नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 04 तैयार किया है।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- कंप्यूटर मेमोरी और भंडारण उपकरण (Computer Memory & Storage Devices)
- Primary Memory, Cache Memory, Register Memory, Flash Memory, Memory Units, Secondary Storage, Cloud Storage, Memory access time, Memory hierarchy
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
📌 महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सारणी (Important Notice & Schedule)
UPSSSC Lower PCS और आगामी परीक्षाओं के संपूर्ण Computer Syllabus को कवर करने के लिए हमने कुल 18 Practice Sets का एक विशेष प्लान तैयार किया है।
- शुरुआत और समापन (Schedule): यह प्रैक्टिस सेट सीरीज 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 20 अगस्त तक नियमित रूप से चलेगी।
- लक्ष्य (Goal): चूंकि आपका UPSSSC Lower PCS का एग्जाम 23 अगस्त को होना तय है, इसलिए हम 20 अगस्त तक पूरा सिलेबस समाप्त कर देंगे। इससे आपको परीक्षा से ठीक पहले 2-3 दिन खुद से अंतिम रिवीजन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन इस सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
- स्टैटिक रैम (SRAM) को डेटा बनाए रखने के लिए लगातार विद्युत रिफ्रेश (Refresh) करने की आवश्यकता नहीं होती है।
- डायनामिक रैम (DRAM) की तुलना में SRAM अधिक तेज और अधिक महंगी होती है, इसलिए इसका उपयोग कैशे मेमोरी (Cache Memory) के रूप में किया जाता है।
- DRAM में डेटा को कैपेसिटर (Capacitor) और ट्रांजिस्टर में स्टोर किया जाता है, जिससे चार्ज लीक होने के कारण इसे प्रति सेकंड सैकड़ों बार रिफ्रेश करना पड़ता है।
दिए गए तीनों कथन (I, II और III) पूर्णतः सत्य हैं:
- कथन I सही है: स्टैटिक रैम (SRAM) में डेटा को स्टोर करने के लिए फ्लिप-फ्लॉप (Flip-Flops) का उपयोग किया जाता है। जब तक पावर सप्लाई चालू रहती है, तब तक इसमें डेटा बना रहता है और इसे DRAM की तरह बार-बार विद्युत रिफ्रेश (Refresh) करने की आवश्यकता नहीं होती।
- कथन II सही है: SRAM की एक्सेस स्पीड DRAM से बहुत अधिक होती है, परंतु इसका निर्माण जटिल और महंगा होता है। इसी कारण इसे कम क्षमता में सीपीयू कैशे मेमोरी (L1, L2, L3 Cache) बनाने के लिए प्रयुक्त किया जाता है।
- कथन III सही है: डायनामिक रैम (DRAM) का प्रत्येक मेमोरी सेल एक ट्रांजिस्टर और एक कैपेसिटर से मिलकर बनता है। कैपेसिटर में विद्युत आवेश (Charge) धीरे-धीरे लीक होता रहता है, इसलिए डेटा को लुप्त होने से बचाने के लिए इसे लगातार रिफ्रेश चक्र (Refresh Cycle) से गुजारना पड़ता है।
SRAM और DRAM में मुख्य अंतर:
| गुण (Feature) | स्टैटिक रैम (SRAM) | डायनामिक रैम (DRAM) |
|---|---|---|
| मूल घटक | फ्लिप-फ्लॉप (4-6 ट्रांजिस्टर) | 1 ट्रांजिस्टर + 1 कैपेसिटर |
| रिफ्रेशिंग | आवश्यक नहीं | आवश्यक (लगातार) |
| गति | अत्यधिक तीव्र (1-10 ns) | अपेक्षाकृत धीमी (50-150 ns) |
| उपयोग | कैशे मेमोरी (Cache Memory) | मुख्य मेमोरी (Main System RAM) |
| लागत व घनत्व | महंगी और कम घनत्व वाली | सस्ती और उच्च सघनता वाली |
