नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 14 तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- ई-गवर्नेंस (E-Governance)
- ई-बैंकिंग और वित्तीय उपकरण (E-banking and Financial Tools)
- ब्लॉकचेन तकनीक (Blockchain Technology)
📌 महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सारणी (Important Notice & Schedule)
UPSSSC Lower PCS और आगामी परीक्षाओं के संपूर्ण Computer Syllabus को कवर करने के लिए हमने कुल 18 Practice Sets का एक विशेष प्लान तैयार किया है।
- शुरुआत और समापन (Schedule): यह प्रैक्टिस सेट सीरीज 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 20 अगस्त तक नियमित रूप से चलेगी।
- लक्ष्य (Goal): चूंकि आपका UPSSSC Lower PCS का एग्जाम 23 अगस्त को होना तय है, इसलिए हम 20 अगस्त तक पूरा सिलेबस समाप्त कर देंगे। इससे आपको परीक्षा से ठीक पहले 2-3 दिन खुद से अंतिम रिवीजन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन इस 👉 सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
- 'मेघराज' भारत सरकार की राष्ट्रीय क्लाउड पहल है जिसका उद्देश्य सरकारी विभागों के लिए क्लाउड कंप्यूटिंग सेवाओं की आपूर्ति को सुगम बनाना है।
- यह केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर एज़ ए सर्विस (IaaS) मॉडल प्रदान करता है और प्लेटफॉर्म एज़ ए सर्विस (PaaS) का समर्थन नहीं करता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य देश में ई-सेवाओं के वितरण में गति लाना और आईसीटी (ICT) पर होने वाले सरकारी व्यय को अनुकूलित करना है।
कथन I और III पूर्णतः सही हैं, जबकि कथन II गलत है। 'मेघराज' (GI Cloud) इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा शुरू की गई एक राष्ट्रीय क्लाउड पहल है।
- कथन II क्यों गलत है: मेघराज क्लाउड केवल IaaS तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्लाउड सेवा के तीनों प्रमुख मॉडलों—IaaS (इन्फ्रास्ट्रक्चर एज़ ए सर्विस), PaaS (प्लेटफॉर्म एज़ ए सर्विस), और SaaS (सॉफ्टवेयर एज़ ए सर्विस) की सुविधा प्रदान करता है, जिससे विभिन्न सरकारी विभाग अपने अनुप्रयोगों (Applications) को सरलता से विकसित और होस्ट कर सकें।
- कथन I और III क्यों सही हैं: इसका मुख्य उद्देश्य पूरे देश में सरकारी सेवाओं के डिजिटल वितरण को तीव्र बनाना, आईटी संसाधनों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना और अलग-अलग हार्डवेयर खरीद की लागत को कम करना है।
परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य:
- संचालन एजेंसी: राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) इस क्लाउड अवसंरचना का मुख्य कार्यान्वयनकर्ता है।
- क्लाउड सेवा मॉडल:
- IaaS: स्टोरेज, सर्वर और नेटवर्किंग संसाधन उपलब्ध कराना।
- PaaS: डेवलपर्स को डेटाबेस और एप्लिकेशन रन-टाइम वातावरण उपलब्ध कराना।
- SaaS: तैयार ई-गवर्नेंस वेब एप्लिकेशन और सेवाएँ प्रदान करना।
अभिकथन (A): ब्लॉकचेन नेटवर्क पर निष्पादित होने वाले स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स (Smart Contracts) में लेन-देन के सत्यापन हेतु किसी तीसरे पक्ष या मध्यस्थ (Intermediary) की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
