नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 13 तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- बिग डेटा प्रोसेसिंग (Big Data Processing)
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
- वितरित और क्लाउड कंप्यूटिंग (Distributed & Cloud Computing)
- फॉग, एज और ग्रीन कंप्यूटिंग (Fog, Edge & Green Computing)
📌 महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सारणी (Important Notice & Schedule)
UPSSSC Lower PCS और आगामी परीक्षाओं के संपूर्ण Computer Syllabus को कवर करने के लिए हमने कुल 18 Practice Sets का एक विशेष प्लान तैयार किया है।
- शुरुआत और समापन (Schedule): यह प्रैक्टिस सेट सीरीज 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 20 अगस्त तक नियमित रूप से चलेगी।
- लक्ष्य (Goal): चूंकि आपका UPSSSC Lower PCS का एग्जाम 23 अगस्त को होना तय है, इसलिए हम 20 अगस्त तक पूरा सिलेबस समाप्त कर देंगे। इससे आपको परीक्षा से ठीक पहले 2-3 दिन खुद से अंतिम रिवीजन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन इस 👉 सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
अपाचे स्वूप (Apache Sqoop) एक कमांड-लाइन टूल है जिसका उपयोग अपाचे हडूप और रिलेशनल डेटाबेस सर्वर (जैसे MySQL, Oracle, Postgres, SQL Server) के बीच डेटा को स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है। 'Sqoop' शब्द "SQL-to-Hadoop" से मिलकर बना है। यह RDBMS से डेटा निकालकर HDFS, Hive या HBase में इम्पोर्ट करता है तथा वापस एक्सपोर्ट भी कर सकता है।
अन्य हडूप इकोसिस्टम टूल्स का विश्लेषण:
- अपाचे फ्लूम (Apache Flume): यह HDFS में बड़ी मात्रा में असंरचित और स्ट्रीम डेटा (जैसे वेब सर्वर लॉग्स, सोशल मीडिया फीड्स) को एकत्र करने और स्थानांतरित करने का सेवा टूल है।
- अपाचे ऊज़ी (Apache Oozie): यह एक वर्कफ़्लो शेड्यूलर (Workflow Scheduler) सिस्टम है जो हडूप जॉब्स (MapReduce, Pig, Hive) के निष्पादन का समयबद्ध प्रबंधन करता है।
- अपाचे ज़ूकीपर (Apache Zookeeper): यह डिस्ट्रीब्यूटेड अनुप्रयोगों के लिए एक केंद्रीकृत समन्वय सेवा (Coordination Service) प्रदान करता है जो कॉन्फ़िगरेशन प्रबंधन और सिंक्रोनाइज़ेशन संभालता है।
हडूप इकोसिस्टम कंपोनेंट तालिका:
| टूल/घटक | प्राथमिक कार्य | डेटा का प्रकार |
|---|---|---|
| Apache Sqoop | RDBMS और HDFS के बीच बल्क डेटा ट्रांसफर | संरचित डेटा (Structured) |
| Apache Flume | स्ट्रीमिंग लॉग्स का संग्रहण व ट्रांसफर | असंरचित/स्ट्रीम डेटा (Unstructured) |
| Apache Hive | SQL जैसी भाषा (HiveQL) द्वारा डेटा क्वेरी | डेटा वेयरहाउसिंग |
| Apache Pig | डेटा फ्लो स्क्रिप्टिंग (Pig Latin) | डेटा विश्लेषण व ट्रांसफ़ॉर्मेशन |
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि 'इंटरनेट ऑफ थिंग्स' (IoT) शब्द सर्वप्रथम केविन एशटन (Kevin Ashton) द्वारा वर्ष 1999 में गढ़ा गया था। उन्होंने P&G में एक प्रेजेंटेशन के दौरान आपूर्ति श्रृंखला में RFID तकनीक को इंटरनेट से जोड़ने की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए इस शब्द का प्रयोग किया था।
विकल्पों में दिए गए अन्य प्रसिद्ध कंप्यूटर विद्वानों का योगदान:
- विंट सर्फ (Vint Cerf): इन्हें बॉब काह्न के साथ संयुक्त रूप से "इंटरनेट का जनक" (Father of the Internet) माना जाता है; इन्होंने TCP/IP प्रोटोकॉल का आर्किटेक्चर तैयार किया था।
- टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee): इन्होंने 1989 में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW), HTML और HTTP का आविष्कार किया था।
- जॉन मैकार्थी (John McCarthy): इन्हें "कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जनक" (Father of AI) माना जाता है; इन्होंने 1956 में 'AI' शब्द गढ़ा और LISP भाषा बनाई।
