नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 16 तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- IT कानून और नैतिकता (IT Laws and Ethics)
- डेटा सुरक्षा और गोपनीयता (Data Security & Privacy)
- सोशल नेटवर्किंग (Social Networking)
- नवीनतम IT घटनाक्रम (Recent IT Developments)
- आधुनिक आईटी गैजेट, उत्पादकता एवं सहयोग उपकरण (ई-कचरा एवं उभरती प्रवृत्तियाँ)
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए इस सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
| सूची-I (साइबर हमले) | सूची-II (कार्यप्रणाली) |
|---|---|
| a. सलामी हमला (Salami Attack) | i. दो पक्षों के बीच होने वाले वास्तविक संचार को गुप्त रूप से इंटरसेप्ट या बाधित करना |
| b. रैनसमवेयर (Ransomware) | ii. अति-सूक्ष्म एवं अनदेखी वित्तीय कटौतियों द्वारा कुल मिलाकर बड़ा गबन करना |
| c. मैन-इन-द-मिडिल (MitM) | iii. किसी अन्य वैध स्रोत या उपयोगकर्ता का रूप धारण कर सिस्टम को धोखा देना |
| d. स्पूफिंग (Spoofing) | iv. पीड़ित के डेटा या सिस्टम को एन्क्रिप्ट कर उसे खोलने के बदले फिरौती माँगना |
विकल्प 1 (a-ii, b-iv, c-i, d-iii) सही सुमेलन है। विभिन्न साइबर खतरों की प्रामाणिक व्याख्या निम्नलिखित है:
- सलामी हमला (Salami Attack): यह एक वित्तीय साइबर अपराध है जिसमें किसी बैंक खाते या डेटाबेस से इतनी छोटी राशि (जैसे कुछ पैसे या सेंट) की बार-बार अवैध कटौती की जाती है कि खाताधारक का उस पर ध्यान नहीं जाता, परंतु कुल मिलाकर यह बहुत बड़ा गबन बन जाता है।
- रैनसमवेयर (Ransomware): यह एक दुर्भावनापूर्ण सॉफ्टवेयर (Malware) है जो उपयोगकर्ता की महत्वपूर्ण फ़ाइलों को जटिल सिफर (Cipher) द्वारा लॉक/एन्क्रिप्ट कर देता है और डिक्रिप्शन की (Decryption Key) देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी (जैसे बिटकॉइन) में फिरौती माँगता है (उदा. WannaCry, Locky)।
- मैन-इन-द-मिडिल हमला (Man-in-the-Middle Attack - MitM): इस हमले में साइबर अपराधी प्रेषक और प्राप्तकर्ता के बीच के संचार माध्यम में अनाधिकृत रूप से प्रवेश कर डेटा पैकेट्स को चुराता या बदल देता है (उदा. असुरक्षित पब्लिक वाई-फाई पर डेटा इंटरसेप्शन)।
- स्पूफिंग (Spoofing): इसमें हमलावर अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर किसी विश्वसनीय व्यक्ति, सर्वर या आईपी पते का मुखौटा धारण करता है (जैसे IP Spoofing, Email Spoofing)।
अन्य साइबर सुरक्षा तथ्य:
- फ़िशिंग (Phishing): यह उपयोगकर्ताओं को जाली ईमेल या लिंक भेजकर उनके पासवर्ड और बैंकिंग क्रेडेंशियल चुराने की सामाजिक इंजीनियरिंग तकनीक है।
- बॉटनेट (Botnet): मैलवेयर से संक्रमित और रिमोटली नियंत्रित कंप्यूटरों का समूह, जिसका प्रयोग DDoS अटैक करने के लिए किया जाता है।
कथन 1 पूर्णतः सही है। GNU जनरल पब्लिक लाइसेंस (GPL) एक सुदृढ़ 'कॉपीलेफ्ट' (Copyleft) लाइसेंस है। इसका मूलभूत सिद्धांत यह है कि यदि कोई व्यक्ति इस कोड का उपयोग करके सॉफ़्टवेयर को संशोधित करता है, तो उसे संशोधित डेरिवेटिव कार्य (Derivative Work) का सोर्स कोड भी GPL लाइसेंस के तहत ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- विकल्प 2 गलत है: एमआईटी (MIT) लाइसेंस एक 'परमिसिव' (Permissive) लाइसेंस है, न कि कॉपीलेफ्ट। यह डेवलपर को बिना सोर्स कोड सार्वजनिक किए निजी या व्यावसायिक उपयोग की पूरी छूट देता है।
- विकल्प 3 गलत है: अपाचे 2.0 (Apache License) भी एक परमिसिव लाइसेंस है जो उपयोगकर्ताओं को वाणिज्यिक उपयोग, संशोधन एवं वितरण की पूर्ण स्वतंत्रता देता है और इसमें पेटेंट सुरक्षा अधिकार भी शामिल होते हैं।
- विकल्प 4 गलत है: प्रोप्राइटरी (Proprietary/Closed-Source) लाइसेंस कोड के पुनर्वितरण, अध्ययन और संशोधन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाता है (उदा. Microsoft Windows OS, Adobe Photoshop)।
| लाइसेंस का प्रकार | प्रकृति (Category) | संशोधित कोड सार्वजनिक करना अनिवार्य? |