कारण (R): स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स स्व-निष्पादित (Self-executing) प्रोग्राम कोड होते हैं, जो पूर्व-निर्धारित नियम और शर्तें पूरी होने पर ब्लॉकचेन के वितरित लेजर (Distributed Ledger) पर स्वतः लागू हो जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में सही विकल्प का चयन कीजिए:||अभिकथन (A) सही है, परंतु कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, परंतु कारण (R) सही है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, परंतु कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या करता है।|इनमें से कोई नहीं||D||
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या प्रस्तुत करता है।
व्याख्या: ब्लॉकचेन तकनीक में 'स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट' कंप्यूटर प्रोटोकॉल या प्रोग्राम कोड होते हैं जिनमें अनुबंध की सभी शर्तें डिजिटल रूप में लिखी होती हैं। जब नेटवर्क पर कोई निर्धारित शर्त (जैसे भुगतान की पुष्टि या डिलीवरी का समय) पूरी होती है, तो यह कोड बिना किसी बैंक, वकील या सरकारी मध्यस्थ के स्वतः निष्पादित हो जाता है।
पारंपरिक बनाम स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट तुलना:
| विशेषता | पारंपरिक अनुबंध (Traditional Contract) | स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट (Smart Contract) |
|---|---|---|
| मध्यस्थ (Intermediary) | वकील/बैंक/नोटरी की अनिवार्य आवश्यकता | किसी मध्यस्थ की आवश्यकता नहीं |
| निष्पादन गति | मैन्युअल सत्यापन के कारण धीमी | प्रोग्राम कोड द्वारा तात्कालिक (Instant) |
| पारदर्शिता व सुरक्षा | छेड़छाड़ की संभावना | ब्लॉकचेन पर अपरिवर्तनीय (Immutable) |
अतिरिक्त परीक्षा तथ्य:
- 'स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट' शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1994 में कंप्यूटर वैज्ञानिक निक स्ज़ाबो (Nick Szabo) द्वारा किया गया था।
- एथेरियम (Ethereum) सबसे लोकप्रिय ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म है जो 'सॉलिडिटी' (Solidity) प्रोग्रामिंग भाषा के माध्यम से स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स का निर्माण करता है।
सही उत्तर 'इनमें से कोई नहीं' है, क्योंकि वास्तविक IFSC कोड 11 वर्णों (Characters) का एक अल्फ़ान्यूमेरिक कोड होता है और इसका पाँचवाँ वर्ण हमेशा '0' (शून्य) होता है, जो दिए गए विकल्पों 1, 2, 3 और 4 में से किसी में भी सही रूप से उपस्थित नहीं है।
- विकल्प 1 गलत है: क्योंकि 9 अंकों का कोड MICR (Magnetic Ink Character Recognition) होता है, IFSC नहीं।
- विकल्प 2 गलत है: क्योंकि पाँचवाँ वर्ण '1' नहीं बल्कि '0' (शून्य) होता है।
- विकल्प 3 व 4 गलत हैं: क्योंकि कोड की कुल लंबाई 12 या 10 वर्ण नहीं, अपितु 11 वर्ण होती है।
IFSC कोड की 11-वर्णीय संरचना:
- प्रथम 4 अक्षर (Alphabetic): बैंक के नाम को दर्शाते हैं (जैसे-
SBIN= State Bank of India)। - 5वाँ वर्ण: हमेशा संख्यात्मक '0' (शून्य) होता है, जिसे भविष्य के उपयोग के लिए सुरक्षित रखा गया है।
- अंतिम 6 वर्ण (Alphanumeric): बैंक की विशिष्ट शाखा (Branch) की पहचान कराते हैं।
| सूची-I | सूची-II |
|---|---|
| a. आरटीजीएस (RTGS) | I. बैच-आधारित निपटान (Half-hourly batches) प्रणाली |
| b. एनईएफटी (NEFT) | II. आधार संख्या और बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/आइरिस) प्रमाणीकरण पर आधारित |
| c. आईएमपीएस (IMPS) | III. न्यूनतम ₹2 लाख की उच्च-मूल्य तात्कालिक सकल निपटान प्रणाली |
| d. एईपीएस (AePS) | IV. एनपीसीआई (NPCI) द्वारा संचालित 24×7 तात्कालिक खुदरा फंड ट्रांसफर |
सही सुमेलन a-III, b-I, c-IV, d-II है।
