अबेकस (Abacus) क्या है? इतिहास, प्रकार और कार्यप्रणाली | Computer History for UPSC & SSC

लकड़ी की मेज पर रखा हुआ प्राचीन अबेकस (Abacus) जिसमें रंगीन मोती और छड़ें दिखाई दे रही हैं, कंप्यूटर इतिहास का प्रतीक।

क्या आपने कभी सोचा है कि आज हम जिस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) और सुपर कंप्यूटर (Super Computer) के युग में जी रहे हैं, उसकी असली नींव कहाँ रखी गई थी? उसकी शुरुआत किसी सिलिकॉन चिप से नहीं, बल्कि लकड़ी के एक साधारण फ्रेम और मोतियों से हुई थी, जिसे दुनिया अबेकस (Abacus) के नाम से जानती है।

अबेकस (Abacus) केवल बच्चों का खिलौना नहीं है, बल्कि यह मानव इतिहास का प्रथम यांत्रिक गणना यंत्र (First Mechanical Calculating Device) है। यह वह पहला पड़ाव था जिसने इंसान को उंगलियों पर गिनने की सीमा से बाहर निकालकर मशीनी गणना की दुनिया में प्रवेश कराया।

प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, SSC, Banking) के कंप्यूटर सेक्शन में अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है कि दुनिया का प्रथम गणना यंत्र (First Calculating Device) कौन सा था? जवाब है—अबेकस। लेकिन एक छात्र के तौर पर केवल इसका नाम जानना काफी नहीं है। चाहे वह बेबीलोन (Babylon) का इतिहास हो, चीन का सुआनपान (Suanpan) हो, या फिर इसे इकाई और दहाई (Units & Tens) के लिए सेट करने का तरीका—हर एक पहलू से प्रश्न बनते हैं।

इस RojgarBytes विशेष लेख में, हम अबेकस के हर उस तकनीकी और ऐतिहासिक पहलू को कवर करेंगे जो आपको परीक्षा में बाकियों से दो कदम आगे रखेगा। चलिए, गणना के इतिहास के पहले पन्ने को पलटते हैं।


अबेकस क्या है? (What is Abacus?)

तकनीकी भाषा में परिभाषित करें तो, अबेकस एक हस्तचलित (Manual) गणना उपकरण है जिसका उपयोग अंकगणितीय गणनाओं (Arithmetic Calculations) के लिए किया जाता है।

  • मूल परिभाषा: यह तारों (Wires) या छड़ों (Rods) में पिरोए गए मोतियों (Beads) वाला एक फ्रेम है।
  • उपयोगिता: इसका प्राथमिक उपयोग जोड़ (Addition) और घटाव (Subtraction) के लिए किया जाता था। हालाँकि, एक कुशल उपयोगकर्ता (Expert User) इसके माध्यम से गुणा (Multiplication), भाग (Division), और यहाँ तक कि वर्गमूल (Square Root) और घनमूल (Cube Root) जैसी जटिल गणनाएं भी कर सकता है।
  • महत्व: यह यंत्र इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि यह गणना करता था, बल्कि इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसने इंसान को यह सिखाया कि गणना मशीनी तरीके (Mechanically) से भी की जा सकती है।

इतिहास और उत्पत्ति (History & Origin)

इतिहास के पन्नों में अबेकस की उत्पत्ति को लेकर अक्सर छात्रों में भ्रम (Confusion) रहता है। आइए इसे परीक्षा के दृष्टिकोण से स्पष्ट करते हैं:

  • समय काल (Time Period): इसका आविष्कार लगभग 2400 ईसा पूर्व से 3000 वर्ष पूर्व (BC) माना जाता है।
  • स्थान (Location): इतिहासकार मानते हैं कि इसका सबसे शुरुआती रूप प्राचीन बेबीलोन (Babylon/Mesopotamia) में विकसित हुआ था। हालाँकि, इसका आधुनिक और सबसे प्रचलित रूप चीन (China) में विकसित हुआ।
  • शब्द की उत्पत्ति (Etymology): 'Abacus' शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द 'Abax' (एबेक्स) से मानी जाती है।
    • अर्थ: इसका शाब्दिक अर्थ है— "सपाट सतह" (Flat Surface) या "धूल/रेत की सतह" (Dust Board)।

