नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 05 तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software)
- सॉफ्टवेयर विकास मॉडल (Software Development Models)
- कंप्यूटर भाषाएँ और प्रोग्रामिंग (Computer Languages and Programming)
- डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (Database Management System)
- एल्गोरिदम (Algorithms)
📌 महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सारणी (Important Notice & Schedule)
UPSSSC Lower PCS और आगामी परीक्षाओं के संपूर्ण Computer Syllabus को कवर करने के लिए हमने कुल 18 Practice Sets का एक विशेष प्लान तैयार किया है।
- शुरुआत और समापन (Schedule): यह प्रैक्टिस सेट सीरीज 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 20 अगस्त तक नियमित रूप से चलेगी।
- लक्ष्य (Goal): चूंकि आपका UPSSSC Lower PCS का एग्जाम 23 अगस्त को होना तय है, इसलिए हम 20 अगस्त तक पूरा सिलेबस समाप्त कर देंगे। इससे आपको परीक्षा से ठीक पहले 2-3 दिन खुद से अंतिम रिवीजन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन इस 👉 सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
- जनरल पब्लिक लाइसेंस (GPL) एक 'कॉपीलेफ्ट' (Copyleft) लाइसेंस है, जिसके तहत संशोधित कोड को उसी लाइसेंस के तहत सार्वजनिक करना अनिवार्य होता है।
- एमआईटी (MIT) और अपाचे (Apache) लाइसेंस 'अनुज्ञेय' (Permissive) लाइसेंस के उदाहरण हैं, जो संशोधित कोड को बंद-स्रोत (Proprietary) बनाने की अनुमति देते हैं।
- प्रोप्राइटरी (Proprietary) सॉफ्टवेयर के सोर्स कोड को अंतिम उपयोगकर्ता स्वतंत्र रूप से एक्सेस, संशोधित और पुनर्वितरित कर सकते हैं।
कथन I और II सत्य हैं:
- कथन I सही है: GNU जनरल पब्लिक लाइसेंस (GPL) 'कॉपीलेफ्ट' (Copyleft) अवधारणा पर आधारित है। इसका नियम है कि यदि आप GPL-लाइसेंस प्राप्त कोड का उपयोग करके कोई नया सॉफ्टवेयर बनाते हैं, तो उस नए सॉफ्टवेयर को भी GPL के तहत ओपन-सोर्स के रूप में जारी करना अनिवार्य है।
- कथन II सही है: MIT और Apache 2.0 लाइसेंस 'अनुज्ञेय' (Permissive) ओपन-सोर्स लाइसेंस हैं। ये डेवलपर्स को सोर्स कोड में संशोधन करने और उसे अपनी वाणिज्यिक/प्रोप्राइटरी (Closed-source) संपत्तियों में बिना कोड उजागर किए उपयोग करने की स्वतंत्रता देते हैं।
कथन III असत्य है: प्रोप्राइटरी (स्वामित्व वाले) सॉफ्टवेयर (जैसे Windows OS, MS Office, Adobe Photoshop) का सोर्स कोड गुप्त रखा जाता है। अंतिम उपयोगकर्ताओं को इसे संशोधित करने, कॉपी करने या पुनर्वितरित करने की कानूनी अनुमति नहीं होती है।
सॉफ्टवेयर लाइसेंस वर्गीकरण तालिका:
| लाइसेंस का प्रकार | मुख्य विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| कॉपीलेफ्ट (Strong Copyleft) | संशोधनों को सार्वजनिक करना अनिवार्य | GNU GPL, AGPL |
| अनुज्ञेय (Permissive) | न्यूनतम प्रतिबंध, बंद-स्रोत की अनुमति | MIT, Apache 2.0, BSD |
| प्रोप्राइटरी (Proprietary) | सोर्स कोड गुप्त, उपयोग/कॉपी पर कानूनी रोक | Windows, macOS |
