नमस्कार दोस्तों! RojgarBytes में आपका स्वागत है। यदि आप UPSSSC Lower PCS और आगामी UPSSSC Exams की तैयारी कर रहे हैं, तो कंप्यूटर सेक्शन (computer section) में अच्छे अंक प्राप्त करना सफलता के लिए बेहद आवश्यक है। आपकी इसी तैयारी को और भी धारदार बनाने के लिए, हमने पिछले वर्षों के प्रश्नों (PYQs) के गहन विश्लेषण (thorough analysis) के आधार पर एक उच्च गुणवत्ता (high-quality) वाला कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट 12 तैयार किया है।
यह सेट बिल्कुल वास्तविक परीक्षा के प्रश्न पत्र के माहौल को ध्यान में रखकर बनाया गया है। UPSSSC के नवीनतम पैटर्न के अनुसार, हर प्रश्न के लिए 5 विकल्प दिए गए हैं और यह पूरी तरह से द्विभाषी (bilingual) है। इस प्रैक्टिस सेट की सबसे बड़ी विशेषता इसकी विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) है, जो आपके कॉन्सेप्ट्स को पूरी तरह से स्पष्ट कर देगी।
इस प्रैक्टिस सेट में निम्नलिखित टॉपिक्स पर आधारित कुल 15 महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए हैं
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence)
- मशीन लर्निंग (Machine Learning)
- डीप लर्निंग (Deep Learning)
📌 महत्वपूर्ण सूचना एवं समय-सारणी (Important Notice & Schedule)
UPSSSC Lower PCS और आगामी परीक्षाओं के संपूर्ण Computer Syllabus को कवर करने के लिए हमने कुल 18 Practice Sets का एक विशेष प्लान तैयार किया है।
- शुरुआत और समापन (Schedule): यह प्रैक्टिस सेट सीरीज 3 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 20 अगस्त तक नियमित रूप से चलेगी।
- लक्ष्य (Goal): चूंकि आपका UPSSSC Lower PCS का एग्जाम 23 अगस्त को होना तय है, इसलिए हम 20 अगस्त तक पूरा सिलेबस समाप्त कर देंगे। इससे आपको परीक्षा से ठीक पहले 2-3 दिन खुद से अंतिम रिवीजन करने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
अपनी तैयारी को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन इस 👉 सीरीज (series) से जरूर जुड़ें!
प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग (Prompt Engineering) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) के क्षेत्र में एक उभरती हुई तकनीक है। इसका मुख्य उद्देश्य लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLM) को ऐसे संरचित और सटीक निर्देश (Prompts) देना है जिससे मॉडल बिना पुनः प्रशिक्षित हुए वांछित और त्रुटिरहित उत्तर उत्पन्न कर सके।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- हाइपरपैरामीटर ट्यूनिंग (Hyperparameter Tuning): यह मशीन लर्निंग मॉडल के प्रशिक्षण से पहले उसकी बाहरी सेटिंग्स (जैसे लर्निंग रेट, बैच साइज) को समायोजित करने की प्रक्रिया है।
- डेटा नॉर्मलाइज़ेशन (Data Normalization): यह डेटा प्री-प्रोसेसिंग की एक तकनीक है जिसका उपयोग विभिन्न पैमानों (Scales) वाले डेटा को एक समान मानक सीमा में लाने के लिए किया जाता है।
- फीचर निष्कर्षण (Feature Extraction): कच्ची सामग्री या डेटासेट में से सबसे महत्वपूर्ण और प्रासंगिक विशेषताओं (Features) को चुनने या निर्माण करने की प्रक्रिया है।
परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य:
- LLM (Large Language Model): यह डीप लर्निंग और ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर (Transformer Architecture) पर आधारित एआई मॉडल होते हैं।
- प्रमुख प्रॉम्प्टिंग तकनीकें:
- जीरो-शॉट प्रॉम्प्टिंग (Zero-shot Prompting): बिना किसी उदाहरण के मॉडल से सीधे उत्तर मांगना।
- फ्यू-शॉट प्रॉम्प्टिंग (Few-shot Prompting): उत्तर देने से पहले मॉडल को कुछ उदाहरण प्रदान करना।
- चेन-ऑफ़-थॉट प्रॉम्प्टिंग (Chain-of-Thought Prompting): जटिल तार्किक प्रश्नों के लिए मॉडल को चरण दर चरण सोचने का निर्देश देना।
