प्रिय अभ्यर्थियों, आज के इस ब्लॉग पोस्ट में हम हाल ही में आयोजित UPSI परीक्षा (14 मार्च 2026) में पूछे गए एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न का 360-डिग्री एनालिसिस (360-Degree Analysis) करेंगे। यह प्रश्न साइबर कानून (Cyber Law) और विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) से जुड़ा है। वर्तमान डिजिटल युग में UPSC, State PCS, UPSSSC और पुलिस भर्ती परीक्षाओं (Police Recruitment Exams) के लिए यह एक 'हॉट टॉपिक' (Hot Topic) है। यदि आप इन वैधानिक धाराओं (Statutory Sections) की गहराई को नहीं समझते हैं, तो आप परीक्षा में एक बड़ा मौका गँवा सकते हैं। आइए, इस विषय का पूरा पोस्टमार्टम करते हैं।
आज का प्रश्न (Today's Question)
प्रश्न (Question): सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A संबंधित है: (Section 69A of the Information Technology Act, 2000 deals with :)
- (A) जानकारी की निगरानी और उसे डिक्रिप्ट करने की शक्ति (Power to monitor and decrypt information)
- (B) हैकिंग के खिलाफ सुरक्षा (Protection against hacking)
- (C) आपत्तिजनक संदेश भेजने पर दंड (Penalty for sending offensive messages)
- (D) जानकारी तक सार्वजनिक पहुँच को अवरुद्ध करने के लिए निर्देश जारी करने की शक्ति (Power to issue directions for blocking public access to information)
प्रश्न कुंडली (Question Analysis)
- कठिनाई (Difficulty): मध्यम (Moderate)
- मुख्य विषय (Core Chapter): भारतीय राजव्यवस्था एवं साइबर कानून (Indian Polity & Cyber Law)
- उप-विषय (Sub-topic): सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 (Information Technology Act 2000)
- प्रश्न की प्रकृति (Question Nature): तथ्यात्मक एवं वैधानिक (Factual & Statutory)
- आदर्श समय (Ideal Time): 30 सेकंड (30 Seconds)
- औसत सफलता दर (Avg. Success Rate): 40-45%
- परीक्षा स्रोत (Exam Source): UPSI Exam (14 March 2026, 1st Shift)
सही उत्तर और व्याख्या (Answer & Deep Explanation)
सही उत्तर है (Correct Answer): (D) जानकारी तक सार्वजनिक पहुँच को अवरुद्ध करने के लिए निर्देश जारी करने की शक्ति (Power to issue directions for blocking public access to information)
विस्तृत व्याख्या (Deep Explanation):
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) भारत में साइबर अपराधों (Cyber Crimes) और इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (Electronic Commerce) को विनियमित (Regulate) करने वाला प्राथमिक कानून है।
इस अधिनियम की धारा 69A (Section 69A) केंद्र सरकार (Central Government) या उसके द्वारा अधिकृत किसी भी अधिकारी को यह असाधारण शक्ति (Extraordinary Power) प्रदान करती है कि वह किसी भी कंप्यूटर संसाधन (Computer Resource) के माध्यम से उत्पन्न, प्रेषित, प्राप्त या संग्रहीत किसी भी जानकारी तक जनता की पहुँच को अवरुद्ध (Block) कर सकती है। भारत सरकार द्वारा हाल के वर्षों में कई चीनी ऐप्स (जैसे- TikTok, PUBG) और विभिन्न भड़काऊ वेबसाइटों तथा ट्विटर अकाउंट्स पर जो प्रतिबंध (Ban) लगाया गया है, वह इसी धारा की शक्ति का उपयोग करके किया गया है।
सरकार इस धारा का प्रयोग केवल कुछ विशिष्ट आधारों (Specific Grounds) पर ही कर सकती है, जो सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 19(2) [Article 19(2)] में उल्लिखित युक्तियुक्त निर्बंधनों (Reasonable Restrictions) से मेल खाते हैं:
- भारत की संप्रभुता और अखंडता (Sovereignty and Integrity of India)
- भारत की रक्षा (Defence of India)
- राज्य की सुरक्षा (Security of the State)
- विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध (Friendly relations with foreign States)
- सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order)