- रे टॉमलिंसन (Ray Tomlinson): इन्होंने 1971 में नेटवर्क ईमेल की शुरुआत की और ईमेल एड्रेस में '@' चिन्ह के उपयोग की शुरुआत की।
महत्वपूर्ण तकनीकें और उनके संस्थापक सारणी:
| शब्द / तकनीक | संस्थापक / गढ़ने वाले | वर्ष |
|---|---|---|
| Internet of Things (IoT) | केविन एशटन (Kevin Ashton) | 1999 |
| World Wide Web (WWW) | टिम बर्नर्स-ली (Tim Berners-Lee) | 1989 |
| Artificial Intelligence | जॉन मैकार्थी (John McCarthy) | 1956 |
| TCP/IP Protocol | विंट सर्फ एवं बॉब काह्न | 1974 |
प्लेटफॉर्म एज़ ए सर्विस (PaaS) एक क्लाउड कंप्यूटिंग मॉडल है जो ग्राहकों को एप्लिकेशन विकसित करने, चलाने और प्रबंधित करने के लिए एक हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर प्लेटफ़ॉर्म (विकास पर्यावरण) प्रदान करता है। इसमें उपयोगकर्ता को केवल अपने कोड/एप्लिकेशन की चिंता करनी होती है; ऑपरेटिंग सिस्टम, सर्वर, नेटवर्क, और स्टोरेज का प्रबंधन क्लाउड प्रदाता द्वारा किया जाता है।
क्लाउड सर्विस मॉडल्स का तुलनात्मक विश्लेषण:
- Infrastructure as a Service (IaaS): यह वर्चुअलाइज़्ड कंप्यूटिंग संसाधन जैसे वर्चुअल मशीन (VMs), स्टोरेज और नेटवर्क प्रदान करता है। उपयोगकर्ता को OS और एप्लिकेशन दोनों प्रबंधित करने होते हैं। उदाहरण: AWS EC2, Azure VM, Google Compute Engine।
- Platform as a Service (PaaS): यह हार्डवेयर और ओएस के साथ रनटाइम एनवायरनमेंट प्रदान करता है। उदाहरण: Google App Engine, AWS Elastic Beanstalk, Heroku।
- Software as a Service (SaaS): यह इंटरनेट के माध्यम से सीधे अंत-उपयोगकर्ता (End-user) के लिए तैयार सॉफ़्टवेयर प्रदान करता है। उदाहरण: Google Workspace (Gmail/Docs), Microsoft 365, Salesforce।
क्लाउड सेवा मॉडलों में उत्तरदायित्व तालिका:
| क्लाउड मॉडल | उपयोगकर्ता द्वारा प्रबंधित | क्लाउड प्रदाता द्वारा प्रबंधित |
|---|---|---|
| IaaS | Applications, Data, Runtime, OS | Virtualization, Servers, Storage, Networking |
| PaaS | Applications, Data | OS, Runtime, Middleware, Servers, Storage |
| SaaS | केवल सॉफ़्टवेयर का उपयोग | संपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर, ओएस, कोड व डेटा सुरक्षा |
अभिकथन (A): स्वायत्त वाहनों (Self-driving Cars), रोबोटिक सर्जरी और स्मार्ट ग्रिड जैसे मिशन-क्रिटिकल अनुप्रयोगों में केंद्रीय क्लाउड कंप्यूटिंग की तुलना में एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) को प्राथमिकता दी जाती है।
कारण (R): एज कंप्यूटिंग डेटा प्रोसेसिंग को केंद्रीय क्लाउड डेटा सेंटर के बजाय डेटा स्रोत (सेंसर/डिवाइस) के बिल्कुल निकट स्थान पर ले आती है, जिससे नेटवर्क लैटेंसी (Network Latency) और बैंडविड्थ की खपत में अत्यधिक कमी आती है।
सही विकल्प का चयन कीजिए:||अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।|अभिकथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।|इनमें से कोई नहीं||A||
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सत्य हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही और तार्किक व्याख्या करता है।
- व्याख्या: स्वायत्त वाहनों (Self-Driving Cars) को सड़क की बाधाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए मिलीसेकंड से भी कम (Ultra-low Latency) समय की आवश्यकता होती है। यदि वाहन डेटा को दूर स्थित केंद्रीय क्लाउड सर्वर पर भेजेगा और प्रतिक्रिया का इंतज़ार करेगा, तो नेटवर्क विलंबता (Latency) के कारण दुर्घटना हो सकती है।
- एज कंप्यूटिंग (Edge Computing) डेटा प्रोसेसिंग को नेटवर्क के "किनारे" (Edge) पर स्थित स्थानीय उपकरणों (जैसे वाहन के ऑन-बोर्ड कंप्यूटर) में ही संपन्न कर देती है। इससे क्लाउड तक डेटा भेजने का राउंड-ट्रिप टाइम खत्म हो जाता है और बैंडविड्थ की बचत होती है।
क्लाउड, फॉग और एज कंप्यूटिंग में अंतर:
| मापदंड (Parameter) | एज कंप्यूटिंग (Edge) | फॉग कंप्यूटिंग (Fog) | क्लाउड कंप्यूटिंग (Cloud) |
|---|---|---|---|
| प्रोसेसिंग का स्थान | सीधे सेंसर/लोकल डिवाइस पर | लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) नोड्स पर | सुदूर स्थित विशाल डेटा सेंटर पर |
| विलंबता (Latency) | अत्यंत कम (Real-time, <1 ms) | कम (Low, 몇 ms) | उच्च (High, 100+ ms) |
| बैंडविड्थ आवश्यकता | न्यूनतम | मध्यम | अत्यधिक उच्च |
| सूची-I (IoT घटक/तकनीक) | सूची-II (विशेषता/अनुप्रयोग) |
|---|---|
| a. लोरावान (LoRaWAN) | i. कम बिजली और लंबी दूरी (Long Range) की वायरलेस कनेक्टिविटी |
| b. जाइरोस्कोप (Gyroscope) | ii. हल्का और कम बैंडविड्थ वाला पब्लिश-सब्सक्राइब संदेश प्रोटोकॉल |
| c. MQTT | iii. कोणीय वेग और घूर्णन (Rotation/Angular Velocity) को मापना |
| d. आरएफआईडी (RFID) | iv. रेडियो तरंगों द्वारा वस्तुओं की बिना स्पर्श किए ऑटोमैटिक पहचान |
सही सुमेलन इस प्रकार है: a-i, b-iii, c-ii, d-iv
- a. लोरावान (LoRaWAN) $\rightarrow$ i. कम बिजली और लंबी दूरी की कनेक्टिविटी: यह एक LPWAN (Low Power Wide Area Network) प्रोटोकॉल है जो कम बैटरी खपत के साथ कई किलोमीटर दूर तक IoT डेटा भेजने के लिए उपयोग किया जाता है।
- b. जाइरोस्कोप (Gyroscope) $\rightarrow$ iii. कोणीय वेग और घूर्णन को मापना: यह स्मार्टफ़ोन और IoT उपकरणों में डिवाइस के ओरिएंटेशन, कोणीय वेग और रोटेशन का पता लगाने वाला सेंसर है।
- c. MQTT $\rightarrow$ ii. हल्का पब्लिश-सब्सक्राइब प्रोटोकॉल: 'Message Queuing Telemetry Transport' एक अत्यंत हल्का मैसेजिंग प्रोटोकॉल है जो सीमित बैंडविड्थ और कम क्षमता वाले IoT उपकरणों में उपयोग होता है।
- d. आरएफआईडी (RFID) $\rightarrow$ iv. रेडियो तरंगों द्वारा पहचान: 'Radio Frequency Identification' का उपयोग टैग्स और पाठकों (Readers) के माध्यम से वस्तुओं व संपत्तियों की ऑटोमैटिक ट्रैकिंग (जैसे Fastag) में होता है।
IoT संचार प्रोटोकॉल तुलना तालिका:
| प्रोटोकॉल | आर्किटेक्चर प्रकार | ट्रांसमिशन रेंज | बैंडविड्थ / उपयोग |
|---|---|---|---|
| MQTT | Publish / Subscribe | IP-आधारित (इंटरनेट) | बहुत कम बैंडविड्थ, मशीन-टू-मशीन (M2M) |
| CoAP | Request / Response (UDP) | IP-आधारित (इंटरनेट) | सीमित (Constrained) IoT डिवाइसेस |
| LoRaWAN | स्टार टोपोलॉजी | लंबी दूरी (10-15 किमी) | स्मार्ट सिटी, कृषि सेंसर नेटवर्क |
| Zigbee | मेश टोपोलॉजी (Mesh) | छोटी दूरी (10-100 मीटर) | होम ऑटोमेशन |
कथन 3 पूर्णतः सत्य है। HDFS का आर्किटेक्चर मास्टर-स्लेव (Master-Slave) मॉडल पर आधारित होता है:
- नेमनोड (NameNode - Master Node): यह पूरे HDFS क्लस्टर का सेंट्रल मास्टर होता है। यह फाइल सिस्टम नामस्थान (Directory Tree), फाइलों को ब्लॉक में विभाजित करने के नियम और यह जानकारी कि कौन सा ब्लॉक किस डेटानोड पर स्थित है (Metadata), इसे अपनी RAM (Main Memory) में स्टोर और प्रबंधित करता है।
- डेटानोड (DataNode - Slave Nodes): ये क्लस्टर के स्लेव नोड्स होते हैं जो स्थानीय डिस्क (Hard Drives) पर वास्तविक डेटा ब्लॉक (Actual Data Blocks) को स्टोर करते हैं। ये नेमनोड के निर्देशों के आधार पर ब्लॉक निर्माण, विलोपन और रिप्लिकेशन का कार्य करते हैं।
असत्य कथनों का सुधार:
- कथन 1 गलत है: नेमनोड डेटा के बजाय केवल मेटाडेटा (Metadata) स्टोर करता है।
- कथन 2 गलत है: डायरेक्टरी ट्री और मेटाडेटा का प्रबंधन डेटानोड नहीं, बल्कि नेमनोड करता है।
- कथन 4 गलत है: HDFS को बिग डेटा (असंरचित जैसे वीडियो, ऑडियो, लॉग्स और संरचित दोनों) को स्टोर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
HDFS आर्किटेक्चर घटकों की तुलना:
| घटक (Component) | नोड का प्रकार | क्या संगृहीत करता है? | भंडारण माध्यम |
|---|---|---|---|
| NameNode | Master | मेटाडेटा (Metadata & Block Maps) | रैम (RAM) - उच्च गति हेतु |