| सूची-I (प्रौद्योगिकी/उपकरण) | सूची-II (प्रमुख विशेषता) |
|---|---|
| a. EEPROM | 1. अतिरेक (Redundancy) एवं स्ट्रिपिंग द्वारा डेटा सुरक्षा व गति बढ़ाना |
| b. NVMe | 2. विद्युत संकेतों द्वारा डेटा को मिटाया और पुनः प्रोग्राम किया जाना |
| c. RAID | 3. उच्च गति PCIe बस का उपयोग करने वाला आधुनिक SSD प्रोटोकॉल |
| d. HDD | 4. चुंबकीय प्लैटर और यांत्रिक रीड/राइट हेड पर आधारित |
सही सुमेलन इस प्रकार है:
- a. EEPROM → 2 (विद्युत संकेतों द्वारा इरेज़ योग्य): EEPROM (Electrically Erasable Programmable Read-Only Memory) एक नॉन-वोलेटाइल मेमोरी है जिसके डेटा को सर्किट से बाहर निकाले बिना विद्युत वोल्टेज द्वारा मिटाया और पुनः लिखा जा सकता है। इसका उपयोग कंप्यूटर के BIOS/UEFI चिप में होता है।
- b. NVMe → 3 (PCIe बस आधारित SSD प्रोटोकॉल): NVMe (Non-Volatile Memory Express) एक आधुनिक होस्ट कंट्रोलर इंटरफ़ेस प्रोटोकॉल है जो सॉलिड-स्टेट ड्राइव (SSD) को सीधे PCI Express (PCIe) बस से जोड़ता है, जिससे डेटा स्थानांतरण दर 7000 MB/s तक पहुँच जाती है।
- c. RAID → 1 (अतिरेक एवं गति संवर्द्धन): RAID (Redundant Array of Independent Disks) एक ऐसी तकनीक है जो कई भौतिक हार्ड डिस्कों को मिलाकर एक लॉजिकल ड्राइव बनाती है, जिससे डेटा लॉस सुरक्षा (Redundancy) और रीड/राइट परफॉर्मेंस बढ़ती है।
- d. HDD → 4 (चुंबकीय प्लैटर आधारित): HDD (Hard Disk Drive) एक पारंपरिक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस है जिसमें डेटा को घूमने वाले मैग्नेटिक प्लैटर पर रीड/राइट हेड द्वारा पढ़ा व लिखा जाता है।
अतिरिक्त परीक्षा उपयोगी तथ्य:
- RAID 0: केवल स्ट्रिपिंग (गति बढ़ाना), कोई डेटा रेडंडेंसी नहीं।
- RAID 1: केवल मिररिंग (पूर्ण डेटा डुप्लीकेशन/सुरक्षा)।
- RAID 5: ब्लॉक-लेवल स्ट्रिपिंग के साथ वितरित पैरिटी (सुरक्षा + गति का संतुलन)।
मानक बाइनरी मेमोरी मापन प्रणाली के अनुसार, 1 पेटाबाइट (PB) = 1024 टेराबाइट (TB) या 250 बाइट्स होता है।
चूंकि विकल्पों (1, 2, 3 और 4) में कहीं भी "1024 टेराबाइट (TB)" का उल्लेख नहीं किया गया है (विकल्प 1 में GB, विकल्प 2 में MB, विकल्प 3 में EB तथा विकल्प 4 में ZB दिया गया है), इसलिए सही उत्तर विकल्प 5 "इनमें से कोई नहीं" है।
गलत विकल्पों का स्पष्टीकरण:
- 1024 गीगाबाइट (GB): यह 1 टेराबाइट (TB) के बराबर होता है।
- 1024 मेगाबाइट (MB): यह 1 गीगाबाइट (GB) के बराबर होता है।
- 1024 एक्साबाइट (EB): यह 1 जेटाबाइट (ZB) के बराबर होता है।
- 1024 जेटाबाइट (ZB): यह 1 योत्ताबाइट (YB) के बराबर होता है।
कंप्यूटर मेमोरी इकाइयों का आरोही क्रम (Ascending Hierarchy):
- 8 बिट्स (Bits) = 1 बाइट (Byte)
- 1024 Bytes = 1 किलोबाइट (KB)
- 1024 KB = 1 मेगाबाइट (MB)
- 1024 MB = 1 गीगाबाइट (GB)
- 1024 GB = 1 टेराबाइट (TB)
- 1024 TB = 1 पेटाबाइट (PB)
- 1024 PB = 1 एक्साबाइट (EB)
- 1024 EB = 1 जेटाबाइट (ZB)
अभिकथन (A): सॉलिड-स्टेट ड्राइव (SSD), पारंपरिक हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD) की तुलना में डेटा को बहुत तेजी से एक्सेस करती हैं और भौतिक आघात से अधिक सुरक्षित होती हैं。