|---|---|---|
| GNU GPL | Copyleft | हाँ (अनिवार्य) |
| MIT License | Permissive | नहीं (स्वैच्छिक) |
| Apache 2.0 | Permissive | नहीं (स्वैच्छिक) |
| Proprietary | Closed-Source | लागू नहीं (संशोधन वर्जित) |
दिए गए विकल्पों में से कोई भी विकल्प सही नहीं है, अतः सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है।
ई-रीडर्स (E-Readers) में जिस तकनीक का उपयोग किया जाता है, उसे 'ई-इंक' (E-Ink / Electronic Ink) या 'इलेक्ट्रॉनिक पेपर डिस्प्ले' (EPD) कहा जाता है।
ई-इंक (E-Ink) तकनीक की मुख्य विशेषताएँ:
- इलेक्ट्रोफोरेसिस सिद्धांत (Electrophoresis): इसमें सूक्ष्म कैप्सूल होते हैं जिनमें तरल के भीतर तैरते हुए काले और सफेद रंगद्रव्य कण (Pigment particles) होते हैं। विद्युत आवेश के अनुसार ये कण ऊपर आकर टेक्स्ट या छवि बनाते हैं।
- शून्य बैकलाइट (No Backlight): यह सीधे प्रकाश उत्सर्जित करने के बजाय परावर्तित प्रकाश (Ambient light) पर काम करती है, जिससे धूप में भी साफ दिखता है और आँखों पर दबाव नहीं पड़ता।
- द्वि-स्थिरता (Bi-stability): जब तक स्क्रीन पर नया पृष्ठ लोड नहीं होता (रिफ्रेश नहीं होता), तब तक यह किसी भी विद्युत ऊर्जा की खपत नहीं करती।
अन्य विकल्पों का विवरण:
- AMOLED / IPS-LCD: स्मार्टफोन, टैबलेट और मॉनिटर में प्रयुक्त होते हैं। ये सक्रिय रूप से प्रकाश उत्सर्जित करते हैं और लगातार बैटरी की खपत करते हैं।
- CRT (Cathode Ray Tube): पुराने भारी मॉनिटरों और टीवी में उपयोग की जाने वाली वैक्यूम आधारित तकनीक है।
अभिकथन (A): 'जीरो ट्रस्ट' (Zero Trust) सुरक्षा मॉडल यह मानता है कि नेटवर्क के भीतर या बाहर का कोई भी अनुरोध स्वाभाविक रूप से विश्वसनीय नहीं है।
कारण (R): जीरो ट्रस्ट आर्किटेक्चर "नेवर ट्रस्ट, ऑलवेज वेरीफाई" (Never Trust, Always Verify) के सिद्धांत पर कार्य करता है और स्थान की परवाह किए बिना प्रत्येक उपयोगकर्ता व उपकरण के निरंतर प्रमाणीकरण की माँग करता है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:||अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|अभिकथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।|इनमें से कोई नहीं||A||
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों तकनीकी रूप से सत्य हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) का सही और तार्किक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।
- पारंपरिक परिधि सुरक्षा (Perimeter Security) बनाम जीरो ट्रस्ट: पारंपरिक सुरक्षा मॉडल केवल बाहरी खतरों को रोकने के लिए फ़ायरवॉल पर निर्भर रहता था और आंतरिक नेटवर्क के सभी उपकरणों पर स्वतः विश्वास करता था। इसके विपरीत, 'जीरो ट्रस्ट' मॉडल नेटवर्क के आंतरिक ट्रैफ़िक को भी संभावित रूप से असुरक्षित मानता है।
- मूल सिद्धांत: जीरो ट्रस्ट सुरक्षा ढाँचा जॉन किंडरवाग (John Kindervag) द्वारा विकसित अवधारणा पर आधारित है, जिसका मूल मंत्र "Never Trust, Always Verify" है।
- कार्यप्रणाली: इसके अंतर्गत किसी भी उपयोगकर्ता, लैपटॉप, सर्वर या मोबाइल को डेटा एक्सेस देने से पहले उसकी पहचान, बहु-कारक प्रमाणीकरण (MFA), डिवाइस की स्थिति और न्यूनतम विशेषाधिकार (Least Privilege Access) के आधार पर प्रत्येक स्तर पर लगातार सत्यापित किया जाता है।
सोशल नेटवर्किंग शब्दावली में उपयोगकर्ता के सभी सामाजिक संबंधों, मित्रों, फॉलोअर्स और उनकी अंतःक्रियाओं के समग्र डिजिटल प्रतिनिधित्व या नेटवर्क मानचित्र को 'सोशल ग्राफ' (Social Graph) कहा जाता है। यह शब्द मूल रूप से फेसबुक द्वारा 2007 में लोकप्रिय बनाया गया था।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- सोशल बॉट (Social Bot): यह एक स्वचालित प्रोग्राम (Automated Account) होता है जो सोशल मीडिया पर मनुष्यों की तरह पोस्ट करने, लाइक करने या फेक न्यूज़ फैलाने का कार्य करता है।