- (a) RTGS (Real Time Gross Settlement): यह बड़े लेन-देन के लिए रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित प्रणाली है जिसमें न्यूनतम लेन-देन सीमा ₹2 लाख है और इसमें फंड का ट्रांसफर व्यक्तिगत आधार पर बिना किसी देरी के वास्तविक समय (Real-time) में होता है।
- (b) NEFT (National Electronic Funds Transfer): यह आस्थगित शुद्ध निपटान (DNS) के तहत प्रत्येक आधे घंटे के बैचों में काम करता है। इसमें न्यूनतम या अधिकतम राशि की कोई बाध्यकारी सीमा नहीं है।
- (c) IMPS (Immediate Payment Service): भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा 2010 में शुरू की गई यह सेवा मोबाइल और नेट बैंकिंग के जरिए 24×7 तात्कालिक खुदरा अंतर-बैंक फंड ट्रांसफर सुनिश्चित करती है।
- (d) AePS (Aadhaar Enabled Payment System): यह माइक्रो-एटीएम और बैंक मित्रों के माध्यम से आधार नंबर और बायोमेट्रिक सत्यापन का उपयोग करके वित्तीय समावेशन को सक्षम बनाता है।
भुगतान प्रणालियों की प्रमुख तुलना:
| प्रणाली | प्रारंभ वर्ष | नियामक/प्रबंधक | निपटान का प्रकार | न्यूनतम सीमा |
|---|---|---|---|---|
| RTGS | 2004 | RBI | रियल टाइम (Gross) | ₹2,00,000 |
| NEFT | 2005 | RBI | 30 मिनट के बैच (DNS) | कोई सीमा नहीं |
| IMPS | 2010 | NPCI | तात्कालिक (Instant) | ₹1 |
| AePS | 2016 | NPCI | बायोमेट्रिक आधारित | ₹1 |
विकल्प 4 सही सुमेलित नहीं है (अतः यह सही उत्तर है), क्योंकि डिजीलॉकर (DigiLocker) केवल आयकर रिटर्न या ई-पैन तक सीमित नहीं है।
- डिजीलॉकर (DigiLocker) का वास्तविक कार्य: यह भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत एक प्रमुख क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म है, जो नागरिकों को ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन आरसी, शैक्षणिक अंकपत्र, जन्म प्रमाण पत्र, पैन कार्ड सहित विभिन्न प्रकार के आधिकारिक दस्तावेजों को डिजिटल रूप में जारी करने, संग्रहीत करने और इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन (e-Verification) की सुविधा प्रदान करता है। इसमें प्रत्येक उपयोगकर्ता को 1 GB का निःशुल्क क्लाउड स्टोरेज मिलता है।
- अन्य विकल्प क्यों सही हैं:
- भाषिनी (BHASHINI - Bhasha Interface for India): MeitY द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय AI पोर्टल है, जिसका उद्देश्य भाषाई बाधाओं को दूर करना और भारतीय भाषाओं में डिजिटल सामग्री व अनुवाद उपलब्ध कराना है।
- ई-संजीवनी (eSanjeevani): स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है।
- स्वामित्व (SVAMITVA): पंचायती राज मंत्रालय की ड्रोन आधारित मैपिंग योजना है जो ग्रामीण संपत्तियों के कानूनी अधिकार पत्र (Property Cards) प्रदान करती है।
- ब्लॉकचेन में प्रत्येक नया ब्लॉक अपने पूर्ववर्ती (Previous) ब्लॉक के 'क्रिप्टोग्राफिक हैश' (Cryptographic Hash) से सुरक्षित रूप से जुड़ा होता है।
- ब्लॉकचेन नेटवर्क 'सर्वसम्मति तंत्र' (Consensus Mechanism) जैसे प्रूफ़-ऑफ़-वर्क (PoW) या प्रूफ़-ऑफ़-स्टेक (PoS) का उपयोग करके डेटा की सत्यता प्रमाणित करता है।
- ब्लॉकचेन एक केंद्रीकृत सर्वर आर्किटेक्चर पर कार्य करता है जहाँ एक केंद्रीय व्यवस्थापक (Central Admin) सभी लेन-देन को संशोधित कर सकता है।
कथन I और II सही हैं, जबकि कथन III पूरी तरह से गलत है।
- कथन III क्यों गलत है: ब्लॉकचेन तकनीक की मूल विशेषता इसका विकेंद्रीकृत (Decentralized) और पीयर-टू-पीयर (P2P) नेटवर्क होना है। इसमें कोई केंद्रीय सर्वर या केंद्रीय व्यवस्थापक (Central Administrator) नहीं होता है। एक बार डेटा ब्लॉक में दर्ज हो जाने के बाद, उसे बदला या हटाया नहीं जा सकता; इसे डेटा की 'अपरिवर्तनीयता' (Immutability) कहा जाता है।