कारण (R): SSD में डेटा को स्टोर करने के लिए सेमीकंडक्टर फ़्लैश मेमोरी (NAND Flash) का उपयोग किया जाता है और इसमें कोई यांत्रिक (Mechanical) घूमने वाले भाग नहीं होते हैं。
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही विकल्प का चयन कीजिए:||अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|अभिकथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।|इनमें से कोई नहीं||A||
अभिकथन (A) सत्य है: SSD की डेटा स्थानांतरण दर (Read/Write Speed) 500 MB/s से लेकर 7000 MB/s तक होती है, जो पारंपरिक HDD (80-160 MB/s) से कई गुना अधिक है। साथ ही, लैपटॉप के गिरने या हिलने पर SSD में डेटा क्षति का जोखिम HDD की तुलना में नगण्य होता है।
कारण (R) सत्य है और (A) की सही व्याख्या करता है: HDD में धातु के प्लैटर और स्पिनिंग मोटर जैसे यांत्रिक भाग होते हैं, जो घर्षण और लेटेंसी (Latency) पैदा करते हैं। इसके विपरीत, SSD केवल इलेक्ट्रॉनिक 'NAND फ़्लैश मेमोरी' चिप्स का उपयोग करती है। यांत्रिक भागों की अनुपस्थिति (No moving parts) ही SSD की तीव्र गति, कम बिजली खपत और उच्च टिकाऊपन का मुख्य कारण है।
SSD और HDD की तुलनात्मक तालिका:
| मापदंड (Parameter) | SSD (Solid State Drive) | HDD (Hard Disk Drive) |
|---|---|---|
| तकनीक | नॉन-वोलेटाइल NAND फ़्लैश | मैग्नेटिक प्लैटर व रीड/राइट हेड |
| एक्सेस टाइम | < 0.1 मिलीसेकंड | 5 – 10 मिलीसेकंड |
| शोर व बिजली | पूर्णतः शांत, कम बिजली | मोटर घूर्णन शोर, अधिक बिजली |
| झटका सहनशीलता | अत्यधिक उच्च (High Shock Resistance) | कम (आघात से प्लैटर खराब हो सकता है) |
विकल्प 4 का कथन गलत (असत्य) है: RAM (Random Access Memory) एक अस्थिर/वोलेटाइल (Volatile) मेमोरी है। कंप्यूटर बंद होते ही RAM में संग्रहीत सामग्री पूरी तरह मिट जाती है। इसलिए, कंप्यूटर को ऑन करने वाले बूटस्ट्रैप लोडर प्रोग्राम को RAM में स्टोर नहीं किया जा सकता। इसे गैर-वोलेटाइल मेमोरी जैसे ROM, EPROM या NVRAM में स्थायी रूप से स्टोर किया जाता है।
अन्य सभी विकल्प (1, 2 और 3) बिल्कुल सही हैं:
- POST (Power-On Self-Test): कंप्यूटर चालू होते ही BIOS सबसे पहले हार्डवेयर घटकों (RAM, कीबोर्ड, डिस्क आदि) की जांच के लिए POST चलाता है।
- बूटस्ट्रैप लोडर का स्थान: यह ROM में स्थित वह फर्मवेयर प्रोग्राम है जो बूटिंग प्रक्रिया शुरू करता है।
- ब्लॉक ज़ीरो (Block Zero): स्टोरेज ड्राइव का पहला सेक्टर (Sector 0 / Master Boot Record - MBR) ब्लॉक ज़ीरो कहलाता है, जहाँ से बूटस्ट्रैप लोडर ऑपरेटिंग सिस्टम फाइलें खोजकर RAM में लोड करता है।
कैशे मेमोरी (Cache Memory) सही उत्तर है: कैशे मेमोरी प्राथमिक/आंतरिक मेमोरी (Primary/Internal Memory) का हिस्सा है। यह सीपीयू और मुख्य RAM के बीच स्थित एक अत्यधिक तीव्र अर्धचालक (Semiconductor) मेमोरी होती है, जिसका उपयोग सीपीयू द्वारा बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा और निर्देशों को अस्थायी रूप से स्टोर करने के लिए किया जाता है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- हार्ड डिस्क ड्राइव (HDD): यह चुंबकीय तकनीक पर आधारित सेकेंडरी स्टोरेज है।
- मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tape): यह क्रमिक अभिगम (Sequential Access) वाला सेकेंडरी स्टोरेज माध्यम है, जिसका उपयोग बड़े डेटा बैकअप के लिए किया जाता है।
- सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD): यह फ़्लैश सेमीकंडक्टर आधारित आधुनिक सेकेंडरी स्टोरेज है।
मेमोरी का वर्गीकरण चार्ट:
- प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory): CPU Registers, Cache Memory, RAM (SRAM, DRAM), ROM (PROM, EPROM, EEPROM)।
- द्वितीयक मेमोरी (Secondary Memory): HDD, SSD, पेन ड्राइव, ऑप्टिकल डिस्क (CD/DVD/Blu-ray), मैग्नेटिक टेप।
दिए गए चारों विकल्प (1, 2, 3 और 4) वर्चुअल मेमोरी की अवधारणा के संबंध में असत्य हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है।
वर्चुअल मेमोरी का सही तकनीकी विश्लेषण:
- वर्चुअल मेमोरी क्या है? यह कोई भौतिक हार्डवेयर चिप या ROM का भाग नहीं है (अतः विकल्प 1 और 2 गलत हैं)। यह ऑपरेटिंग सिस्टम की एक "मेमोरी प्रबंधन तकनीक" (Memory Management Technique) है।
- यह कैसे काम करती है? जब कंप्यूटर में चल रहे प्रोग्रामों को भौतिक RAM की क्षमता से अधिक मेमोरी की आवश्यकता होती है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम हार्ड डिस्क के एक हिस्से (जिसे Page File या Swap File कहते हैं) को अस्थायी RAM की तरह उपयोग करता है।
- पेजिंग एवं स्वैपिंग (Paging & Swapping): इस प्रक्रिया में RAM के कम इस्तेमाल होने वाले डेटा को हार्ड डिस्क में ट्रांसफर (Swap Out) किया जाता है और आवश्यक डेटा को वापस RAM में लाया (Swap In) जाता है (अतः विकल्प 3 गलत है)।
- CPU पहुंच: CPU केवल भौतिक RAM से सीधे निर्देश फेच कर सकता है, न कि वर्चुअल मेमोरी डिस्क क्षेत्र से सीधे (अतः विकल्प 4 गलत है)।
निबल (Nibble) सही उत्तर है: बाइनरी डिजिटल सिस्टम में 4 बिट्स (4-bit binary digit) का समूह 1 निबल (Nibble) कहलाता है। इसे आधा बाइट (Half-byte) भी कहा जाता है। उदाहरण के लिए, बाइनरी संख्या 1010 एक निबल को निरूपित करती है। हेक्साडेसिमल (Hexadecimal) प्रणाली का एक अंक (0-F) ठीक 1 निबल के बराबर होता है।
गलत विकल्पों का स्पष्टीकरण:
- बाइट (Byte): 8 बिट्स (या 2 निबल्स) के समूह को 1 बाइट कहा जाता है। कंप्यूटर में 1 कैरेक्टर (जैसे 'A' या '5') को दर्शाने के लिए 1 बाइट की आवश्यकता होती है।
- वर्ड (Word): किसी कंप्यूटर सिस्टम के प्रोसेसर द्वारा एक बार में प्रोसेस किए जा सकने वाले बिट्स के समूह को 'वर्ड' कहा जाता है (जैसे 32-बिट या 64-बिट वर्ड)।
- डबल बाइट (Double Byte): यह 16 बिट्स (2 बाइट्स) का समूह होता है।
डेटा मापन की मूलभूत तालिका:
| इकाई (Unit) | समकक्ष मान (Equivalent) |
|---|---|
| 1 बिट (Bit) | 0 या 1 (बाइनरी डिजिट) |
| 1 निबल (Nibble) | 4 बिट्स |
| 1 बाइट (Byte) | 8 बिट्स (2 निबल्स) |
| 1 वर्ड (Word) | 16/32/64 बिट्स (प्रोसेसर पर निर्भर) |
- सीडी (CD), डीवीडी (DVD) और ब्लू-रे डिस्क (Blu-ray Disc) पर डेटा लिखने और पढ़ने के लिए लेजर बीम (Laser Beam) का उपयोग किया जाता है।