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) शब्द सर्वप्रथम जॉन मैकार्थी (John McCarthy) द्वारा वर्ष 1956 में आयोजित डार्टमाउथ सम्मेलन (Dartmouth Conference) में गढ़ा गया था। जॉन मैकार्थी को व्यापक रूप से "कृत्रिम बुद्धिमत्ता का जनक" (Father of AI) माना जाता है।
विकल्पों में दिए गए वैज्ञानिकों का योगदान:
- एलन ट्यूरिंग (Alan Turing): इन्होंने वर्ष 1950 में 'ट्यूरिंग टेस्ट' (Turing Test) का प्रतिपादन किया था, जो यह जांचने का एक मानक है कि क्या कोई मशीन मानव की तरह सोच सकती है। इन्हें आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान का जनक कहा जाता है।
- जॉन वॉन न्यूमैन (John von Neumann): इन्होंने 'स्टोर्ड-प्रोग्राम आर्किटेक्चर' (Stored-Program Architecture) की अवधारणा दी, जो आज के सभी आधुनिक कंप्यूटरों का आधार है।
- ग्रेस हॉपर (Grace Hopper): इन्होंने पहले कंपाइलर का विकास किया था तथा COBOL भाषा के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई थी।
- मार्विन मिंस्की (Marvin Minsky): ये भी डार्टमाउथ सम्मेलन के सह-संस्थापक थे और इन्होंने प्रथम न्यूरल नेटवर्क सिमुलेटर (SNARC) बनाया था।
परीक्षा उपयोगी सारणी:
| व्यक्तित्व | मुख्य योगदान |
|---|---|
| जॉन मैकार्थी | 'AI' शब्द के जन्मदाता (1956) एवं LISP भाषा के निर्माता |
| एलन ट्यूरिंग | ट्यूरिंग मशीन एवं ट्यूरिंग टेस्ट (1950) |
| चार्ल्स बैबेज | कंप्यूटर का जनक (Analytical Engine) |
- पर्यवेक्षित अधिगम (Supervised Learning) में मॉडल को लेबल किए गए डेटासेट (Labelled Dataset) पर प्रशिक्षित किया जाता है।
- अपर्यवेक्षित अधिगम (Unsupervised Learning) का प्राथमिक उद्देश्य बिना किसी लेबल वाले डेटा में छिपे हुए पैटर्न या क्लस्टर (Cluster) की पहचान करना है।
- सुदृढ़ीकरण अधिगम (Reinforcement Learning) में एक एजेंट पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करके पुरस्कार (Reward) और दंड (Penalty) के माध्यम से सीखता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?||केवल I और II|केवल II और III|केवल I और III|I, II और III|इनमें से कोई नहीं||D||
दिए गए तीनों कथन (I, II और III) पूर्णतः सत्य हैं। मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वह शाखा है जो कंप्यूटरों को बिना किसी स्पष्ट प्रोग्रामिंग के डेटा से स्वतः सीखने में सक्षम बनाती है। इसे मुख्य रूप से तीन भागों में वर्गीकृत किया जाता है:
- पर्यवेक्षित अधिगम (Supervised Learning): इसमें इनपुट और सही आउटपुट (Labelled Data) दोनों पहले से दिए जाते हैं। उदाहरण: स्पैम ईमेल डिटेक्शन, हाउस प्राइस प्रेडिक्शन (Linear Regression, Decision Trees)।
- अपर्यवेक्षित अधिगम (Unsupervised Learning): इसमें डेटा में कोई पूर्व-निर्धारित लेबल नहीं होता। मॉडल स्वतः डेटा की समानता के आधार पर समूह (Clusters) बनाता है। उदाहरण: कस्टमर सेग्मेंटेशन (K-Means Clustering, PCA)।
- सुदृढ़ीकरण अधिगम (Reinforcement Learning): इसमें एजेंट प्रयोग और त्रुटि (Trial and Error) विधि से सीखता है। सही कदम पर 'रिवॉर्ड' और गलत कदम पर 'पेनल्टी' मिलती है। उदाहरण: स्व-संचालित कारें, गेमिंग एआई (AlphaGo)।
मशीन लर्निंग प्रकारों का तुलनात्मक विवरण:
| विशेषता | Supervised Learning | Unsupervised Learning | Reinforcement Learning |
|---|---|---|---|
| डेटा का प्रकार | लेबल युक्त (Labelled) | बिना लेबल वाला (Unlabelled) | कोई पूर्व डेटा नहीं (Dynamic Env) |
| मुख्य लक्ष्य | आउटपुट का पूर्वानुमान | संरचना/पैटर्न की खोज | इष्टतम नीति (Optimal Policy) सीखना |
| प्रमुख एल्गोरिदम | Linear Regression, SVM | K-Means, Apriori | Q-Learning, Deep Q-Network |
अभिकथन (A): आधुनिक साइबर सुरक्षा प्रणालियों (Cybersecurity Systems) में अज्ञात खतरों और विसंगतियों (Anomalies) का पता लगाने के लिए मशीन लर्निंग (ML) मॉडल का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
कारण (R): मशीन लर्निंग एल्गोरिदम नेटवर्क ट्रैफ़िक के सामान्य व्यवहारिक पैटर्न को सीखकर नेटवर्क में होने वाले असामान्य विचलन और शून्य-दिवस हमलों (Zero-day Attacks) की पहचान स्वतः कर सकते हैं।
