नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 18 तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- कंप्यूटर इतिहास के कुछ तथ्य (Computer History Facts)
- महत्वपूर्ण कंप्यूटर संबंधी शब्दावली (Important Computer-Related Terminology)
- कंप्यूटर फुल फॉर्म (Final Review Abbreviations)
- शॉर्टकट कुंजियाँ (Mega Mix Shortcuts)
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए इस सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
| सूची-I (अग्रदूत / वैज्ञानिक) | सूची-II (ऐतिहासिक नवाचार / योगदान) |
|---|---|
| a. जॉन बैकस (John Backus) | i. ज़ेरॉक्स PARC में ईथरनेट (Ethernet) नेटवर्किंग तकनीक का विकास (1973) |
| b. बॉब मेटकाफ (Bob Metcalfe) | ii. प्रथम प्रेजेंटेशन सॉफ़्टवेयर 'MS PowerPoint' का आविष्कार (1987) |
| c. रे टॉमलिंसन (Ray Tomlinson) | iii. पहली सफल उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा FORTRAN का विकास (1954/57) |
| d. रॉबर्ट गैस्किन्स एवं डेनिस ऑस्टिन | iv. इलेक्ट्रॉनिक मेल (E-mail) पते में '@' प्रतीक का सर्वप्रथम मानकीकरण (1971) |
विकल्प 2 (a-iii, b-i, c-iv, d-ii) सही सुमेलन है। कंप्यूटर और इंटरनेट के इतिहास में इन अग्रदूतों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- जॉन बैकस (John Backus): 1954 से 1957 के मध्य आईबीएम (IBM) में जॉन बैकस और उनकी टीम ने FORTRAN (Formula Translation) भाषा विकसित की। यह कंप्यूटर इतिहास की पहली व्यापक रूप से प्रयुक्त सामान्य प्रयोजन वाली उच्च-स्तरीय (High-Level) प्रोग्रामिंग भाषा थी, जिसने वैज्ञानिक और संख्यात्मक संगणना में क्रांति ला दी।
- बॉब मेटकाफ (Bob Metcalfe): 1973 में जेरॉक्स PARC (Palo Alto Research Center) में बॉब मेटकाफ और डेविड बॉग्स ने ईथरनेट (Ethernet) प्रोटोकॉल का आविष्कार किया, जो आज विश्व भर में LAN (Local Area Network) का वैश्विक भौतिक मानक है।
- रे टॉमलिंसन (Ray Tomlinson): 1971 में ARPANET पर कार्य करते हुए इन्होंने पहली बार नेटवर्क ई-मेल प्रणाली विकसित की और उपयोगकर्ता के नाम को उसके कंप्यूटर (होस्ट) से अलग करने के लिए '@' (At the rate) प्रतीक का चयन किया।
- रॉबर्ट गैस्किन्स और डेनिस ऑस्टिन: 1987 में फोरथॉट इंक (Forethought Inc.) में इन्होंने मूल रूप से 'Presenter' (बाद में PowerPoint) सॉफ्टवेयर विकसित किया, जिसे बाद में माइक्रोसॉफ्ट द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया।
| वैज्ञानिक / अग्रदूत | नवाचार / तकनीक | वर्ष |
|---|---|---|
| विंट सर्फ और बॉब काह्न | TCP/IP आर्किटेक्चर एवं इंटरनेट प्रोटोकॉल | 1974 / 1983 |
| टिम बर्नर्स-ली | वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) एवं HTML भाषा | 1989 / 1991 |
| जैक किल्बी और रॉबर्ट नोयस | इंटीग्रेटेड सर्किट (IC चिप) | 1958–1959 |
| डेनिस रिची | C प्रोग्रामिंग भाषा एवं UNIX का विकास | 1972 |
विकल्प 1 सही है। माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में Ctrl + 5 दबाने से चयनित सेल अथवा टेक्स्ट के ऊपर 'स्ट्राइकथ्रू' (Strikethrough) फॉर्मेटिंग लागू हो जाती है, और इसे पुनः दबाने पर यह प्रभाव हट जाता है।
| शॉर्टकट कुंजी | MS Excel में कार्य |
|---|---|
| Ctrl + 1 | 'Format Cells' डायलॉग बॉक्स खोलना |
| Ctrl + 2 (या Ctrl + B) | बोल्ड (Bold) फॉर्मेटिंग लागू/हटाना |
| Ctrl + 3 (या Ctrl + I) | इटैलिक (Italic) फॉर्मेटिंग लागू/हटाना |
| Ctrl + 4 (या Ctrl + U) | रेखांकन (Underline) फॉर्मेटिंग लागू/हटाना |
| Ctrl + 5 | स्ट्राइकथ्रू (Strikethrough) फॉर्मेटिंग लागू/हटाना |
| Ctrl + 6 | ऑब्जेक्ट्स/चित्रों को दिखाना या छिपाना |
| Ctrl + 8 | आउटलाइन सिंबल (Outline Symbols) टॉगल करना |
| Ctrl + 9 | चयनित पंक्तियों (Rows) को छिपाना (Hide) |