- एक मानक सिंगल-लेयर डीवीडी की भण्डारण क्षमता 4.7 GB होती है, जबकि सिंगल-लेयर ब्लू-रे डिस्क की क्षमता 25 GB तक होती है।
- ब्लू-रे डिस्क में डेटा पढ़ने के लिए लाल लेजर (Red Laser - 650 nm) का उपयोग किया जाता है, जबकि डीवीडी में नीले-बैंगनी लेजर (Blue-Violet Laser - 405 nm) का उपयोग किया जाता है।
कथन I और II सत्य हैं:
- कथन I सही है: सभी ऑप्टिकल डिस्क (CD, DVD, BD) पर 'पिट्स' (Pits) और 'लैंड्स' (Lands) के रूप में डेटा स्टोर किया जाता है, जिसे पढ़ने के लिए लेजर प्रकाश की किरणों का उपयोग होता है।
- कथन II सही है: सिंगल-लेयर DVD की मानक क्षमता 4.7 GB होती है, जबकि ब्लू-रे डिस्क की पिट्स साइज बहुत सूक्ष्म होने के कारण इसकी सिंगल-लेयर क्षमता 25 GB होती है।
कथन III असत्य है (उल्टा लिखा गया है):
- डीवीडी (DVD) में लाल लेजर (Red Laser - 650 nm तरंगदैर्ध्य) का उपयोग होता है।
- ब्लू-रे डिस्क (Blu-ray Disc) में नीले-बैंगनी लेजर (Blue-Violet Laser - 405 nm तरंगदैर्ध्य) का उपयोग किया जाता है। छोटी तरंगदैर्ध्य (Shorter Wavelength) के कारण लेजर बीम अधिक बारीक स्थान पर फोकस कर पाती है, जिससे डिस्क की भंडारण क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
ऑप्टिकल डिस्क की तुलनात्मक तालिका:
| विशेषता | कॉम्पैक्ट डिस्क (CD) | डिजिटल वर्सटाइल डिस्क (DVD) | ब्लू-रे डिस्क (Blu-ray) |
|---|---|---|---|
| मानक क्षमता | ~700 MB | 4.7 GB (Single Layer) | 25 GB (Single Layer) |
| लेजर का प्रकार | इन्फ्रारेड लेजर (780 nm) | लाल लेजर (650 nm) | नीला-बैंगनी लेजर (405 nm) |
| ट्रैक पिच | 1.6 μm | 0.74 μm | 0.32 μm |
विकल्प 1 बिल्कुल सही क्रम है:
- CPU Registers: यह सीपीयू के अंदर ही स्थित होते हैं और फ्लिप-फ्लॉप्स से बने होते हैं। इनकी एक्सेस स्पीड सबसे तेज (< 1 नैनोसेकंड) होती है।
- L1 व L2 Cache: कैशे मेमोरी SRAM आधारित होती है। L1 कैशे कोर के अंदर होती है (एक्सेस समय ~1-2 ns), जबकि L2 और L3 कैशे थोड़ी धीमी होती हैं (एक्सेस समय ~3-15 ns)।
- Main Memory (RAM): DRAM आधारित प्राथमिक मेमोरी, जिसकी एक्सेस स्पीड ~50-100 नैनोसेकंड होती है।
- SSD (Solid State Drive): फ़्लैश सेमीकंडक्टर मेमोरी आधारित सेकेंडरी स्टोरेज (एक्सेस समय ~50-100 माइक्रोसेकंड)।
- HDD (Hard Disk Drive): मैग्नेटिक स्पिनिंग प्लैटर आधारित यांत्रिक स्टोरेज (एक्सेस समय ~5-10 मिलीसेकंड)।
- Magnetic Tape: क्रमिक अभिगम (Sequential Access) वाला उपकरण, जो सबसे धीमा होता है (एक्सेस समय कई सेकंड तक हो सकता है)।
याद रखने योग्य पदानुक्रम नियम:
- ऊपर से नीचे जाने पर: गति घटती है, क्षमता बढ़ती है, और प्रति बाइट लागत घटती है।
| सूची-I (ROM का प्रकार) | सूची-II (डेटा मिटाने/लिखने की तकनीकी विधि) |
|---|---|
| a. PROM | 1. पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet Light) के संपर्क में रखकर डेटा मिटाया जाता है |
| b. EPROM | 2. केवल एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है, तत्पश्चात् डेटा मिटाया नहीं जा सकता (WORM) |
| c. EEPROM | 3. ब्लॉक-स्तरीय (Block-level) इरेज़िंग तकनीक का उपयोग करने वाली उच्च घनत्व वाली नॉन-वोलेटाइल मेमोरी |