सही विकल्प का चयन कीजिए:||अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं और कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या है।|अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों सही हैं, लेकिन कारण (R), अभिकथन (A) की सही व्याख्या नहीं है।|अभिकथन (A) सही है, लेकिन कारण (R) गलत है।|अभिकथन (A) गलत है, लेकिन कारण (R) सही है।|इनमें से कोई नहीं||A||
अभिकथन (A) और कारण (R) दोनों पूर्णतः सत्य हैं तथा कारण (R), अभिकथन (A) की सही और तार्किक व्याख्या करता है।
- व्याख्या: पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियाँ (जैसे हस्ताक्षर-आधारित एंटीवायरस) केवल उन्हीं खतरों को रोक पाती हैं जिनका कोड पहले से ज्ञात हो। परंतु आधुनिक मशीन लर्निंग (ML) मॉडल जैसे आइसोलेशन फ़ॉरेस्ट, ऑटोएनकोडर और SVM, नेटवर्क के दैनिक ट्रैफ़िक और उपयोगकर्ता व्यवहार के विशाल डेटासेट का विश्लेषण करके "सामान्य व्यवहार" (Baseline Behavior) की रूपरेखा तैयार करते हैं।
- जब भी कोई दुर्भावनापूर्ण गतिविधि, अनधिकृत डेटा ट्रांसफर या ज़ीरो-डे अटैक (Zero-day Attack) होता है, तो ML मॉडल तुरंत असामान्य पैटर्न (Anomaly) को भांप लेते हैं और सुरक्षा दल को अलर्ट कर देते हैं। इस कारण मशीन लर्निंग साइबर सुरक्षा में सुरक्षा की एक अत्यंत प्रभावी और उन्नत परत प्रदान करती है।
परीक्षा उपयोगी साइबर सुरक्षा व एआई तथ्य:
- ज़ीरो-डे अटैक (Zero-day Vulnerability): ऐसा साइबर हमला जो सॉफ़्टवेयर की उस खामी का फ़ायदा उठाता है जिसका विक्रेता या डेवलपर को पहले से ज्ञान न हो और जिसका कोई पैच उपलब्ध न हो।
- बॉटनेट (Botnet): मैलवेयर से संक्रमित कंप्यूटरों का नेटवर्क, जिसका उपयोग हैकर्स DDoS हमले करने के लिए करते हैं। एआई एल्गोरिदम बॉटनेट ट्रैफ़िक की त्वरित पहचान करने में सक्षम हैं।
| सूची-I (एल्गोरिदम/तकनीक) | सूची-II (अधिगम/कार्य श्रेणी) |
|---|---|
| a. K-मीन्स (K-Means) | i. सुदृढ़ीकरण अधिगम (Reinforcement Learning) |
| b. लीनियर रिग्रेशन (Linear Regression) | ii. अपर्यवेक्षित क्लस्टरिंग (Unsupervised Clustering) |
| c. Q-लर्निंग (Q-Learning) | iii. पर्यवेक्षित वर्गीकरण एवं पूर्वाभास (Supervised Classification) |
| d. निर्णय वृक्ष (Decision Tree) | iv. पर्यवेक्षित सतत मान पूर्वानुमान (Supervised Continuous Prediction) |
सही सुमेलन इस प्रकार है: a-ii, b-iv, c-i, d-iii
- a. K-मीन्स (K-Means) $\rightarrow$ ii. अपर्यवेक्षित क्लस्टरिंग: यह अपर्यवेक्षित अधिगम (Unsupervised Learning) का एक लोकप्रिय एल्गोरिदम है जो बिना लेबल वाले डेटासेट को 'K' संख्या वाले समूहों (Clusters) में विभाजित करता है।
- b. लीनियर रिग्रेशन (Linear Regression) $\rightarrow$ iv. पर्यवेक्षित सतत मान पूर्वानुमान: यह एक पर्यवेक्षित एल्गोरिदम है जिसका उपयोग स्वतंत्र चरों (Independent variables) के आधार पर किसी सतत संख्यात्मक मान (Continuous numerical value जैसे तापमान, मूल्य) का पूर्वानुमान लगाने के लिए किया जाता है।
- c. Q-लर्निंग (Q-Learning) $\rightarrow$ i. सुदृढ़ीकरण अधिगम: यह एक मॉडल-मुक्त सुदृढ़ीकरण अधिगम (Reinforcement Learning) एल्गोरिदम है जो पर्यावरण में अधिकतम पुरस्कार प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम कदम चुनना सीखता है।
- d. निर्णय वृक्ष (Decision Tree) $\rightarrow$ iii. पर्यवेक्षित वर्गीकरण एवं पूर्वाभास: यह एक सुपरवाइज्ड लर्निंग एल्गोरिदम है जिसका उपयोग वर्गीकरण (Classification) और रिग्रेशन दोनों प्रकार की समस्याओं को हल करने के लिए किया जाता है।
त्वरित संदर्भ तालिका:
| एल्गोरिदम | अधिगम प्रकार | मुख्य उपयोग |
|---|---|---|
| K-Means | Unsupervised | ग्राहक वर्गीकरण (Segmentation) |
| Linear Regression | Supervised | घर की कीमत का अनुमान (Prediction) |
| Q-Learning | Reinforcement | रोबोटिक्स और गेमिंग AI |
