Generation of Computer in Hindi (1st to 5th) | Detailed Notes For UPSSSC & SSC

कंप्यूटर की पीढ़ियाँ (जेनरेशन ऑफ़ कंप्यूटर) का फीचर्ड इमेज, जिसमें SSC, UPSSSC, बैंकिंग जैसी सभी सरकारी परीक्षाओं के लिए नोट्स, तथ्य और प्रश्न दिए गए हैं।

नमस्कार दोस्तों!👋

यदि आप SSC, Banking, Railway, UPSSSC या किसी भी सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो आप जानते हैं कि कंप्यूटर जागरूकता (Computer Awareness) एक कितना महत्वपूर्ण सेक्शन है। इस सेक्शन में, कंप्यूटर की पीढ़ियों (Generations of Computer) से जुड़े सवाल लगभग हर परीक्षा में पूछे जाते हैं। अक्सर छात्र पहली, दूसरी, तीसरी, चौथी और पाँचवीं पीढ़ी के बीच की मुख्य तकनीक (Main Technology), समय अवधि (Time Period) और उदाहरणों (Examples) को लेकर भ्रमित (confuse) हो जाते हैं।

Rojgarbytes द्वारा प्रस्तुत यह लेख आपकी इसी समस्या का समाधान है। इस पोस्ट में, हम Generation of Computer in Hindi (1st to 5th) को बहुत ही सरल भाषा में, स्टेप-बाय-स्टेप समझेंगे। हम पहली पीढ़ी के विशाल वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) से लेकर आज की 5वीं पीढ़ी के AI (Artificial Intelligence) तक का पूरा सफर, बहुत ही आसान भाषा में और स्टेप-बाय-स्टेप समझेंगे। यह Computer Generation Notes in Hindi आपकी तैयारी को इतना मजबूत कर देंगे कि इस टॉपिक से आपका एक भी नंबर नहीं कटेगा!

कंप्यूटर की पीढ़ियाँ: एक संक्षिप्त परिचय (Generations of computers: A brief introduction)

कंप्यूटर की पीढ़ियाँ (Generations of Computers) कंप्यूटर के तकनीकी विकास (Technical Development) के इतिहास को अलग-अलग चरणों (Phases) में बांटने का एक तरीका है। इन्हें मुख्य रूप से पाँच पीढ़ियों (Five Generations) में बाँटा गया है। इन पीढ़ियों का विभाजन मुख्य रूप से कंप्यूटर द्वारा उपयोग किए जाने वाले कोर प्रोसेसिंग कंपोनेंट (Core Processing Component) के आधार पर किया जाता है।

इन पीढ़ियों का विभाजन इसलिए किया गया ताकि कंप्यूटर प्रौद्योगिकी (Computer Technology) के विकास को समझना आसान हो। प्रत्येक नई पीढ़ी ने पिछली पीढ़ी की तुलना में कंप्यूटर को आकार में छोटा (Compact), गति (Speed) और भंडारण क्षमता (Storage Capacity) में अधिक शक्तिशाली (Powerful), विश्वसनीयता (Reliability) में बेहतर और उपयोग में अधिक सुविधाजनक (User-Friendly) बनाया। इस प्रगति (Progress) का सीधा संबंध हार्डवेयर (Hardware), सॉफ्टवेयर (Software) और उपयोगकर्ता इंटरफेस (User Interface) में हुए नवाचारों (Innovations) से है।

कंप्यूटर की पीढ़ी की शुरुआत 1946 से ही क्यों?

आपका यह जानना बहुत जरूरी है कि 1946 से पहले भी कई यांत्रिक (Mechanical) और इलेक्ट्रो-मैकेनिकल (Electro-Mechanical) कंप्यूटिंग उपकरणों का आविष्कार हुआ था जैसा कि हमने कंप्यूटर के इतिहस में कई उपकरणों के बारे में पढ़ा था।

फिर भी, 1946 को ही पहली पीढ़ी की शुरुआत का "आधिकारिक" वर्ष माना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि 1946 में विकसित किया गया ENIAC पहला ऐसा कंप्यूटर था जिसमें निम्नलिखित तीनों महत्वपूर्ण विशेषताएं एक साथ थीं:

  1. पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक (Fully Electronic): यह पूरी तरह से वैक्यूम ट्यूब्स (Vacuum Tubes) पर आधारित था, जबकि इससे पहले के उपकरण यांत्रिक स्विच या रिले पर निर्भर थे। यही इसकी मुख्य तकनीकी पहचान बनी।
  2. सामान्य-उद्देश्य (General-Purpose): इससे पहले के ज्यादातर उपकरण किसी एक विशिष्ट काम (जैसे कोड तोड़ना, गणना) के लिए बने थे। ENIAC को अलग-अलग तरह की गणना करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता था।
  3. डिजिटल और प्रोग्राम करने योग्य (Digital & Programmable): यह डेटा को डिजिटल रूप में प्रोसेस करता था और इसके प्रोग्राम को बदला जा सकता था (हालाँकि प्रोग्रामिंग बहुत जटिल थी)।

संक्षेप में: 1946 से पहले के उपकरण कंप्यूटिंग इतिहास के महत्वपूर्ण अध्याय हैं, लेकिन "कंप्यूटर पीढ़ियों" का वर्गीकरण मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटिंग के तेजी से हुए तकनीकी विकास (वैक्यूम ट्यूब -> ट्रांजिस्टर -> IC -> माइक्रोप्रोसेसर) को ट्रैक करने के लिए बनाया गया है। इसलिए, ENIAC (1946) को इस श्रृंखला का प्रतीकात्मक शुरुआती बिंदु (Symbolic starting point) मान लिया गया।


ENIAC (एनीयैक), दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर, जिसने कंप्यूटर की पहली पीढ़ी की नींव रखी।
क्रम (Sr.) पीढ़ी (Generation) समय अवधि (Time Period) मुख्य तकनीक (Core Technology)
1 पहली पीढ़ी 1946 – 1959 (लगभग) वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes)
2 दूसरी पीढ़ी 1959 – 1965 (लगभग) ट्रांजिस्टर (Transistors)
3 तीसरी पीढ़ी 1965 – 1971 (लगभग) इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuits - IC)
4 चौथी पीढ़ी 1971 – 1989 (लगभग) माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) (VLSI)
5 पाँचवीं पीढ़ी 1990 – वर्तमान ULSI और AI (Artificial Intelligence)

कंप्यूटर की सभी पीढ़ियाँ: विस्तृत विवरण (All Generations of computers: Detailed Description)

अब हम कंप्यूटर की सभी पीढ़ियों को चरण दर चरण (Step-by-step) विस्तार से समझेंगे।

1. कंप्यूटर की पहली पीढ़ी (First Generation of Computer in Hindi)

कंप्यूटिंग के इतिहास में, प्रथम पीढ़ी (First Generation) का युग (लगभग 1946-1959) तकनीकी नवाचार का एक मूलभूत अध्याय है। इस पीढ़ी ने उन विशाल मशीनों की नींव रखी, जिन्होंने आज की डिजिटल दुनिया का मार्ग प्रशस्त किया। इस पीढ़ी की पहचान इसके मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) से होती है।

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर में उपयोग की जाने वाली वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) का डायग्राम - Generation of Computer in Hindi (1st to 5th).