अभिकथन (A): बड़े पैमाने के आधुनिक वेब अनुप्रयोगों (Web Applications) के निर्माण में मोनोलिथिक (Monolithic) आर्किटेक्चर की तुलना में माइक्रोसर्विसेज (Microservices) आर्किटेक्चर को अधिक प्राथमिकता दी जाती है。
कारण (R): माइक्रोसर्विसेज आर्किटेक्चर प्रत्येक सेवा (Service) की स्वतंत्र स्केलिंग (Independent Scaling), लचीलेपन और आसान डीबगिंग की अनुमति देता है, जिससे एक घटक के विफल होने पर पूरा सिस्टम ठप नहीं होता。
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही विकल्प का चयन कीजिए:||अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|अभिकथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।|इनमें से कोई नहीं||A||
अभिकथन (A) सत्य है: पारंपरिक 'मोनोलिथिक आर्किटेक्चर' (Monolithic Architecture) में संपूर्ण एप्लिकेशन (UI, बिजनेस लॉजिक, डेटाबेस) एक ही बड़े सिंगल कोडबेस में एकीकृत होता है। इसके विपरीत, 'माइक्रोसर्विसेज आर्किटेक्चर' (Microservices Architecture) ऐप को कई छोटी, स्वतंत्र रूप से चलने वाली सेवाओं में विभाजित करता है, जो आधुनिक जटिल एप्लिकेशनों (जैसे Netflix, Amazon) के लिए अधिक उपयुक्त है।
कारण (R) सत्य है और (A) की सही व्याख्या करता है: मोनोलिथिक सिस्टम में एक छोटा सा बग पूरे एप्लिकेशन को क्रैश कर सकता है। माइक्रोसर्विसेज में यदि कोई एक सर्विस (जैसे पेमेंट गेटवे) फेल हो जाती है, तो बाकी एप्लिकेशन (जैसे प्रोडक्ट सर्च) चलता रहता है। प्रत्येक सर्विस को अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषा और डेटाबेस का उपयोग करके स्वतंत्र रूप से स्केल (Scale Up/Down) किया जा सकता है।
मोनोलिथिक बनाम माइक्रोसर्विसेज आर्किटेक्चर:
| मापदंड | मोनोलिथिक (Monolithic) | माइक्रोसर्विसेज (Microservices) |
|---|---|---|
| संरचना | सिंगल, एकीकृत कोडबेस | स्वतंत्र, छोटी सेवाओं का समूह |
| फॉल्ट टॉलेरेंस | कम (एक त्रुटि से पूरा सिस्टम ठप) | उच्च (सेवाएँ पृथक/Isolated होती हैं) |
| स्केलेबिलिटी | पूरे सिस्टम को एक साथ स्केल करना पड़ता है | केवल आवश्यक सर्विस को स्केल किया जा सकता है |
| जटिलता | शुरुआत में सरल | शुरुआती सेटअप और नेटवर्क जटिल |
सही उत्तर 'फॉरट्रॉन' (FORTRAN) है: 1954 में जॉन बैकस (John Backus) द्वारा IBM में विकसित की गई भाषा FORTRAN (Formula Translation) थी। यह दुनिया की पहली व्यावसायिक रूप से सफल उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High-Level Language) थी, जिसे विशेष रूप से वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए जटिल गणितीय और वैज्ञानिक गणनाओं हेतु डिज़ाइन किया गया था।
चूंकि विकल्पों (1, 2, 3 और 4) में 'FORTRAN' का उल्लेख नहीं किया गया है, इसलिए विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) सही उत्तर है।
गलत विकल्पों का ऐतिहासिक विश्लेषण:
- कोबोल (COBOL - Common Business-Oriented Language): 1959 में ग्रेस हॉपर (Grace Hopper) और CODASYL समिति द्वारा व्यावसायिक डेटा प्रोसेसिंग के लिए विकसित की गई।
- सी (C Language): 1972 में एटी एंड टी बेल लैब्स में डेनिस रिची (Dennis Ritchie) द्वारा विकसित की गई।
- पास्कल (PASCAL): 1970 में निकोलस वर्थ (Niklaus Wirth) द्वारा शिक्षण उद्देश्य हेतु बनाई गई।