- उपरोक्त से संबंधित किसी संज्ञेय अपराध को भड़काने से रोकना (Preventing incitement to the commission of any cognizable offence relating to above)
ऐतिहासिक वाद (Landmark SC Judgment):श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ (Shreya Singhal v. Union of India, 2015): इस ऐतिहासिक फैसले में, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने आईटी एक्ट की धारा 66A को असंवैधानिक (Unconstitutional) घोषित कर रद्द कर दिया था, लेकिन धारा 69A की संवैधानिक वैधता (Constitutional Validity) को बरकरार रखा था, यह मानते हुए कि इसमें पर्याप्त सुरक्षा उपाय (Safeguards) मौजूद हैं।
देसी उदाहरण (Deshi Analogy): साइबर दुनिया का 'कर्फ्यू' या 'बैरिकेडिंग'
कल्पना कीजिए कि आपके शहर में दंगा भड़कने की आशंका है। ऐसे में जिलाधिकारी (District Magistrate) शांति बनाए रखने के लिए किसी विशेष सड़क पर भौतिक रूप से 'बैरिकेडिंग' (Barricading) करवा देते हैं या धारा 144 लगा देते हैं ताकि उपद्रवी न आ सकें। ठीक इसी तरह, जब किसी वेबसाइट, ऐप या सोशल मीडिया पोस्ट से देश की सुरक्षा या शांति को खतरा होता है, तो सरकार धारा 69A का उपयोग करके इंटरनेट रूपी हाईवे पर उस विशेष 'वेबसाइट' तक जाने वाले रास्ते को डिजिटल रूप से 'बैरिकेड' (Block) कर देती है।
सभी विकल्पों का 360° एनालिसिस (360° Analysis of Options)
एक गंभीर अभ्यर्थी (Serious Aspirant) के रूप में आपको केवल सही उत्तर ही नहीं, बल्कि गलत विकल्पों के पीछे का विज्ञान भी पता होना चाहिए। आयोग (Commission) अक्सर एक परीक्षा के गलत विकल्पों को दूसरी परीक्षा का प्रश्न बना देता है। आइए, बाकी विकल्पों का पोस्टमार्टम करते हैं:
(A) जानकारी की निगरानी और उसे डिक्रिप्ट करने की शक्ति (Power to monitor and decrypt information)
- यह क्या है (What does it mean?): यह शक्ति सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (Information Technology Act) की धारा 69 (Section 69) के तहत आती है। यह केंद्र या राज्य सरकार को राष्ट्रहित (National Interest) या अपराध की जांच के लिए किसी भी कंप्यूटर संसाधन (Computer Resource) में उत्पन्न, प्रेषित (Transmitted), प्राप्त (Received) या संग्रहीत (Stored) किसी भी जानकारी को इंटरसेप्ट (Intercept), मॉनिटर (Monitor) या डिक्रिप्ट (Decrypt) करने का अधिकार देती है।
- यह गलत क्यों है? (Why is it wrong?): क्योंकि प्रश्न विशेष रूप से 'धारा 69A' के बारे में पूछ रहा है, जिसका मुख्य कार्य इंटरनेट पर मौजूद किसी सामग्री तक जनता की पहुँच को रोकना (Blocking Access) है, न कि किसी के निजी संदेशों की निगरानी या डिक्रिप्शन (Monitoring or Decryption) करना।
(B) हैकिंग के खिलाफ सुरक्षा (Protection against hacking)
- यह क्या है (What does it mean?): 'हैकिंग' (Hacking) शब्द को आईटी (संशोधन) अधिनियम 2008 के बाद अधिनियम से हटाकर अधिक व्यापक बना दिया गया था। वर्तमान में, कंप्यूटर संसाधनों को नुकसान पहुँचाने, डेटा चोरी करने या बिना अनुमति के प्रवेश (Unauthorized Access) करने से संबंधित अपराधों और दंड का प्रावधान मुख्य रूप से आईटी एक्ट की धारा 43 (Section 43) (जुर्माना और मुआवजा) और धारा 66 (Section 66) (कंप्यूटर से संबंधित अपराध) में किया गया है।
- यह गलत क्यों है? (Why is it wrong?): धारा 69A का हैकिंग की रोकथाम, मालवेयर (Malware) या साइबर घुसपैठ (Cyber Intrusion) से कोई कानूनी संबंध नहीं है। यह धारा केवल राष्ट्र की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली डिजिटल सामग्री को सेंसर (Censor) करने का एक वैधानिक उपकरण (Statutory Tool) है।
(C) आपत्तिजनक संदेश भेजने पर दंड (Penalty for sending offensive messages)
- यह क्या है (What does it mean?): किसी भी संचार सेवा (Communication Service) जैसे कंप्यूटर या मोबाइल फोन के माध्यम से घोर आपत्तिजनक (Grossly Offensive), डराने वाले (Menacing) या झूठे संदेश भेजने पर दंड का प्रावधान आईटी एक्ट की धारा 66A (Section 66A) में किया गया था। इसमें दोषी पाए जाने पर 3 साल तक के कारावास (Imprisonment) का प्रावधान था।