- नेटवर्क थ्रूपुट (Network Throughput): यह एक नेटवर्किंग मीट्रिक है जो यह मापता है कि प्रति सेकंड किसी चैनल पर वास्तव में कितना डेटा प्रसारित हुआ।
- कम्युनिटी मॉडरेशन (Community Moderation): यह किसी ऑनलाइन समूह या मंच पर आपत्तिजनक सामग्री को हटाने और सामुदायिक नियमों को लागू करने की प्रशासनिक प्रक्रिया है।
सोशल मीडिया से जुड़े अन्य परीक्षा-उपयोगी तथ्य:
- एजरैंक (EdgeRank): फेसबुक द्वारा उपयोगकर्ता की न्यूज़ फीड में पोस्ट्स को रैंक करने के लिए प्रयुक्त एल्गोरिथ्म, जो मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करता है:
- बंधुत्व (Affinity - उपयोगकर्ता का संबंध)
- भार (Weight - पोस्ट का प्रकार जैसे वीडियो/छवि)
- समय का ह्रास (Time Decay - पोस्ट कितनी पुरानी है)
- हैशटैग (#): किसी पोस्ट के मुख्य विषय (Keywords) को चिह्नित कर उसे सर्च और ट्रेंडिंग के लिए सुलभ बनाने वाला प्रतीक।
लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs जैसे ChatGPT, Google Gemini, Claude) से इच्छित और सटीक आउटपुट प्राप्त करने के लिए दिए जाने वाले निर्देशों (Prompts) को कुशलतापूर्वक डिज़ाइन, प्रारूपित और अनुकूलित करने की प्रक्रिया को 'प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग' (Prompt Engineering) कहा जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण तकनीकी पदों की व्याख्या:
- टोकनाइज़ेशन (Tokenization): प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) का वह प्रारंभिक चरण जिसमें संपूर्ण वाक्य या टेक्स्ट को अलग-अलग छोटे घटकों (शब्दों या उप-शब्दों) में विभाजित किया जाता है जिन्हें 'टोकन' कहते हैं।
- डेटा माइनिंग (Data Mining): विशाल डेटासेट (Big Data) से अज्ञात पैटर्न, रुझान और उपयोगी जानकारी निकालने की कम्प्यूटेशनल तकनीक।
- डेटा रैंगलिंग (Data Wrangling / Data Cleaning): विश्लेषण और मॉडलिंग से पहले कच्चे (Raw) एवं अव्यवस्थित डेटा को साफ, सुव्यवस्थित और उपयोगी प्रारूप में बदलने की प्रक्रिया।
एआई (AI) संबंधी नवीनतम सरकारी पहल:
- भाषिनी (BHASHINI): इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा भारतीय भाषाओं के मध्य रीयल-टाइम अनुवाद व भाषा सेतु स्थापित करने हेतु विकसित राष्ट्रीय एआई प्लेटफॉर्म।
- भारत की पहली AI सिटी: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लखनऊ में देश की पहली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिटी विकसित की जा रही है।
- यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज (EDI) और इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से किए जाने वाले वित्तीय लेन-देन को पूर्ण कानूनी मान्यता प्रदान करता है।
- इस अधिनियम के तहत 'डिजिटल हस्ताक्षर' (Digital Signatures) को कानूनी वैधता प्रदान करने के लिए पब्लिक की इन्फ्रास्ट्रक्चर (PKI) का उपयोग किया जाता है।
- धारा 43A वाणिज्यिक संस्थाओं द्वारा संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा (Sensitive Personal Data) की सुरक्षा में विफलता पर पीड़ित को क्षतिपूर्ति देने के दायित्व से संबंधित है।
उपर्युक्त तीनों कथन (I, II और III) सत्य हैं, अतः विकल्प 4 (I, II और III) सही उत्तर है।
- कथन I सत्य है: भारत का सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (IT Act 2000) 17 अक्टूबर 2000 को लागू हुआ था। यह यूएनसीआईट्रल (UNCITRAL) के मॉडल लॉ पर आधारित है और ई-कॉमर्स व इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को कानूनी मान्यता देता है।
- कथन II सत्य है: अधिनियम की धारा 3 और 5 के तहत डिजिटल हस्ताक्षर को कानूनी मान्यता दी गई है। यह असममित एन्क्रिप्शन (Asymmetric Cryptography / PKI) पर आधारित होता है जिसमें एक 'प्राइवेट की' (Private Key - हस्ताक्षरकर्ता के पास) और एक 'पब्लिक की' (Public Key - सत्यापनकर्ता के पास) का उपयोग होता है।