| Decision Tree | Supervised | निर्णय लेना व वर्गीकरण (Classification) |
लॉग शॉर्ट-टर्म मेमोरी (LSTM) नेटवर्क एक विशेष प्रकार का रिकरेंट न्यूरल नेटवर्क (RNN - Recurrent Neural Network) है। पारंपरिक RNN में लंबी अनुक्रमिक जानकारी को याद रखते समय "वैनिशिंग ग्रेडिएंट" (Vanishing Gradient) की समस्या आती है, जिसे LSTM अपने विशेष 'गेटेड आर्किटेक्चर' (Forget Gate, Input Gate, Output Gate) की मदद से हल करता है। इसका उपयोग भाषा अनुवाद, भाव विश्लेषण (Sentiment Analysis), वाणी पहचान और शेयर बाज़ार पूर्वानुमान जैसे अनुक्रमिक डेटा कार्यों में होता है।
अन्य विकल्पों का विवरण:
- कॉन्वोल्यूशन न्यूरल नेटवर्क (CNN): यह मुख्य रूप से ग्रिड-जैसी संरचना वाले डेटा जैसे छवियों (Image Processing) और वीडियो विश्लेषण के लिए डिज़ाइन किया गया न्यूरल नेटवर्क है।
- जनरेटिव एडवरसेरियल नेटवर्क (GAN): इसमें दो न्यूरल नेटवर्क (Generator और Discriminator) आपस में प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसका उपयोग नई यथार्थवादी छवियां, वीडियो या ऑडियो बनाने (Generative AI) में होता है।
- मल्टी-लेयर परसेप्ट्रॉन (MLP): यह एक बुनियादी फ़ीडफ़ॉरवर्ड कृत्रिम न्यूरल नेटवर्क (ANN) है जिसमें इनपुट, हिडन और आउटपुट परतें होती हैं।
प्रमुख न्यूरल नेटवर्क और उनके प्रयोग:
| न्यूरल नेटवर्क आर्किटेक्चर | प्राथमिक अनुप्रयोग क्षेत्र |
|---|---|
| CNN (Convolutional) | कम्प्यूटर विज़न, ऑब्जेक्ट डिटेक्शन, मेडिकल इमेजिंग |
| RNN / LSTM | पाठ विश्लेषण, अनुवाद, स्पीच रिकॉग्निशन |
| GAN | डीपफेक, एआई आर्ट जनरेशन, इमेज-टू-इमेज ट्रांसलेशन |
| Transformer | आधुनिक LLM (जैसे GPT, BERT) का आधार तंत्र |
भाषिनी (Bhashini - National Language Translation Mission) भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) द्वारा शुरू की गई एक महत्वाकांक्षी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य डिजिटल सेवाओं को स्थानीय भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाना तथा एआई और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके विभिन्न भारतीय भाषाओं के बीच भाषा बाधाओं को समाप्त करना है।
अन्य विकल्पों का विश्लेषण:
- ई-संजीवनी (eSanjeevani): यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित भारत की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है जो नागरिकों को घर बैठे डॉक्टरों से परामर्श करने में सक्षम बनाती है।
- उमंग (UMANG - Unified Mobile Application for New-age Governance): यह एक एकीकृत मोबाइल ऐप है जो केंद्र और राज्य सरकारों की सैकड़ों ई-गवर्नेंस सेवाओं को एक ही प्लेटफ़ॉर्म पर उपलब्ध कराता है।
भाषिनी (Bhashini) से जुड़े महत्वपूर्ण परीक्षा तथ्य:
- लक्ष्य: ओपन-सोर्स AI मॉडल विकसित करना ताकि स्टार्ट-अप्स, शोधकर्ता और डेवलपर्स भारतीय भाषाओं के लिए समाधान तैयार कर सकें।
- जुड़ी तकनीकें: एआई-आधारित स्पीच-टू-स्पीच ट्रांसलेशन (Speech-to-Speech Translation), टेक्स्ट-टू-स्पीच और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR)।
- व्यावहारिक उपयोग: न्यायपालिका, ई-कॉमर्स, शिक्षा और सरकारी योजनाओं को क्षेत्रीय भाषाओं में आम नागरिकों तक पहुँचाना।
मीन स्क्वायर्ड एरर (MSE) का उपयोग वर्गीकरण (Classification) समस्याओं के लिए नहीं, बल्कि सतत मान पूर्वानुमान/रिग्रेशन (Regression) मॉडल के मूल्यांकन के लिए किया जाता है। यह वास्तविक मान और अनुमानित मान के बीच के अंतर के वर्ग का औसत निकालता है।
वर्गीकरण (Classification) मॉडल के मूल्यांकन मीट्रिक्स:
- कन्फ्यूजन मैट्रिक्स (Confusion Matrix): यह मॉडल के अनुमानों का तालिकाबद्ध रूप है जो True Positive (TP), True Negative (TN), False Positive (FP), और False Negative (FN) को प्रदर्शित करता है।
- प्रेसिजन (Precision): मॉडल द्वारा धनात्मक बताए गए कुल मामलों में से वास्तव में कितने धनात्मक थे ($\frac{TP}{TP + FP}$)।