| d. Flash Memory | 4. बाइट-स्तरीय (Byte-level) विद्युत आवेश द्वारा डेटा को इरेज़ और री-राइट किया जाता है |
सही सुमेलन इस प्रकार है:
- a. PROM → 2 (केवल एक बार प्रोग्राम योग्य): PROM (Programmable ROM) को 'WORM' (Write Once, Read Many) भी कहा जाता है। इसमें निर्माता द्वारा एक बार डेटा बर्न (Burn) कर देने के बाद उसे किसी भी विधि से मिटाया या बदला नहीं जा सकता।
- b. EPROM → 1 (UV प्रकाश द्वारा इरेज़ योग्य): EPROM (Erasable Programmable ROM) चिप के ऊपर एक क्वार्ट्ज़ विंडो (Quartz Window) होती है। इसे 20-30 मिनट तक पराबैंगनी (UV) किरणों के संपर्क में रखकर इसका संपूर्ण डेटा मिटाया जा सकता है।
- c. EEPROM → 4 (बाइट-स्तरीय विद्युत इरेज़िंग): EEPROM में सर्किट बोर्ड से बिना निकाले बाइट-बाय-बाइट (Byte-by-Byte) इलेक्ट्रिकल वोल्टेज देकर डेटा मिटाया और लिखा जा सकता है।
- d. Flash Memory → 3 (ब्लॉक-स्तरीय इरेज़िंग): फ़्लैश मेमोरी, EEPROM का ही एक उन्नत उच्च-घनत्व वाला संस्करण है, जो बाइट के बजाय पूरे 'ब्लॉक' (Block of Memory) को एक साथ विद्युत रूप से मिटाता है। पेन ड्राइव और SSD में इसी तकनीक का उपयोग होता है।
दिए गए चारों विकल्प (1, 2, 3 और 4) वर्ड लेंथ की अवधारणा के संबंध में असत्य हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प 5 (इनमें से कोई नहीं) है।
वर्ड लेंथ (Word Length) के मुख्य तकनीकी तथ्य:
- परिभाषा: 'वर्ड लेंथ' (या शब्द लंबाई) बिट्स की वह संख्या है जिसे एक सीपीयू (CPU) की इंटरनल बस और रजिस्टर्स एक ही क्लॉक साइकिल (Clock Cycle) में एक साथ प्रोसेस या ट्रांसफर कर सकते हैं।
- परिवर्तनशीलता (विकल्प 1 गलत क्यों है): यह निश्चित नहीं होती। पुराने सिस्टम 8-बिट या 16-बिट के होते थे, जबकि आधुनिक कंप्यूटर 32-बिट या 64-बिट वर्ड लेंथ के होते हैं।
- गति से संबंध (विकल्प 2 गलत क्यों है): वर्ड लेंथ जितनी अधिक होगी, सीपीयू की प्रोसेसिंग क्षमता और डेटा ट्रांसफर स्पीड उतनी ही अधिक होगी।
- 64-बिट क्षमता (विकल्प 3 गलत क्यों है): 64-बिट वर्ड लेंथ (64 bits = 8 Bytes) का अर्थ है कि सीपीयू एक ही निर्देश चक्र में 8 बाइट्स डेटा को एक साथ प्रोसेस कर सकता है और बड़ी रैम एड्रेस स्पेस (4 GB से अधिक) को एक्सेस कर सकता है।
- आंतरिक घटक (विकल्प 4 गलत क्यों है): वर्ड लेंथ सीपीयू और रैम के इंटरनल आर्किटेक्चर से संबंधित है, न कि सेकेंडरी स्टोरेज (हार्ड डिस्क) से।
'थ्रैशिंग' (Thrashing) का अर्थ व कारण: जब कंप्यूटर में कई सारे भारी प्रोग्राम एक साथ खोल दिए जाते हैं और उपलब्ध भौतिक RAM की क्षमता बहुत कम पड़ जाती है, तो ऑपरेटिंग सिस्टम में लगातार 'पेज फॉल्ट' (Page Faults) उत्पन्न होते हैं।
ऐसी स्थिति में OS का अधिकांश समय (तथा CPU का अधिकांश चक्र) RAM और हार्ड डिस्क (वर्चुअल मेमोरी) के बीच पेजों की अदला-बदली (Page Swapping In / Swapping Out) में ही खर्च होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप, उपयोगी गणनाएँ रुक जाती हैं, कंप्यूटर पूरी तरह हैंग/धीमा हो जाता है और सीपीयू यूटिलाइजेशन (CPU Utilization) अचानक बहुत गिर जाता है। इसी स्थिति को ऑपरेटिंग सिस्टम में Thrashing कहते हैं।
अन्य विकल्प असत्य क्यों हैं?