| Ctrl + 0 | चयनित स्तंभों (Columns) को छिपाना (Hide) |
अन्य विकल्पों का विवरण:
- Ctrl + 4: एक्सेल में टेक्स्ट को अंडरलाइन करने के लिए प्रयोग होता है।
- Ctrl + 3: एक्सेल में टेक्स्ट को इटैलिक करने के लिए प्रयोग होता है।
- Ctrl + K: चयनित सेल में हाइपरलिंक (Hyperlink) प्रविष्ट करने का सार्वभौमिक शॉर्टकट है।
दिए गए विकल्पों में से कोई भी विकल्प सही नहीं है, अतः सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है।
चार्ल्स बैबेज के एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine, 1837) में गणना करने वाली केंद्रीय इकाई को 'द मिल' (The Mill) कहा जाता था, जो आधुनिक कंप्यूटरों के ALU / CPU के समतुल्य थी।
एनालिटिकल इंजन के चार मुख्य संरचनात्मक घटक:
- द मिल (The Mill): यह इंजन की वास्तविक गणना इकाई थी, जहाँ जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी सभी अंकगणितीय और तार्किक प्रक्रियाएँ यांत्रिक पहियों और गियर्स द्वारा पूरी की जाती थीं।
- द स्टोर (The Store): यह इंजन की मेमोरी (भंडारण) इकाई थी, जहाँ 50-अंकों वाली 1,000 संख्याओं को यांत्रिक रूप से संग्रहीत किया जा सकता था (आधुनिक RAM/मेमोरी के समतुल्य)।
- द रीडर (The Reader): निर्देशों और डेटा को इनपुट करने के लिए जोसेफ मैरी जैक्वार्ड के 'पंच कार्ड' (Punch Cards) का उपयोग करने वाला इनपुट तंत्र।
- द प्रिंटर (The Printer): परिणामों को कागज़ पर मुद्रित करने अथवा धातु प्लेटों पर छापने वाला आउटपुट तंत्र।
ऐतिहासिक परीक्षा तथ्य: लेडी एडा लवलेस (Ada Lovelace) ने चार्ल्स बैबेज के एनालिटिकल इंजन के लिए बर्नौली संख्याओं की गणना का पहला एल्गोरिदम लिखा, जिसके कारण उन्हें "विश्व की पहली कंप्यूटर प्रोग्रामर" माना जाता है।
||Easy Q4||ऑपरेटिंग सिस्टम, मेमोरी प्रबंधन और सिस्टम शब्दावली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:- 'स्पूलिंग' (SPOOLing) एक बफरिंग तकनीक है जो प्रिंटर जैसी धीमी I/O युक्तियों के लिए डेटा को सीधे मुख्य मेमोरी के बजाय हार्ड डिस्क पर अस्थायी रूप से संग्रहीत करती है ताकि CPU की गति अवरुद्ध न हो।
- 'थ्रैशिंग' (Thrashing) वह गंभीर स्थिति है जब सिस्टम में अत्यधिक पेज फॉल्ट (Page Faults) होने के कारण CPU वास्तविक कार्यों को निष्पादित करने के बजाय अपना अधिकांश समय मुख्य मेमोरी और डिस्क के बीच पेजों की अदला-बदली (Swapping) में व्यर्थ करता है।
- 'GIGO' (Garbage In, Garbage Out) सिद्धांत यह स्थापित करता है कि कंप्यूटर के आउटपुट की शुद्धता और वैधता पूरी तरह से उपयोगकर्ता द्वारा प्रदान किए गए इनपुट डेटा की शुद्धता पर निर्भर करती है।
उपर्युक्त तीनों कथन (I, II और III) सत्य हैं, अतः विकल्प 4 (I, II और III) सही उत्तर है।
- कथन I सत्य है: SPOOL (Simultaneous Peripheral Operations On-Line) एक तकनीक है जो विभिन्न प्रक्रियाओं द्वारा भेजे गए आउटपुट (जैसे प्रिंट जॉब्स) को डिस्क के स्पूल डायरेक्टरी में कतारबद्ध (Queue) कर देती है। इससे CPU प्रिंटर के धीमे संचालन की प्रतीक्षा किए बिना अपने अन्य कार्यों को तेजी से जारी रख सकता है।
- कथन II सत्य है: जब किसी सिस्टम में वर्चुअल मेमोरी के लिए उपलब्ध फिजिकल RAM बहुत कम हो जाती है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम लगातार पेजों को डिस्क (Swap space) से RAM में लोड और अनलोड करता रहता है। इस अत्यधिक I/O गतिविधि के कारण CPU उपयोगिता (Utilization) शून्य के करीब गिर जाती है, जिसे 'थ्रैशिंग' (Thrashing) कहते हैं।
- कथन III सत्य है: GIGO (गार्बेज इन, गार्बेज आउट) कंप्यूटर विज्ञान का एक मौलिक स्वयंसिद्ध नियम है। कंप्यूटर स्वयं गलत डेटा को सही नहीं कर सकता; यदि इनपुट दूषित या त्रुटिपूर्ण है, तो परिणामी आउटपुट भी अनिवार्य रूप से गलत ही होगा।
| शब्दावली | मूल अवधारणा | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|