- यह गलत क्यों है? (Why is it wrong?): यह विकल्प दो कारणों से गलत है। पहला, यह धारा 66A का विषय है, धारा 69A का नहीं। दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण (Most Important) तथ्य यह है कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने 2015 के ऐतिहासिक श्रेया सिंघल बनाम भारत संघ वाद (Shreya Singhal v. Union of India Case) में इस धारा 66A को असंवैधानिक (Unconstitutional) घोषित कर दिया था। न्यायालय ने माना था कि यह धारा संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) [Article 19(1)(a)] यानी 'वाक् और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' (Freedom of Speech and Expression) पर सीधा प्रहार करती है। अतः अब यह धारा अस्तित्व में ही नहीं है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act, 2000) – Short Notes
UPSC Mains, State PCS और Police SI परीक्षाओं के लिए यह अधिनियम साइबर सुरक्षा (Cyber Security) और ई-गवर्नेंस (e-Governance) का आधार स्तंभ है। आइए इस अधिनियम का तकनीकी और तथ्यात्मक 'एक्स-रे' (X-Ray) करते हैं।
1. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उद्भव (Historical Background & Genesis)
- आधार (Basis): यह अधिनियम संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय व्यापार कानून आयोग (United Nations Commission on International Trade Law - UNCITRAL) द्वारा 1996 में अपनाए गए 'इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स पर मॉडल कानून' (Model Law on Electronic Commerce) पर आधारित है।
- लागू होने की तिथि (Date of Enforcement): इसे 17 अक्टूबर 2000 को पूरे भारत में लागू किया गया था। (यह तिथि SSC और पुलिस परीक्षाओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है)।
- प्रमुख संशोधन (Major Amendment):सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 [Information Technology (Amendment) Act, 2008]। इसी संशोधन के द्वारा इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर (Electronic Signatures) को मान्यता मिली और साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism) जैसे नए अपराध जोड़े गए।
2. अधिनियम के मुख्य उद्देश्य (Core Objectives of the Act)
- इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज (Electronic Data Interchange - EDI) और ई-कॉमर्स (e-Commerce) के माध्यम से किए गए लेन-देन को कानूनी मान्यता (Legal Recognition) प्रदान करना।
- सरकारी एजेंसियों में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड दाखिल करने (Filing of Electronic Records) की सुविधा प्रदान करना।
- भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code - IPC), भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act), और बैंकर्स बुक एविडेंस एक्ट (Bankers' Books Evidence Act) में डिजिटल दुनिया के अनुकूल संशोधन करना।
3. परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण धाराएँ (High-Yielding Sections for Exams)
यहां उन धाराओं का संपूर्ण वर्गीकरण है, जो सीधे सुमेलित (Match) करने या बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) के रूप में पूछी जाती हैं:
- धारा 43 (Section 43): बिना अनुमति के कंप्यूटर प्रणाली तक पहुंचना, डेटा डाउनलोड करना या कंप्यूटर में वायरस (Virus) डालना। इसके लिए भारी जुर्माने (Penalty) और मुआवजे (Compensation) का प्रावधान है।
- धारा 43A (Section 43A): संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा (Sensitive Personal Data) की सुरक्षा करने में विफलता। (कॉरपोरेट निकायों पर लागू)।