- कथन III सत्य है: वर्ष 2008 के संशोधन द्वारा जोड़ी गई धारा 43A के अनुसार, यदि कोई कॉर्पोरेट निकाय संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा (SPDI) की सुरक्षा हेतु उचित सुरक्षा प्रक्रियाएँ बनाए रखने में विफल रहता है और किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचता है, तो वह संस्था क्षतिपूर्ति (Compensation) देने के लिए उत्तरदायी होगी।
IT Act की अन्य महत्वपूर्ण धाराएँ:
- धारा 66: कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़ और हैकिंग के लिए दंड।
- धारा 66C: पहचान की चोरी (Identity Theft) के लिए दंड।
- धारा 66E: किसी व्यक्ति की निजता के उल्लंघन (गोपनीय अंगों के चित्र बिना सहमति खींचना/प्रसारित करना) हेतु दंड।
| सूची-I (संचार तकनीक) | सूची-II (विशेषता एवं अनुप्रयोग) |
|---|---|
| a. लोरावान (LoRaWAN) | i. दृश्य प्रकाश (Visible Light) का उपयोग करके अति-उच्च गति डेटा ट्रांसमिशन |
| b. एनएफसी (NFC) | ii. स्मार्ट होम उपकरणों हेतु कम ऊर्जा खपत वाला मेश नेटवर्क (Mesh Network) |
| c. ज़िगबी (ZigBee) | iii. 4 सेमी से कम दूरी पर संपर्क-रहित (Contactless) वित्तीय भुगतान एवं पेयरिंग |
| d. लाई-फाई (Li-Fi) | iv. व्यापक भौगोलिक क्षेत्र में अत्यंत कम बिजली खपत वाली लंबी दूरी (Long Range) कनेक्टिविटी |
विकल्प 2 (a-iv, b-iii, c-ii, d-i) सही सुमेलन है। आधुनिक IoT एवं वायरलेस संचार तकनीकों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
- लोरावान (LoRaWAN - Long Range Wide Area Network): यह LPWAN (Low Power Wide Area Network) प्रोटोकॉल है जो सब-गीगाहर्ट्ज़ (Sub-GHz) अनलाइसेंस्ड रेडियो बैंड (भारत में 865–867 MHz) पर काम करता है। यह ग्रामीण एवं स्मार्ट सिटी अनुप्रयोगों (जैसे स्मार्ट वाटर मीटरिंग, कृषि सेंसर) में 10-15 किमी तक कम डेटा ट्रांसमिट कर सकता है।
- एनएफसी (Near Field Communication - NFC): यह 13.56 MHz रेडियो फ्रीक्वेंसी पर संचालित एक अति-अल्प दूरी (अमूमन 4 सेमी से कम) की तकनीक है। इसका मुख्य उपयोग स्मार्टफोन से संपर्क-रहित भुगतान (Tap-to-Pay), ई-टिकटिंग और त्वरित ब्लूटूथ पेयरिंग में होता है।
- ज़िगबी (ZigBee): यह IEEE 802.15.4 मानक पर आधारित एक कम-शक्ति और कम डेटा-दर वाला वायरलेस मेश नेटवर्किंग प्रोटोकॉल है। यह मुख्य रूप से स्मार्ट होम ऑटोमेशन, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और IoT सेंसर नेटवर्क में काम आता है।
- लाई-फाई (Light Fidelity - Li-Fi): यह ऑप्टिकल वायरलेस कम्युनिकेशन (OWC) तकनीक है जो डेटा संचारित करने के लिए रेडियो तरंगों के बजाय एलईडी (LED) बल्बों के प्रकाश स्पेक्ट्रम का उपयोग करती है। यह वाई-फाई की तुलना में 100 गुना तक तेज़ गति (1 Gbps से अधिक) प्रदान कर सकती है तथा रेडियो फ्रीक्वेंसी प्रतिबंध वाले क्षेत्रों (जैसे अस्पतालों और विमानों) में सुरक्षित है।
| तकनीक | मानक / माध्यम | सामान्य परास (Range) | मुख्य अनुप्रयोग |
|---|---|---|---|
| LoRaWAN | LPWAN / Radio Waves | 10–15 किमी | स्मार्ट सिटी, कृषि, स्मार्ट मीटरिंग |
| NFC | ISO/IEC 18092 / 13.56 MHz | < 4 सेमी | डिजिटल वॉलेट (FASTag/UPI Tap), टोकन |
| ZigBee | IEEE 802.15.4 / 2.4 GHz | 10–100 मीटर | स्मार्ट बल्ब, होम सिक्योरिटी, मेश नेटवर्क |
| Li-Fi | IEEE 802.11bb / Visible Light | < 10 मीटर (Line-of-Sight) | उच्च-सुरक्षा डेटा ट्रांसफर, इनडोर ब्रॉडबैंड |
विकल्प 2 सही है। सुरक्षित पासवर्ड भंडारण में 'साल्टिंग' (Salting) एक अनिवार्य क्रिप्टोग्राफ़िक तकनीक है।
- कार्यप्रणाली: जब कोई उपयोगकर्ता पासवर्ड बनाता है, तो सिस्टम एक अद्वितीय एवं यादृच्छिक क्रिप्टोग्राफ़िक स्ट्रिंग (जिसे 'Salt' कहते हैं) उत्पन्न करता है और उसे मूल पासवर्ड के साथ जोड़कर हैश फ़ंक्शन (जैसे Argon2, bcrypt, PBKDF2 या SHA-256) से गुज़ारता है। इसके बाद परिणामी हैश और साल्ट को डेटाबेस में सहेजा जाता है।