| SPOOLing | I/O डिवाइसेस और CPU के बीच गति का संतुलन बनाना | मल्टीप्रोग्रामिंग क्षमता में वृद्धि |
| Paging | मेमोरी को निश्चित आकार के 'पेज' व 'फ्रेम' में विभाजित करना | गैर-सन्निहित (Non-contiguous) आवंटन |
| Thrashing | अनियंत्रित पेज रिप्लेसमेंट और निरंतर पेज फॉल्ट्स | सिस्टम का पूरी तरह हैंग/धीमा होना |
| Datapath | ALU, रजिस्टर्स और बसेस का हार्डवेयर नेटवर्क | निर्देशों के निष्पादन का भौतिक मार्ग |
- एनिएक (ENIAC) का निर्माण एवं संचालन
- पहली उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा FORTRAN का विकास
- व्यावसायिक रूप से उपलब्ध पहला एकल-चिप माइक्रोप्रोसेसर 'इंटेल 4004' (Intel 4004)
- टिम बर्नर्स-ली द्वारा वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) की अवधारणा एवं विकास
विकल्प 1 (I, II, III, IV) सही कालानुक्रमिक क्रम है। इन ऐतिहासिक नवाचारों का विस्तृत वर्षवार विवरण निम्नलिखित है:
- I. ENIAC (1945): जॉन मौचली और जे. प्रेस्पर एकर्ट द्वारा पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय में निर्मित 'इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इंटीग्रेटर एंड कंप्यूटर'। यह दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक, सामान्य-प्रयोजन, डिजिटल वैक्यूम-ट्यूब आधारित कंप्यूटर था।
- II. FORTRAN (1954–1957): आईबीएम के जॉन बैकस द्वारा विकसित पहली वाणिज्यिक उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा, जो 1957 में आधिकारिक रूप से IBM 704 मेनफ्रेम के लिए जारी की गई।
- III. Intel 4004 (1971): इंटेल के टेड हॉफ, फेडेरिको फागिन और मासातोशी शिमा द्वारा डिज़ाइन किया गया दुनिया का पहला व्यावसायिक 4-बिट सिंगल-चिप माइक्रोप्रोसेसर, जिसने माइक्रोकंप्यूटर क्रांति का सूत्रपात किया।
- IV. World Wide Web - WWW (1989–1991): सर्न (CERN) प्रयोगशाला में टिम बर्नर्स-ली ने 1989 में प्रस्ताव प्रस्तुत किया और 1991 में इसे आम जनता के लिए इंटरनेट पर उपलब्ध कराया।
कालानुक्रमिक सारांश: ENIAC (1945) → FORTRAN (1957) → Intel 4004 (1971) → WWW (1991)
||Hard Q6||भारतीय भाषाओं के लिए मानकीकृत कंप्यूटर कोड और सूचना विनिमय हेतु भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा स्वीकृत 8-बिट वर्ण एन्कोडिंग मानक ISCII का पूर्ण रूप क्या है?||इंडियन स्क्रिप्ट कोड फॉर इंफॉर्मेशन इंटरचेंज (Indian Script Code for Information Interchange)|इंडियन सिस्टम कोड फॉर इंटरनेट इंटरकनेक्ट (Indian System Code for Internet Interconnect)|इंटरनेशनल स्टैंडर्ड कोड फॉर इंफॉर्मेशन इंटरफेस (International Standard Code for Information Interface)|इंडियन स्क्रिप्ट कम्युनिकेशन फॉर इंटरनेट इंटीग्रेशन (Indian Script Communication for Internet Integration)|इनमें से कोई नहीं||A||विकल्प 1 सही है। ISCII का पूर्ण रूप 'Indian Script Code for Information Interchange' (सूचना आदान-प्रदान के लिए भारतीय लिपि कोड) है।
ISCII से संबंधित महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य:
- 8-बिट वर्ण एन्कोडिंग: ASCII (7-बिट) के विपरीत, ISCII एक 8-बिट वर्ण कोड है जिसमें कुल 28 = 256 वर्णों को कोडित किया जा सकता है।
- ब्राह्मी लिपि मूल: ISCII को 1980 के दशक के उत्तरार्ध में C-DAC और DoE द्वारा भारतीय लिपियों (देवनागरी, बंगाली, गुरुमुखी, गुजराती, उड़िया, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, तमिल आदि) की साझा ध्वन्यात्मक संरचना के आधार पर मानकीकृत किया गया था।
- संरचना: इसके निचले 128 कोड (0–127) मानक 7-बिट ASCII के समान होते हैं, जबकि ऊपरी 128 कोड (128–255) भारतीय भाषा के अक्षरों, स्वरों, व्यंजनों और मात्राओं के लिए आरक्षित होते हैं।
- यूनिकोड (Unicode): आधुनिक कंप्यूटिंग में ISCII का स्थान अब वैश्विक 16-बिट/32-बिट यूनिकोड (UTF-8 / UTF-16) मानक ने ले लिया है।