- जावा (JAVA): 1995 में सन माइक्रोसिस्टम्स के जेम्स गोसलिंग (James Gosling) द्वारा विकसित की गई।
विकल्प 3 का कथन गलत (असत्य) है: स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज (SQL) एक मानकीकृत भाषा है जिसका उपयोग रिलेशनल डेटाबेस (RDBMS) (जैसे Oracle, MySQL, PostgreSQL, MS SQL Server) को प्रबंधित, नियंत्रित और क्वेरी करने के लिए किया जाता है, न कि NoSQL डेटाबेस के लिए। NoSQL डेटाबेस (जैसे MongoDB, Cassandra) अन-स्ट्रक्चर्ड डेटा के लिए डॉक्यूमेंट या की-वैल्यू पेयर आधारित क्वेरी का उपयोग करते हैं।
अन्य विकल्पों (1, 2 और 4) का सत्य विश्लेषण:
- RDBMS स्कीमा: रिलेशनल डेटाबेस में डेटा निश्चित पंक्तियों (Rows/Tuples) और स्तंभों (Columns/Attributes) में व्यवस्थित होता है।
- NoSQL की उपयोगिता: Big Data और सोशल मीडिया के असंरचित डेटा (वीडियो, इमेज, ऑडियो) के लिए NoSQL अत्यंत प्रभावी है।
- संरचित डेटा (Structured Data): वह डेटा जो एक निश्चित पंक्तियों/स्तंभों के फॉर्मेट में होता है (जैसे Excel शीट या RDBMS टेबल)।
| सूची-I (एल्गोरिदम) | सूची-II (प्राथमिक उद्देश्य/उपयोग) |
|---|---|
| a. डिजक्स्ट्रा एल्गोरिदम (Dijkstra's Algorithm) | 1. अपर्यवेक्षित अधिगम (Unsupervised Learning) द्वारा डेटा का समूह बनाना |
| b. K-मीन्स क्लस्टरिंग (K-Means Clustering) | 2. ग्राफ में दो नोड्स के बीच सबसे छोटा पथ (Shortest Path) खोजना |
| c. पेजरैंक एल्गोरिदम (PageRank Algorithm) | 3. डेटा सुरक्षा के लिए सममित कुंजी एन्क्रिप्शन (Symmetric Encryption) |
| d. एईएस एल्गोरिदम (AES Algorithm) | 4. प्रासंगिकता के आधार पर वेब पेजों को सर्च इंजन में रैंक करना |
सही सुमेलन इस प्रकार है:
- a. डिजक्स्ट्रा एल्गोरिदम → 2 (सबसे छोटा पथ खोजना): ग्राफ थ्योरी में डिजक्स्ट्रा (Dijkstra) एल्गोरिदम का उपयोग किसी ग्राफ में एक शुरुआती नोड से अन्य सभी नोड्स तक का सबसे छोटा पथ (Shortest Path) ज्ञात करने के लिए किया जाता है (जैसे GPS नेविगेशन में)।
- b. K-मीन्स क्लस्टरिंग → 1 (अपर्यवेक्षित क्लस्टरिंग): K-Means मशीन लर्निंग की एक अपर्यवेक्षित (Unsupervised) एल्गोरिदम है जो बिना लेबल वाले डेटासेट को उनके पैटर्न के आधार पर 'K' समूहों (Clusters) में विभाजित करती है।
- c. पेजरैंक एल्गोरिदम → 4 (वेब पेज रैंकिंग): गूगल के संस्थापकों (लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन) द्वारा विकसित पेजरैंक (PageRank) एल्गोरिदम बैकलिंक्स की संख्या और गुणवत्ता के आधार पर वेब पेजों की महत्ता का आकलन कर उन्हें सर्च रिजल्ट्स में रैंक करती है।
- d. एईएस (AES) → 3 (सममित एन्क्रिप्शन): एडवांस एन्क्रिप्शन स्टैंडर्ड (Advanced Encryption Standard - AES) एक सममित (Symmetric Key) क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम है जिसका उपयोग डेटा को सुरक्षित रूप से एन्क्रिप्ट करने के लिए किया जाता है।