RojgarBytes Exam Tip: यदि परीक्षा में प्रश्न आए कि "अबेकस का आविष्कार कहाँ हुआ?" और विकल्प में 'चीन' और 'बेबीलोन' दोनों हों, तो ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर बेबीलोन (Babylon) को प्राथमिकता दें। यदि बेबीलोन विकल्प में नहीं है, तो चीन (China) 100% सही उत्तर है।


बनावट और तकनीकी संरचना (Architecture & Technical Structure)

UPSC और तकनीकी परीक्षाओं (Technical Exams) में इसकी संरचना (Architecture) से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं।

अबेकस का एक नामांकित रेखाचित्र (Labeled Sketch) जिसमें फ्रेम, बीम, छड़ें और ऊपरी/निचले मोतियों को स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।

  1. फ्रेम (Frame): यह लकड़ी का एक आयताकार ढांचा होता है।
  2. बीम (Beam): यह एक क्षैतिज विभाजक (Horizontal Divider) है जो फ्रेम को दो भागों में बांटता है—ऊपरी डेक (Upper Deck) और निचला डेक (Lower Deck)।
  3. छड़ें (Rods): इसमें लंबवत (Vertical) छड़ें होती हैं जो स्थानीय मान (Place Value) का प्रतिनिधित्व करती हैं (जैसे—इकाई, दहाई, सैकड़ा)।
  4. मोती (Beads): गणना के लिए मिट्टी, पत्थर या लकड़ी के मोतियों का उपयोग होता है।

कार्य सिद्धांत: स्वर्ग और पृथ्वी (Working Principle: Heaven & Earth)

चीनी अबेकस, जिसे सुआनपान (Suanpan) कहा जाता है, एक विशेष बिक्विनेरी सिस्टम (Biquinary System) पर काम करता है। यह आपके लिए समझना सबसे महत्वपूर्ण है:

एक चीनी अबेकस (सुआनपान) का स्पष्ट चित्र जिसमें ऊपरी भाग 'स्वर्ग' (लाल मोती, मान 5) और निचला भाग 'पृथ्वी' (नीले मोती, मान 1) को लेबल के साथ दिखाया गया है।

अबेकस दो भागों में बंटा होता है:

भाग (Part) नाम (Name) मोतियों की संख्या (Per Rod) मान (Value per Bead)
ऊपरी भाग स्वर्ग (Heaven) 2 5
निचला भाग पृथ्वी (Earth) 5 1

कार्यप्रणाली (Mechanism):

जब मोतियों को उंगलियों से बीम (Beam) की ओर सरकाया जाता है, तो उनका मान गणना में जुड़ जाता है। जब उन्हें बीम से दूर किया जाता है, तो मान शून्य हो जाता है। यह पूरी तरह से स्थानीय मान (Place Value Concept) पर आधारित है।


अबेकस संचालन: तकनीकी विन्यास और नियम (Technical Configuration & Rules)

अक्सर छात्र यह तो जानते हैं कि अबेकस गणना करता है, लेकिन "कैसे और किस तरफ से?"—इसमें कंफ्यूज रहते हैं। आइए इसे रोजगारबाइट्स की स्पष्टता के साथ समझें:

अबेकस को कैसे रखा जाता है? (Placement & Orientation)

  • स्थिति (Position): अबेकस को हमेशा समतल सतह (Flat Surface) पर लेटाकर (Horizontally) रखा जाता है। इसे मेज पर बिल्कुल सीधा रखा जाना चाहिए।
  • खड़ा क्यों नहीं? यदि आप इसे दीवार घड़ी की तरह खड़ा (Vertical) करेंगे, तो गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के कारण मोती (Beads) अपनी जगह से नीचे गिर जाएंगे और गणना गलत हो जाएगी। (नोट: शिक्षकों के पास जो बड़े डेमो अबेकस होते हैं, उनमें मोतियों को रोकने के लिए विशेष फ्रिक्शन/ब्रश लगा होता है, इसलिए वे खड़े रहते हैं)।
  • पकड़ने का तरीका: गणना करते समय अबेकस को बाएं हाथ (Left Hand) से मजबूती से पकड़ा जाता है और दाएं हाथ (Right Hand) से मोतियों को सरकाया जाता है (हालांकि एक्सपर्ट दोनों हाथों का उपयोग करते हैं)।

छड़ें (Rods) कितनी होती हैं? (Number of Rods)