| DataNode | Slave | वास्तविक डेटा ब्लॉक (Data Blocks) | स्थानीय डिस्क (HDD / SSD) |
| Secondary NameNode | Helper | नेमनोड की चेकपॉइंट फाइल्स (FsImage/EditLog) | डिस्क स्टोरेज |
ओवरक्लॉकिंग (Overclocking) सीपीयू या जीपीयू को उसकी फ़ैक्टरी-निर्धारित क्लॉक स्पीड से अधिक गति पर चलाने की प्रक्रिया है। ऐसा करने से प्रोसेसर अत्यधिक ऊर्जा की खपत करता है तथा अत्यधिक गर्मी (Heat) उत्पन्न करता है, जिसके लिए अतिरिक्त कूलिंग सिस्टम (जैसे लिक्विड कूलिंग) की आवश्यकता होती है। यह ग्रीन कंप्यूटिंग के सिद्धांतों के बिल्कुल विपरीत है।
ग्रीन कंप्यूटिंग (Green Computing) के मुख्य स्तंभ व उपाय:
- सर्वर वर्चुअलाइज़ेशन: एक ही भौतिक सर्वर पर अनेक वर्चुअल मशीनें (VMs) चलाकर हार्डवेयर और बिजली की खपत को 70% तक घटाना।
- ऊर्जा-दक्ष हार्डवेयर (ENERGY STAR): कम बिजली की खपत करने वाले मॉनिटर, डिस्प्ले और प्रोसेसर का उपयोग करना।
- ई-कचरा प्रबंधन (E-Waste Management): पुराने इलेक्ट्रॉनिक कचरे का सुरक्षित और रीसाइक्लिंग द्वारा पर्यावरण-अनुकूल निपटान।
- क्लाउड ऑफलोडिंग व पॉवर मैनेजमेंट: कंप्यूटर निष्क्रिय होने पर 'स्लीप मोड' या 'हाइपरनेट मोड' का स्वचालित उपयोग।
ग्रीन कंप्यूटिंग के चार मुख्य आयाम (4 Green Dimensions):
| आयाम (Dimension) | विवरण |
|---|---|
| Green Use | कंप्यूटरों का उपयोग करते समय बिजली की खपत न्यूनतम रखना। |
| Green Disposal | पुराने उपकरणों का पुनर्चक्रण (Recycling) करना। |
| Green Design | ऊर्जा-दक्ष और पर्यावरण-अनुकूल चिप्स और सर्वर डिज़ाइन करना। |
| Green Manufacturing | कंप्यूटर निर्माण में विषैले रसायनों (जैसे सीसा, पारा) का न्यूनतम उपयोग। |
वेरासिटी (Veracity) बिग डेटा का वह गुण है जो डेटा की विश्वसनीयता, गुणवत्ता, सटीकता और सत्यता को संदर्भित करता है। बड़े पैमाने पर एकत्र किए जाने वाले बिग डेटा में अक्सर असंगतता, त्रुटियाँ और अनिश्चितता (Noise) होती हैं; इसलिए उपयोगी निष्कर्ष निकालने के लिए डेटा की वेरासिटी सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक होता है।
बिग डेटा के 5 V's का विस्तृत विवरण:
- Volume (आयतन): डेटा का विशाल आकार/परिमाण (जैसे टेराबाइट या पेटाबाइट में)।
- Velocity (वेग): वह गति जिससे नया डेटा उत्पन्न और प्रवाहित होता है (जैसे रियल-टाइम सोशल मीडिया स्ट्रीम)।
- Variety (विविधता): डेटा के विभिन्न प्रकार जैसे संरचित (Structured), अर्ध-संरचित (Semi-structured), और असंरचित (Unstructured)।
- Veracity (सत्यता): डेटा की विश्वसनीयता, सटीकता और अनिश्चितता का स्तर।
- Value (मूल्य): कच्चे बिग डेटा का विश्लेषण करके व्यावसायिक या रणनीतिक मूल्य/लाभ निकालना।
बिग डेटा 5 V's तुलना सारणी:
| बिग डेटा का 'V' | मुख्य प्रश्न / अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| Volume | डेटा कितना बड़ा है? | 50 पेटाबाइट से अधिक डेटा |
| Velocity | डेटा किस गति से आ रहा है? | प्रति सेकंड लाखों क्रेडिट कार्ड लेन-देन |
| Variety | डेटा किस रूप में है? | टेक्स्ट, वीडियो, ऑडियो, पीडीएफ, SQL |
| Veracity | क्या डेटा विश्वसनीय और सही है? | फेक न्यूज़ व फर्जी डेटा को हटाना |
| Value | डेटा से क्या व्यावसायिक लाभ मिला? | ग्राहक व्यवहार पैटर्न और बिक्री वृद्धि |
- 'मेघराज' राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा कार्यान्वित और प्रबंधित भारत सरकार का जीआई क्लाउड (GI Cloud) है।
- यह सुविधा केवल केंद्र सरकार के मंत्रालयों तक ही सीमित है और राज्य सरकारों के लिए उपलब्ध नहीं है।
- इसके अंतर्गत सरकारी विभागों को IaaS, PaaS, SaaS और DBaaS सेवा मॉडल प्रदान किए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?||केवल I और II|केवल I और III|केवल II और III|I, II और III|इनमें से कोई नहीं||B||
कथन I और III सही हैं, जबकि कथन II असत्य है。
कथन II असत्य क्यों है?