सही उत्तर 'सिस्टम सॉफ्टवेयर' (System Software) है: ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे Windows, Linux), डिवाइस ड्राइवर (जो हार्डवेयर को OS से जोड़ते हैं) और लैंग्वेज ट्रांसलेटर (Compiler, Assembler) सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) की प्राथमिक श्रेणी में आते हैं। सिस्टम सॉफ्टवेयर का मुख्य उद्देश्य कंप्यूटर हार्डवेयर को नियंत्रित करना, संसाधनों का प्रबंधन करना और एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर को चलने के लिए एक प्लेटफॉर्म प्रदान करना है।
चूंकि विकल्पों (1, 2, 3 और 4) में कहीं भी 'सिस्टम सॉफ्टवेयर' नहीं दिया गया है (विकल्प 1 में एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर, विकल्प 2 में यूटिलिटी सॉफ्टवेयर, विकल्प 3 में एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और विकल्प 4 में कस्टम सॉफ्टवेयर दिया गया है), इसलिए विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) सही उत्तर है।
कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का मुख्य वर्गीकरण:
| सॉफ्टवेयर का प्रकार | मुख्य कार्य व उद्देश्य | उदाहरण |
|---|---|---|
| सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) | हार्डवेयर का प्रबंधन और सिस्टम का संचालन करना | Windows, Linux, Device Drivers, Compiler |
| एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software) | उपयोगकर्ता के विशिष्ट कार्यों को पूरा करना | MS Word, Web Browser (Chrome), Tally |
| यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software) | कंप्यूटर के रखरखाव व सुरक्षा में सहायता करना | Antivirus, Disk Defragmenter, Backup Tools |
- कंपाइलर (Compiler) पूरे उच्च-स्तरीय सोर्स कोड को एक साथ विश्लेषण करके ऑब्जेक्ट कोड या मशीन भाषा में परिवर्तित करता है।
- इंटरप्रेटर (Interpreter) सोर्स कोड को लाइन-दर-लाइन (Line-by-line) पढ़ता है और निष्पादित करता है, जिससे त्रुटियों की पहचान (Debugging) आसान हो जाती है।
- असेंबलर (Assembler) उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (जैसे Python) के कोड को असेंबली भाषा में परिवर्तित करता है।
कथन I और II सत्य हैं:
- कथन I सही है: कंपाइलर (Compiler) संपूर्ण उच्च-स्तरीय प्रोग्राम (High-Level Source Code) को एक साथ स्कैन करता है और यदि कोई सिंटैक्स त्रुटि न हो, तो उसे एक बार में ही मशीन कोड/ऑब्जेक्ट कोड (जैसे
.exeफ़ाइल) में बदल देता है (उदा. C, C++ कंपाइलर)। - कथन II सही है: इंटरप्रेटर (Interpreter) सोर्स कोड की एक-एक पंक्ति को क्रमिक रूप से पढ़ता है, उसे तुरंत मशीन भाषा में बदलकर निष्पादित करता है। यदि किसी पंक्ति में त्रुटि मिलती है, तो निष्पादन वहीं रुक जाता है, जिससे डीबगिंग सरल हो जाती है (उदा. Python, JavaScript)।
कथन III असत्य है: असेंबलर (Assembler) एक निम्न-स्तरीय अनुवादक है जो असेंबली भाषा (Assembly Language) के कोड (निमोनिक्स जैसे ADD, SUB) को मशीन भाषा (0 और 1) में परिवर्तित करता है, न कि उच्च-स्तरीय भाषा कोड को असेंबली भाषा में।
अनुवादकों का तुलनात्मक अंतर:
| मापदंड | कंपाइलर (Compiler) | इंटरप्रेटर (Interpreter) | असेंबलर (Assembler) |
|---|---|---|---|
| इनपुट कोड | उच्च-स्तरीय (High-Level) | उच्च-स्तरीय (High-Level) | असेंबली कोड (Low-Level) |
| कार्यप्रणाली | संपूर्ण कोड एक साथ | लाइन-दर-लाइन (Line by Line) | निमोनिक्स कोड अनुवाद |