  • विषम संख्या का नियम (Rule of Odd Numbers): एक मानक अबेकस (Standard Abacus) में छड़ों की संख्या हमेशा विषम (Odd) होती है।
  • मानक संख्या: आमतौर पर इसमें 13, 15, 17, 21 या 23 छड़ें होती हैं।
  • कारण: विषम संख्या होने से हमें अबेकस का बिल्कुल मध्य बिंदु (Center Point) खोजने में आसानी होती है, जिसे हम अपनी गणना का आधार (Unit Point) बनाते हैं।

गणना की दिशा और स्थानीय मान (Direction & Place Value)

यह सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी हिस्सा है। इसे ध्यान से समझें:

  • दिशा (Direction): हम गणना के लिए दाएं से बाएं (Right to Left) के क्रम का पालन करते हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे हम भारतीय संख्या प्रणाली में "इकाई, दहाई, सैकड़ा" गिनते हैं।
  • इकाई बिंदु (Unit Point/House Point): अबेकस की बीम (Beam) पर हर 3 छड़ों के बाद एक छोटा सा बिंदु (Dot) होता है। आप अपनी सुविधानुसार किसी भी बिंदु को इकाई (Unit/Ones) मान सकते हैं। आमतौर पर केंद्र के बिंदु को इकाई माना जाता है।
अबेकस का एक तकनीकी आरेख जो छड़ों पर स्थानीय मान प्रणाली (इकाई, दहाई, सैकड़ा) और दशमलव बिंदु को दर्शाता है।

स्थान का निर्धारण (Assignment of Rods):

मान लीजिए आपने बीच वाली छड़ को इकाई (Unit) माना है, तो:

  1. मध्य छड़: इकाई (Unit) - 100
  2. बाईं ओर (Left Side): मान बढ़ता जाएगा।
    • दूसरी छड़: दहाई (Tens) - 101
    • तीसरी छड़: सैकड़ा (Hundreds) - 102
    • चौथी छड़: हजार (Thousands) - 103 ... और यह क्रम खरबों तक जा सकता है।
  3. दाईं ओर (Right Side): क्या इसके आगे भी कुछ है? जी हाँ! इकाई बिंदु के दाईं ओर की छड़ें दशमलव (Decimals) के लिए होती हैं।
    • पहली दाईं छड़: दशांश (Tenths) - 0.1
    • दूसरी दाईं छड़: शतांश (Hundredths) - 0.01

RojgarBytes Pro Tip: यही कारण है कि अबेकस पर केवल सामान्य जोड़-घटाना ही नहीं, बल्कि दशमलव की गणनाएं (Decimal Calculations) भी सटीक रूप से की जा सकती हैं।

अबेकस पर गणना कैसे करें? (How to Calculate on Abacus?)

एक व्यक्ति का क्लोज़-अप शॉट जो लकड़ी के अबेकस पर उंगलियों का उपयोग करके गणना (जोड़/घटाव) कर रहा है।

(Practical Knowledge: Addition, Subtraction, Multiplication & Square Root)

अबेकस पर गणना करने के लिए मोतियों को बीम (Beam) की ओर खिसकाया जाता है। जब कोई मोती बीम को छूता है, तभी उसका मान (Value) गिना जाता है।

आइए उदाहरणों से समझते हैं:

(A) जोड़ (Addition)

मान लीजिए हमें 12 में 21 जोड़ना है।

  1. संख्या 12 सेट करें:
    • दहाई (Tens) की छड़ पर 'Earth' (निचले भाग) से 1 मोती ऊपर करें। (मान = 10)
    • इकाई (Units) की छड़ पर 'Earth' से 2 मोती ऊपर करें। (मान = 2)
    • अब अबेकस पर 12 दिख रहा है।
  2. 21 जोड़ें:
    • दहाई (Tens) की छड़ पर 2 और मोती ऊपर करें (1+2 = 3)।
    • इकाई (Units) की छड़ पर 1 और मोती ऊपर करें (2+1 = 3)।
  3. परिणाम: दहाई पर 3 मोती और इकाई पर 3 मोती बीम को छू रहे हैं।
    • उत्तर = 33

Expert Note (Complementary Numbers): जब मोती कम पड़ जाते हैं (जैसे 4 में 3 जोड़ना), तो हम 5 के मित्र (Friends of 5) या 10 के मित्र (Friends of 10) नियम का उपयोग करते हैं।

  • सूत्र: +3 = +5 - 2 (5 का मोती नीचे लाओ और 2 मोती नीचे करो)।

(B) घटाव (Subtraction)