- धारा 65 (Section 65): कंप्यूटर स्रोत दस्तावेजों (Computer Source Documents) के साथ छेड़छाड़ करना। (3 साल तक की सजा या 2 लाख रुपये जुर्माना)।
- धारा 66 श्रृंखला (Section 66 Series) - कंप्यूटर से संबंधित अपराध (Computer Related Offences):
- धारा 66 (Section 66): कंप्यूटर हैकिंग (Hacking) या कंप्यूटर संसाधनों का उपयोग करके बेईमानी (Dishonestly) से कार्य करना।
- धारा 66B (Section 66B): चुराए गए कंप्यूटर संसाधन या संचार उपकरण को बेईमानी से प्राप्त करना (Receiving stolen computer resource)।
- धारा 66C (Section 66C): पहचान की चोरी (Identity Theft) - जैसे किसी का पासवर्ड या डिजिटल हस्ताक्षर चुराना।
- धारा 66D (Section 66D): कंप्यूटर संसाधन का उपयोग करके प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी (Cheating by personation)।
- धारा 66E (Section 66E): निजता का उल्लंघन (Violation of Privacy) - जैसे किसी की निजी तस्वीरें खींचना या प्रकाशित करना।
- धारा 66F (Section 66F):साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism)। यह पूरे अधिनियम की सबसे कठोर धारा है, जिसमें आजीवन कारावास (Life Imprisonment) तक का प्रावधान है।
- धारा 67 (Section 67): इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री (Obscene Material) प्रकाशित या प्रेषित करना।
- धारा 70 (Section 70): संरक्षित प्रणाली (Protected System)। सरकार किसी भी कंप्यूटर प्रणाली को, जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, 'संरक्षित प्रणाली' घोषित कर सकती है। इसमें अनधिकृत प्रवेश पर 10 साल तक की जेल हो सकती है।
- धारा 79 (Section 79): मध्यस्थों के लिए सुरक्षित आश्रय (Safe Harbour for Intermediaries)। यह धारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे- Facebook, Twitter) को उनके यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए कानूनी देयता (Legal Liability) से छूट देती है, बशर्ते वे सरकार के दिशा-निर्देशों (IT Rules) का पालन करें।
आईटी एक्ट 2000 के संस्थागत ढांचे और उन्नत तथ्य (Institutional Framework & Advanced Facts of IT Act 2000) - एक्सक्लूसिव मास्टर टेबल
सामान्य पुस्तकों में आपको केवल धाराएँ मिलेंगी, लेकिन UPSC, State PCS और उच्च-स्तरीय पुलिस परीक्षाओं में इन धाराओं को लागू करने वाली नोडल एजेंसियों (Nodal Agencies) और न्यायाधिकरणों (Tribunals) से प्रश्न पूछे जाते हैं। यह मास्टर टेबल आपको प्रतिस्पर्धियों से "दो कदम आगे" रखेगी।
| संस्थागत निकाय / विषय (Institutional Body / Subject) | स्थापना का आधार (Statutory Basis) | मुख्य कार्य / अधिकार क्षेत्र (Core Function / Jurisdiction) | परीक्षा के लिए "हाई-यील्ड" तथ्य (High-Yield Exam Fact) |
|---|---|---|---|
| CERT-In (भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल - Indian Computer Emergency Response Team) | धारा 70B (Section 70B) | साइबर सुरक्षा घटनाओं (Cyber Security Incidents) पर प्रतिक्रिया देना और पूर्वानुमान लगाना। | यह भारत में हैकिंग और फ़िशिंग (Phishing) जैसे साइबर हमलों से निपटने के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी (National Nodal Agency) है, जो MeitY के अंतर्गत आती है। |
| NCIIPC (राष्ट्रीय महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना संरक्षण केंद्र - National Critical Information Infrastructure Protection Centre) | धारा 70A (Section 70A) | देश की महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना (Critical Information Infrastructure - CII) की सुरक्षा करना। | यह राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) के अधीन कार्य करता है। यह पावर ग्रिड, बैंकिंग नेटवर्क जैसे सेक्टरों की रक्षा करता है। |