| गति | निष्पादन तीव्र | निष्पादन अपेक्षाकृत धीमा | बहुत तीव्र |
| उदाहरण | C, C++, Java | Python, Ruby, PHP | Assembler |
$O(1)$ स्थिर समय (Constant Time) सही उत्तर है: बिग-ओ नोटेशन ($O$) किसी एल्गोरिदम द्वारा इनपुट साइज़ ($n$) के आधार पर लिए जाने वाले अधिकतम समय को दर्शाता है। $O(1)$ समय जटिलता का अर्थ है कि इनपुट का आकार चाहे कितना भी बड़ा हो ($n = 10$ या $n = 10,000,000$), एल्गोरिदम को निष्पादित होने में हमेशा एक समान/स्थिर समय लगता है। यह सबसे कुशल और तीव्र समय जटिलता मानी जाती है (जैसे- ऐरे में इंडेक्स द्वारा मान एक्सेस करना या हैश टेबल लुकअप)।
विभिन्न समय जटिलताओं का प्रदर्शन क्रम (सर्वश्रेष्ठ से सबसे खराब):
$$O(1) < O(\log n) < O(n) < O(n \log n) < O(n^2) < O(2^n) < O(n!)$$
समय जटिलताओं की तुलनात्मक तालिका:
| नोटेशन | नाम | दक्षता स्तर | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| $O(1)$ | Constant Time | सर्वोत्तम (Fastest) | ऐरे इंडेक्स एक्सेस, स्टैक पॉप (Pop) |
| $O(\log n)$ | Logarithmic Time | उत्कृष्ट | बाइनरी सर्च (Binary Search) |
| $O(n)$ | Linear Time | अच्छा | लीनियर सर्च (Linear Search) |
| $O(n \log n)$ | Linearithmic | मध्यम | मर्ज सॉर्ट (Merge Sort), क्विक सॉर्ट |
| $O(n^2)$ | Quadratic Time | धीमा | बबल सॉर्ट (Bubble Sort), इंसर्शन सॉर्ट |
- वॉटरफॉल मॉडल (Waterfall Model) एक रेखीय और अनुक्रमिक (Linear Sequential) मॉडल है, जो उन परियोजनाओं के लिए उपयुक्त है जहाँ आवश्यकताएँ (Requirements) शुरू से ही स्पष्ट और स्थिर होती हैं।
- एजाइल मॉडल (Agile Model) पुनरावृत्त (Iterative) और वृद्धिशील (Incremental) विकास पर आधारित है, जो ग्राहकों की बदलती आवश्यकताओं के अनुकूल त्वरित प्रतिक्रिया देता है।
- स्पाइरल मॉडल (Spiral Model) जोखिम प्रबंधन (Risk Management) और जोखिम विश्लेषण पर सबसे अधिक जोर देता है।
दिए गए तीनों कथन (I, II और III) पूर्णतः सत्य हैं:
- कथन I सही है: वॉटरफॉल मॉडल (Waterfall Model) सबसे पुराना SDLC मॉडल है। इसमें प्रत्येक चरण (आवश्यकता विश्लेषण → डिज़ाइन → कोडिंग → टेस्टिंग → मेंटेनेंस) एक झरने के पानी की तरह एक के बाद एक पूरा होता है। इसमें पीछे मुड़ना कठिन होता है, इसलिए यह केवल स्थिर आवश्यकताओं वाले प्रोजेक्ट्स के लिए उपयुक्त है।
- कथन II सही है: एजाइल मॉडल (Agile Model) छोटे-छोटे पुनरावृत्तियों (Iterative Sprints - 2 से 4 सप्ताह) में काम करता है। यह लगातार ग्राहक फीडबैक और सॉफ्टवेयर में बदलावों को स्वीकार करता है।
- कथन III सही है: बैरी बोएम (Barry Boehm) द्वारा विकसित स्पाइरल मॉडल (Spiral Model) वॉटरफॉल और इटेरेटिव मॉडल का संयोजन है। इसका सबसे प्रमुख घटक 'जोखिम विश्लेषण' (Risk Analysis) है, जो इसे बड़े व जोखिम भरे सॉफ्टवेयर प्रोजेक्ट्स के लिए सर्वोत्तम बनाता है।
| सूची-I (अवधारणा) | सूची-II (परिभाषा) |
|---|---|
| a. एनकैप्सुलेशन (Encapsulation) | 1. एक मौजूदा क्लास (Parent Class) के गुणों और विधियों को नई क्लास (Child Class) द्वारा पुनः उपयोग करना |