अभिकथन (A): रीयल-टाइम ऑनलाइन गेमिंग, वीओआईपी (VoIP) कॉलिंग और लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग में 'जिटर' (Jitter) का उच्च मान ऑडियो-वीडियो के टूटने (Stuttering/Buffering) का मुख्य कारण बनता है।
कारण (R): 'जिटर' नेटवर्क में प्रेषित डेटा पैकेटों के आगमन अंतराल अथवा विलंब (Packet Delay Variation) में होने वाले अस्थिर समय-अंतर को मापता है।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:||अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|अभिकथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।|इनमें से कोई नहीं||A||
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों तकनीकी रूप से सत्य हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) का सही और तार्किक स्पष्टीकरण प्रस्तुत करता है।
- लेटेंसी बनाम जिटर (Latency vs Jitter):
- लेटेंसी (Latency / Network Delay): किसी डेटा पैकेट को स्रोत (Source) से गंतव्य (Destination) तक की भौतिक दूरी तय करने में लगने वाला कुल समय है (उदा. 50 मिलीसेकंड)।
- जिटर (Jitter / Packet Delay Variation): पैकेटों के पहुँचने के समय में होने वाला उतार-चढ़ाव या असमानता है। यदि पहला पैकेट 40ms में, दूसरा 120ms में और तीसरा 50ms में पहुँचता है, तो इस असमान विलंब को 'जिटर' कहा जाता है।
- प्रभाव: लाइव वॉइस और वीडियो संचार में पैकेटों का एक निरंतर और स्थिर क्रम में पहुँचना अनिवार्य होता है। जब जिटर अधिक होता है, तो प्राप्तकर्ता का बफ़र खाली हो जाता है और आवाज़ कटने लगती है या वीडियो फ़्रीज़ हो जाता है।
| नेटवर्क पैरामीटर | परिभाषा | आदर्श स्थिति |
|---|---|---|
| बैंडविड्थ (Bandwidth) | प्रति सेकंड डेटा स्थानांतरित करने की अधिकतम सैद्धांतिक क्षमता | अधिकतम (High) |
| थ्रूपुट (Throughput) | नेटवर्क पर प्रति सेकंड स्थानांतरित होने वाला वास्तविक उपयोगी डेटा | अधिकतम (High) |
| लेटेंसी (Latency) | सिग्नल के जाने और वापस आने में लगा कुल समय (Round Trip Time) | न्यूनतम (< 50ms) |
| जिटर (Jitter) | पैकेट आगमन विलंब में असमान विचलन / अस्थिरता | न्यूनतम (< 10-20ms) |
| सूची-I (शॉर्टकट कुंजी) | सूची-II (संबंधित कार्य / विशेषता) |
|---|---|
| a. Alt + Shift + I | i. वर्तमान दस्तावेज़ विंडो को दो भागों में विभाजित (Split) करना या स्प्लिट व्यू हटाना |
| b. Alt + Ctrl + S | ii. चयनित टेक्स्ट का फ़ॉन्ट आकार ठीक 1 पॉइंट (Point) बढ़ाना |
| c. Ctrl + ] | iii. चयनित टेक्स्ट के केस को टॉगल करना (अपरकेस, लोअरकेस, टाइटल केस) |
| d. Shift + F3 | iv. लीगल एवं शोध दस्तावेजों में 'मार्क साइटेशन' (Mark Citation) डायलॉग बॉक्स खोलना |
विकल्प 1 (a-iv, b-i, c-ii, d-iii) सही सुमेलन है। माइक्रोसॉफ्ट वर्ड के इन महत्वपूर्ण एवं उन्नत कीबोर्ड शॉर्टकट्स का विस्तृत विवरण निम्नलिखित है:
- Alt + Shift + I: यह कानूनी, विधिक और शोध दस्तावेज़ों में 'टेबल ऑफ अथॉरिटीज' (Table of Authorities) के लिए उद्धरणों को चिह्नित करने हेतु 'मार्क साइटेशन' (Mark Citation) डायलॉग बॉक्स खोलता है।
- Alt + Ctrl + S: यह एक ही दस्तावेज़ के दो अलग-अलग अनुभागों को एक साथ देखने और संपादित करने के लिए सक्रिय विंडो को क्षैतिज रूप से दो भागों में स्प्लिट (Split Window) करता है या पहले से लगे स्प्लिट को हटाता है।
- Ctrl + ] : यह चयनित टेक्स्ट के फ़ॉन्ट आकार को ठीक 1 पॉइंट (1 pt) बढ़ाता है (जबकि Ctrl + [ फ़ॉन्ट को 1 पॉइंट घटाता है)।
- Shift + F3: यह चयनित टेक्स्ट के केस को चक्रानुक्रम (UPPERCASE → lowercase → Title Case) में बदलने (Change Case) की शॉर्टकट कुंजी है।
| MS Word शॉर्टकट कुंजी | निष्पादित कार्य |
|---|---|
| Ctrl + Shift + F / Ctrl + D | फ़ॉन्ट डायलॉग बॉक्स (Font Formatting Dialog) खोलना |