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों की तकनीकी विशेषताएं (Technical Specifications)

  1. मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक (Main Electronic Component): वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube)
    • प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों के संचालन का पूरा आधार वैक्यूम ट्यूब थे। इनका उपयोग प्रोसेसिंग (Processing) और मेमोरी (Memory) के लिए किया गया था। एक कंप्यूटर के भीतर हज़ारों की संख्या में वैक्यूम ट्यूब कार्य करते थे। ये सिग्नल को नियंत्रित और प्रवर्धित (amplify) करने के लिए आवश्यक थे।
  2. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System): वास्तविक ऑपरेटिंग सिस्टम नहीं (No Operating System)
    • आज के GUI/CLI OS की तरह पहली पीढ़ी में कोई ऑपरेटिंग सिस्टम (No Operating System - OS) नहीं था, लेकिन काम करने के तरीके को बैच प्रोसेसिंग (Batch Processing) कहा जाता था जिसमें समान प्रकार के कार्यों (Jobs) को एक समूह (Batch) में इकट्ठा किया जाता था और कंप्यूटर उन्हें एक के बाद एक प्रोसेस करता था। एक समय में केवल एक ही प्रोग्राम (program) चलता था और सारे काम मैन्युअल (manual) तरीके से होते थे।
  3. प्रोग्रामिंग भाषा (Programming Languages): मशीनी भाषा (Machine Language)
    • उस समय आज के जैसे उच्च स्तरीय भाषाएं (जैसे पायथन, सी++) और Compiler या Interpreter जैसा कोई अनुवादक (translator) विकसित नहीं हुआ था। कंप्यूटर को समझ आने वाली केवल एकमात्रा भाषा थी - मशीनी भाषा (Machine Language), जो बाइनरी कोड (0 और 1) पर आधारित थी। प्रोग्राम को सीधे बाइनरी कोड (0 और 1 के सीक्वेंस) में निर्देश लिखने पड़ते थे। यह बेहद कठिन (extremely difficult), समय लेने वाला (time-consuming) और त्रुटि-प्रवण (error-prone) था।
    • पहली पीढ़ी के आखिरी सालों में असेंबली भाषा (Assembly Language) का विकास हुआ। इसमे मशीन कोड के निर्देशों को आसान कोड (जैसे ADD, SUB, LOAD) में याद रखा जा सकता था। एक खास प्रोग्राम/अनुवादक (translator) "असेम्बलर" इन कोड्स को मशीन भाषा में बदल देता था। फिर भी, ये आज की भाषाओं की तुलना में बहुत निम्न-स्तरीय (Low-level) और मशीन-विशिष्ट (Machine-specific) थी।
  4. प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory): मर्करी डिले लाइन्स (Mercury Delay Lines), विलियम्स ट्यूब (Williams Tubes) और मैग्नेटिक ड्रम (Magnetic Drum)
    • आज की RAM (Random Access Memory) की तरह, पहली पीढ़ी में मुख्य मेमोरी (Main Memory) के तौर पर मैग्नेटिक ड्रम (Magnetic Drum) का इस्तेमाल किया जाता था। यह एक घूमता हुआ (rotating) सिलेंडर होता था, जिस पर डेटा को मैग्नेटिक रूप से लिखा और पढ़ा जाता था। (कुछ शुरुआती कंप्यूटरों में वैक्यूम ट्यूब्स (Vacuum Tubes) का भी मेमोरी के तौर पर इस्तेमाल हुआ, लेकिन मैग्नेटिक ड्रम ज़्यादा प्रचलित था)।
    • इस पीढ़ी के अंत में (1950 के दशक के उत्तरार्ध में) 'मैग्नेटिक कोर मेमोरी' (Magnetic Core Memory) का विकास शुरू हो गया था, जिसने दूसरी पीढ़ी में क्रांति ला दी।
  5. द्वतीयक भंडारण (Secondary Storage): पंच कार्ड (Punch Cards) और मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tapes)
    • आज की हार्ड डिस्क (HDD) या SSD की तरह, उस समय डेटा को स्थायी (permanent) रूप से स्टोर करने के लिए पंच कार्ड (Punch Cards) और मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tapes) का उपयोग किया जाता था। मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tapes) आज के ऑडियो कैसेट की तरह दिखते थे, जिन पर डेटा को सीक्वेंशियल एक्सेस (Sequential Access) के रूप में स्टोर किया जाता था (यानी डेटा को क्रम से ही पढ़ा जा सकता था, बीच से नहीं), जो कि आज की डिस्क (Direct Access) से अलग है।
  6. इनपुट और आउटपुट (Input & Output):
    • आज के कीबोर्ड (Keyboard) की जगह, पहली पीढ़ी में डेटा इनपुट करने के लिए मुख्य रूप से पंच्ड कार्ड्स (Punched Cards) और पेपर टेप (Paper Tape) का इस्तेमाल होता था। इन कार्ड्स या टेप पर छेद (holes) करके निर्देशों (instructions) और डेटा को कंप्यूटर में डाला जाता था।
    • उस समय आज के मॉनिटर (Monitor) नहीं होते थे। रिजल्ट (Result) या आउटपुट देखने के लिए टेलीटाइपराइटर्स (Teletypewriters), प्रिंटआउट (Printouts) (जो एक तरह के टाइपराइटर से निकलते थे) और पंच्ड कार्ड्स (Punched Cards) का ही इस्तेमाल होता था। (यानी, कंप्यूटर गणना (calculation) करके नए पंच कार्ड पर रिजल्ट को पंच कर देता था)।
  7. गति (Speed): मिलीसेकण्ड (milliseconds)
    • इस पीढ़ी के कंप्यूटर उस समय के सबसे तेज गणना (calculation) करने वाले उपकरण थे। इनकी गति मिलीसेकण्ड से मापी जाती थी।

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों की सीमाएं (Features and Limitations)

  • विशाल आकार (Huge Size): ये कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े होते थे (एक पूरे कमरे जितने) और इनका वजन भी 30 टन के लगभग था।
  • अत्यधिक गर्मी (Immense Heat): हजारों वैक्यूम ट्यूब बहुत अधिक गर्मी पैदा करते थे, जिसके कारण निरंतर महंगे एयर कंडीशनिंग (Air Conditioning) सिस्टम चलाने की आवश्यकता होती थी।
  • बिजली खपत (Power Consumption): एक साथ हजारों की संख्या में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) चलने के कारण बिजली की खपत बहुत ज्यादा थी। ENIAC 150 kW से अधिक बिजली लेता था।
  • अविश्वसनीय (Unreliable): वैक्यूम ट्यूब बार-बार जल जाते (failed) थे। उनका MTBF (Mean Time Between Failure) बहुत कम था, जो अक्सर कुछ घंटों का ही होता था जिस वजह से इनकी गणना कम भरोसेमंद होती थी।
  • कठिन प्रोग्रामिंग (Difficult Programming): मशीन भाषा (Machine Language) में प्रोग्रामिंग के लिए उच्च कौशल (high skill) की आवश्यकता होती थी।
  • गैर-पोर्टेबल (Non-Portable): इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान पर नहीं ले जाया जा सकता था। ये कंप्यूटर पूरी तरह से गैर-पोर्टेबल (Non-portable) थे।
  • महंगे (Expensive): इन्हें बनाना और बनाए रखना बहुत महंगा था।

पहली पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर (Key Computers of the First Generation)

  • ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) - 1946 [पहला सफल डिजिटल कंप्यूटर]
  • EDVAC (Electronic Discrete Variable Automatic Computer) - 1949
  • EDSAC (Electronic Delay Storage Automatic Calculator) - 1949
  • UNIVAC-I (Universal Automatic Computer) - 1951 [पहला व्यावसायिक कंप्यूटर]
  • SEAC (Standards Electronic Automatic Computer) - 1950
  • IBM 701 (IBM Defense Calculator) - 1952
  • IBM 650 (IBM 650 Magnetic Drum Data Processing Machine) - 1953
  • पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों का दिल और दिमाग वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) थे।
  • हजारों वैक्यूम ट्यूब मिलकर बाइनरी लॉजिक (binary logic) का प्रदर्शन करते थे।

वॉन न्यूमैन आर्किटेक्चर (Von Neumann Architecture):

1945 में जॉन वॉन न्यूमैन ने "स्टोर्ड प्रोग्राम कॉन्सेप्ट" (Stored Program Concept) का प्रस्ताव रखा था। EDVAC और उसके बाद के कंप्यूटर इसी पर आधारित थे। यह इस पीढ़ी की सबसे बड़ी क्रांतियों में से एक थी कि डेटा और निर्देश (Instructions) दोनों को मेमोरी में एक साथ स्टोर किया जा सकता था।


2. कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी (Second Generation of Computer in Hindi)

कंप्यूटर के विकास के इतिहास में, दूसरी पीढ़ी (Second Generation) (1959 – 1965) ने एक मूलभूत तकनीकी छलांग को चिह्नित किया। इस युग ने कंप्यूटिंग को वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) की गर्मी और अविश्वसनीयता से मुक्त कर दिया और ट्रांजिस्टर (Transistor) को अपनाया, जिसने आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स की नींव रखी।

ट्रांजिस्टरों ने पहली पीढ़ी के वैक्यूम ट्यूबों (Vacuum Tubes) को पूरी तरह से प्रतिस्थापित (replace) कर दिया। ट्रांजिस्टर भी वही काम (एम्प्लीफाई य स्विचिंग) कर सकता था जो वैक्यूम ट्यूब करता था। यह परिवर्तन क्रांति से कम नहीं था, क्योंकि ट्रांजिस्टर:

  • बहुत छोटे (Smaller) थे,
  • अधिक विश्वसनीय (More Reliable) थे,
  • बहुत कम बिजली (less power) की खपत करते थे
  • अधिक कुशल (More Efficient) और सस्ते (cheaper) थे, और
  • वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में काफी कम गर्मी (Significantly less heat) उत्पन्न करते थे।
द्वितीय पीढ़ी के कंप्यूटर का मुख्य घटक ट्रांजिस्टर (Transistor) का चित्र - Generation of Computer in Hindi.

इस एक बदलाव ने कंप्यूटरों को छोटा, सस्ता और अधिक शक्तिशाली (Powerful) बना दिया, जिससे वे प्रयोगशालाओं से निकलकर व्यावसायिक और वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के लिए अधिक सुलभ हो गए।

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तकनीकी विशेषताएं (Technical Specifications of the Second Generation)

  1. मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक (Main Electronic Component): ट्रांजिस्टर (Transistor)
    • दूसरी पीढ़ी की रीढ़ ट्रांजिस्टर (Transistor) था। इसका आविष्कार 1947 में बेल लैब्स (Bell Labs) में जॉन बारडीन, विलियम शॉकली और वाल्टर ब्रेटन ने किया था। यह एक सॉलिड-स्टेट (Solid-state) अर्धचालक डिवाइस था जो वैक्यूम ट्यूब के समान कार्य (स्विचिंग और एम्पलीफिकेशन) करता था।
    • वैक्यूम ट्यूब के विपरीत, इसमें कोई फिलामेंट नहीं था, इसलिए यह तुरंत काम करता था (No warm-up time needed) और जलने (burn out) की समस्या खत्म हो गई।
  2. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System): बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating Systems)
    • इस पीढ़ी में ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) की शुरुआत हुई। इन्हें बैच ऑपरेटिंग सिस्टम (Batch Operating Systems) कहा जाता था। ये ऑपरेटिंग सिस्टम (OS) एक बार में एक जैसे कई कामों (Jobs) का एक बैच (Batch) बनाकर उन्हें एक के बाद एक (sequentially) चलाते थे।
    • प्रोग्रामर (programmer) अब सीधे कंप्यूटर से इंटरैक्ट (interact) नहीं करते थे बल्कि वे अपने प्रोग्राम (आमतौर पर पंच कार्ड पर लिखकर) एक ऑपरेटर (operator) को देते थे।
    • इस पीढ़ी के अंतिम वर्षों में 'मल्टीप्रोग्रामिंग' (Multiprogramming) और 'टाइम-शेयरिंग' (Time-sharing) ऑपरेटिंग सिस्टम की अवधारणा का भी उदय हुआ, जिसने सीपीयू (CPU) की दक्षता को और बढ़ाया।
  3. प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language): असेंबली भाषा (Assembly Language)
    • इस पीढ़ी में मशीनी भाषा के साथ-साथ असेंबली भाषा (Assembly Language) और उच्च-स्तरीय प्रोग्रामिंग भाषा (High-Level Programming Languages) जैसे FORTRAN, COBOL और LISP जैसी प्रभावशाली उच्च स्तरीय भाषाओं का विकास हुआ जिससे प्रोग्रामिंग अधिक परिष्कृत और मानव-पठनीय (Human-readable) बन गई। उच्च स्तरीय भाषाओं ने प्रोग्रामिंग को मशीन से स्वतंत्र और बहुत अधिक सुलभ बना दिया।
      • असेम्बली भाषा (Assembly Language): कंप्यूटर अब भी मशीनी भाषा (Machine Language) पर ही चलते थे, लेकिन प्रोग्रामर असेम्बली भाषा का उपयोग कर सकते थे। यह एक निम्न-स्तरीय भाषा (Low-Level Language) थी, जो मशीनी भाषा (0 और 1) की तुलना में अधिक पठनीय थी। कैथलीन बूथ (Kathleen Booth) ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
      • FORTRAN (Formula Translation): यह पहली प्रमुख उच्च-स्तरीय भाषा थी, जिसे वैज्ञानिक और गणितीय गणनाओं (Scientific and mathematical calculations) के लिए बनाया गया था।
      • COBOL (Common Business-Oriented Language): इसे व्यावसायिक अनुप्रयोगों (Business Data Processing) के लिए बनाया गया था।
  4. प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory): मैग्नेटिक कोर मेमोरी (Magnetic Core Memory)
    • दूसरी पीढ़ी में मुख्य मेमोरी (Main Memory) के लिए मैग्नेटिक कोर मेमोरी (Magnetic Core Memory) का इस्तेमाल किया गया। यह छोटी-छोटी चुंबकीय छल्लों (magnetic rings) या 'डोनट्स' (donuts) से बनी होती थी, जो डेटा को 0 या 1 के रूप में स्टोर करती थीं। यह मैग्नेटिक ड्रम (1st Gen) से तेज और ज़्यादा भरोसेमंद थी।
  5. द्वतीयक भंडारण (Secondary Storage): मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tapes) और मैग्नेटिक डिस्क (Magnetic Disks)
    • सेकेंडरी स्टोरेज के लिए मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tapes) का उपयोग प्रमुखता से जारी रहा। साथ ही, इसी पीढ़ी में (देर से) मैग्नेटिक डिस्क (Magnetic Disks) (जो आज की हार्ड डिस्क के पूर्वज थे) का भी आविष्कार और उपयोग शुरू हो गया था, जिसने डेटा को रैंडमली एक्सेस (Randomly Access) करना संभव बनाया।
  6. इनपुट और आउटपुट (Input & Output):
    • दूसरी पीढ़ी में भी डेटा इनपुट करने के लिए मुख्य रूप से पंच्ड कार्ड्स (Punched Cards) और पेपर टेप (Paper Tape) का ही इस्तेमाल जारी रहा।
    • आउटपुट के लिए मुख्य रूप से लाइन प्रिंटर्स (Line Printers) से निकलने वाले प्रिंटआउट (Printouts) और पंच्ड कार्ड्स (Punched Cards) का ही उपयोग किया जाता था।
    • दूसरी पीढ़ी में एक नई तकनीक आई थी - "I/O Channels" (इनपुट-आउटपुट चैनल)। इससे CPU को इनपुट-आउटपुट के काम से आजादी मिली। (नोट: I/O चैनल एक छोटे प्रोसेसर की तरह होते थे जो CPU को इनपुट-आउटपुट के धीमी गति वाले कार्यों से मुक्त रखते थे, जिससे CPU अपनी मुख्य गणना जारी रख सकता था।)