- रिकॉल (Recall / Sensitivity): वास्तव में मौजूद कुल धनात्मक मामलों में से मॉडल कितनों की सही पहचान कर पाया ($\frac{TP}{TP + FN}$)।
- F1-स्कोर (F1-Score): यह प्रेसिजन और रिकॉल का हरात्मक माध्य (Harmonic Mean) होता है, जो असंतुलित डेटासेट (Imbalanced Data) में मॉडल की सटीकता मापने के लिए सर्वोत्तम है।
रिग्रेशन बनाम क्लासिफिकेशन मूल्यांकन मीट्रिक्स:
| रिग्रेशन मीट्रिक्स (Regression) | क्लासिफिकेशन मीट्रिक्स (Classification) |
|---|---|
| Mean Squared Error (MSE) | Accuracy & Confusion Matrix |
| Root Mean Squared Error (RMSE) | Precision & Recall |
| Mean Absolute Error (MAE) | F1-Score |
| R-Squared ($R^2$) | ROC-AUC Curve |
टेंसरफ्लो (TensorFlow) एक अत्यधिक लोकप्रिय ओपन-सोर्स डीप लर्निंग फ्रेमवर्क है, जिसे मूल रूप से गूगल ब्रेन (Google Brain) टीम द्वारा विकसित किया गया था और वर्ष 2015 में जनता के लिए ओपन-सोर्स किया गया था। यह डेटाफ़्लो ग्राफ का उपयोग करता है और जटिल न्यूरल नेटवर्क (जैसे CNN, RNN, LSTM) के निर्माण और प्रशिक्षण को आसान बनाता है।
अन्य प्रमुख एआई/डीप लर्निंग फ्रेमवर्क का विश्लेषण:
- PyTorch: इसे मेटा (Meta / Facebook) की एआई रिसर्च लैब द्वारा विकसित किया गया था। यह अपने डायनामिक कम्प्यूटेशनल ग्राफ (Dynamic Computation Graph) के कारण शोधकर्ताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय है।
- Keras: यह एक उच्च-स्तरीय (High-level) न्यूरल नेटवर्क एपीआई है, जो Python में लिखा गया है और टेंसरफ्लो के शीर्ष पर चलता है। इसे फ़्रांस्वा शोले (François Chollet) ने बनाया था।
- CNTK (Cognitive Toolkit): यह माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) द्वारा विकसित एक डीप लर्निंग फ्रेमवर्क है।
डीप लर्निंग फ्रेमवर्क तुलना:
| फ्रेमवर्क (Framework) | विकासकर्ता (Developer) | लॉन्च वर्ष | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|---|
| TensorFlow | Google Brain | 2015 | प्रोडक्शन और डिप्लॉयमेंट (TensorFlow Lite, TFJS) में मजबूत |
| PyTorch | Meta (Facebook) | 2016 | अनुसंधान (Research) और समझने में आसान |
| Keras | François Chollet / Google | 2015 | यूजर-फ्रेंडली और क्विक प्रोटोटाइपिंग |
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि एआई प्रोग्रामिंग के लिए विकसित की गई सबसे पहली उच्च-स्तरीय भाषा LISP (List Processing) है। LISP का विकास वर्ष 1958 में एमआईटी (MIT) के जॉन मैकार्थी (John McCarthy) द्वारा किया गया था। LISP फॉरट्रान (FORTRAN) के बाद दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा है जो आज भी उपयोग में है।
विकल्पों में दी गई भाषाओं का एआई में योगदान:
- PROLOG (Programming in Logic): इसका विकास 1972 में अलेन कोलमेरोएर (Alain Colmerauer) द्वारा किया गया था। यह तार्किक प्रोग्रामिंग (Symbolic AI) और एक्सपर्ट सिस्टम बनाने के लिए दूसरी सबसे पुरानी लोकप्रिय एआई भाषा है।
- Python: इसका विकास 1991 में गिडो वैन रोसुम द्वारा किया गया था। वर्तमान में यह अपने समृद्ध पुस्तकालयों (NumPy, Pandas, Scikit-Learn, TensorFlow) के कारण AI/ML की सबसे लोकप्रिय भाषा है।
- C++: इसका उपयोग एआई में उच्च गति और प्रदर्शन-संवेदनशील भागों (जैसे गेम एआई, कंप्यूटर विजन) के लिए होता है।
एआई भाषाओं का कालानुक्रमिक इतिहास:
| भाषा (Language) | वर्ष | निर्माता / संस्थापक | मुख्य विशेषता |
|---|---|---|---|
| LISP | 1958 | John McCarthy | प्रथम एआई भाषा, लिस्ट प्रोसेसिंग |
| PROLOG | 1972 | Alain Colmerauer | लॉजिक प्रोग्रामिंग, एक्सपर्ट सिस्टम |
| Python | 1991 | Guido van Rossum | आधुनिक एआई, एमएल और डेटा साइंस की मानक भाषा |
