ल्यू. डिज्क्स्ट्रा (Edsger W. Dijkstra) द्वारा 1965 में किया गया था。
बैंकर्स एल्गोरिथ्म (Banker's Algorithm):
- उद्देश्य: यह एक डेडलॉक अवॉइडेंस (Deadlock Avoidance) एल्गोरिथ्म है।
- कार्यप्रणाली: यह प्रत्येक प्रक्रिया द्वारा मांगी गई संसाधनों की अधिकतम आवश्यकता (Maximum Claim) का पहले से विश्लेषण करता है। यदि संसाधन आवंटित करने से सिस्टम 'Safe State' में रहता है, तभी संसाधन दिए जाते हैं।
डेडलॉक की चार आवश्यक स्थितियाँ (Coffman Conditions):
- म्यूचुअल एक्सक्लूजन (Mutual Exclusion)
- होल्ड एंड वेट (Hold and Wait)
- नो प्रीएम्प्शन (No Preemption)
- सर्कुलर वेट (Circular Wait)
- सेमाफ़ोर (Semaphore) एक पूर्णांक (Integer) चर है जिसका उपयोग क्रिटिकल सेक्शन (Critical Section) समस्या को हल करने के लिए किया जाता है।
- 'म्यूटेक्स' (Mutex / Mutual Exclusion Lock) केवल एक समय में एक ही प्रक्रिया को साझा संसाधन (Shared Resource) तक पहुँचने की अनुमति देता है।
- साझा स्मृति (Shared Memory) तकनीक में प्रक्रियाओं के बीच डेटा का आदान-प्रदान केवल कर्नेल के सीधे हस्तक्षेप द्वारा ही संभव होता है, जिससे यह संदेश पासिंग (Message Passing) से धीमी होती है।
कथन I और II सत्य हैं, जबकि कथन III असत्य है।
- कथन I (सत्य): सेमाफ़ोर (Semaphore) डिज्क्स्ट्रा द्वारा विकसित एक पूर्णांक चर है, जो दो मुख्य ऑपरेशन्स -
wait()औरsignal()का उपयोग करके क्रिटिकल सेक्शन में समवर्ती पहुँच को नियंत्रित करता है। - कथन II (सत्य): म्यूटेक्स (Mutex) एक बाइनरी लॉपिंग तकनीक है जो केवल एक समय में एक ही प्रोसेस को शेयर रिसोर्स तक जाने देती है।
- कथन III (असत्य): Shared Memory तकनीक में, एक बार शेयर की गई मेमोरी स्थापित हो जाने के बाद, प्रक्रियाओं के बीच डेटा ट्रांसफर के लिए कर्नेल के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए Shared Memory, Message Passing तकनीक की तुलना में अत्यधिक तीव्र (Faster) होती है।
IPC तकनीकों की तुलना:
| तकनीक | कर्नेल का हस्तक्षेप | गति |
|---|---|---|
| Shared Memory | केवल सेटअप के समय | अत्यंत तेज़ |
| Message Passing | प्रत्येक संदेश में | धीमी (सिस्टम कॉल के कारण) |
सही उत्तर विकल्प 2 है। इसे इंटरप्ट सर्विस रूटीन (ISR) या 'इंटरप्ट हैन्डलर' (Interrupt Handler) कहा जाता है।
इंटरप्ट हैंडलिंग प्रक्रिया (Interrupt Handling Mechanism):
- इंटरप्ट सिग्नल: जब कोई हार्डवेयर घटना घटती है, तो डिवाइस सीपीयू को 'इंटरप्ट' (Interrupt) भेजता है।
- वर्तमान स्थिति का संरक्षण: सीपीयू वर्तमान में चल रहे प्रोसेस के निष्पादन को रोकता है और उसके प्रोग्राम काउंटर तथा रजिस्टर्स की स्थिति को स्टैक में सेव करता है।
- ISR का निष्पादन: सीपीयू इंटरप्ट वेक्टर टेबल (IVT) से संबंधित ISR का पता खोजता है और ISR कोड को निष्पादित करता है।
- पुनः निष्पादन: ISR समाप्त होने के बाद, सीपीयू मूल प्रोसेस को वहीं से शुरू करता है।
इंटरप्ट के प्रकार:
- हार्डवेयर इंटरप्ट: बाहरी भौतिक उपकरणों द्वारा (उदा. कीबोर्ड की कुंजी दबाना)।
- सॉफ़्टवेयर इंटरप्ट (Traps/Exceptions): प्रोग्राम निष्पादन के दौरान त्रुटि उत्पन्न होने पर (उदा. Division by Zero)।
a. RAID 0 - स्ट्राइपिंग (Striping) - कोई पैरिटी/मिररिंग नहीं (उच्चतम प्रदर्शन, शून्य फॉल्ट टॉलरेंस)
b. RAID 1 - मिररिंग (Mirroring) - डेटा की सटीक प्रतिकृति (100% डेटा अतिरेक एवं उच्च फॉल्ट टॉलरेंस)
c. RAID 5 - ब्लॉक-लेवल स्ट्राइपिंग के साथ वितरित पैरिटी (Distributed Parity)
उपर्युक्त में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?||केवल a और b|केवल b और c|a, b और c|केवल a और c|इनमें से कोई नहीं||C||
उपर्युक्त दिए गए तीनों युग्म (a, b, और c) RAID प्रौद्योगिकियों के मानकीकृत स्तरों के अनुसार सही सुमेलित हैं।
RAID स्तरों का तुलनात्मक विवरण:
| RAID स्तर | तकनीक | न्यूनतम डिस्क | फॉल्ट टॉलरेंस | मुख्य लाभ |
|---|---|---|---|---|
| RAID 0 | Striping | 2 | नहीं (No) | उच्चतम गति (High Performance) |
| RAID 1 | Mirroring | 2 | हाँ (1 डिस्क विफलता) | उच्चतम डेटा सुरक्षा (Data Redundancy) |
| RAID 5 | Striping with Parity | 3 | हाँ (1 डिस्क विफलता) | गति, सुरक्षा एवं क्षमता का संतुलन |
- The 'Shortest Seek Time First' (SSTF) algorithm may suffer from the problem of starvation.