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की उपलब्धियाँ (Achievements of Second Generation Computers):

  • आकार (Size): ट्रांजिस्टर के कारण कमरे के आकार के ब़ड़े बड़े कंप्यूटर अब एक अलमारी जितने छोटे हो गए।
  • गति (Speed): ये कंप्यूटर पहली पीढ़ी से बहुत तेज (faster) थे, जो माइक्रोसेकंड (microseconds) में काम करते थे।
  • बिजली (Power): इस पीढ़ी में बिजली का खपत में कमी आई। ट्रांजिस्टर काफी कम गर्मी (Significantly less heat) उत्पन्न करते थे हालांकि इन्हें ठंडा रखने के लिए एयर कंडीशनिंग (AC) की जरूरत पड़ती थी।
  • विश्वसनीयता (Reliability): वैक्यूम ट्यूब की तुलना में ट्रांजिस्टर लगभग खराब नहीं होते थे अतः गणना की विश्वसनीयता में तेजी आई। MTBF (Mean Time Between Failure) घंटों से बढ़कर सैकड़ों घंटे हो गया।
  • आसान प्रोग्रामिंग (Easier Programming): COBOL और FORTRAN जैसी उच्च-स्तरीय भाषाओं ने कंप्यूटर का उपयोग करना आसान बना दिया।
  • पोर्टेबिलिटी (Portability): अभी भी गैर-पोर्टेबल (Non-portable) थे, हालाँकि डिज़ाइन और आकार में काफी सुधार हुआ।

दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर की सीमाएँ (Limitations of Second Generation Computers):

  • अभी भी महंगे (Still Expensive): हालाँकि ये पहली पीढ़ी से सस्ते थे, फिर भी ये केवल बड़ी कंपनियों (large corporations) या सरकारों (governments) की पहुँच में ही थे।
  • विशेषज्ञों की आवश्यकता (Needed Experts): इन्हें चलाने और रखरखाव (maintenance) के लिए अभी भी उच्च प्रशिक्षित (highly trained) ऑपरेटरों और प्रोग्रामरों की आवश्यकता होती थी।
  • जटिल निर्माण (Complex Assembly): कंप्यूटर बनाने के लिए हजारों ट्रांजिस्टरों को सर्किट बोर्ड (circuit boards) पर हाथ से सोल्डर (manually solder) करना पड़ता था, जो एक धीमी और महंगी प्रक्रिया थी।

दूसरी पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर (Key Computers of the 2nd Generation)

दूसरी पीढ़ी ने कई प्रभावशाली मेनफ्रेम और सुपर कंप्यूटरों का निर्माण देखा, जिनका उपयोग व्यवसायों, विश्वविद्यालयों और सरकारों द्वारा बड़े पैमाने पर किया गया:

  • IBM 1401 (1959) [व्यापक रूप से सफल उस समय का सबसे लोकप्रिय कंप्यूटर]
  • IBM 1620 (1959)
  • IBM 7090 / 7094 (1959-1962)
  • CDC 1604 (1960)
  • CDC 3600 (1963)
  • UNIVAC 1107 (1962)
  • UNIVAC 1108 (1964)
  • Honeywell 400 (1960)
  • ATLAS (1962)
  • दूसरी पीढ़ी ने कंप्यूटर को व्यावसायिक दुनिया (Business World) में ला दिया।
  • इस पीढ़ी का निर्णायक नवाचार ट्रांजिस्टर (Transistor) था।
  • जॉन बारडीन (John Bardeen), विलियम शॉकली (William Shockley), और वाल्टर ब्रेटन (Walter Brattain) ने 1947 में अमेरिका की बेल लेबोरेटरी (Bell Laboratory) में ट्रांजिस्टर का आविष्कार किया।
  • FORTRAN और COBOL के जन्म ने सॉफ्टवेयर उद्योग (Software Industry) की शुरुआत की।

3. कंप्यूटर की तीसरी पीढ़ी (Third Generation of Computer in Hindi)

कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के इतिहास में, तीसरी पीढ़ी (Third Generation) (1965-1975) ने कंप्यूटिंग शक्ति के लघुकरण (miniaturization) और पहुंच (accessibility) में एक असाधारण छलांग को चिह्नित किया। इस युग का नेतृत्व इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit, IC) नामक एक क्रांतिकारी आविष्कार ने किया।

एक IC अनिवार्य रूप से एक छोटी चिप होती है जो कई इलेक्ट्रॉनिक घटकों—जैसे ट्रांजिस्टर (Transistors), प्रतिरोधक (Resistors), और कैपेसिटर (Capacitors)—को एक ही सब्सट्रेट पर एकीकृत (integrate) करती है।

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर में लगी इंटीग्रेटेड सर्किट (IC Chip) - Generation of Computer in Hindi.

इस महत्वपूर्ण आकार में कमी के कारण, इस पीढ़ी के दौरान मिनी कंप्यूटर (Mini Computer) का उदय हुआ, जिसने कंप्यूटिंग को बड़े अनुसंधान संस्थानों के बाहर छोटे व्यवसायों और विभागों के लिए सुलभ बना दिया।

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तकनीकी विशेषताएं (Technical Specifications)