- रेनबो टेबल हमलों से बचाव: यदि दो उपयोगकर्ताओं का पासवर्ड समान (जैसे "Admin@123") हो, तो बिना साल्ट के दोनों का हैश मान एक जैसा होगा। हमलावर 'रेनबो टेबल' (पहले से संगणित हैश मानों की विशाल डिक्शनरी) का उपयोग करके इन हैश को तुरंत क्रैक कर लेते हैं। साल्टिंग प्रत्येक पासवर्ड के हैश को अद्वितीय बना देती है, जिससे प्री-कंप्यूटेड रेनबो टेबल और डिक्शनरी अटैक पूरी तरह विफल हो जाते हैं।
क्रिप्टोग्राफिक हैश फ़ंक्शंस के गुणधर्म:
- एक-तरफा कार्य (One-Way Property / Pre-image Resistance): हैश से मूल पासवर्ड प्राप्त करना गणितीय रूप से असंभव होता है।
- हिमस्खलन प्रभाव (Avalanche Effect): इनपुट में 1 बिट का भी मामूली बदलाव करने पर आउटपुट हैश पूरी तरह बदल जाता है।
- टकराव प्रतिरोध (Collision Resistance): किन्हीं दो भिन्न इनपुट का एक ही हैश मान नहीं हो सकता।
दिए गए विकल्पों में से कोई भी विकल्प सही नहीं है, अतः सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है।
इस कानूनी एवं नियामक व्यवस्था को तकनीकी और विधिक रूप से 'विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व' (Extended Producer Responsibility - EPR) कहा जाता है।
EPR और ई-कचरा (E-Waste) नियम 2022 के मुख्य बिंदु:
- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) का पोर्टल: ई-कचरा प्रबंधन नियम, 2022 (जो 1 अप्रैल 2023 से लागू हुए) के तहत सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण निर्माताओं, आयातकों और रीसाइक्लर्स को CPCB के केंद्रीकृत EPR पोर्टल पर अनिवार्य रूप से पंजीकृत होना पड़ता है।
- ई-कचरे की श्रेणियाँ: इसके अंतर्गत आईटी एवं दूरसंचार उपकरण (कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल, सर्वर), उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, और सौर पीवी मॉड्यूल/पैनल शामिल हैं।
- खतरनाक रसायनों पर प्रतिबंध (RoHS - Restriction of Hazardous Substances): इसके तहत नए उपकरणों में सीसा (Lead), पारा (Mercury), कैडमियम (Cadmium), और हेक्सावेलेंट क्रोमियम जैसे विषाक्त पदार्थों की मात्रा को निर्धारित सीमाओं के भीतर रखना अनिवार्य है।
- लिथियम-आयन बैटरियों का निपटान: लिथियम-आयन बैटरियों को सामान्य कचरे में फेंकने से पर्यावरण प्रदूषण और 'थर्मल रनअवे' (Thermal Runaway - आग लगने की दुर्घटनाएँ) का गंभीर जोखिम होता है, इसलिए इनके लिए विशेष बैटरी रीसाइक्लिंग EPR लक्ष्य तय किए गए हैं।
विकल्प 4 सही उत्तर है क्योंकि 'लीनियर रिग्रेशन' (Linear Regression) एक सुपरवाइज्ड लर्निंग (Supervised Learning) ऐल्गोरिथ्म है, अनसुपरवाइज्ड नहीं।
मशीन लर्निंग के प्रकार एवं उनके ऐल्गोरिथ्म की तुलना:
| श्रेणी (Category) | विशेषता (Characteristics) | प्रमुख ऐल्गोरिथ्म (Algorithms) |
|---|---|---|
| सुपरवाइज्ड लर्निंग (Supervised Learning) | लेबल किए गए डेटा (Labelled Input-Output Data) से सीखता है। इसका उपयोग वर्गीकरण (Classification) और रिग्रेशन (Regression) में होता है। | • लीनियर रिग्रेशन (Linear Regression) • लॉजिस्टिक रिग्रेशन (Logistic Regression) • सपोर्ट वेक्टर मशीन (SVM) • डिसीजन ट्री व रैंडम फॉरेस्ट |
| अनसुपरवाइज्ड लर्निंग (Unsupervised Learning) | बिना लेबल वाले डेटा (Unlabelled Data) में अंतर्निहित पैटर्न, संरचना या समूह ढूँढता है। | • के-मीन्स (K-Means Clustering) • हायरार्किकल क्लस्टरिंग (Hierarchical) • PCA (डायमेंशनलिटी रिडक्शन) • एप्रीयोरी (मार्केट बास्केट एसोसिएशन) |
| सुदृढ़ीकरण अधिगम (Reinforcement Learning) | एजेंट पर्यावरण के साथ अंतःक्रिया करके पुरस्कार (Reward) और दंड (Penalty) के माध्यम से इष्टतम नीति सीखता है। | • क्यू-लर्निंग (Q-Learning) • डीप क्यू-नेटवर्क्स (DQN) • SARSA (रोबोटिक्स व गेमिंग - AlphaGo) |
अन्य विकल्पों का विवरण:
- K-Means: डेटा बिंदुओं को उनकी समानताओं के आधार पर K समूहों (Clusters) में विभाजित करता है।
- PCA: विशाल और जटिल डेटासेट के आयामों (Dimensions) को घटाकर महत्वपूर्ण सूचनाओं को संरक्षित रखता है।
- Apriori: ई-कॉमर्स साइटों पर "ग्राहकों ने यह भी खरीदा" जैसे एसोसिएशन नियम बनाता है।