| Ctrl + H | फाइंड एंड रिप्लेस (Find and Replace) डायलॉग बॉक्स खोलना |
| Alt + Shift + D | दस्तावेज़ में वर्तमान दिनांक (Current Date) प्रविष्ट करना |
| Alt + Shift + T | दस्तावेज़ में वर्तमान समय (Current Time) प्रविष्ट करना |
विकल्प 3 सही है। वायरलेस तकनीक 'ब्लूटूथ' (Bluetooth) का नाम 10वीं शताब्दी के डेनमार्क और नॉर्वे के वाइकिंग राजा हैराल्ड ब्लैटंड (Harald "Bluetooth" Gormsson) के नाम पर रखा गया है।
ब्लूटूथ के नामकरण और लोगो (Logo) का ऐतिहासिक विवरण:
- ऐतिहासिक संदर्भ: राजा हैराल्ड ब्लैटंड ने विभाजित स्कैंडिनेवियाई जनजातियों (डेनमार्क और नॉर्वे) को एक संयुक्त साम्राज्य में एकजुट किया था। 1997 में जब इंटेल के जिम कार्डेक (Jim Kardach) और एरिक्सन (Ericsson) के इंजीनियर्स अल्प-दूरी की वायरलेस तकनीक विकसित कर रहे थे, तो उन्होंने कंप्यूटर और सेलुलर उपकरणों को निर्बाध रूप से जोड़ने के लिए इस तकनीक का कोडनेम 'Bluetooth' प्रस्तावित किया।
- ब्लूटूथ लोगो का रहस्य: ब्लूटूथ का आधिकारिक प्रतीक चिह्न (Logo) प्राचीन स्कैंडिनेवियाई रूणिक लिपि (Runic Alphabet) के दो अक्षरों— हगाल (ƒ - H) और बर्कन (β - B) का संयुक्त मोनोग्राम है, जो राजा 'Harald Blåtand' के आद्याक्षरों (H.B.) का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- मानक: ब्लूटूथ तकनीक IEEE 802.15.1 मानक और 2.4 GHz ISM रेडियो बैंड पर कार्य करती है तथा इसका प्रबंधन Bluetooth SIG (Special Interest Group) द्वारा किया जाता है।
दिए गए विकल्पों में से कोई भी विकल्प सही नहीं है, अतः सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है।
NVMe का सही एवं मानक पूर्ण रूप 'Non-Volatile Memory Express' (नॉन-वोलेटाइल मेमोरी एक्सप्रेस) है।
NVMe तकनीक के मुख्य लाभ एवं परीक्षा तथ्य:
- PCIe बस का सीधा उपयोग: पारंपरिक SATA इंटरफ़ेस (जो केवल 600 MB/s तक सीमित था) के विपरीत, NVMe एसएसडी सीधे मदरबोर्ड के PCIe (PCI Express) लेन से जुड़ती है, जिससे 3,500 MB/s से 7,000+ MB/s (PCIe Gen4/Gen5) तक की तीव्र डेटा स्थानांतरण गति प्राप्त होती है।
- समानांतर कतारें (Parallel Queues): SATA जहाँ एक समय में केवल 1 कतार में 32 कमांड (Queue depth 32) संभाल सकता था, वहीं NVMe एक साथ 64,000 कतारों में प्रत्येक कतार के तहत 64,000 कमांड्स को समानांतर रूप से निष्पादित कर सकता है।
- फॉर्म फैक्टर्स: NVMe एसएसडी आमतौर पर M.2 और U.2 फॉर्म फैक्टर में उपलब्ध होती हैं।
| स्टोरेज मानक | बस इंटरफ़ेस | अधिकतम सैद्धांतिक गति | कतार क्षमता (Queue Depth) |
|---|---|---|---|
| SATA III SSD | SATA Bus | ~600 MB/s (6 Gbps) | 1 कतार (32 कमांड) |
| NVMe SSD (Gen 3) | PCIe 3.0 x4 | ~3,500 MB/s | 64,000 कतारें (64K कमांड) |
| NVMe SSD (Gen 4) | PCIe 4.0 x4 | ~7,500 MB/s | 64,000 कतारें (64K कमांड) |
विकल्प 2 सही उत्तर है। किसी भी कंप्यूटर प्रोसेसर के निर्देश निष्पादन चक्र (Instruction Cycle) का सबसे पहला चरण 'फेच' (Fetch - मेमोरी से निर्देश लाना) होता है।
CPU मशीन चक्र के चार क्रमिक चरण:
- 1. फेच (Fetch): प्रोग्राम काउंटर (Program Counter - PC) में संग्रहीत अगले निर्देश के मेमोरी पते से निर्देश को मुख्य मेमोरी (RAM / Cache) से पढ़कर सीपीयू के निर्देश रजिस्टर (Instruction Register - IR) में लाया जाता है। इसके बाद PC स्वतः अगले निर्देश के पते पर अपडेट हो जाता है।
- 2. डिकोड (Decode): कंट्रोल यूनिट (CU) निर्देश रजिस्टर में उपस्थित बाइनरी मशीन कोड के ऑपकोड (Opcode) और ऑपरेंड्स (Operands) का विश्लेषण कर यह निर्धारित करती है कि कौन-सा कार्य किया जाना है।
- 3. एक्ज़ीक्यूट (Execute): एरिथमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU) वास्तविक अंकगणितीय, तार्किक या डेटा स्थानांतरण संक्रिया को निष्पादित करता है।