- कथन I क्यों सही है: प्रत्येक ब्लॉक में डेटा, स्वयं का हैश और पिछले ब्लॉक का हैश निहित होता है। यह हैश-लिंकिंग एक अटूट श्रृंखला बनाती है, जिससे डेटा में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर पूरी श्रृंखला अमान्य हो जाती है।
- कथन II क्यों सही है: नेटवर्क के सभी नोड्स (Nodes) के बीच नए लेन-देन की वैधता पर सहमति बनाने के लिए सर्वसम्मति एल्गोरिदम (जैसे बिटकॉइन में Proof of Work और आधुनिक नेटवर्क्स में Proof of Stake) का उपयोग किया जाता है।
ब्लॉकचेन के तीन मुख्य स्तंभ:
- विकेंद्रीकरण (Decentralization): नियंत्रण किसी एक संस्था के हाथ में न होकर सभी प्रतिभागियों में वितरित होता है।
- पारदर्शिता (Transparency): बहीखाता (Ledger) नेटवर्क के सभी नोड्स पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है।
- अपरिवर्तनीयता (Immutability): क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग (जैसे SHA-256) के कारण दर्ज डेटा को बदला नहीं जा सकता।
सही उत्तर 'इनमें से कोई नहीं' है, क्योंकि डिजिटल हस्ताक्षर सार्वजनिक कुंजी अवसंरचना (Public Key Infrastructure - PKI) और असममित कुंजी क्रिप्टोग्राफी (Asymmetric Key Cryptography) तकनीक पर कार्य करते हैं, जो दिए गए विकल्पों 1, 2, 3 और 4 में शामिल नहीं है।
- विकल्प 1 गलत है: सिमेट्रिक (सममित) क्रिप्टोग्राफी में डेटा को एन्क्रिप्ट और डिक्रिप्ट करने के लिए एक ही कुंजी (Secret Key) का उपयोग होता है, जो डिजिटल हस्ताक्षर की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता।
- विकल्प 2 गलत है: सिंगल प्राइवेट-की नहीं बल्कि 'पब्लिक-प्राइवेट की-पेयर' (Key Pair) का उपयोग होता है।
- विकल्प 3 व 4 गलत हैं: डिजिटल हस्ताक्षर एक-तरफ़ा सुरक्षित हैश फ़ंक्शन (जैसे SHA-2) और एन्क्रिप्शन का संयोजन होते हैं।
डिजिटल हस्ताक्षर और असममित एन्क्रिप्शन के मुख्य घटक:
- प्राइवेट की (Private Key): यह केवल प्रेषक/हस्ताक्षरकर्ता के पास सुरक्षित रहती है और इसका उपयोग दस्तावेज़ पर डिजिटल हस्ताक्षर करने (हस्ताक्षर निर्माण) के लिए किया जाता है।
- पब्लिक की (Public Key): यह सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होती है और इसका उपयोग कोई भी प्राप्तकर्ता हस्ताक्षर की प्रामाणिकता को सत्यापित (Verification) करने के लिए करता है।
- कानूनी प्रावधान: भारत में IT Act, 2000 की धारा 3 और 3A डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षरों की कानूनी मान्यता से संबंधित है, जिसका नियमन 'प्रमाणीकरण प्राधिकारी नियंत्रक' (Controller of Certifying Authorities - CCA) द्वारा किया जाता है।
सही उत्तर ISO 20022 है। यह इलेक्ट्रॉनिक डेटा इंटरचेंज के लिए एक अंतरराष्ट्रीय बहु-आयामी मैसेजिंग मानक है जिसका उपयोग वैश्विक वित्तीय सेवा उद्योग (भुगतान, प्रतिभूतियाँ, व्यापार और क्रेडिट कार्ड) में किया जा रहा है।
- विकल्प 3 क्यों सही है: ISO 20022 वित्तीय संदेशों के लिए XML (eXtensible Markup Language) आधारित एक आधुनिक मानक संरचना प्रदान करता है। पारंपरिक स्विफ्ट (SWIFT MT) संदेशों की तुलना में यह काफी अधिक डेटा, गैर-लैटिन वर्णमाला और समृद्ध वित्तीय मेटाडेटा ले जाने में सक्षम है, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक लगाने में सहायता मिलती है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने भी अपने RTGS और NEFT सिस्टम को ISO 20022 पर अपग्रेड किया है।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- ISO 9001: गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (Quality Management System) का मानक है।