| b. इनहेरिटेंस (Inheritance) | 2. डेटा (Variables) और कोड (Methods) को एक सिंगल यूनिट (Class) में बाँधना तथा बाहरी सीधी पहुँच से सुरक्षित रखना |
| c. पॉलीमॉर्फिज्म (Polymorphism) | 3. जटिल आंतरिक विवरणों को छिपाकर केवल आवश्यक इंटरफ़ेस/सुविधाओं को प्रदर्शित करना |
| d. एब्स्ट्रैक्शन (Abstraction) | 4. एक ही मेथड/फ़ंक्शन का स्थिति के अनुसार अलग-अलग रूपों में व्यवहार करना (जैसे Method Overloading) |
सही सुमेलन इस प्रकार है:
- a. एनकैप्सुलेशन → 2 (डेटा बंडलिंग व डेटा हाइडिंग): एनकैप्सुलेशन डेटा और उस पर काम करने वाले मेथड्स को एक कैप्सूल (Class) के अंदर समेटता है। इसमें डेटा मेम्बर्स को
privateरखकर बाहरी अनधिकृत एक्सेस से बचाया जाता है (Data Hiding)। - b. इनहेरिटेंस → 1 (कोड री-यूजेबिलिटी): यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक नई क्लास (Derived/Child Class) पहले से बनी क्लास (Base/Parent Class) की विशेषताओं और व्यवहार को प्राप्त करती है।
- c. पॉलीमॉर्फिज्म → 4 (अनेक रूप/Polymorphism): 'पॉलीमॉर्फिज्म' का अर्थ है "एक नाम, अनेक रूप"। इसके दो मुख्य प्रकार हैं: कंपाइल-टाइम (Method Overloading) और रन-टाइम (Method Overriding)।
- d. एब्स्ट्रैक्शन → 3 (जटिलता छिपाना): एब्स्ट्रैक्शन उपयोगकर्ता को केवल प्रासंगिक जानकारी दिखाता है और बैकएंड की जटिल क्रियाविधि को छिपाता है (उदा. कार का एक्सीलेटर दबाना, बिना इंजन की आंतरिक कार्यप्रणाली जाने)।
प्राइमरी की (Primary Key) सही उत्तर है: RDBMS में 'प्राइमरी की' एक या एक से अधिक कॉलमों का ऐसा संयोजन है जो टेबल की प्रत्येक रो (Row/Tuple) को विशिष्ट रूप से पहचानता है। इसकी दो मुख्य शर्तें होती हैं:
- मान हमेशा यूनिक (Unique) होना चाहिए।
- इसमें NOT NULL बाधा होती है (अर्थात यह खाली नहीं छूट सकता)।
Roll_Number या Aadhaar_Number|अन्य कुंजी (Keys) प्रकारों का स्पष्टीकरण:
- फॉरेन की (Foreign Key): एक टेबल का वह कॉलम जो दूसरी टेबल की 'प्राइमरी की' को संदर्भित (Refer) करता है। इसका उपयोग दो टेबलों के बीच संबंध (Relationship) स्थापित करने के लिए होता है।
- कैंडिडेट की (Candidate Key): वे सभी कॉलम जो प्राइमरी की बनने की क्षमता रखते हैं।
- अल्टरनेट की (Alternate Key): कैंडिडेट की में से प्राइमरी की चुने जाने के बाद बची हुई शेष कैंडिडेट कुंजियाँ।
सही उत्तर 'शेल' (Shell) है: ऑपरेटिंग सिस्टम के आर्किटेक्चर में उपयोगकर्ता और कर्नेल (Kernel) के बीच का इंटरफ़ेस 'शेल' (Shell) कहलाता है। जब यूजर कोई कमांड टाइप करता है या आइकन पर क्लिक करता है, तो शेल उस निर्देश को समझकर कर्नेल को भेजता है ताकि उसे निष्पादित किया जा सके (उदा. Linux में Bash, Zsh और Windows में Command Prompt - cmd, PowerShell)।
चूंकि विकल्पों (1, 2, 3 और 4) में 'शेल' (Shell) का उल्लेख नहीं है, इसलिए विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) सही उत्तर है।
गलत विकल्पों का तकनीकी विवरण:
- कंपाइलर: यह उच्च-स्तरीय भाषा को मशीन कोड में बदलने वाला अनुवादक है।
- स्पूलर (Spooler): स्पूलिंग (SPOOLing - Simultaneous Peripheral Operations On-Line) तकनीक I/O डेटा (जैसे प्रिंट जॉब्स) को बफर में स्टोर करती है।