- 4. राइटबैक / स्टोर (Store / Writeback): निष्पादन के बाद प्राप्त अंतिम परिणाम को आंतरिक रजिस्टरों (जैसे Accumulator) या प्राथमिक मेमोरी (RAM) में सहेज दिया जाता है।
क्रम: Fetch → Decode → Execute → Writeback
||Moderate Q12||प्रारंभिक ऑपरेटिंग सिस्टमों और प्रोग्रामिंग भाषाओं के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:- 1960 के दशक में MIT, बेल लैब्स और जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ऐतिहासिक 'मल्टिक्स' (MULTICS) टाइम-शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्य रूप से PL/I प्रोग्रामिंग भाषा में लिखा गया था।
- 1969 में बेल लैब्स में केन थॉम्पसन और डेनिस रिची द्वारा असेंबली में शुरू किए गए 'यूनिक्स' (UNIX) ऑपरेटिंग सिस्टम को 1972–73 में 'C' प्रोग्रामिंग भाषा में पुनः लिखा गया, जिससे यह पोर्टेबल ऑपरेटिंग सिस्टम बन गया।
- 1952 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव (आइजनहावर बनाम स्टीवेन्सन) के परिणामों की सटीक भविष्यवाणी करने के लिए पहला वाणिज्यिक सामान्य-प्रयोजन डिजिटल कंप्यूटर UNIVAC I उपयोग किया गया था।
उपर्युक्त तीनों कथन (I, II और III) ऐतिहासिक रूप से सत्य हैं, अतः विकल्प 4 (I, II और III) सही उत्तर है।
- कथन I सत्य है: MULTICS (Multiplexed Information and Computing Service) ऑपरेटिंग सिस्टम का विकास 1964 में शुरू हुआ था। अधिकांश सिस्टम सॉफ्टवेयर जहाँ असेंबली भाषा में लिखे जाते थे, वहीं मल्टिक्स को उच्च-स्तरीय भाषा PL/I (Programming Language One) में लिखा गया था। इसने आधुनिक यूनिक्स और लिनक्स की सुरक्षा संरचना की नींव रखी।
- कथन II सत्य है: केन थॉम्पसन और डेनिस रिची ने 1969 में पीडीपी-7 कंप्यूटर पर यूनिक्स विकसित किया। 1972 में डेनिस रिची ने 'C' भाषा का आविष्कार किया और 1973 में पूरे यूनिक्स कर्नेल को 'C' में पुनः लिखा। इससे यूनिक्स किसी भी हार्डवेयर पर आसानी से पोर्ट होने वाला पहला प्रमुख ओएस बन गया।
- कथन III सत्य है: जे. प्रेस्पर एकर्ट और जॉन मौचली द्वारा निर्मित UNIVAC I (Universal Automatic Computer I) अमेरिका का पहला व्यावसायिक कंप्यूटर था। सीबीएस (CBS) टेलीविजन नेटवर्क ने 1952 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की रात इसका उपयोग किया, जहाँ इसने शुरुआती रुझानों के आधार पर ड्वाइट डी. आइजनहावर की शानदार जीत की सटीक भविष्यवाणी कर आम जनता को स्तब्ध कर दिया था।
विकल्प 4 सही सुमेलित नहीं है (अतः यही सही उत्तर है)। PCI का सही और मानक पूर्ण रूप 'Peripheral Component Interconnect' (पेरिफेरल कंपोनेंट इंटरकनेक्ट) होता है, न कि 'Peripheral Communication Interface'।
संक्षिप्त रूपों का विस्तृत विवरण:
- PCI (Peripheral Component Interconnect): इंटेल द्वारा 1992 में पेश किया गया एक स्थानीय कंप्यूटर बस मानक, जिसका उपयोग मदरबोर्ड पर साउंड कार्ड, नेटवर्क कार्ड (NIC), और ग्राफिक्स कार्ड जैसे विस्तार कार्डों (Expansion Cards) को जोड़ने के लिए किया जाता था।
- POST (Power-On Self-Test): कंप्यूटर चालू होते ही ROM BIOS/UEFI द्वारा चलाया जाने वाला प्रारंभिक नैदानिक परीक्षण कार्यक्रम, जो यह सुनिश्चित करता है कि RAM, कीबोर्ड, डिस्क ड्राइव और GPU सही ढंग से काम कर रहे हैं।
- NCSA (National Center for Supercomputing Applications): अमेरिका का प्रमुख सुपरकंप्यूटिंग अनुसंधान केंद्र, जिसने 1993 में मार्क एंड्रीसन के नेतृत्व में पहले लोकप्रिय ग्राफिकल वेब ब्राउज़र 'NCSA Mosaic' का विकास किया था।
- RTSP (Real-Time Streaming Protocol): मल्टीमीडिया सर्वरों से ऑडियो और वीडियो डेटा की रीयल-टाइम स्ट्रीमिंग को नियंत्रित (Play, Pause, Record) करने वाला एप्लिकेशन लेयर नेटवर्क प्रोटोकॉल।
दिए गए विकल्पों में से कोई भी विकल्प सही नहीं है, अतः सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है।