| TDSAT (दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलीय न्यायाधिकरण - Telecom Disputes Settlement and Appellate Tribunal) | वित्त अधिनियम 2017 (Finance Act 2017) द्वारा संशोधित | आईटी एक्ट के तहत अधिनिर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) के फैसलों के खिलाफ अपील सुनना। | उन्नत तथ्य: पहले इसके लिए 'साइबर अपीलीय न्यायाधिकरण' (CyAT) था, लेकिन 2017 में CyAT का विलय TDSAT में कर दिया गया। |
| CCA (प्रमाणन प्राधिकरण नियंत्रक - Controller of Certifying Authorities) | धारा 17 (Section 17) | डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाणपत्र (Digital Signature Certificates) जारी करने वाली एजेंसियों को लाइसेंस देना और विनियमित करना। | भारत में डिजिटल हस्ताक्षरों (Digital Signatures) की प्रामाणिकता और पब्लिक की इंफ्रास्ट्रक्चर (Public Key Infrastructure - PKI) का शीर्ष नियंत्रक। |
| भारतीय साक्ष्य अधिनियम (Indian Evidence Act, 1872) में बदलाव | आईटी एक्ट की अनुसूची 2 (Schedule 2 of IT Act) | इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की स्वीकार्यता (Admissibility of Electronic Records)। | धारा 65B (Section 65B) जोड़ी गई, जिसके तहत कोर्ट में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (CCTV फुटेज, WhatsApp चैट) पेश करने के लिए एक विशेष प्रमाणपत्र (Certificate) अनिवार्य है। |
आईटी एक्ट की प्रमुख धाराओं को याद रखने की देसी ट्रिक (A 'Deshi' Trick to Remember Key IT Act Sections)
इस अधिनियम की धाराएं अक्सर कन्फ्यूज करती हैं। आइए, इन्हें याद रखने के लिए एक 'देसी' जुगाड़ (Deshi Trick) को देखते हैं, जो आपकी आगामी परीक्षाओं के लिए रामबाण साबित होंगे।
ट्रिक (The Trick):"43 वायरस, 66 हैकर, C से 'चोर', F से 'फाइट' (आतंक), 67 में गंदा काम, तो सरकार ने 69A से किया सब 'ब्लॉक' जाम!"
ट्रिक का डिकोडिंग (Decoding the Trick):
कल्पना करें कि एक साइबर अपराधी की कहानी चल रही है:
- 43 वायरस: धारा 43 (Section 43) = बिना अनुमति कंप्यूटर में वायरस (Virus) डालना या डेटा लेना।
- 66 हैकर: धारा 66 (Section 66) = कंप्यूटर हैकिंग (Computer Hacking)।
- C से 'चोर': धारा 66C (Section 66C) = पहचान की 'चोरी' (Identity Theft - C फॉर चोरी/Chori)।
- F से 'फाइट' (आतंक): धारा 66F (Section 66F) = देश के खिलाफ 'फाइट' या साइबर आतंकवाद (Cyber Terrorism - F फॉर फाइट/Fight)।
- 67 में गंदा काम: धारा 67 (Section 67) = अश्लील सामग्री (Obscene Material) भेजना।
- 69A से किया सब 'ब्लॉक': धारा 69A (Section 69A) = इन सब से बचने के लिए सरकार द्वारा वेबसाइट/ऐप को ब्लॉक (Block) करना।
आईटी एक्ट और साइबर सुरक्षा में समसामयिक घटनाएँ (Current Affairs in IT Act & Cyber Security)
परीक्षा में परीक्षक (Examiner) हमेशा स्टेटिक विषय (Static Subject) को करंट अफेयर्स से जोड़कर पूछता है। यहाँ पिछले 6-12 महीनों के कुछ अति-महत्वपूर्ण अपडेट्स (Crucial Updates) दिए गए हैं:
- सट्टेबाजी ऐप्स पर प्रतिबंध (Ban on Betting Apps): हाल ही में, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology - MeitY) ने धारा 69A (Section 69A) का ही प्रयोग करते हुए अवैध अपतटीय सट्टेबाजी मंचों (Illegal Offshore Betting Platforms) और महादेव बेटिंग ऐप (Mahadev Betting App) जैसे कई ऐप्स को भारत में ब्लॉक कर दिया है।
- डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 (Digital Personal Data Protection Act - DPDP Act, 2023): भारत सरकार ने डेटा प्राइवेसी (Data Privacy) के लिए यह नया कानून पारित किया है। इसके लागू होने के बाद, पुराने आईटी एक्ट की धारा 43A (Section 43A) (जो कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा डेटा सुरक्षित न रखने पर मुआवजे की बात करती थी) को समाप्त (Omit) कर दिया गया है। अब डेटा उल्लंघनों (Data Breaches) पर जुर्माना DPDP एक्ट के तहत लगेगा, जो 250 करोड़ रुपये तक हो सकता है।