मान लीजिए हमें 45 में से 20 घटाना है।

  1. संख्या 45 सेट करें:
    • दहाई की छड़ पर 'Earth' के 4 मोती ऊपर।
    • इकाई की छड़ पर 'Heaven' (ऊपरी भाग) का 1 मोती (जिसका मान 5 है) नीचे लाएं।
  2. 20 घटाएं:
    • दहाई की छड़ से 2 मोती नीचे (दूर) कर दें।
    • इकाई की छड़ से 0 घटाना है (कुछ नहीं करना)।
  3. परिणाम: दहाई पर 2 मोती और इकाई पर 5 का मोती बचा।
    • उत्तर = 25

(C) गुणा (Multiplication)

अबेकस पर गुणा को बार-बार जोड़ने (Repeated Addition) की प्रक्रिया के रूप में नहीं, बल्कि सीधे पहाड़ों (Tables) का उपयोग करके किया जाता है।

मान लीजिए हमें 12 में 3 का गुना करना है।

  1. सेटअप: बायीं ओर 12 और थोड़ी दूर 3 सेट करें।
  2. प्रक्रिया:
    • पहले 3 का गुणा 1 (दहाई) से करें = 03। इसे परिणाम क्षेत्र में सेट करें।
    • फिर 3 का गुणा 2 (इकाई) से करें = 06। इसे परिणाम क्षेत्र में इकाइयों पर जोड़ें।
  3. परिणाम: 30 + 6 = 36

(D) वर्गमूल (Square Root): एक्सपर्ट लेवल

यह सबसे जटिल प्रक्रिया है जिसे विषम संख्या घटाव विधि (Subtracting Odd Numbers Method) या जोड़ी विध" (Pairing Method) से किया जाता है।

  • तरीका: संख्या के जोड़ों (Pairs) को दाईं ओर से बाईं ओर बनाया जाता है (जैसे √625 में '25' और '6' का जोड़ा)।
  • प्रक्रिया: हम मूल संख्या में से लगातार बढ़ते क्रम में विषम संख्याएं (1, 3, 5...) घटाते हैं या भाजक (Divisor) का दोगुना करने का नियम (Double the Root) अपनाते हैं, जैसा हम कागज पर करते हैं।
    • उदाहरण (सरल विधि): √9 के लिए।
    • 9 - 1 = 8
    • 8 - 3 = 5
    • 5 - 5 = 0
    • हमने 3 बार घटाया (1, 3, 5), इसलिए उत्तर = 3 है।

विश्व भर में अबेकस के प्रकार (Types of Abacus Globally)

विभिन्न सभ्यताओं ने अबेकस को अपने अनुसार ढाला। मिलान (Match the following) वाले प्रश्नों के लिए यह सूची याद रखें:

एक कंपोजिट चित्र जिसमें पांच अलग-अलग प्रकार के अबेकस दिखाए गए हैं: प्राचीन 'धूल' अबेकस, चीनी 'सुआनपान', जापानी 'सोरोबान', रूसी 'श्योटी', और क्रेनमर अबेकस, उनके नाम के लेबल के साथ।

  1. सुआनपान (Suanpan): चीन (China) में विकसित। (2 मोती ऊपर, 5 नीचे)।
  2. सोरोबान (Soroban): जापान (Japan) का अबेकस। यह चीनी अबेकस का आधुनिक, हल्का और सुधरा हुआ रूप है। (1 मोती ऊपर, 4 नीचे)।
  3. श्योटी (Schoty): रूस (Russia) में उपयोग किया जाने वाला अबेकस।
  4. क्रेनमर अबेकस (Cranmer Abacus): इसका आविष्कार टिम क्रेनमर (Tim Cranmer) ने किया था। यह विशेष रूप से दृष्टिबाधित (Visually Impaired/Blind) लोगों के लिए बनाया गया है। इसमें मोतियों के पीछे रबर या फोम होता है ताकि वे छूने पर अपनी जगह से न हिलें।

RojgarBytes परीक्षा मंथन (Exam Fact Sheet)

छात्रों, यह सेक्शन आपके लिए "संजीवनी बूटी" है। इसे रट लें:

  • दुनिया का पहला गणना यंत्र: अबेकस (Abacus)।
  • अबेकस किस प्रकार का डिवाइस है? यह एक मैकेनिकल (Mechanical) डिवाइस है, इलेक्ट्रॉनिक नहीं।
  • पितामह: हालांकि अबेकस का कोई एक "जनक" नहीं है, लेकिन इसे आधुनिक रूप देने का श्रेय चीन को जाता है।
  • जापान में महत्व: जापान में इसे दिमाग के विकास (Brain Development) और एकाग्रता (Concentration) के लिए आज भी स्कूलों में अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाता है।
  • गणितीय क्षमता: जोड़, घटाव, गुणा, भाग, वर्गमूल (Square Root)।

RojgarBytes मॉक टेस्ट (Mock Test)

अपनी तैयारी को परखें (Check Your Preparation):

Q1. 'Abacus' शब्द की उत्पत्ति किस भाषा के शब्द से हुई है?