कथन 3 पूर्णतः सत्य है। मशीन लर्निंग में High Bias (उच्च पूर्वाग्रह) का अर्थ है कि मॉडल अत्यधिक सरल है और डेटा के अंतर्निहित पैटर्न को पकड़ने में असमर्थ है, जिसे अंडरफिटिंग (Underfitting) कहा जाता है। दूसरी ओर, High Variance (उच्च विविधता) का अर्थ है कि मॉडल अत्यधिक जटिल है और उसने ट्रेनिंग डेटा के शोर (Noise) को भी रट लिया है, जिसे ओवरफिटिंग (Overfitting) कहा जाता है।
असत्य कथनों का सुधार:
- कथन 1 गलत है: ओवरफिटिंग में पूर्वाग्रह (Bias) कम (Low) होता है और वैरियंस (Variance) उच्च (High) होता है।
- कथन 2 गलत है: ट्रेनिंग डेटा के शोर (Noise) को याद कर लेना 'ओवरफिटिंग' कहलाता है, अंडरफिटिंग नहीं।
- कथन 4 गलत है: ओवरफिटिंग को कम करने के लिए मॉडल की जटिलता को घटाया जाता है या रेगुलराइजेशन (Regularization) तकनीक का प्रयोग किया जाता है।
ओवरफिटिंग एवं अंडरफिटिंग में अंतर व समाधान:
| लक्षण / समाधान | अंडरफिटिंग (Underfitting) | ओवरफिटिंग (Overfitting) |
|---|---|---|
| त्रुटि स्थिति | Training व Testing दोनों पर उच्च त्रुटि | Training पर शून्य/कम त्रुटि, Testing पर अत्यधिक त्रुटि |
| कारण | Model अत्यधिक सरल है (High Bias) | Model अत्यधिक जटिल है (High Variance) |
| निदान/समाधान | 1. मॉडल जटिलता बढ़ाएं 2. अधिक फीचर्स जोड़ें | 1. क्रॉस-वैलिडेशन (Cross-Validation) 2. रेगुलराइजेशन (L1/L2 - Lasso/Ridge) 3. ड्रॉपआउट (Dropout in DL) |
- वस्तु पहचान (Object Detection) केवल यह बताती है कि छवि में कौन सी वस्तु मौजूद है, लेकिन छवि में उसकी भौतिक स्थिति (Location) का निर्धारण नहीं करती।
- इमेज सेग्मेंटेशन (Image Segmentation) में छवि के प्रत्येक पिक्सेल (Pixel) को एक विशिष्ट श्रेणी या वर्ग में विभाजित किया जाता है।
- स्वायत्त वाहनों (Self-Driving Cars) में सड़क के संकेतों, पैदल चलने वालों और बाधाओं को वास्तविक समय में पहचानने के लिए CNN और कंप्यूटर विज़न का उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?||केवल I और II|केवल II और III|केवल I और III|I, II और III|इनमें से कोई नहीं||B||
कथन II और III सही हैं, जबकि कथन I असत्य है।
कथन I असत्य क्यों है?
'इमेज क्लासिफिकेशन' (Image Classification) केवल यह बताता है कि छवि में क्या वस्तु है। परंतु ऑब्जेक्ट डिटेक्शन (Object Detection) वस्तु की पहचान करने के साथ-साथ बाउंडिंग बॉक्स (Bounding Box) बनाकर छवि में उसकी सटीक स्थिति (Location) भी निर्धारित करता है।
कथन II और III सत्य क्यों हैं?
- इमेज सेग्मेंटेशन (Image Segmentation): यह कंप्यूटर विज़न की एक उन्नत तकनीक है जो पिक्सेल-स्तर (Pixel-level) पर काम करती है, जहाँ छवि के हर पिक्सेल को कार, सड़क, आकाश या मानव जैसे वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है।
- स्वायत्त वाहन (Self-Driving Cars): टेस्ला या वेमो जैसी स्वायत्त कारें कैमरों से मिलने वाले इनपुट को संसाधित करने के लिए कॉन्वोल्यूशन न्यूरल नेटवर्क (CNN) आधारित कंप्यूटर विज़न एल्गोरिदम (जैसे YOLO - You Only Look Once, R-CNN) का उपयोग करती हैं।
कंप्यूटर विज़न तकनीकों की पदानुक्रमित तुलना:
| तकनीक (Technology) | क्या करती है? (Output) | जटिलता स्तर |
|---|---|---|
| Image Classification | छवि में क्या है? (उदा. "कार") | बुनियादी (Basic) |
| Object Detection | छवि में क्या है और कहाँ है? (Bounding Box) | मध्यम (Intermediate) |
| Image Segmentation | पिक्सेल स्तर पर प्रत्येक वस्तु की सटीक रूपरेखा | उच्च (Advanced) |
वर्ष 2017 में गूगल ब्रेन और गूगल रिसर्च के 8 शोधकर्ताओं (आशीष वासवानी एवं अन्य) द्वारा प्रकाशित ऐतिहासिक शोध पत्र "Attention Is All You Need" में ट्रांसफॉर्मर (Transformer) आर्किटेक्चर का पहली बार प्रस्ताव रखा गया था। इस शोध पत्र ने प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) और एआई के क्षेत्र में क्रांति ला दी।
ट्रांसफॉर्मर आर्किटेक्चर का महत्व और कार्यप्रणाली:
- सेल्फ़-अटेंशन मैकेनिज्म (Self-Attention Mechanism): पारंपरिक RNN/LSTM नेटवर्क वाक्यों को एक-एक करके क्रमिक (Sequential) रूप से प्रोसेस करते थे जो धीमा था। ट्रांसफॉर्मर पूरे वाक्य को एक साथ प्रोसेस करता है और वाक्य के प्रत्येक शब्द का दूसरे शब्दों के साथ संबंध और महत्व (Attention Weight) मापता है।