- नया दूरसंचार अधिनियम (New Telecommunications Act, 2023): यह नया अधिनियम 138 साल पुराने 'भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम, 1885' (Indian Telegraph Act, 1885) की जगह ले चुका है। सार्वजनिक आपातकाल (Public Emergency) या सार्वजनिक सुरक्षा (Public Safety) के हित में सरकार द्वारा जो 'इंटरनेट शटडाउन' (Internet Shutdown) किया जाता है, उसके नियम अब इस नए अधिनियम के तहत संचालित होंगे।
- डीपफेक (Deepfake) पर सरकारी एडवाइजरी: भारत सरकार ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 'डीपफेक' (AI द्वारा निर्मित फर्जी वीडियो) को रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि डीपफेक बनाना और फैलाना आईटी एक्ट की धारा 66D (Section 66D) (कंप्यूटर का उपयोग करके प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी) के तहत एक दंडनीय अपराध (Punishable Offence) है।
आपके लिए आज का सवाल (Today's question for you)
अपनी तैयारी का स्तर और बेहतर करने के लिए इस प्रश्न का उत्तर नीचे कमेंट बॉक्स (Comment Box) में दें।
प्रश्न (Question): निम्नलिखित कथनों पर विचार करें और असत्य कथन का चयन करें: (Consider the following statements and select the incorrect statement:)
- (A) आईटी एक्ट 2000, UNCITRAL मॉडल कानून पर आधारित है। (IT Act 2000 is based on the UNCITRAL model law.)
- (B) धारा 66F साइबर आतंकवाद से संबंधित है, जिसमें आजीवन कारावास का प्रावधान है। (Section 66F deals with cyber terrorism, which carries a provision for life imprisonment.)
- (C) श्रेया सिंघल मामले के बाद, सरकार किसी भी वेबसाइट को ब्लॉक करने की अपनी शक्ति पूरी तरह खो चुकी है। (After the Shreya Singhal case, the government has completely lost its power to block any website.)
- (D) CERT-In भारत में साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटने के लिए राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है। (CERT-In is the national nodal agency for responding to cyber security incidents in India.)
- (E) उपर्युक्त में से कोई नहीं (None of the above)
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
क्या वीपीएन का उपयोग करके ब्लॉक की गई वेबसाइट को चलाना आईटी एक्ट के तहत गैरकानूनी है?
भारत में वीपीएन का उपयोग करना अपने आप में गैरकानूनी नहीं है, लेकिन इसका उपयोग करके धारा 69A के तहत ब्लॉक की गई किसी भी वेबसाइट या कंटेंट तक पहुंचना और उसे डाउनलोड करना या फैलाना कानूनी दायरे में अपराध माना जा सकता है। सरकार ऐसी गतिविधियों को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा मान सकती है और संबंधित व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
क्या कोई आम नागरिक किसी आपत्तिजनक पोस्ट या वेबसाइट को ब्लॉक करने के लिए सीधे धारा 69A का इस्तेमाल कर सकता है?
नहीं, कोई भी आम नागरिक सीधे तौर पर किसी इंटरनेट कंटेंट या वेबसाइट को ब्लॉक नहीं कर सकता। धारा 69A की शक्ति केवल केंद्र सरकार या उसके द्वारा अधिकृत नोडल अधिकारियों के पास सुरक्षित है। आम नागरिक नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिस पर जांच के बाद सरकार उचित कदम उठाती है।
आईटी एक्ट की धारा 66A और धारा 69A में मुख्य अंतर क्या है और श्रेया सिंघल केस क्यों अहम है?
धारा 66A ऑनलाइन आपत्तिजनक मैसेज भेजने पर सजा का प्रावधान करती थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 के श्रेया सिंघल केस में नागरिकों की बोलने की आजादी का हनन मानते हुए असंवैधानिक घोषित कर दिया। वहीं, धारा 69A सरकार को देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक वेबसाइट्स और इंटरनेट कंटेंट को ब्लॉक करने का अधिकार देती है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने वैध माना है क्योंकि इसमें देश हित शामिल है।