'मेघराज' (GI Cloud) की सेवाएँ केंद्र सरकार के मंत्रालयों/विभागों के साथ-साथ राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के लिए भी समान रूप से उपलब्ध हैं।
'मेघराज' (MeghRaj) पहल से जुड़े मुख्य तथ्य:
- उद्देश्य: सरकारी विभागों में आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले दोहराव वाले खर्च को रोकना तथा ई-गवर्नेंस अनुप्रयोगों के त्वरित डिप्लॉयमेंट को बढ़ावा देना।
- कार्यान्वयन एजेंसी: इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के तहत राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC)।
- प्रदत्त सेवाएँ:
- IaaS: वर्चुअल मशीनें और स्टोरेज।
- PaaS: विकास और टेस्टिंग पर्यावरण।
- SaaS: सरकारी ईमेल और वेब होस्टिंग सेवाएँ।
- DBaaS: डेटाबेस एज़ ए सर्विस।
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि इस उपकरण को IoT गेटवे (IoT Gateway) कहा जाता है। IoT गेटवे एक स्मार्ट डिवाइस है जो IoT सेंसर नेटवर्क (जो Zigbee, Bluetooth LE, या LoRaWAN का उपयोग करते हैं) को IP-आधारित क्लाउड इंटरनेट नेटवर्क (WiFi, Ethernet, 4G/5G) से जोड़ता है।
IoT गेटवे के मुख्य कार्य:
- प्रोटोकॉल रूपांतरण (Protocol Translation): गैर-आईपी प्रोटोकॉल (उदा. Zigbee) को आईपी प्रोटोकॉल (MQTT/HTTP) में बदलना।
- डेटा फ़िल्टरिंग व प्री-प्रोसेसिंग: बेकार डेटा को वहीं रोककर केवल महत्वपूर्ण डेटा को क्लाउड पर भेजना।
- सुरक्षा एवं एन्क्रिप्शन: सेंसर डेटा को क्लाउड तक भेजने से पहले एन्क्रिप्ट करना।
नेटवर्किंग उपकरणों की तुलना सारणी:
| उपकरण (Device) | कार्य व परत (Layer) | IoT में उपयोग |
|---|---|---|
| IoT Gateway | प्रोटोकॉल ट्रांसलेशन, प्री-प्रोसेसिंग व ब्रिजिंग | सेंसर और क्लाउड के बीच |
| Switch | डेटा लिंक लेयर (L2) पर पैकेट फॉरवर्डिंग | स्थानीय नेटवर्क (LAN) में |
| Repeater | फिजिकल लेयर (L1) पर सिग्नल री-जनरेशन | नेटवर्क सीमा बढ़ाने हेतु |
| Modem | डिजिटल-टू-एनालॉग सिग्नल रूपांतरण | ISP इंटरनेट कनेक्शन हेतु |
कथन 2 पूर्णतः सत्य है। फॉग कंप्यूटिंग (Fog Computing) अवधारणा को सिस्को (Cisco) द्वारा 2012 में पेश किया गया था। यह क्लाउड कंप्यूटिंग का ही एक विस्तार है जो केंद्रीय क्लाउड डेटा सेंटर और किनारे पर स्थित एज डिवाइसेस के बीच स्थानीय नेटवर्क (LAN) नोड्स (जैसे स्मार्ट राउटर, फॉग सर्वर, स्विचेस) पर डेटा प्रोसेसिंग और स्टोरेज की सुविधा देता है।
अन्य कथनों में सुधार:
- कथन 1 गलत है: फॉग कंप्यूटिंग सीधे सेंसर चिप्स पर नहीं, बल्कि लोकल नेटवर्क नोड्स (फॉग नोड्स) पर काम करती है।
- कथन 3 गलत है: एज कंप्यूटिंग डेटा को क्लाउड पर भेजने के बजाय सीधे स्रोत (डिवाइस) पर ही प्रोसेस कर देती है।
- कथन 4 गलत है: क्लाउड कंप्यूटिंग में दूरी अधिक होने के कारण लैटेंसी (Latency) हमेशा अधिक होती है, जबकि एज कंप्यूटिंग में लैटेंसी सबसे कम होती है।