- ISO 27001: सूचना सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली (ISMS) से संबंधित सुरक्षा मानक है।
- ISO 14001: पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली (Environmental Management) का मानक है।
पारंपरिक SWIFT MT बनाम ISO 20022 MX की तुलना:
| मानक | डेटा प्रारूप (Format) | डेटा क्षमता | लचीलापन व वैश्विक स्वीकार्यता |
|---|---|---|---|
| SWIFT MT (विरासत) | टेक्स्ट आधारित (अनसंरचित) | सीमित वर्ण (Character Limit) | सीमित अंतर-संचालनीयता |
| ISO 20022 (MX) | XML आधारित (संरचित) | अत्यधिक समृद्ध और विस्तृत डेटा | वैश्विक स्तर पर सभी नेटवर्कों में निर्बाध |
फास्टैग (FASTag) मुख्य रूप से रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID - Radio Frequency Identification) तकनीक पर आधारित एक पैसिव डिवाइस (Passive Tag) है।
- विकल्प 1 क्यों सही है: फास्टैग वाहन की विंडस्क्रीन (Windshield) पर चिपकाया जाता है। इसमें एक निष्क्रिय (Passive) RFID चिप और एंटीना लगा होता है। जब वाहन टोल प्लाजा के पास पहुँचता है, तो टोल लेन पर लगा RFID रीडर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के माध्यम से टैग को सक्रिय करता है और बिना वाहन रोके सीधे लिंक किए गए बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट से टोल राशि काट लेता है।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं: BLE (ब्लूटूथ), IrDA (इन्फ्रारेड) या सैटेलाइट ट्रांसपोंडर का उपयोग स्वचालित टोलिंग के फास्टैग आर्किटेक्चर में नहीं किया जाता है।
फास्टैग से संबंधित महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य:
- प्रचालन आवृत्ति (Frequency Band): भारत में FASTag 865 MHz से 867 MHz के अल्ट्रा-हाई फ्रीक्वेंसी (UHF) बैंड पर कार्य करता है।
- नियामक ढाँचा: इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा NETC (National Electronic Toll Collection) कार्यक्रम के तहत प्रबंधित किया जाता है।
- EPC (Electronic Product Code): प्रत्येक फास्टैग में एक अद्वितीय 24-अंकीय EPC कोड संगृहीत होता है जो वाहन के चेसिस नंबर और बैंक खाते से जुड़ा होता है।
- राज्यव्यापी क्षेत्र नेटवर्क (SWAN - State Wide Area Network)
- राज्य डेटा केंद्र (SDC - State Data Centre)
- सामान्य सेवा केंद्र (CSC - Common Services Centres)
कथन I, II और III तीनों NeGP (National e-Governance Plan) की कोर अवसंरचना के अनिवार्य घटक हैं। भारत सरकार ने ई-गवर्नेंस सेवाओं को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने के लिए इस त्रि-स्तरीय वास्तुकला (3-Tier Architecture) को डिज़ाइन किया था।
- कथन I (SWAN): यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ब्लॉक स्तर तक 24×7 उच्च-गति डेटा, वॉयस और वीडियो कनेक्टिविटी प्रदान करने वाला सुरक्षित सरकारी नेटवर्क है।
- कथन II (SDC): यह राज्य स्तर पर सभी ई-गवर्नेंस अनुप्रयोगों, वेबसाइटों और डेटाबेस को सुरक्षित रूप से होस्ट करने वाला केंद्रीय रिपॉजिटरी/सर्वर वातावरण है।
- कथन III (CSC): यह ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिकों को डिजिटल एवं वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने वाला भौतिक फ्रंट-एंड डिलीवरी पॉइंट (कियोस्क) है, जिसे पीपीपी (PPP) मॉडल पर चलाया जाता है।