- The 'SCAN' algorithm is also known as the 'Elevator Algorithm'.
- The 'First-Come, First-Served' (FCFS) algorithm guarantees that the disk head always travels the minimum seek distance.
Assertion (A): Virtual Memory allows a computer to execute programs larger than the actual capacity of its physical RAM.
Reason (R): In virtual memory management, a portion of secondary storage (such as a hard disk) is used as an extension of main memory, and data is exchanged via swap file/paging.
Select the correct option:||(A) is true, but (R) is false.|(A) is false, but (R) is true.|Both (A) and (R) are true and (R) is the correct explanation of (A).|Both (A) and (R) are true, but (R) is not the correct explanation of (A).|None of these||C||||Moderate Q5||Which of the following statements is correct regarding 'SPOOLING' in input/output (I/O) management of an operating system?||It is used only for data transfer between CPU and memory running at equal speeds.|In this, data for slow output devices (such as printers) is temporarily queued in secondary storage (such as disk).|In spooling, data is kept temporarily only in a small portion of primary memory (RAM).|It works only in single-tasking operating systems.|None of these||B||||Hard Q6||What is an operating system designed to provide highly accurate, prompt, and instantaneous response time within strict deadlines, used in missile guidance systems, air traffic control, and medical monitoring, called?||Time-Sharing Operating System (Time-Sharing OS)|Batch Processing Operating System (Batch Processing OS)|Network Operating System (Network OS)|Single-User Operating System (Single-User OS)|None of these||E||||Easy Q7||Consider the following statements regarding the 'Kernel' in the architecture of an operating system:
- The kernel is the core component of the operating system that resides continuously in primary memory (RAM) after system boot.
- In a Monolithic Kernel, all major OS services (such as process management, file system, device drivers) execute in a single virtual address space.
- In a Microkernel, only minimal essential services (such as IPC, basic memory management) run in kernel space, while other services run in user space.
- Round-Robin Scheduling
- Shortest Remaining Time First (SRTF)
- First-Come, First-Served (FCFS)
| List-I (File System) | List-II (Characteristic) |
|---|---|
| a. FAT32 | I. File-level encryption, Access Control List (ACL), and Journaling |
| b. NTFS | II. Dedicated disk area in Linux for virtual memory extension |
| c. ext4 | III. Default file system of modern Linux distributions |
| d. Swap Partition | IV. Older standard not supporting single file size larger than 4GB |
- A Semaphore is an integer variable used to solve the Critical Section problem.
- A 'Mutex' (Mutual Exclusion Lock) allows only one process at a time to access a shared resource.
- In the Shared Memory technique, data exchange between processes is possible only through direct kernel intervention, making it slower than Message Passing.
a. RAID 0 - Striping - No parity/mirroring (highest performance, zero fault tolerance)
b. RAID 1 - Mirroring - Exact replica of data (100% data redundancy and high fault tolerance)
c. RAID 5 - Block-level striping with distributed parity
Which of the above pair(s) is/are correctly matched?||Only a and b|Only b and c|a, b and c|Only a and c|None of these||C||||Moderate
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 06
Practice Completed
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Performance Report
निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
Thanks for Reading! / पढ़ने के लिए धन्यवाद! 🙏
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