डेटा प्रोसेसिंग पदानुक्रम (Data Processing Hierarchy):
- Cloud Computing: वैश्विक विश्लेषण, विशाल भंडारण (High Latency)
- Fog Computing: लोकल नेटवर्क नोड्स पर प्रोसेसिंग (Medium Latency)
- Edge Computing: सीधे सेंसर / स्मार्ट डिवाइस पर (Ultra-Low Latency)
माइक्रोसर्विसेज (Microservices) आर्किटेक्चर एक सॉफ्टवेयर डिज़ाइन पैटर्न है जहाँ एक जटिल एप्लिकेशन को छोटी, स्वतंत्र और शिथिल रूप से जुड़ी (Loosely Coupled) सेवाओं में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक सेवा (जैसे पेमेंट सेवा, यूजर लॉगिन, इन्वेंटरी सेवा) अपना विशिष्ट कार्य करती है और API (REST/gRPC) के माध्यम से एक-दूसरे से संवाद करती है।
माइक्रोसर्विसेज के मुख्य लाभ:
- स्वतंत्र स्केलिंग (Independent Scaling): यदि केवल पेमेंट सेवा पर ट्रैफ़िक बढ़ता है, तो पूरे एप्लिकेशन को स्केल करने के बजाय केवल पेमेंट सर्विस को स्केल किया जा सकता है।
- फॉल्ट आइसोलेशन (Fault Isolation): यदि एक माइक्रोसर्विस क्रैश हो जाती है, तो पूरा एप्लिकेशन ठप नहीं होता।
- लचीलापन (Flexibility): अलग-अलग सेवाओं को अलग-अलग प्रोग्रामिंग भाषाओं में लिखा जा सकता है।
मोनोलिथिक बनाम माइक्रोसर्विसेज आर्किटेक्चर तुलना:
| विशेषता | मोनोलिथिक (Monolithic) | माइक्रोसर्विसेज (Microservices) |
|---|---|---|
| कोडबेस | एकल विशाल कोडबेस (Single Unit) | छोटे, स्वतंत्र कोडबेस का समूह |
| स्केलिंग | पूरे एप्लिकेशन को एक साथ स्केल करना पड़ता है | केवल आवश्यकतानुसार विशिष्ट सेवा को स्केल करें |
| डिप्लॉयमेंट | छोटा सा बदलाव करने पर भी पूरा ऐप फिर से डिप्लॉय करना | प्रत्येक सर्विस को स्वतंत्र रूप से डिप्लॉय करें |
| क्लाउड अनुकूलता | कम अनुकूल | क्लाउड-नेटिव (Docker/Kubernetes आधारित) |
| सूची-I (कंपोनेंट) | सूची-II (मुख्य कार्य/भूमिका) |
|---|---|
| a. मैपरिड्यूस (MapReduce) | i. क्लस्टर संसाधनों (Resource Management) और जॉब शेड्यूलिंग का प्रबंधन |
| b. यार्न (YARN) | ii. समानांतर और वितरित डेटा प्रोसेसिंग (Parallel Processing) प्रोग्रामिंग मॉडल |
| c. एचबेस (HBase) | iii. HDFS के शीर्ष पर बना डिस्ट्रीब्यूटेड NoSQL कॉलम-ओरिएंटेड डेटाबेस |
| d. हाइव (Hive) | iv. SQL जैसी क्वेरी भाषा (HiveQL) द्वारा बड़े डेटासेट का विश्लेषण |
सही सुमेलन इस प्रकार है: a-ii, b-i, c-iii, d-iv
- a. मैपरिड्यूस (MapReduce) $\rightarrow$ ii. समानांतर और वितरित डेटा प्रोसेसिंग: यह हडूप का मूल सॉफ्टवेयर फ़्रेमवर्क है जो बड़े डेटासेट को क्लस्टर में समानांतर रूप से संसाधित (Map Phase और Reduce Phase) करता है।
- b. यार्न (YARN - Yet Another Resource Negotiator) $\rightarrow$ i. संसाधन प्रबंधन: हडूप 2.0 में पेश किया गया यह घटक क्लस्टर के संसाधनों (CPU/RAM) का आवंटन और जॉब शेड्यूलिंग संभालता है।