- विकल्प 1: थ्रैशिंग एक सॉफ्टवेयर/मेमोरी मैनेजमेंट समस्या है, हार्डवेयर का खराब होना नहीं।
- विकल्प 3: बैड सेक्टर हार्ड डिस्क का भौतिक दोष है, थ्रैशिंग से इसका संबंध नहीं है।
- विकल्प 4: यह उष्मा प्रबंधन की बात करता है, जो गलत है।
विकल्प 4 का कथन पूरी तरह गलत (असत्य) है: NAS और SAN दोनों ही एंटरप्राइज-स्तरीय नॉन-वोलेटाइल सेकेंडरी स्टोरेज प्रणालियाँ हैं जो RAID अर्रे, HDDs और SSDs का उपयोग करती हैं। इनमें से कोई भी स्टोरेज के लिए केवल RAM (वोलेटाइल) या केवल मैग्नेटिक टेप का उपयोग नहीं करता।
अन्य विकल्पों (1, 2 और 3) का सत्य विश्लेषण:
- NAS (Network Attached Storage): यह एक समर्पित फाइल सर्वर की तरह काम करता है। यह फाइल-स्तरीय (File-level) डेटा शेयरिंग (जैसे NFS, SMB/CIFS प्रोटोकॉल द्वारा) प्रदान करता है और मौजूदा LAN/ईथरनेट नेटवर्क का उपयोग करता है।
- SAN (Storage Area Network): यह उच्च-प्रदर्शन वाला समर्पित नेटवर्क है जो ब्लॉक-स्तरीय (Block-level) स्टोरेज प्रदान करता है। इसमें डेटा सीधे ब्लॉक्स के रूप में स्थानांतरित होता है और सर्वर इसे अपने खुद के लोकल हार्ड ड्राइव की तरह फॉर्मेट और एक्सेस कर सकते हैं।
NAS बनाम SAN का संक्षिप्त तुलनात्मक चार्ट:
| मापदंड | NAS (Network Attached Storage) | SAN (Storage Area Network) |
|---|---|---|
| डेटा एक्सेस | फाइल स्तर (File Level) | ब्लॉक स्तर (Block Level) |
| नेटवर्क प्रकार | सामान्य ईथरनेट (TCP/IP) | फाइबर चैनल (FC) या iSCSI |
| प्रोटोकॉल | NFS, SMB, CIFS | FCP, iSCSI |
| गति व लागत | मध्यम गति, कम खर्चीला | अत्यधिक उच्च गति, महंगा |
मेमोरी इंटरलीविंग (Memory Interleaving) का प्राथमिक उद्देश्य: पारंपरिक प्रणालियों में सीपीयू एक समय में केवल एक ही मेमोरी बैंक से डेटा एक्सेस कर पाता था। 'मेमोरी इंटरलीविंग' तकनीक में मुख्य मेमोरी (RAM) को कई स्वतंत्र रूप से एक्सेस किए जा सकने वाले मेमोरी बैंकों (Memory Banks) में विभाजित कर दिया जाता है।
इससे सीपीयू एक साथ (Simultaneously) अनेक बैंकों से डेटा पढ़ और लिख सकता है। यह प्रक्रिया डेटा बस की बैंडविड्थ (Data Bus Bandwidth) को दोगुना कर देती है और सीपीयू के लिए मेमोरी एक्सेस लेटेंसी (Wait Time) को काफी हद तक कम कर देती है, जिससे पूरे सिस्टम का प्रदर्शन (System Performance) बढ़ जाता है।
गलत विकल्पों का स्पष्टीकरण:
- विकल्प 1 गलत है: यह सेकेंडरी नॉन-वोलेटाइल स्टोरेज क्षमता नहीं बढ़ाती, बल्कि प्राथमिक वोलेटाइल RAM की डेटा ट्रांसफर स्पीड बढ़ाती है।
- विकल्प 2 गलत है: इसका मुख्य उद्देश्य पावर सेविंग नहीं, बल्कि स्पीड और बैंडविड्थ बढ़ाना है।
- विकल्प 4 गलत है: इसका ROM की सुरक्षा या बूट कोड से कोई सीधा संबंध नहीं है।
- Static RAM (SRAM) does not require continuous electrical refreshing to retain data.