अभिकथन (A): वेब ब्राउज़िंग में 'थर्ड-पार्टी कुकीज़' (Third-Party Cookies) का उपयोग कई अलग-अलग वेबसाइटों पर उपयोगकर्ता के डिजिटल व्यवहार और प्राथमिकताओं को ट्रैक करने के लिए किया जाता है।
कारण (R): सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स कंपनियाँ अक्सर 'डार्क पैटर्न्स' (Dark Patterns) आधारित यूजर-इंटरफेस (UI) का उपयोग करती हैं ताकि उपयोगकर्ताओं को बिना समझे व्यापक डेटा ट्रैकिंग और सहमति देने के लिए प्रेरित किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:||अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), डिजिटल गोपनीयता के संदर्भ में अभिकथन (A) की प्रासंगिक व्याख्या करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|अभिकथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।|इनमें से कोई नहीं||A||
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और कारण (R), डिजिटल विज्ञापन व ट्रैकिंग उद्योग में गोपनीयता हनन के अंतर्संबंध को सही ढंग से पुष्ट करता है।
- थर्ड-पार्टी कुकीज़ (Third-Party Cookies): जब कोई उपयोगकर्ता किसी वेबसाइट 'X' पर जाता है, परंतु उस पेज पर लगे विज्ञापन या ट्रैकर किसी बाहरी डोमेन 'Y' (जैसे विज्ञापन नेटवर्क) द्वारा लोड किए जाते हैं, तो डोमेन 'Y' उपयोगकर्ता के ब्राउज़र में कुकी सेट कर देता है। यह कुकी उपयोगकर्ता द्वारा देखी जाने वाली सभी संबंधित वेबसाइटों पर उसके ब्राउज़िंग व्यवहार का क्रॉस-साइट प्रोफाइल तैयार करती है।
- डार्क पैटर्न्स (Dark Patterns): यह एक भ्रामक और जोड़-तोड़ वाली यूजर इंटरफेस (UI/UX) डिजाइन तकनीक है, जिसे उपयोगकर्ताओं को ऐसे निर्णय लेने के लिए बरगलाने हेतु बनाया जाता है जो उनके हित में नहीं होते (जैसे कुकी बैनर में "Reject All" बटन को छिपाना या छोटा करना और "Accept All" को चमकीले रंग में प्रस्तुत करना)।
- भारत सरकार का विनियमन: उपभोक्ता मामले विभाग (DoCA) ने 2023 में ई-कॉमर्स और डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर 13 प्रकार के डार्क पैटर्न्स (जैसे Confirm Shaming, Forced Action, Sneaking, Basket Sneaking) को अनुचित व्यापार व्यवहार घोषित कर प्रतिबंधित किया है।
- गिट (Git) एक वितरित संस्करण नियंत्रण प्रणाली (Distributed Version Control System - DVCS) है जो डेवलपर्स को कोड परिवर्तनों को ऑफ़लाइन ट्रैक करने और शाखाएँ (Branches) बनाने की सुविधा देती है।
- 'पुल रिक्वेस्ट' (Pull Request / Merge Request) का उपयोग टीम के सदस्यों द्वारा किसी फीचर शाखा (Branch) के कोड की समीक्षा करने और उसे मुख्य कोडबेस (Main Branch) में एकीकृत करने के लिए किया जाता है।
- माइक्रोसॉफ्ट लूप (Microsoft Loop) और नोशन (Notion) जैसे आधुनिक कार्यक्षेत्र (Workspaces) गतिशील कैनवास और वास्तविक समय (Real-time) सह-संपादन की सुविधा प्रदान करते हैं।
उपर्युक्त तीनों कथन (I, II और III) सत्य हैं, अतः विकल्प 4 (I, II और III) सही उत्तर है।
- कथन I सत्य है: गिट (Git) का विकास लिनुस टोरवाल्ड्स (Linus Torvalds) ने 2005 में लिनक्स कर्नेल के विकास हेतु किया था। सेंट्रलाइज्ड सिस्टम (जैसे SVN) के विपरीत, Git में प्रत्येक डेवलपर के स्थानीय कंप्यूटर पर संपूर्ण रिपॉजिटरी और इतिहास की पूरी प्रतिलिपि (Clone) उपलब्ध होती है।
- कथन II सत्य है: गिटहब (GitHub) या गिटलैब (GitLab) में जब कोई डेवलपर नया फीचर तैयार कर लेता है, तो वह 'पुल रिक्वेस्ट' (PR) जनरेट करता है। सहकर्मी (Peers) कोड का निरीक्षण, टेस्टिंग और टिप्पणी करते हैं, जिसके बाद कोड को मूल मास्टर/मेन ब्रांच में सुरक्षित रूप से 'मर्ज' (Merge) कर दिया जाता है।
- कथन III सत्य है: आधुनिक उत्पादकता उपकरण जैसे Microsoft Loop, Notion, Slack और Microsoft Teams टीमों को दस्तावेजों, कार्यों, कोड स्निपेट्स और डेटाबेस को वास्तविक समय में एक ही गतिशील इंटरफेस पर सहयोगात्मक रूप से संपादित करने की सुविधा देते हैं।