- c. एचबेस (HBase) $\rightarrow$ iii. NoSQL कॉलम-ओरिएंटेड डेटाबेस: यह HDFS के शीर्ष पर निर्मित एक गैर-रिलेशनल (NoSQL) डिस्ट्रीब्यूटेड डेटाबेस है जो बड़े डेटा पर रियल-टाइम रीड/राइट एक्सेस देता है।
- d. हाइव (Hive) $\rightarrow$ iv. SQL जैसी क्वेरी भाषा: फेसबुक द्वारा विकसित यह डेटा वेयरहाउस टूल HDFS में संग्रहीत डेटा पर SQL-जैसी भाषा (HiveQL) का उपयोग करके विश्लेषण करने की अनुमति देता है।
अपाचे हडूप 2.0+ आर्किटेक्चर परतें सारणी:
| परत (Layer) | घटक का नाम | भूमिका |
|---|---|---|
| Storage Layer | HDFS | डेटा का डिस्ट्रीब्यूटेड स्टोरेज |
| Resource Layer | YARN | रिसोर्स मैनेजमेंट व शेड्यूलिंग |
| Processing Layer | MapReduce / Spark | समानांतर डेटा प्रोसेसिंग |
| Access/Query Layer | Hive / HBase / Pig | डेटा क्वेरी व विश्लेषण |
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि भौतिक क्रिया उत्पन्न करने वाले इन घटकों को एक्ट्यूएटर (Actuators) कहा जाता है। IoT आर्किटेक्चर में, सेंसर (Sensors) पर्यावरण से भौतिक डेटा (जैसे तापमान, प्रकाश) लेकर उसे विद्युत सिग्नल में बदलते हैं, जबकि एक्ट्यूएटर (Actuators) विद्युत सिग्नल प्राप्त करके भौतिक क्रिया (Physical Motion/Action) उत्पन्न करते हैं।
एक्ट्यूएटर के प्रमुख प्रकार एवं उदाहरण:
- इलेक्ट्रिक मोटर्स (Electric Motors): रोबोटिक आर्म्स, ड्रोन प्रोपेलर या स्मार्ट ब्लाइंड्स को घुमाना।
- सोलेनॉइड वाल्व (Solenoid Valves): स्मार्ट कृषि में सिंचाई के पानी के प्रवाह को नियंत्रित करना।
- रिले (Relays / Switches): स्मार्ट होम में लाइट या एसी को रिमोटली ऑन/ऑफ़ करना।
- हाइड्रॉलिक/न्यूमेटिक एक्ट्यूएटर: औद्योगिक ऑटोमेशन में भारी घटकों को हिलाना।
सेंसर बनाम एक्ट्यूएटर तुलना:
| मापदंड | सेंसर (Sensor) | एक्ट्यूएटर (Actuator) |
|---|---|---|
| भूमिका | डेटा एकत्र करना (Input) | क्रिया निष्पादित करना (Output) |
| ऊर्जा रूपांतरण | भौतिक ऊर्जा $\rightarrow$ विद्युत सिग्नल | विद्युत सिग्नल $\rightarrow$ भौतिक ऊर्जा / गति |
| उदाहरण | थर्मामीटर, LDR लाइट सेंसर | सोलेनॉइड वाल्व, डीसी मोटर, बजर |
- 'पॉवर यूसेज इफेक्टिवनेस' (PUE) डेटा सेंटर की ऊर्जा दक्षता मापने का मुख्य मानक है, जहाँ PUE का मान 1.0 के जितने निकट होता है, डेटा सेंटर उतना ही अधिक ऊर्जा-दक्ष माना जाता है।
- सर्वर वर्चुअलाइज़ेशन द्वारा कई कम-उपयोग वाले भौतिक सर्वरों को कम मशीनों पर समेकित (Consolidate) करके बिजली और कूलिंग खपत को कम किया जा सकता है।
- अनुयोगी और पुराने डेटा (Dark Data) को असीमित समय तक एक्टिव प्राइमरी सर्वरों पर स्टोर करके रखने से डेटा सेंटर की ऊर्जा दक्षता बढ़ती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?||केवल I और II|केवल II और III|केवल I और III|I, II और III|इनमें से कोई नहीं||A||
कथन I और II सत्य हैं, जबकि कथन III असत्य है。
कथन III असत्य क्यों है?