  1. मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक (Main Electronic Component): इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit - IC)
    • इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) ने कंप्यूटर जगत में क्रांति ला दी। इस पीढ़ी में मुख्य रूप से SSI (Small Scale Integration) और MSI (Medium Scale Integration) तकनीक का प्रयोग हुआ, जिसने हजारों ट्रांजिस्टरों की ताकत को एक छोटी सी सिलिकॉन चिप (Silicon Chip) में समाहित कर दिया।
    • पीढ़ी की शुरुआत में SSI (Small Scale Integration) तकनीक का उपयोग हुआ (जिसमें एक चिप पर 10-100 ट्रांजिस्टर होते थे), और बाद में MSI (Medium Scale Integration) का उपयोग हुआ (100-1000 ट्रांजिस्टर)।
  2. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System - OS): टाइम-शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम (Time-sharing Operating System)
    • बैच प्रोसेसिंग की जगह टाइम-शेयरिंग (Time-Sharing) और मल्टीप्रोग्रामिंग (Multiprogramming) ने ले लिया। यह इस पीढ़ी का सबसे महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर (software) विकास था। इसने इंटरैक्टिव कंप्यूटिंग (interactive computing) को संभव बनाया। अब उपयोगकर्ता को अपना रिजल्ट पाने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ता था, वे कीबोर्ड के जरिए सीधे कंप्यूटर से बात (Interact) कर सकते थे।
    • सिस्टम के अधिकांश आंतरिक कार्य स्वचालित (automatic) होने लगे, जिससे एक ही व्यक्ति पूरे कंप्यूटर को संचालित करने में सक्षम हो गया।
    • टाइम-शेयरिंग सिस्टम (Time-sharing System) ने कई उपयोगकर्ताओं (multi-users) को एक ही समय में एक ही कंप्यूटर के संसाधनों (resources) का इस्तेमाल करने की सुविधा प्रदान की। वहीं मल्टीप्रोग्रामिंग (Multiprogramming) के जरिए अब कंप्यूटर एक ही समय में मेमोरी में एक से ज़्यादा प्रोग्राम रख सकता था, जिससे CPU का खाली समय (idle time) बहुत कम हो गया।
  3. प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language): BASIC, PASCAL, ALGOL-68, PL/I, C
    • यह पीढ़ी उच्च-स्तरीय भाषाओं (HLLs) के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी। FORTRAN और COBOL (जो 2nd Gen में आईं थीं) का उपयोग जारी रहा और वे ज़्यादा मानक (standardized) बन गईं। कई नई HLLs का जन्म हुआ, जिन्होंने प्रोग्रामिंग को और आसान बनाया, जैसे:
      • BASIC (Beginners' All-purpose Symbolic Instruction Code)
      • PL/I (Programming Language One)
      • PASCAL
      • ALGOL-68
      • C (इस पीढ़ी के अंत में विकसित हुई)
  4. प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory): सेमीकंडक्टर मेमोरी (Semiconductor Memory)
    • इस पीढ़ी में दूसरी पीढ़ी की मैग्नेटिक कोर मेमोरी (Magnetic Core Memory) का इस्तेमाल शुरू में जारी रहा (जैसे IBM 360 में), लेकिन वे तेज, सघन (denser) और सस्ती हो गईं। इस पीढ़ी के अंत तक, पीढ़ी की सबसे बड़ी क्रांति सेमीकंडक्टर मेमोरी (Semiconductor Memory) (जो ICs से बनी होती थी) का आविष्कार था, जिसने मैग्नेटिक कोर को रिप्लेस करना शुरू कर दिया। यह आज की RAM की तरह तेज, छोटी और सस्ती थी।
  5. सेकेंडरी स्टोरेज (Secondary Storage):
    • मैग्नेटिक डिस्क (Magnetic Disks) का उपयोग बहुत ज़्यादा बढ़ गया। वे दूसरी पीढ़ी की तुलना में बहुत तेज़ और ज़्यादा स्टोरेज (large capacity) वाले हो गए।
    • मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tapes) का इस्तेमाल मुख्य रूप से डेटा बैकअप (Backup) लेने या डेटा को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने (archival) के लिए होने लगा।
  6. इनपुट और आउटपुट (Input & Output):
    • यह वह युग था जब कंप्यूटिंग इंटरैक्टिव (interactive) बन गई। डेटा इनपुट के लिए पंच्ड कार्ड की जगह पहली बार कीबोर्ड (Keyboard) का इस्तेमाल किया गया, और आउटपुट के लिए मॉनिटर (Monitor) का इस्तेमाल शुरू हुआ। इसके अलावा, प्रिंटर्स (Printers) भी बहुत उन्नत (advanced) हो गए थे और आउटपुट छापने के लिए प्रमुखता से इस्तेमाल होते रहे।

तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों की उपलब्धियाँ (Achievements of Third Generation Computers):

  • आकार (Efficiency): IC के कारण कम्प्यूटर छोटे होकर एक टेबल जितने हो गए और उन्हें मिनीकंप्यूटर (Minicomputers) कहा जाने लगा।
  • प्रदर्शन (Performance): कंप्यूटर की गति और दक्षता (efficiency) में भारी वृद्धि हुई (गति नैनोसेकंड (Nanoseconds) में मापी जाने लगी)।
  • गति (Speed): काम करने की गति नैनोसेकंड (nanoseconds) में मापी जाने लगी।
  • कम बिजली और गर्मी (Less Power & Heat): ये दूसरी पीढ़ी की तुलना में कम बिजली की खपत करते थे और कम गर्मी पैदा करते थे।
  • क्षमता (Capacity): मेमोरी (memory) और स्टोरेज (storage) क्षमता में भारी वृद्धि हुई।
  • उपयोग में आसानी (Ease of Use): कीबोर्ड (keyboards), मॉनिटर (monitors) और टाइम-शेयरिंग OS ने कंप्यूटर को इंटरैक्टिव (interactive) बना दिया, जिससे वे आम उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक सुलभ (accessible) हो गए।
  • व्यावसायिक पहुँच (Commercial Access): मिनी-कंप्यूटर (Minicomputers) ने कंप्यूटिंग शक्ति को छोटी कंपनियों और विभागों तक पहुँचाया।
  • पोर्टेबिलिटी (Portability): हालांकि ये पूरी तरह पोर्टेबल नहीं थे, लेकिन इनका आकार इतना छोटा हो गया था कि इन्हें आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता था (Moveable) यानी उन्हें एक डेस्क से दूसरी डेस्क पर खिसकाया जा सकता था, जबकि पहले के कंप्यूटर फिक्स्ड (Fixed) होते थे।।

तीसरी पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर (Key Computers of the 3rd Generation)

  • IBM System/360 (1964) - सबसे महत्वपूर्ण कंप्यूटर जिसने Family of Computers का कांसेप्ट दिया। यानी एक ही आर्किटेक्चर के कई मॉडल।
  • IBM System/370 (1972)
  • DEC PDP-8 (Personal Data Processor) (1965) – इसे पहला सफल मिनी-कंप्यूटर माना जाता है।
  • ICL 2900
  • CDC 6600 (1964)
  • Honeywell 6000 Series
  • TDC 316 (भारत का अपना कंप्यूटर था)
  • यह पीढ़ी इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) या 'सिलिकॉन चिप' पर आधारित है।
  • इसके स्वतंत्र आविष्कार का श्रेय जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस (इंटेल के सह-संस्थापक) को दिया जाता है।
  • जैक किल्बी ने 1958 में पहला इंटीग्रेटेड सर्किट बनाया, जबकि रॉबर्ट नॉयस ने आधुनिक सिलिकॉन चिप (जैसी आज प्रयोग में है) के व्यावहारिक डिजाइन का आविष्कार किया।
  • रॉबर्ट नॉयस को 'सिलिकॉन वैली का मेयर' (Mayor of Silicon Valley) भी कहा जाता है।

4. कंप्यूटर की चौथी पीढ़ी (Fourth Generation of Computer in Hindi)

कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के इतिहास में, चौथी पीढ़ी (Fourth Generation) (1971-1989) ने कंप्यूटिंग को बड़े कमरों से निकालकर सीधे डेस्कटॉप पर ला दिया। इस क्रांति का श्रेय एक ही नवाचार को जाता है: माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor)।

इस युग ने वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेटेड सर्किट (Very Large Scale Integrated Circuit - VLSIC) तकनीक को अपनाया। VLSIC ने एक अभूतपूर्व कार्य को संभव बनाया: इसने एक पूरी सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit - CPU) के लगभग 300,000 सर्किट तत्वों (Circuit Elements) को एक ही सिलिकॉन चिप (Silicon Chip) पर एकीकृत (Integrate) कर दिया।

चतुर्थ पीढ़ी के कंप्यूटर का माइक्रोप्रोसेसर और VLSI तकनीक - Generation of Computer in Hindi (1st to 5th).