भारत के पहले स्वदेशी सुपरकंप्यूटर का सही नाम 'परम 8000' (PARAM 8000) था, जिसे 1 जुलाई 1991 को लॉन्च किया गया था।
भारतीय सुपरकंप्यूटिंग इतिहास के प्रमुख तथ्य:
- पृष्ठभूमि: 1980 के दशक में अमेरिका द्वारा भारत को मौसम पूर्वानुमान हेतु 'Cray X-MP' सुपरकंप्यूटर देने से मना किए जाने के बाद, भारत सरकार ने 1988 में C-DAC की स्थापना की और स्वदेशी सुपरकंप्यूटर बनाने का लक्ष्य रखा।
- परम 8000 (PARAM 8000): डॉ. विजय पांडुरंग भटकर (जिन्हें "भारतीय सुपरकंप्यूटिंग का जनक" कहा जाता है) के नेतृत्व में 64-नोड समानांतर प्रसंस्करण (Parallel Processing) आर्किटेक्चर पर आधारित PARAM 8000 का निर्माण किया गया, जिसकी गति 1 GigaFLOPS थी।
- राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM): आधुनिक भारत में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) को बढ़ावा देने के लिए C-DAC और IISc द्वारा संचालित मिशन, जिसके तहत 'परम शिवाय' (PARAM Shivay), 'परम शक्ति', और 'एरावत' (AIRAWAT - AI सुपरकंप्यूटर) स्थापित किए गए हैं।
अन्य विकल्पों का विवरण:
- PARAM 10000: 1998 में C-DAC द्वारा निर्मित 100 GigaFLOPS क्षमता वाला सुपरकंप्यूटर।
- ANUPAM: भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा विकसित सुपरकंप्यूटर श्रृंखला।
- Cray-1: सेमोर क्रे (Seymour Cray) द्वारा 1976 में निर्मित दुनिया का पहला सफल व्यावसायिक सुपरकंप्यूटर।
अभिकथन (A): सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) का 'डेटापाथ' (Datapath) वह हार्डवेयर घटक है जो निर्देशों के निष्पादन के दौरान वास्तविक डेटा प्रोसेसिंग, अंकगणितीय गणनाओं और रजिस्टरों के बीच डेटा स्थानांतरण का भौतिक कार्य करता है।
कारण (R): 'कंट्रोल यूनिट' (Control Unit) डेटापाथ के घटकों (ALU, रजिस्टर्स, मल्टीप्लेक्सर) को विद्युत नियंत्रण संकेत (Control Signals) भेजकर यह तय करती है कि कब और कौन-सा ऑपरेशन किस क्रम में निष्पादित किया जाएगा।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए:||अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|अभिकथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।|इनमें से कोई नहीं||A||
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं और कारण (R), अभिकथन (A) का सही और तार्किक स्पष्टीकरण देता है।
सीपीयू के दो मूलभूत स्तंभ: डेटापाथ और कंट्रोल यूनिट
- डेटापाथ (Datapath): यह प्रोसेसर का "मांसपेशीय तंत्र" (Muscle) है। इसमें अंकगणितीय और तार्किक इकाई (ALU), आंतरिक रजिस्टर्स (Program Counter, Instruction Register, Accumulator, General Purpose Registers), और आंतरिक डेटा बसेस शामिल होती हैं। यह वास्तव में डेटा पर जोड़-घटाव करता है और पतों की गणना करता है।
- कंट्रोल यूनिट (Control Unit): यह प्रोसेसर का "मस्तिष्क" (Brain) है। यह मेमोरी से निर्देश पढ़ती है, उन्हें डिकोड करती है और डेटापाथ को सिंक्रोनाइज़्ड इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल्स (जैसे Read, Write, ALU Operation Select, Register Enable) भेजती है ताकि डेटापाथ सही समय पर सही डेटा को प्रोसेस कर सके।
| घटक (Component) | मुख्य कार्य | शामिल हार्डवेयर तत्व |
|---|---|---|
| Datapath | डेटा का भौतिक प्रसंस्करण और स्थानांतरण | ALU, रजिस्टर्स, मल्टीप्लेक्सर्स, शिफ्टर्स, आंतरिक बसेस |
| Control Unit | निर्देशों का डिकोडिंग और डेटापाथ का समन्वयन | डिकोडर सर्किटरी, क्लॉक जनरेटर, माइक्रो-ऑपरेशन सीक्वेंसर |
| List-I (Pioneer / Scientist) | List-II (Historical Innovation / Contribution) |
|---|---|
| a. John Backus | i. Development of Ethernet networking technology at Xerox PARC (1973) |
| b. Bob Metcalfe | ii. Invention of the first presentation software 'MS PowerPoint' (1987) |
| c. Ray Tomlinson | iii. Development of the first successful high-level programming language FORTRAN (1954/57) |