डार्क डेटा (Dark Data) वह अप्रयुक्त, पुराना या बेकार डेटा होता है जिसे संगठन एकत्र तो करते हैं लेकिन कभी उपयोग नहीं करते। डार्क डेटा को एक्टिव सर्वरों पर स्टोर करने से अनावश्यक डिस्क स्टोरेज, पावर और कूलिंग ऊर्जा की बर्बादी होती है, जो ग्रीन कंप्यूटिंग के खिलाफ है। डार्क डेटा को हटाना (Data Purging) या कोल्ड स्टोरेज में डालना ऊर्जा दक्षता बढ़ाता है।
PUE (Power Usage Effectiveness) की अवधारणा:
PUE डेटा सेंटर की कुल खपत ऊर्जा और केवल IT उपकरणों द्वारा खपत ऊर्जा का अनुपात है:
$$\text{PUE} = \frac{\text{Total Facility Energy}}{\text{IT Equipment Energy}}$$
- यदि PUE = 1.0 है, तो इसका अर्थ है कि डेटा सेंटर की 100% बिजली केवल IT उपकरणों द्वारा उपयोग की जा रही है और कूलिंग/लाइटिंग में कोई बर्बादी नहीं हो रही (आदर्श स्थिति)।
डेटा सेंटर में ग्रीन कंप्यूटिंग तकनीकें:
- लिक्विड कूलिंग (Liquid Cooling): पारंपरिक एयर कंडीशनिंग की तुलना में पानी या कूलेंट का उपयोग करके ऊर्जा बचाना।
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy): डेटा सेंटरों को सौर ऊर्जा या पवन ऊर्जा से चलाना।
- वर्चुअलाइज़ेशन: भौतिक सर्वरों का 80-90% तक बेहतर क्षमता उपयोग सुनिश्चित करना।
Assertion (A): Edge Computing is preferred over centralized Cloud Computing in mission-critical applications such as autonomous vehicles (self-driving cars), robotic surgery, and smart grids.
Reason (R): Edge Computing brings data processing closer to the data source (sensors/devices) rather than relying on a centralized cloud data center, significantly reducing network latency and bandwidth consumption.
Select the correct option:||Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|None of the above||A||||Hard Q5||Match List-I (IoT Components/Communication Technologies) with List-II (Key Characteristics/Applications) and select the correct answer using the codes given below:
| List-I (IoT Component/Technology) | List-II (Characteristic/Application) |
|---|---|
| a. LoRaWAN | i. Low power, long-range wireless connectivity |
| b. Gyroscope | ii. Lightweight, low-bandwidth publish-subscribe messaging protocol |
| c. MQTT | iii. Measuring angular velocity and rotation |
| d. RFID | iv. Touchless automatic identification of objects via radio waves |
- 'MeghRaj' is the GI Cloud of the Government of India, implemented and managed by the National Informatics Centre (NIC).
- This facility is restricted only to Central Government ministries and is not available to State Governments.
- Under this initiative, IaaS, PaaS, SaaS, and DBaaS service models are provided to government departments.
Which of the above statements is/are true?||I and II only|I and III only|II and III only|I, II, and III|None of the above||B||||Moderate Q10||In Internet of Things (IoT) architecture, what is the device that acts as an intermediate bridge between resource-constrained physical sensors/devices (Non-IP Devices) and high-capacity cloud servers, handling data aggregation and protocol translation, called?||Network Switch|Signal Repeater|Analog Modem|Ethernet Hub|None of the above||E||||Easy Q11||In the context of network architecture and data processing hierarchy among Cloud, Fog, and Edge Computing, which of the following statements is TRUE?||Fog computing performs all processing directly on sensor chips and does not use network devices.|Fog Computing acts as an intermediate processing layer at the local area network (LAN) level between edge devices and the central cloud data center.|In Edge Computing, all raw data is first sent to the central cloud server without processing.|Latency is always lower in Cloud Computing compared to Edge Computing.|None of the above||B||||Hard Q12||In the design of large-scale modern software applications and cloud-native applications, which of the following is the primary technical reason for preferring Microservices architecture over traditional Monolithic architecture?||In Microservices architecture, the entire application functions as a single massive codebase.|It allows independent scaling, updates, and deployment of each distinct service without disrupting the entire application.|Microservices do not require any network connection to run.|Microservices are always easier to debug and build initially compared to Monolithic architecture.|None of the above||B||||Hard Q13||Match List-I (Hadoop Ecosystem Component) with List-II (Primary Function/Role) and select the correct answer using the codes given below:
| List-I (Component) | List-II (Primary Function/Role) |
|---|---|
| a. MapReduce | i. Cluster Resource Management and Job Scheduling |
| b. YARN | ii. Parallel and Distributed Data Processing Programming Model |
| c. HBase | iii. Distributed NoSQL column-oriented database built on top of HDFS |
| d. Hive | iv. Analyzing large datasets using an SQL-like query language (HiveQL) |
- 'Power Usage Effectiveness' (PUE) is a key metric used to measure data center energy efficiency, where a PUE value closer to 1.0 indicates a more energy-efficient data center.
- Through server virtualization, multiple underutilized physical servers can be consolidated onto fewer machines to reduce power and cooling consumption.
- Storing unused and outdated data (Dark Data) on active primary servers indefinitely increases data center energy efficiency.
Which of the above statements is/are true?||I and II only|II and III only|I and III only|I, II, and III|None of the above||A||||Moderate
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 13
Practice Completed
All questions answered. Generate report?
Generating report
Analyzing performance...
Performance Report
निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
Thanks for Reading! / पढ़ने के लिए धन्यवाद! 🙏
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