माइक्रोप्रोसेसर के कारण ही कंप्यूटर वास्तव में "व्यक्तिगत" (personal) बने और पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer - PC) क्रांति का जन्म हुआ। कंप्यूटर अब आम लोगों के घरों और ऑफिसों तक पहुँच गए। इस पीढ़ी ने यूजर-फ्रेंडली कंप्यूटिंग (Software and User-Friendly Computing) को सफल बनाया।

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों की तकनीकी विशेषताएं (Technical Specifications)

  1. मुख्य इलेक्ट्रॉनिक घटक (Main Electronic Component): माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor - VLSI)
    • चौथी पीढ़ी की शुरुआत माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) के आविष्कार से हुई। माइक्रोप्रोसेसर एक सिंगल चिप (single IC) होती है जिसमें पूरा सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU) समाहित होता है। इसमें VLSI (Very Large Scale Integration) तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे एक चिप पर लाखों ट्रांजिस्टर लगाए जा सकते थे।
  2. ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System): ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (Graphical User Interface - GUI)
    • यह ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए सबसे क्रांतिकारी पीढ़ी थी। इस पीढ़ी में ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (Graphical User Interface - GUI) का उदय हुआ, जिसने उपयोगकर्ताओं को कमांड लाइन के बजाय विज़ुअल आइकॉन (icons), मेन्यू (menus) और फोल्डर्स (folders) को माउस से क्लिक कर सकते थे। जैसे Apple Macintosh और बाद में Microsoft Windows में।
    • Apple Macintosh ने GUI को लोकप्रिय बनाया और Windows OS ने इसे IBM PC संगत प्रणालियों पर ला दिया। इसके साथ ही, CLI (Command-Line Interface) पर आधारित DOS (Disk Operating System), टाइम-शेयरिंग (Time-sharing) और मल्टीटास्किंग (Multitasking) ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग भी जारी रहा।
    • UNIX: यह भी एक शक्तिशाली OS था जिसका इस्तेमाल विश्वविद्यालयों और कंपनियों में होता था।
  3. प्रोग्रामिंग लैंग्वेज (Programming Language): C, C++, DBASE, SQL
    • इस पीढ़ी में बहुत शक्तिशाली और आज भी इस्तेमाल होने वाली HLLs (High-Level Languages) का विकास हुआ:
      • C और C++: ये दो सबसे महत्वपूर्ण भाषाएँ थीं, जिनका इस्तेमाल ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे Windows) और बड़े सॉफ्टवेयर बनाने के लिए किया गया।
      • DBASE एक महत्वपूर्ण डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (Database Management System - DBMS) थी जिसका उपयोग डेटाबेस बनाने और प्रबंधित करने के लिए किया जाता था।
      • SQL (Structured Query Language): इसे डेटाबेस (Database) से जानकारी निकालने और मैनेज करने के लिए बनाया गया, जो आज भी मानक (standard) है।
      • BASIC, PASCAL, COBOL का इस्तेमाल भी जारी रहा।
  4. प्राइमरी मेमोरी (Primary Memory): सेमीकंडक्टर मेमोरी (Semiconductor Memory) (RAM, ROM, आदि)
    • इस पीढ़ी में मैग्नेटिक कोर मेमोरी (Magnetic Core) पूरी तरह से चलन से बाहर हो गई तथा सेमीकंडक्टर मेमोरी (Semiconductor Memory) बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होने लगी, जो VLSI (Very Large Scale Integration) चिप्स पर बनी होती थीं। इन्हें ही DRAM (Dynamic Random Access Memory) कहा गया। ये पिछली पीढ़ी की तुलना में बहुत तेज, छोटी और सस्ती हो गईं।
  5. सेकेंडरी स्टोरेज (Secondary Storage): फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) और मैग्नेटिक डिस्क (Magnetic Disks)
    • डेटा और प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk) का व्यापक रूप से उपयोग किया जाने लगा, जिसने डेटा साझा करना आसान बना दिया और बहुत लोकप्रिय हुआ।
      • फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disks): इस पीढ़ी में डेटा को डेटा और प्रोग्राम को स्टोर करने के लिए तथा एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में ले जाने (portable storage) के लिए 5.25-इंच और बाद में 3.5-इंच की फ्लॉपी डिस्क का आविष्कार हुआ, जिसने डेटा साझा करना आसान बना दिया और बहुत लोकप्रिय हुआ।
      • मैग्नेटिक डिस्क (Magnetic Disks): यानी हार्ड ड्राइव्स (Hard Drives) का इस्तेमाल प्रमुखता से होने लगा। ये आकार में छोटी और स्टोरेज क्षमता में बहुत बड़ी हो गईं।
  6. इनपुट और आउटपुट (Input & Output):
    • डेटा इनपुट के लिए माउस (Mouse), कीबोर्ड (Keyboard), स्कैनर (Scanner) का इस्तेमाल तेजी से हुआ वहीं आउटपुट के लिए अधिक उन्नत मॉनिटर (Monitor), एवं डॉट-मैट्रिक्स प्रिंटर (Dot-Matrix Printers) जैसे प्रिंटर का व्यापक रूप से उपयोग शुरू हुआ।
      • इनपुट (Input): इस पीढ़ी में कीबोर्ड (Keyboard) इनपुट के लिए मानक (standard) डिवाइस बन गया। सबसे बड़ा आविष्कार माउस (Mouse) का था, जिसे ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI) के साथ इस्तेमाल किया जाने लगा, जिससे कंप्यूटर चलाना बहुत आसान हो गया। इसके अलावा जॉयस्टिक (Joysticks) (गेमिंग के लिए) और स्कैनर्स (Scanners) का भी विकास हुआ।
      • आउटपुट (Output): मॉनिटर्स (Monitors) अब बहुत आम हो गए। शुरू में ये मोनोक्रोम (Monochrome - यानी ब्लैक एंड व्हाइट या ग्रीन स्क्रीन) थे, लेकिन इसी पीढ़ी में कलर मॉनिटर्स (Color Monitors) भी आ गए। प्रिंटर्स (Printers) में डॉट मैट्रिक्स (Dot Matrix) प्रिंटर बहुत आम थे। इसी पीढ़ी के अंत तक इंकजेट (Inkjet) और लेज़र प्रिंटर्स (Laser Printers) की भी शुरुआत हो गई थी, जिनसे बेहतर क्वालिटी की छपाई होती थी।
  7. डेटाबेस प्रबंधन (Database Management): DBMS
    • इस पीढ़ी में केवल डेटाबेस नहीं, बल्कि RDBMS (Relational Database Management System) का उदय हुआ।
    • SQL (Structured Query Language) एक मानक बन गई, जिसने बड़े डेटा को टेबल (Tables) के रूप में व्यवस्थित करना और एक्सेस करना आसान बना दिया। ओरेकल (Oracle) और आईबीएम (IBM DB2) जैसे प्रमुख डेटाबेस इसी समय उभरे।
  8. नेटवर्किंग का क्रांतिकारी विस्तार (Revolutionary Expansion of Networking):
    • लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) और ईथरनेट (Ethernet): इस पीढ़ी में ऑफिसों के भीतर कंप्यूटरों को आपस में जोड़ने के लिए LAN और Ethernet (रॉबर्ट मेटकाफ द्वारा आविष्कृत) का मानक उपयोग शुरू हुआ। इसने 'रिसोर्स शेयरिंग' (जैसे एक प्रिंटर को कई कंप्यूटरों द्वारा उपयोग करना) को संभव बनाया।
    • इंटरनेट का जन्म: 1983 में ARPANET ने TCP/IP (Transmission Control Protocol/Internet Protocol) को अपनाया, जिसे आधुनिक इंटरनेट का जन्म माना जाता है।
    • वर्ल्ड वाइड वेब (WWW): इस पीढ़ी के अंत में (1989-90) टिम बर्नर्स ली (Tim Berners-Lee) ने WWW का प्रस्ताव रखा, जिसने जानकारी साझा करने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया।
  9. प्रोसेसिंग पावर (Processing Power):
    • पाइपलाइनिंग और पैरेलल प्रोसेसिंग (Pipelining and Parallel Processing): चौथी पीढ़ी के सुपर कंप्यूटरों में पैरेलल प्रोसेसिंग (एक साथ कई गणनाएं करना) की अवधारणा परिपक्व हुई, जिससे गणना की गति नैनोसेकंड से पिकोसेकंड (Picoseconds) तक पहुँच गई।

चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों की उपलब्धियाँ (Achievements of Fourth Generation Computers):

  • गति (Speed): अत्यधिक तेज हो गए जिनकी गति पिकोसेकंड में मापी जाने लगी।
  • आकार (Size): कंप्यूटर इतने छोटे हो गए कि उन्हें डेस्क पर रखा जा सकता था। यहीं से पर्सनल कंप्यूटर (PC) या माइक्रो-कंप्यूटर (Microcomputer) का युग शुरू हुआ। कंप्यूटर पोर्टेबल (portable) और सस्ते हो गए थे और उन्हें घरों और ऑफिसों में इस्तेमाल किया जा सका (जैसे IBM PC, Apple II)।
  • लागत (Cost): लागत में अभूतपूर्व कमी आई। माइक्रोप्रोसेसर ने कंप्यूटर को इतना छोटा और सस्ता बना दिया कि एक आम व्यक्ति (common person) उन्हें खरीद सकता था।
  • पोर्टेबिलिटी (Portability): बहुत ही आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा सकता था।
  • विश्वसनीयता (Reliability): VLSI तकनीक ने हार्डवेयर विफलताओं (hardware failures) को बहुत कम कर दिया।
  • उपयोग में आसानी (Ease of Use): GUI और माउस (Mouse) के आगमन ने कंप्यूटर को उन लोगों के लिए भी सुलभ (accessible) बना दिया जो प्रोग्रामर (programmers) नहीं थे।
  • नेटवर्किंग (Networking): LAN और इंटरनेट की शुरुआत ने कंप्यूटरों को एक दूसरे से जोड़ दिया।

चौथी पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर (Key Computers of the Fourth Generation)

इस पीढ़ी में कंप्यूटरों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल थी, जिसने कंप्यूटिंग के हर पहलू को छुआ:

  • पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computers):
    • IBM PC
    • APPLE II
    • Apple Macintosh
    • ZX – Spectrum
    • MITS Altair 8800 (पहला पर्सनल कंप्यूटर माना जाता है जिसे किट के रूप में बेचा गया था)
  • मिनी/मेनफ्रेम कंप्यूटर (Mini/Mainframe Computers):
    • PDP 11
    • DEC 10
    • VAX - 9000
  • सुपर कंप्यूटर (Super Computers):
    • STAR 1000
    • CRAY 1 (1976) - दुनिया का पहला सफल सुपर कंप्यूटर था जिसके आविष्कारक सेमूर क्रे (Seymour Cray) थे।
    • CRAY-X_MP
  • चौथी पीढ़ी ने कंप्यूटिंग को लोकतांत्रिक बनाया, शक्ति को केंद्रीकृत मेनफ्रेम से हटाकर व्यक्तियों के हाथों में सौंप दिया, और उस डिजिटल दुनिया की नींव रखी जिसमें हम आज रहते हैं।
  • कंप्यूटर विज्ञान में चौथी पीढ़ी की शुरुआत 1971 से मानी जाती है जब पहला माइक्रोप्रोसेसर (Intel 4004) आया था।
  • दुनिया का पहला माइक्रोप्रोसेसर Intel 4004 था, जिसे 1971 में इंटेल द्वारा बनाया गया था। इसके बाद Intel 8008 और 8080 आए।
  • टेड हॉफ (Ted Hoff) को 'फादर ऑफ माइक्रोप्रोसेसर' कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने 1971 में इंटेल 4004 चिप की टीम का नेतृत्व किया था।

5. कंप्यूटर की पाँचवीं पीढ़ी (Fifth Generation of Computer in Hindi)

कंप्यूटर प्रौद्योगिकी के विकास में, पाँचवीं पीढ़ी (Fifth Generation) (1990 से वर्तमान और भविष्य) वह क्रांतिकारी युग है जिसने कंप्यूटर को केवल 'गणना' करने वाली मशीन से बदलकर एक 'बुद्धिमान' (Intelligent) साथी बना दिया है। इस पीढ़ी का मुख्य उद्देश्य ऐसे कंप्यूटर का निर्माण करना है जो मानव की तरह सोच सकें, सीख सकें और निर्णय ले सकें। तकनीकी रूप से इसे KIPS (Knowledge Information Processing System) भी कहा जाता है।

इस क्रांति का आधार ULSIC (Ultra Large-Scale Integrated Circuit) तकनीक है। ULSIC चिप्स एक ही सिलिकॉन चिप पर लाखों नहीं, बल्कि अरबों (Billions) ट्रांजिस्टर और घटकों को समाहित करते हैं।

पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटर में उपयोग होने वाली ULSI तकनीक और AI चिप का ग्राफिक - Generation of Computer in Hindi.

पांचवीं पीढ़ी की नींव इन दो स्तंभों पर टिकी है:

  1. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence): कंप्यूटर को सोचने, पैटर्न पहचानने और खुद से सीखने (Machine Learning) की क्षमता देना।
  2. समानांतर प्रसंस्करण (Parallel Processing): एक साथ कई काम करना। इसमें कई माइक्रोप्रोसेसर (Multi-core Processors) (जिन्हें 'कोर' (cores) कहा जाता है) मिलकर जटिल समस्याओं को चुटकियों में हल करते हैं।

पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटरों की तकनीकी विशेषताएं (Technical Specifications)

  • मुख्य तकनीक: ULSI (Ultra Large Scale Integration) तकनीक और सुपरकंडक्टर्स (Superconductors) का बढ़ता प्रयोग। इसने माइक्रोप्रोसेसरों को अविश्वसनीय रूप से छोटा और शक्तिशाली बना दिया है।
  • ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System - OS): हम अत्यधिक उन्नत और क्लाउड-आधारित (Cloud-based) OS की ओर बढ़ रहे हैं। अब वॉयस रिकग्निशन (जैसे Siri, Google Assistant) OS का अहम हिस्सा बन गए हैं।
  • प्रोग्रामिंग भाषा (Programming Language): AI और डेटा साइंस के लिए विशेष भाषाएँ जैसे Python, Java, Julia, Swift, और R का उपयोग होता है। ये भाषाएँ मशीन को 'सिखाने' (Train) में सक्षम हैं।
  • मेमोरी (Memory):
    • प्राथमिक मेमोरी (Primary Memory): DDR4/DDR5 RAM जो बहुत तेज और बड़ी क्षमता वाली सेमीकंडक्टर मेमोरी हैं।
    • द्वितीयक मेमोरी (Secondary Memory): HDD की जगह अब SSD (Solid State Drives) और NVMe ने ले ली है, जो डेटा को प्रकाश की गति से पढ़ सकते हैं। इसके अलावा क्लाउड स्टोरेज (Google Drive, AWS) अब डेटा रखने का नया मानक है।
  • कनेक्टिविटी: IoT (Internet of Things) का उदय। अब केवल कंप्यूटर नहीं, बल्कि घड़ी, टीवी, कार और घर के उपकरण भी इंटरनेट से जुड़े हैं (Smart Home)। 5G और 6G नेटवर्क ने इसे और तेज कर दिया है।
  • इनपुट और आउटपुट (Input & Output):
    • इनपुट (Input): टच स्क्रीन (Touch Screen), माइक्रोफोन (Microphone), बायोमेट्रिक सेंसर (Biometric Sensors) और जेस्चर कंट्रोल (Gesture Control)।
    • आउटपुट (Output): 4K/8K डिस्प्ले (Displays), 3D प्रिंटर्स और VR (Virtual Reality) हेडसेट्स।