- SRAM is faster and more expensive compared to Dynamic RAM (DRAM), which is why it is used as Cache Memory.
- In DRAM, data is stored in capacitors and transistors, requiring it to be refreshed hundreds of times per second due to charge leakage.
| List-I (Technology/Device) | List-II (Key Feature) |
|---|---|
| a. EEPROM | 1. Enhancing data security and speed through Redundancy and Striping |
| b. NVMe | 2. Data erased and reprogrammed using electrical signals |
| c. RAID | 3. Modern SSD protocol utilizing high-speed PCIe bus |
| d. HDD | 4. Based on magnetic platters and mechanical read/write heads |
Assertion (A): Solid-State Drives (SSDs) access data much faster and are more resistant to physical shock than traditional Hard Disk Drives (HDDs).
Reason (R): SSDs use semiconductor flash memory (NAND Flash) to store data and have no mechanical moving parts.
Select the correct option with reference to the above statements:||Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|None of these||A||||Moderate Q5||Which of the following statements is incorrect regarding computer booting process and system memory functioning?||When the computer is turned on, the BIOS first executes the Power-On Self-Test (POST).|The Bootstrap Loader is a small program typically stored securely in ROM or EPROM.|The Bootstrap Loader accesses 'Block Zero' (Block Zero / MBR) of the hard disk to load the Operating System kernel into main memory.|The Bootstrap Loader is permanently stored in the computer's primary memory (RAM) so that it is not lost when power is turned off.|None of these||D||||Hard Q6||Which of the following options is NOT an example of a Secondary Storage Device?||Hard Disk Drive (HDD)|Magnetic Tape|Cache Memory|Solid State Drive (SSD)|None of these||C||||Easy Q7||Which of the following statements is completely true regarding 'Virtual Memory' used by computer operating systems?||It is an ultra-high-speed semiconductor memory chip that increases the physical capacity of main memory (RAM).|It is located exclusively in ROM and increases the speed of computer booting instructions.|Using Virtual Memory ensures that data available in RAM is never transferred to the hard disk.|It is a type of non-volatile secondary memory used directly by the CPU to fetch instructions.|None of these||E||||Moderate Q8||In computer science under data measurement units, a group of 4 bits is known by which name?||Byte|Nibble|Word|Double Byte|None of these||B||||Easy Q9||Consider the following statements with reference to Optical Storage Media:
- Laser beams are used to write and read data on Compact Discs (CD), Digital Versatile Discs (DVD), and Blu-ray Discs.
- A standard single-layer DVD has a storage capacity of 4.7 GB, whereas a single-layer Blu-ray Disc has a capacity of up to 25 GB.
- A Red Laser (650 nm) is used to read data in Blu-ray Discs, whereas a Blue-Violet Laser (405 nm) is used in DVDs.
| List-I (Type of ROM) | List-II (Technical Data Erasing/Writing Method) |
|---|---|
| a. PROM | 1. Data is erased by exposure to Ultraviolet (UV) Light |
| b. EPROM | 2. Can be programmed only once, after which data cannot be erased (WORM) |
| c. EEPROM | 3. High-density non-volatile memory using block-level erasing technology |
| d. Flash Memory | 4. Data is erased and rewritten byte-by-byte using electrical voltage |
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 04 (कंप्यूटर मेमोरी [Computer Memory])
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Performance Report
निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
Thanks for Reading! / पढ़ने के लिए धन्यवाद! 🙏
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