| d. Robert Gaskins and Dennis Austin | iv. First standardization of the '@' symbol in Electronic Mail (E-mail) addresses (1971) |
- 'SPOOLing' is a buffering technique that temporarily stores data on the hard disk rather than in main memory for slow I/O devices like printers to prevent CPU stalling.
- 'Thrashing' is a critical state where, due to excessive page faults, the CPU spends most of its time swapping pages between main memory and disk rather than executing actual processes.
- The 'GIGO' (Garbage In, Garbage Out) principle establishes that the accuracy and validity of a computer's output strictly depend on the quality of the input data provided.
- Construction and operation of ENIAC
- Development of the first high-level programming language FORTRAN
- Commercially available first single-chip microprocessor 'Intel 4004'
- Conceptualization and development of the World Wide Web (WWW) by Tim Berners-Lee
Assertion (A): In real-time online gaming, VoIP calling, and live video streaming, a high value of 'Jitter' is the primary cause of audio-video stuttering and buffering.
Reason (R): 'Jitter' measures the irregular time variation in the delay of data packets arriving across a network (Packet Delay Variation).
Select the correct option from the following:||Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|None of the above||A||||Moderate Q8||Match List-I (Microsoft Word Shortcut Keys) with List-II (Their Respective Functions / Features):
| List-I (Shortcut Key) | List-II (Respective Function / Feature) |
|---|---|
| a. Alt + Shift + I | i. Split the active document window into two panes or remove the split view |
| b. Alt + Ctrl + S | ii. Increase the font size of selected text by exactly 1 point |
| c. Ctrl + ] | iii. Toggle the case of selected text (UPPERCASE, lowercase, Title Case) |
| d. Shift + F3 | iv. Open the 'Mark Citation' dialog box in legal and research documents |
- The landmark 'MULTICS' time-sharing operating system, jointly developed in the 1960s by MIT, Bell Labs, and General Electric, was primarily written in the PL/I programming language.
- The 'UNIX' operating system, started in assembly in 1969 by Ken Thompson and Dennis Ritchie at Bell Labs, was rewritten in the 'C' programming language in 1972–73, making it a portable operating system.
- The first commercial general-purpose digital computer, UNIVAC I, was famously used to accurately predict the results of the 1952 US Presidential Election (Eisenhower vs. Stevenson).
Assertion (A): The 'Datapath' of a Central Processing Unit (CPU) is the hardware subsystem that performs the physical execution of data processing, arithmetic calculations, and data transfers between registers during instruction execution.
Reason (R): The 'Control Unit' sends synchronized electrical control signals to the components of the datapath (ALU, registers, multiplexers) to dictate which operation is executed and in what sequence.
Select the correct option from the following:||Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|None of the above||A||||Hard
UPSSSC Lower PCS 2026
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निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
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