NeGP के 3 प्रमुख अवसंरचनात्मक स्तंभ:
- SDC (राज्य डेटा केंद्र): डेटा व एप्लिकेशन सुरक्षित होस्टिंग
- SWAN (राज्यव्यापी नेटवर्क): ब्लॉक स्तर तक सुरक्षित नेटवर्किंग
- CSC (सामान्य सेवा केंद्र): अंतिम छोर तक नागरिक सेवा वितरण
अतिरिक्त परीक्षा तथ्य:
- NeGP को मई 2006 में 27 मिशन मोड परियोजनाओं (MMPs) के साथ अनुमोदित किया गया था, जिन्हें बाद में 'डिजिटल इंडिया' (2015) कार्यक्रम के तहत समाहित कर और अधिक विस्तारित किया गया।
विकल्प 2 पूर्णतः सत्य है। 'मर्कल ट्री' (जिसका आविष्कार 1979 में राल्फ मर्कल द्वारा किया गया था) ब्लॉकचेन की क्रिप्टोग्राफिक संरचना का एक बुनियादी आधार है।
- व्याख्या: एक ब्लॉक में हजारों अलग-अलग लेन-देन हो सकते हैं। मर्कल ट्री इन सभी लेन-देनों को नीचे से ऊपर (Bottom-up) की ओर दो-दो के जोड़े में हैश करता है, जिससे अंततः एक अकेला सर्वोच्च हैश प्राप्त होता है, जिसे मर्कल रूट (Merkle Root) कहा जाता है।
- दक्षता एवं सुरक्षा लाभ: इस मर्कल रूट को ब्लॉक के हेडर (Block Header) में संगृहीत किया जाता है। इससे किसी भी नोड को पूरे ब्लॉक का डेटा डाउनलोड किए बिना केवल लघु क्रिप्टोग्राफिक प्रमाण द्वारा O(log N) समय जटिलता में किसी विशिष्ट लेन-देन की वैधता जाँचने की सुविधा मिलती है (जिसे SPV - Simplified Payment Verification कहा जाता है)।
- अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
- मर्कल ट्री का ऊर्जा खपत (बिजली) समाप्त करने से कोई संबंध नहीं है।
- यह लेजर को केंद्रीकृत नहीं करता, बल्कि विकेंद्रीकृत सत्यापन को गति प्रदान करता है।
- यह कोई हार्डवेयर घटक नहीं, अपितु एक डेटा संरचना (Data Structure) है।
इस प्रकार की वित्तीय धोखाधड़ी को सलामी स्लाइसिंग अटैक (Salami Slicing Attack) या 'सलामी धोखाधड़ी' कहा जाता है।
- कार्यप्रणाली: यह नाम 'सलामी' (एक प्रकार का मांस) के बहुत पतले-पतले टुकड़े काटने के सादृश्य पर रखा गया है। इस हमले में साइबर अपराधी कोर बैंकिंग सिस्टम या वित्तीय लेनदेन सॉफ्टवेयर के राउंडिंग-ऑफ एल्गोरिदम (Rounding logic) में सूक्ष्म हेरफेर करते हैं। प्रत्येक लेनदेन से कटी राशि इतनी नगण्य (जैसे ₹0.05 या ₹0.10) होती है कि व्यक्तिगत ग्राहक कभी इसकी शिकायत नहीं करते, परंतु लाखों लेन-देन के संचयन से अपराधी भारी मात्रा में अवैध धन इकट्ठा कर लेते हैं।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- बफ़र ओवरफ़्लो: मेमोरी आवंटन सीमा से अधिक डेटा लिखकर सिस्टम क्रैश या पेलोड निष्पादित करने की तकनीक है।
- DoS (Denial of Service): सर्वर पर अत्यधिक फर्जी ट्रैफिक भेजकर उसकी सेवाएं ठप करने का हमला है।
- MitM (Man-in-the-Middle): दो पक्षों के मध्य होने वाले संचार को बीच में ही इंटरसेप्ट और संशोधित करने का साइबर हमला है।
विकल्प 3 सही नहीं है (अतः यह सही उत्तर है), क्योंकि UPI 'पुश' (Push - Send Money) और 'पुल' (Pull - Collect/Request Money) दोनों प्रकार के लेन-देन का पूर्ण समर्थन करता है।
- पुश लेन-देन (Push): जब प्रेषक स्वयं धनराशि को किसी अन्य व्यक्ति या मर्चेंट के खाते में भेजता है।
- पुल लेन-देन (Pull / Collect Request): जब कोई प्राप्तकर्ता (जैसे कोई ई-कॉमर्स मर्चेंट या व्यक्ति) किसी अन्य UPI उपयोगकर्ता से एक निश्चित राशि का भुगतान करने का डिजिटल अनुरोध (Request) भेजता है।
- अन्य विकल्प क्यों सही हैं:
- विकल्प 1: UPI का बैकएंड कोर सेटलमेंट इंजन IMPS ही है।