- समानांतर प्रसंस्करण (Parallel Processing): यह जीपीयू (GPU) पर समानांतर गणना की अनुमति देता है, जिससे विशाल डेटासेट पर बड़े मॉडल्स (LLM) को प्रशिक्षित करना संभव हुआ।
विकल्पों में दिए गए अन्य प्रसिद्ध एआई शोध पत्र:
- "Deep Residual Learning for Image Recognition" (2015): केमिंग ही (Kaiming He) आदि द्वारा लिखित, जिसने ResNet न्यूरल नेटवर्क की नींव रखी।
- "Mastering the Game of Go" (2016): गूगल डीपमाइंड (DeepMind) द्वारा प्रकाशित, जिसने AlphaGo एआई सिस्टम का विवरण दिया।
- "Generative Adversarial Nets" (2014): इयान गुडफ़ेलो (Ian Goodfellow) द्वारा लिखित, जिसने GANs की शुरुआत की।
सही उत्तर विकल्प E (इनमें से कोई नहीं) है, क्योंकि NPCI द्वारा शुरू की गई एआई-संचालित संवादात्मक भुगतान सुविधा का आधिकारिक नाम "हेलो यूपीआई" (Hello! UPI) है। इसे ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) में लॉन्च किया गया था, जो उपयोगकर्ताओं को अपने स्मार्टफोन पर एआई आधारित वॉयस कमांड (हिंदी और अंग्रेजी में) के जरिए सुरक्षित भुगतान करने की अनुमति देता है।
विकल्पों में दी गई अन्य यूपीआई सुविधाओं का विवरण:
- UPI 123PAY: यह बिना इंटरनेट वाले फीचर फोन (Feature Phones) के उपयोगकर्ताओं के लिए IVR, मिस कॉल या ऐप द्वारा यूपीआई भुगतान की सुविधा है।
- UPI AutoPay: यह आवर्ती भुगतान (Recurring Payments) जैसे बिजली बिल, ओटीटी सब्सक्रिप्शन आदि के लिए ऑटो-डेबिट जनादेश (Mandate) सेट करने की सुविधा है।
- UPI Lite: यह बिना यूपीआई पिन दर्ज किए कम मूल्य (Small-value) वाले त्वरित ऑफ़लाइन/ऑन-डिवाइस वॉलेट भुगतानों के लिए एक डिजिटल बटुआ सुविधा है।
डिजिटल वित्तीय सेवाओं में एआई के उपयोग हेतु महत्वपूर्ण तथ्य:
- Hello! UPI: यह सुविधा NPCI द्वारा 'भाषिनी AI' (Bhashini AI) प्लेटफ़ॉर्म और IIT मद्रास के सहयोग से विकसित की गई है।
- AI फिनटेक सुरक्षा: एआई मॉडल धोखाधड़ी (Fraud Detection) का वास्तविक समय में पता लगाने के लिए बायोमेट्रिक और व्यवहारिक पैटर्न का विश्लेषण करते हैं।
कथन 3 तकनीकी रूप से पूर्णतः सटीक है। एआई, एमएल और डीप लर्निंग का संबंध एक-दूसरे के भीतर समाहित (Nested Venn Diagram) संरचना की तरह होता है:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI - सबसे व्यापक क्षेत्र): यह एक व्यापक कंप्यूटर विज्ञान का क्षेत्र है जिसका लक्ष्य ऐसी मशीनें बनाना है जो मानव जैसी बुद्धिमत्ता, तर्क और निर्णय लेने की क्षमता का अनुकरण कर सकें।
- मशीन लर्निंग (ML - AI का उपसमूह): यह एआई की एक विशिष्ट शाखा है जो एल्गोरिदम और सांख्यिकी का उपयोग करके कंप्यूटर को डेटा से स्वतः सीखने में सक्षम बनाती है (बिना स्पष्ट प्रोग्रामिंग के)।
- डीप लर्निंग (DL - ML का उपसमूह): यह मशीन लर्निंग की एक उन्नत और विशिष्ट तकनीक है जो मानव मस्तिष्क की संरचना से प्रेरित बहु-स्तरीय कृत्रिम न्यूरल नेटवर्क (Artificial Neural Networks - ANN) का उपयोग करके जटिल डेटा (छवियां, वीडियो, प्राकृतिक भाषा) को संसाधित करती है।
AI vs ML vs DL तुलनात्मक सारणी:
| पैरामीटर (Parameter) | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) | मशीन लर्निंग (ML) | डीप लर्निंग (DL) |
|---|---|---|---|
| दायरा (Scope) | व्यापक अवधारणा (Concept) | AI की एक शाखा | ML की एक विशिष्ट तकनीक |
| आर्किटेक्चर | नियम-आधारित प्रणाली + एमएल | सांख्यिकीय एल्गोरिदम | बहु-स्तरीय न्यूरल नेटवर्क (ANN) |
| डेटा आवश्यकता | कम से मध्यम | मध्यम डेटासेट | अत्यधिक विशाल (Big Data) |
| हार्डवेयर आवश्यकता | सामान्य कंप्यूटर | मानक CPU | उच्च-स्तरीय GPU / TPU |
| विशेषता निष्कर्षण | मानव द्वारा (Manual) | आंशिक रूप से मैनुअल | स्वतः (Automated Feature Extraction) |
- In Supervised Learning, the model is trained on a Labelled Dataset.