Git संबंधी अन्य परीक्षा तथ्य:
- कमिट (Commit): कोडबेस के परिवर्तनों का एक स्थायी स्नैपशॉट, जिसे SHA-1 (या SHA-256) हैश द्वारा विशिष्ट रूप से पहचाना जाता है।
- मर्ज कॉन्फ्लिक्ट (Merge Conflict): वह स्थिति जब दो डेवलपर्स एक ही फ़ाइल की एक ही लाइन में अलग-अलग बदलाव करते हैं और Git स्वचालित रूप से यह तय नहीं कर पाता कि किसे प्राथमिकता दी जाए।
दिए गए विकल्पों में से कोई भी विकल्प सही नहीं है, अतः सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है।
वैश्विक बैंकिंग एवं भुगतान प्रणाली में अपनाया जा रहा यह अत्याधुनिक मैसेजिंग मानक 'ISO 20022' है।
ISO 20022 मानक के मुख्य बिंदु:
- उद्देश्य एवं तकनीक: यह वित्तीय सेवाओं के बीच इलेक्ट्रॉनिक डेटा विनिमय के लिए एक सार्वभौमिक खुला मानक है। यह पुराने गैर-संरचित टेक्स्ट संदेशों (SWIFT MT) को संरचित XML (Extensible Markup Language) प्रारूप में बदलता है, जिससे डेटा हानि नहीं होती।
- आरबीआई और भारतीय प्रणालियाँ: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भारत की वास्तविक समय सकल निपटान प्रणाली (RTGS) और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक निधि अंतरण (NEFT) के मैसेजिंग प्रारूपों को ISO 20022 मानक के अनुरूप उन्नत किया है ताकि सीमा-पार भुगतान निर्बाध और पारदर्शी हो सकें।
- लाभ: यह धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग (AML) का पता लगाने, एंड-टू-एंड भुगतान ट्रैकिंग और अंतर्राष्ट्रीय अंतर-संचालनीयता (Interoperability) में अत्यधिक प्रभावी है।
अन्य विकल्पों का वास्तविक संदर्भ:
- IEEE 802.11: वाई-फाई (Wi-Fi) वायरलेस लोकल एरिया नेटवर्क का मानक।
- ISO 9001: गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System) का मानक।
- RFC 2822: इंटरनेट ईमेल संदेश प्रारूप (Standard for Internet Message Format) का विनिर्देश।
विकल्प 1 सही है। FIDO2 (Fast Identity Online 2) और WebAuthn (Web Authentication) पासवर्ड-रहित (Passwordless) प्रमाणीकरण के सबसे उन्नत वैश्विक सुरक्षा मानक हैं।
FIDO2 / WebAuthn की कार्यप्रणाली:
- पब्लिक-की क्रिप्टोग्राफी: उपयोगकर्ता का पासवर्ड सर्वर पर भेजने के बजाय, प्रमाणीकरण उपयोगकर्ता के स्थानीय उपकरण (जैसे स्मार्टफोन का बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट, फेस आईडी या हार्डवेयर सिक्योरिटी की जैसे YubiKey) पर असममित कुंजी-युग्म (Asymmetric Key Pair) द्वारा होता है।
- फ़िशिंग से पूर्ण सुरक्षा (Phishing Resistance): निजी कुंजी (Private Key) कभी भी उपयोगकर्ता के डिवाइस के सुरक्षित एन्क्लेव (TPM चिप) से बाहर नहीं जाती। यह प्रमाणीकरण केवल उस विशिष्ट वेबसाइट के डोमेन नाम (Origin) से बंधा होता है, इसलिए जाली/फ़िशिंग वेबसाइटों पर क्रेडेंशियल चोरी नहीं किए जा सकते।
- पासकीज़ (Passkeys): Google, Apple और Microsoft ने FIDO2 मानक के आधार पर 'Passkeys' तकनीक लागू की है, जो पारंपरिक अल्फ़ान्यूमेरिक पासवर्ड और कमजोर एसएमएस आधारित ओटीपी (SMS OTP) का सुरक्षित विकल्प बन गई है।
अन्य विकल्पों का विवरण:
- SMTP: ईमेल भेजने का मानक प्रोटोकॉल (पोर्ट 25/587)।
- FAT32: फ़ाइलों को डिस्क पर व्यवस्थित करने वाला 32-बिट फ़ाइल आवंटन सिस्टम।
- ARP: नेटवर्क लेयर आईपी पते को डेटा लिंक लेयर मैक पते (MAC Address) में परिवर्तित करने वाला प्रोटोकॉल।
| List-I (Cyber Attacks) | List-II (Mechanism) |
|---|---|
| a. Salami Attack | i. Secretly intercepting or disrupting real-time communication between two parties |
| b. Ransomware | ii. Embezzling a large sum cumulatively through tiny and unnoticed financial deductions |
| c. Man-in-the-Middle (MitM) | iii. Deceiving a system by impersonating another legitimate source or user |
| d. Spoofing | iv. Encrypting victim's data or system and demanding ransom to unlock it |