- थ्रेड (Thread): किसी प्रोसेस (Process) के निष्पादन की सबसे छोटी इकाई।
- रजिस्ट्री: विंडोज ओएस का डेटाबेस जहाँ सिस्टम सेटिंग्स स्टोर होती हैं।
स्वूप (Sqoop) सही उत्तर है: अपाचे स्वूप (Sqoop - SQL to Hadoop) बिग डेटा पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण टूल है। इसका मुख्य कार्य रिलेशनल डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम (RDBMS) जैसे MySQL, Postgres, Oracle और HDFS/Hive/HBase के बीच संरचित डेटा (Structured Data) का बड़े पैमाने पर आयात (Import) और निर्यात (Export) करना है।
हडूप इकोसिस्टम के अन्य उपकरणों का कार्य:
| टूल का नाम | प्राथमिक कार्य |
|---|---|
| Sqoop | RDBMS और HDFS के बीच स्ट्रक्चर्ड डेटा ट्रांसफर |
| Flume | लॉग फाइलों व स्ट्रीमिंग डेटा (Unstructured) का एकत्रीकरण |
| Oozie | हडूप जॉब्स के लिए वर्कफ़्लो शेड्यूलर (Workflow Scheduler) |
| Zookeeper | वितरित प्रणालियों के लिए समन्वय सेवा (Synchronization) |
| Hive | HDFS डेटा पर SQL-जैसा क्वेरी (HiveQL) निष्पादन |
विकल्प 3 का कथन गलत (असत्य) है: लीनियर सर्च (Linear Search) में डेटासेट के प्रत्येक तत्व को एक-एक करके क्रमिक रूप से जाँचा जाता है। यदि खोजा जाने वाला तत्व सरणी के सबसे अंत में हो या मौजूद न हो, तो $n$ तुलनाएँ करनी पड़ती हैं। अतः लीनियर सर्च की सबसे खराब स्थिति (Worst-case) समय जटिलता $O(n)$ होती है, न कि $O(\log n)$।
अन्य सभी विकल्पों (1, 2 और 4) का सत्य विश्लेषण:
- बाइनरी सर्च पूर्व-शर्त: बाइनरी सर्च केवल सॉर्ट किए गए डेटा पर काम करती है। यह ऐरे को दो हिस्सों में बांटकर मध्य तत्व से तुलना करती है।
- क्विक सॉर्ट रणनीति: क्विक सॉर्ट एक 'पिवट' (Pivot) तत्व चुनकर ऐरे को दो भागों में विभाजित (Divide and Conquer) करती है।
- बाइनरी सर्च गति: बाइनरी सर्च की टाइम कम्प्लेक्सिटी $O(\log n)$ होती है, जिससे यह लाखों रिकॉर्ड्स में से भी कुछ ही चरणों में परिणाम खोज लेती है।
बिल्ड, ओन, ऑपरेट, ट्रांसफर (Build, Own, Operate, Transfer) सही उत्तर है: BOOT मॉडल सार्वजनिक-निजी भागीदारी (Public-Private Partnership - PPP) का एक प्रमुख ढाँचा है, जिसका व्यापक उपयोग उत्तर प्रदेश और भारत सरकार की ई-गवर्नेंस व आईसीटी (ICT) अवसंरचना परियोजनाओं में किया जाता है।
BOOT मॉडल के चरण:
- Build (निर्माण): निजी विक्रेता (Vendor) अपने खर्च पर आईसीटी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करता है।
- Own (स्वामित्व): अनुबंध अवधि (उदा. 5 या 10 वर्ष) के दौरान कानूनी स्वामित्व निजी कंपनी के पास रहता है।
- Operate (संचालन): निजी कंपनी प्रोजेक्ट का संचालन और रखरखाव करती है।
- Transfer (हस्तांतरण): अनुबंध अवधि समाप्त होने पर संपत्ति और संचालन का पूर्ण स्वामित्व सरकार को सौंप दिया जाता है।
अन्य संबंधित PPP निष्पादन मॉडल:
- BOT Model: Build, Operate, Transfer (इसमें स्वामित्व निजी कंपनी के पास नहीं रहता)।
- BOO Model: Build, Own, Operate (हस्तांतरण नहीं होता, स्वामित्व हमेशा निजी विक्रेता के पास रहता है)।
- General Public License (GPL) is a 'Copyleft' license under which modified code must be made public under the same license.