- विकल्प 2: UPI में बैंक खाता संख्या और IFSC को उजागर करने की आवश्यकता नहीं होती; इसके स्थान पर VPA (जैसे-
username@upi) का उपयोग होता है। - विकल्प 4: इसमें डिवाइस बाइंडिंग (पहला कारक) और गुप्त UPI PIN (दूसरा कारक) के माध्यम से सुदृढ़ 2-कारक प्रमाणीकरण प्रदान किया जाता है।
UPI की प्रमुख उन्नत विशेषताएँ (UPI 2.0 & New Features):
- UPI AutoPay: आवर्ती भुगतानों (OTT सब्सक्रिप्शन, बिजली बिल, EMI) के लिए ई-मेंडेट सुविधा।
- UPI Lite: छोटे भुगतानों (₹500 तक) के लिए बिना UPI PIN के तात्कालिक ऑफलाइन वॉलेट निपटान।
- Single-Block-Multi-Debit: आईपीओ (IPO) और ई-कॉमर्स हेतु राशि ब्लॉक कर बाद में वास्तविक डिलीवरी पर आंशिक डेबिट की सुविधा।
सही उत्तर 'इनमें से कोई नहीं' है, क्योंकि भारत सरकार द्वारा पेंशनभोगियों के लिए संचालित आधिकारिक योजना और पोर्टल का नाम 'जीवन प्रमाण' (Jeevan Pramaan) है, जो दिए गए विकल्पों 1, 2, 3 और 4 में शामिल नहीं है।
- 'जीवन प्रमाण' (Jeevan Pramaan) का परिचय: इसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा नवंबर 2014 में लॉन्च किया गया था। यह केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और अन्य सरकारी संगठनों के 1 करोड़ से अधिक पेंशनभोगियों के लिए एक आधार-सक्षम डिजिटल सेवा है।
- कार्यप्रणाली:
- इसके अंतर्गत पेंशनभोगी अपने स्मार्टफोन (फेस ऑथेंटिकेशन ऐप द्वारा), कंप्यूटर या नजदीकी सीएससी (CSC) केंद्र पर जाकर आधार बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/आइरिस/चेहरा) के माध्यम से अपना डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र (DLC - Digital Life Certificate) ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
- उत्पन्न प्रमाण पत्र स्वतः ही संबंधित पेंशन संवितरण प्राधिकारी (PDA - जैसे बैंक, कोषागार या डाकघर) के पास इलेक्ट्रॉनिक रूप में पहुँच जाता है।
- प्रमाण पत्र का भंडारण: जनरेट किया गया DLC 'जीवन प्रमाण रिपॉजिटरी' में सुरक्षित संग्रहीत होता है, जिसे पेंशन एजेंसियाँ किसी भी समय एक्सेस कर सकती हैं।
विकल्प 3 पूर्णतः सत्य है।
- विकल्प 3 क्यों सत्य है: प्राइवेट/एंटरप्राइज ब्लॉकचेन में केवल सीमित और पूर्व-सत्यापित नोड्स (Known Validators) भाग लेते हैं। इसमें भारी ऊर्जा खपत वाले प्रूफ़-ऑफ़-वर्क (PoW) की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि हल्के सर्वसम्मति तंत्र (जैसे Raft, PBFT) का उपयोग होता है। इसी कारण प्राइवेट ब्लॉकचेन में लेन-देन थ्रूपुट (Transactions Per Second - TPS) हजारों प्रति सेकंड तक पहुँच जाता है, जबकि बिटकॉइन (पब्लिक) की गति केवल 5–7 TPS तक सीमित होती है।
- अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
- विकल्प 1 गलत है: यह उल्टी परिभाषा है। पब्लिक ब्लॉकचेन में कोई भी शामिल हो सकता है (Permissionless), जबकि प्राइवेट में केवल अधिकृत संस्थाएं ही नोड चला सकती हैं (Permissioned)।
- विकल्प 2 गलत है: बिटकॉइन और एथेरियम 'पब्लिक ब्लॉकचेन' हैं, जबकि लिनक्स फाउंडेशन का 'हाइपरलेजर फैब्रिक' (Hyperledger Fabric) तथा R3 का 'कोर्डा' (Corda) प्रमुख 'एंटरप्राइज/प्राइवेट ब्लॉकचेन' फ्रेमवर्क हैं।
- विकल्प 4 गलत है: प्राइवेट ब्लॉकचेन भी डेटा की अखंडता के लिए क्रिप्टोग्राफिक हैशिंग (जैसे SHA-256) और डिजिटल हस्ताक्षरों का अनिवार्य उपयोग करती है।
पब्लिक बनाम प्राइवेट ब्लॉकचेन विस्तृत तुलना:
| तुलना का आधार | पब्लिक / अनुमति-रहित (Public Blockchain) | प्राइवेट / अनुमति-प्राप्त (Permissioned Blockchain) |