Assertion (A): The 'Zero Trust' security model assumes that no request originating inside or outside the network is inherently trustworthy.
Reason (R): Zero Trust architecture operates on the principle of "Never Trust, Always Verify" and demands continuous authentication of every user and device regardless of location.
In the context of the above statements, select the correct option from the following:||Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|None of the above||A||||Moderate Q5||In social networking platforms, what is the overall digital map representing a user's personal connections, interactions, and relationships technically called?||Social Graph|Social Bot|Network Throughput|Community Moderation|None of the above||A||||Moderate Q6||What is the emerging skill of structuring and refining text inputs and instructions to obtain the most accurate, relevant, and high-quality outputs from Generative AI and Large Language Models (LLMs) called?||Data Mining|Prompt Engineering|Tokenization|Data Wrangling|None of the above||B||||Easy Q7||Consider the following statements with reference to India's Information Technology Act, 2000 (IT Act, 2000):
- This Act accords full legal recognition to financial transactions carried out through Electronic Data Interchange (EDI) and electronic communication.
- Under this Act, Public Key Infrastructure (PKI) is used to grant legal validity to 'Digital Signatures'.
- Section 43A deals with the liability of commercial entities to pay compensation to victims for failure to protect Sensitive Personal Data.
| List-I (Communication Technology) | List-II (Feature and Application) |
|---|---|
| a. LoRaWAN | i. Ultra-high-speed data transmission using Visible Light |
| b. NFC | ii. Low-energy consumption Mesh Network for smart home devices |
| c. ZigBee | iii. Contactless financial payment and pairing within less than 4 cm distance |
| d. Li-Fi | iv. Long-range connectivity across wide geographic areas with extremely low power consumption |
Assertion (A): In web browsing, 'Third-Party Cookies' are used to track a user's digital behavior and preferences across multiple different websites.
Reason (R): Social media and e-commerce companies often employ 'Dark Patterns' based user interfaces (UI) to nudge users into consenting to extensive data tracking without full comprehension.
In the context of the above statements, select the correct option from the following:||Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is a relevant explanation of Assertion (A) in the context of digital privacy.|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|None of the above||A||||Hard Q13||Consider the following statements regarding modern software development, productivity, and collaboration tools:
- Git is a Distributed Version Control System (DVCS) that enables developers to track code changes offline and create branches.
- A 'Pull Request' (or Merge Request) is used by team members to review code from a feature branch and integrate it into the main codebase.
- Modern workspaces such as Microsoft Loop and Notion provide dynamic canvases and real-time co-editing capabilities.
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 16
Practice Completed
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Performance Report
निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
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