  1. लैटिन (Latin)
  2. ग्रीक (Greek)
  3. चीनी (Chinese)
  4. जापानी (Japanese)

Q2. पारंपरिक चीनी अबेकस (Suanpan) में 'Heaven' (ऊपरी भाग) के एक मोती का मान (Value) कितना होता है?

  1. 1
  2. 2
  3. 5
  4. 10

Q3. दृष्टिबाधित (Blind) लोगों के लिए विकसित किए गए अबेकस का क्या नाम है?

  1. सोरोबान (Soroban)
  2. सुआनपान (Suanpan)
  3. क्रेनमर अबेकस (Cranmer Abacus)
  4. पास्कलाइन (Pascaline)

Q4. अबेकस को किस श्रेणी का कंप्यूटर माना जा सकता है?

  1. डिजिटल (Digital)
  2. एनालॉग (Analog)
  3. मैकेनिकल (Mechanical)
  4. इलेक्ट्रॉनिक (Electronic)
उत्तर: 1-B, 2-C, 3-C, 4-C


RojgarBytes मास्टर रिवीज़न टेबल (Master Revision Table)

विवरण (Parameter) तथ्य (Fact) परीक्षा विशेष नोट (Exam Booster)
आविष्कारक/जनक (Inventor) अज्ञात (Unknown) आधुनिक श्रेय चीन (China) को जाता है।
उत्पत्ति का स्थान (Origin) बेबीलोन (Babylon) / मेसोपोटामिया विकल्प में बेबीलोन न हो, तो चीन सही उत्तर है।
समय काल (Time Period) 2400-3000 ईसा पूर्व (BC) मानव इतिहास का सबसे पुराना गणना यंत्र।
सिद्धांत (Principle) स्थानीय मान (Place Value) यह बिक्विनेरी सिस्टम (Bi-quinary System) पर आधारित है।
मुख्य भाग (Parts) फ्रेम, बीम, छड़ें (Rods), मोती (Beads) बीम इसे दो भागों में बांटती है: Heaven और Earth
स्वर्ग (Heaven) का मान 2 मोती (प्रत्येक का मान 5) ऊपरी डेक (Upper Deck)।
पृथ्वी (Earth) का मान 5 मोती (प्रत्येक का मान 1) निचला डेक (Lower Deck)।
जापानी नाम सोरोबान (Soroban) यह 1/4 सिस्टम पर काम करता है (1 ऊपर, 4 नीचे)।
दृष्टिबाधितों के लिए क्रेनमर अबेकस (Cranmer Abacus) इसे टिम क्रेनमर ने बनाया था (स्पर्श द्वारा गणना)।

निष्कर्ष (Conclusion)

अबेकस (Abacus) केवल लकड़ी और मोतियों का खिलौना नहीं, बल्कि कंप्यूटर इतिहास (History of Computer) की वह नींव है जिस पर आज की डिजिटल दुनिया खड़ी है।

आज के इस विस्तृत अध्ययन (Deep Dive) में हमने जाना कि कैसे बेबीलोन (Babylon) की धूल भरी सतह से शुरू होकर, यह यंत्र चीन के सुआनपान (Suanpan) और जापान के सोरोबान (Soroban) के रूप में विकसित हुआ। हमने इसके स्वर्ग और पृथ्वी (Heaven & Earth) सिद्धांत को समझा और यह भी देखा कि कैसे यह स्थानीय मान (Place Value) के जरिए जटिल गणनाएं चुटकियों में कर सकता है।

चाहे आप UPSC में तकनीकी इतिहास लिख रहे हों या UPSSSC/SSC/Railways में प्रथम गणना यंत्र (First Calculating Device) पर टिक कर रहे हों—अब आपके पास हर सवाल का जवाब है। इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद, आपको अबेकस के लिए किसी और किताब या पीडीएफ को खोलने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

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