|---|---|---|
| भागीदारी (Access) | कोई भी व्यक्ति पढ़ और लिख सकता है | केवल अधिकृत और सत्यापित भागीदार |
| सर्वसम्मति तंत्र | भारी ऊर्जा खपत (PoW, PoS) | तीव्र और कुशल (PBFT, Raft, PoA) |
| लेन-देन गति (TPS) | धीमी (5 – 30 TPS) | अत्यंत तेज (2,000 – 10,000+ TPS) |
| प्रमुख उदाहरण | बिटकॉइन (Bitcoin), एथेरियम (Ethereum) | हाइपरलेजर फैब्रिक (Hyperledger), कोर्डा (Corda) |
| उपयुक्तता | सार्वजनिक क्रिप्टोकरेंसी | भूमि रिकॉर्ड, बैंक कंसोर्टियम, आपूर्ति श्रृंखला |
- 'MeghRaj' is the national cloud initiative of the Government of India aimed at facilitating the delivery of cloud computing services for government departments.
- It provides only Infrastructure as a Service (IaaS) model and does not support Platform as a Service (PaaS).
- Its primary objective is to accelerate the delivery of e-services in the country and optimize government ICT spending.
Assertion (A): In Smart Contracts executed on a blockchain network, the need for a third party or intermediary to verify transactions is eliminated.
Reason (R): Smart Contracts are self-executing program codes that automatically execute on the distributed ledger of a blockchain when pre-defined rules and conditions are met.
Select the correct option with reference to the statements above:||Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|None of the above||D||||Hard Q3||With reference to the Indian Financial System Code (IFSC), how many characters does this alphanumeric code consist of, and what is always the fifth character?||9 characters, fifth character '0' (zero)|11 characters, fifth character '1' (one)|12 characters, fifth character '0' (zero)|10 characters, fifth character 'Alphabet'|None of the above||E||||Easy Q4||Match List-I (Digital Payment System) with List-II (Key Feature/Technology):
| List-I | List-II |
|---|---|
| a. RTGS | I. Batch-based settlement (Half-hourly batches) system |
| b. NEFT | II. Based on Aadhaar number and biometric (fingerprint/iris) authentication |
| c. IMPS | III. High-value real-time gross settlement system with a minimum of ₹2 lakh |
| d. AePS | IV. 24×7 instant retail fund transfer managed by NPCI |
- In a blockchain, each new block is securely linked to the 'Cryptographic Hash' of its previous block.
- A blockchain network validates the authenticity of data using a 'Consensus Mechanism' such as Proof-of-Work (PoW) or Proof-of-Stake (PoS).
- A blockchain operates on a centralized server architecture where a central administrator can modify all transaction records.
- State Wide Area Network (SWAN)
- State Data Centre (SDC)
- Common Services Centres (CSC)
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 14
Practice Completed
All questions answered. Generate report?
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Analyzing performance...
Performance Report
निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
Thanks for Reading! / पढ़ने के लिए धन्यवाद! 🙏
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