- The primary objective of Unsupervised Learning is to identify hidden patterns or clusters in unlabelled data.
- In Reinforcement Learning, an agent learns through interaction with an environment using rewards and penalties.
Which of the above statements is/are true?||I and II only|II and III only|I and III only|I, II, and III|None of the above||D||||Moderate Q4||Given below are two statements, one is labelled as Assertion (A) and the other as Reason (R):
Assertion (A): Machine Learning (ML) models are widely used in modern Cybersecurity Systems to detect unknown threats and anomalies.
Reason (R): Machine Learning algorithms can learn normal behavioral patterns of network traffic and automatically identify abnormal deviations and Zero-day Attacks in the network.
Select the correct option:||Both Assertion (A) and Reason (R) are true and Reason (R) is the correct explanation of Assertion (A).|Both Assertion (A) and Reason (R) are true, but Reason (R) is not the correct explanation of Assertion (A).|Assertion (A) is true, but Reason (R) is false.|Assertion (A) is false, but Reason (R) is true.|None of the above||A||||Hard Q5||Match List-I (Algorithm/Technique) with List-II (Learning/Task Category) and select the correct answer using the codes given below:
| List-I (Algorithm/Technique) | List-II (Learning/Task Category) |
|---|---|
| a. K-Means | i. Reinforcement Learning |
| b. Linear Regression | ii. Unsupervised Clustering |
| c. Q-Learning | iii. Supervised Classification |
| d. Decision Tree | iv. Supervised Continuous Prediction |
- Object Detection only identifies which object is present in an image, but does not determine its physical location in the image.
- In Image Segmentation, every pixel of an image is categorized into a specific class or category.
- Autonomous vehicles (Self-Driving Cars) use CNN and Computer Vision to recognize road signs, pedestrians, and obstacles in real-time.
Which of the above statements is/are correct?||I and II only|II and III only|I and III only|I, II, and III|None of the above||B||||Moderate Q13||The foundation of modern Generative AI and Large Language Models (such as GPT-4, Claude, BERT) is the Transformer architecture. In which historic research paper published in 2017 by Google researchers was the Transformer architecture and the 'Self-Attention' mechanism introduced for the first time?||"Deep Residual Learning for Image Recognition"|"Attention Is All You Need"|"Mastering the Game of Go"|"Generative Adversarial Nets"|None of the above||B||||Hard Q14||What is the name of the official AI-powered feature launched by the National Payments Corporation of India (NPCI) using Artificial Intelligence (AI) and ChatGPT-like technologies to enable voice-based Conversational Payments on the Unified Payments Interface (UPI)?||UPI 123PAY|UPI AutoPay|UPI Lite|UPI Global|None of the above||E||||Easy Q15||Which of the following statements is MOST ACCURATE in describing the inter-relationship among the technical domains of Artificial Intelligence (AI), Machine Learning (ML), and Deep Learning (DL)?||AI, ML, and DL are three completely independent technologies with no relationship to one another.|Deep Learning is the broadest domain; Machine Learning is a part of it; and AI is a subset of Machine Learning.|Artificial Intelligence (AI) is the broadest domain; Machine Learning (ML) is a subset of AI; and Deep Learning (DL) is a specialized subset of Machine Learning.|Machine Learning is the broadest domain, under which both AI and Deep Learning equally fall.|None of the above||C||||Moderate
UPSSSC Lower PCS 2026
Computer Questions Practice Set (Topic Wise)
Practice Set - 12
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निष्कर्ष (Conclusion)
हमें उम्मीद है कि UPSSSC Lower PCS के लिए तैयार किया गया यह कंप्यूटर प्रैक्टिस सेट (Computer Practice Set) आपकी परीक्षा की तैयारी (exam preparation) में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। प्रश्नों को हल करने के बाद, विस्तृत व्याख्या (detailed explanations) को पढ़ना न भूलें, क्योंकि असली कॉन्सेप्ट्स वहीं छिपे हैं। अपना स्कोर (score) और किसी भी प्रश्न से जुड़ा डाउट (doubt) नीचे कमेंट सेक्शन (comment section) में अथवा Telegram Group में जरूर शेयर करें।
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