- MIT and Apache licenses are examples of 'Permissive' licenses that allow modified code to be made proprietary (closed-source).
- End-users can freely access, modify, and redistribute the source code of proprietary software.
Assertion (A): Microservices Architecture is preferred over Monolithic Architecture for building large-scale modern web applications.
Reason (R): Microservices Architecture allows independent scaling, flexibility, and easier debugging for each service, so the failure of one component does not bring down the entire system.
Select the correct option with reference to the above statements:||Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|None of these||A||||Hard Q3||Which of the following is the first high-level scientific programming language developed in 1954 by John Backus and his team at International Business Machines (IBM)?||COBOL|C Language|PASCAL|JAVA|None of these||E||||Easy Q4||Which of the following statements is incorrect regarding Database Management Systems (DBMS) and data structures?||Relational Databases (RDBMS) store data in tables of rows and columns with a fixed schema.|NoSQL databases are highly suitable for handling large-scale unstructured and semi-structured data.|Structured Query Language (SQL) is used only to manage and query NoSQL databases.|Data tables in a spreadsheet (such as MS Excel) are examples of structured data.|None of these||C||||Moderate Q5||Match List-I (Algorithm) with List-II (Primary Purpose/Use) and select the correct answer using the codes given below:
| List-I (Algorithm) | List-II (Primary Purpose/Use) |
|---|---|
| a. Dijkstra's Algorithm | 1. Grouping data using Unsupervised Learning |
| b. K-Means Clustering | 2. Finding the Shortest Path between two nodes in a graph |
| c. PageRank Algorithm | 3. Symmetric Key Encryption for data security |
| d. AES Algorithm | 4. Ranking web pages in search engines based on relevance |
- A Compiler analyzes the entire high-level source code at once and converts it into object code or machine language.
- An Interpreter reads and executes source code line-by-line, making debugging easier.
- An Assembler converts high-level programming language code (such as Python) into assembly language.
- The Waterfall Model is a linear sequential model suitable for projects where requirements are clear and stable from the beginning.
- The Agile Model is based on iterative and incremental development, responding quickly to changing customer requirements.
- The Spiral Model places the strongest emphasis on Risk Management and risk analysis.
| List-I (Concept) | List-II (Definition) |
|---|---|
| a. Encapsulation | 1. Reusing properties and methods of an existing Parent Class by a Child Class |
| b. Inheritance | 2. Bundling data (Variables) and code (Methods) into a single unit (Class) and protecting it from direct external access |
| c. Polymorphism | 3. Hiding complex internal implementation details and displaying only essential interface/features |
| d. Abstraction | 4. Allowing a method/function to exhibit different behaviors based on context (e.g., Method Overloading) |
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 05
Practice Completed
All questions answered. Generate report?
Generating report
Analyzing performance...
Performance Report
निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
Thanks for Reading! / पढ़ने के लिए धन्यवाद! 🙏
सरकारी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे
हैं?
हमारे ब्लॉग पर पाएं
Best Computer Notes, PYQs, Mock Tests और
Quizzes बिल्कुल फ्री।