पांचवीं पीढ़ी के कंप्यूटरों की उपलब्धियाँ (Achievements of Fifth Generation Computers)

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): रोबोटिक्स, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP) (जैसे ChatGPT), और न्यूरल नेटवर्क्स का विकास। कंप्यूटर अब मानव भाषा समझ और बोल सकते हैं।
  • पोर्टेबिलिटी और पावर: कलाई में पहनने वाली स्मार्टवॉच में आज इतनी ताकत है जितनी 1960 के एक पूरे कमरे के कंप्यूटर में नहीं थी।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग (Quantum Computing): यह भविष्य की दिशा है। पारंपरिक कंप्यूटर जहाँ 'बिट्स' (0 या 1) का उपयोग करते हैं, वहीं क्वांटम कंप्यूटर 'क्यूबिट्स' (Qubits) का उपयोग करते हैं, जो गणना की गति को करोड़ों गुना बढ़ा सकते हैं।
  • चिकित्सा और विज्ञान: DNA अनुक्रमण और जटिल बीमारियों के इलाज खोजने में सुपर कंप्यूटरों का उपयोग।

पांचवीं पीढ़ी की चुनौतियाँ (Limitations/Challenges)

  • AI का डर: मशीनों का मानव बुद्धि से आगे निकल जाना (Singularity) एक नैतिक बहस का विषय है।
  • बेरोजगारी: स्वचालन (Automation) और रोबोटिक्स के कारण नौकरियों का खतरा।
  • साइबर सुरक्षा: सब कुछ इंटरनेट से जुड़े होने के कारण हैकिंग और प्राइवेसी (Privacy) का बड़ा खतरा।

    पांचवीं पीढ़ी के मुख्य कंप्यूटर और उदाहरण (Key Examples of the 5th Generation)

    1. डेस्कटॉप/पर्सनल कंप्यूटर (PCs), लैपटॉप (Laptops), टैबलेट (Tablet), नोटबुक (Notebook), स्मार्टफोन (Smartphones)
    2. सुपर कंप्यूटर: Fugaku (Japan), Frontier (USA), परम सिद्धि (PARAM Siddhi), प्रत्युष (Pratyush), मिहिर (Mihir)
    3. रोबोटिक्स: सोफिया (Sophia - ह्यूमनॉइड रोबोट)
    4. AI टूल्स: IBM Watson, Google DeepMind, OpenAI (ChatGPT)

    कंप्यूटर जनरेशन चार्ट: एक नज़र में (Computer Generation Chart in Hindi)

    परीक्षा में त्वरित रिवीज़न (quick revision) के लिए, यह Computer Generation Chart in Hindi सबसे महत्वपूर्ण है। यह आपको Generation of Computer 1st to 5th Notes को एक नज़र में याद करने में मदद करेगा।

    पीढ़ी (Generation) समय (Time Period) मुख्य घटक (Main Component) भंडारण डिवाइस (Storage Device) गति (Speed) भाषा (Language) संचालन/OS (Operating System) उदाहरण (Examples)
    पहली (1st) 1946-1959 वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) मैग्नेटिक ड्रम, पंच कार्ड मिलीसेकंड (Milliseconds) मशीनी भाषा (Machine Language) बैच प्रोसेसिंग (Batch Processing) ENIAC, UNIVAC, EDVAC
    दूसरी (2nd) 1959-1965 ट्रांजिस्टर (Transistor) मैग्नेटिक कोर, मैग्नेटिक टेप माइक्रोसेकंड (Microseconds) असेंबली भाषा, FORTRAN, COBOL बैच और मल्टीप्रोग्रामिंग IBM 1401, CDC 1604
    तीसरी (3rd) 1965-1971 इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) मैग्नेटिक डिस्क (Large capacity) नैनोसेकंड (Nanoseconds) उच्च-स्तरीय (BASIC, PASCAL) टाइम-शेयरिंग, रियल टाइम OS IBM-360, PDP-8, TDC-316
    चौथी (4th) 1971-1989 माइक्रोप्रोसेसर (VLSI) सेमीकंडक्टर मेमोरी (RAM), विंचेस्टर डिस्क पिकोसेकंड (Picoseconds) C, C++, SQL (4GL) GUI आधारित (Windows, MacOS), नेटवर्क IBM PC, Apple Macintosh
    पाँचवीं (5th) 1990-वर्तमान ULSI और AI (Bio-Chips) ऑप्टिकल डिस्क (CD/DVD), SSD, क्लाउड फेमटोसेकंड / GHz (Femtoseconds) नेचुरल लैंग्वेज, Python, Java AI आधारित, नॉलेज प्रोसेसिंग (KIPS) Supercomputers (PARAM), Laptops, AI Bots

    कंप्यूटर की पाँच पीढ़ियों (वैक्यूम ट्यूब, ट्रांजिस्टर, IC, माइक्रोप्रोसेसर, AI) का तुलनात्मक चार्ट, जिसमें समयावधि, तकनीक और विशेषताएँ दर्शाई गई हैं।

    निष्कर्ष (Conclusion)

    साथियों, इस लेख में हमने Generation of Computer in Hindi (1st to 5th) के सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से कवर किया है। हमने देखा कि कैसे वैक्यूम ट्यूब से शुरू होकर आज हम AI और क्वांटम कंप्यूटिंग के युग तक पहुँचे हैं।

    याद रखें, परीक्षा में सफलता के लिए आधी-अधूरी जानकारी खतरनाक हो सकती है। इन Computer Generation Notes in Hindi को अच्छी तरह से पढ़ें और चार्ट (chart) को याद कर लें। यह History of Computer in Hindi Notes का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और आपको परीक्षा में 2 से 4 अंक आसानी से दिला सकता है।

    क्या आपके पास इस विषय से संबंधित कोई प्रश्न है? या आप अगला टॉपिक (topic) किस पर चाहते हैं? मुझे नीचे Comment में बताएं। अगर आपको यह पोस्ट पसंद आई हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर (Share) करें।

    धन्यवाद! जय हिन्द!


    FAQs: Generations of computers

    Q1: कंप्यूटर की 5 पीढ़ियाँ कौन सी हैं (1st to 5th Generation)?

    1. पहली पीढ़ी (वैक्यूम ट्यूब), 2. दूसरी पीढ़ी (ट्रांजिस्टर), 3. तीसरी पीढ़ी (इंटीग्रेटेड सर्किट - IC), 4. चौथी पीढ़ी (माइक्रोप्रोसेसर - VLSI), 5. पाँचवीं पीढ़ी (AI और ULSI).

    Q2. कंप्यूटर की पहली पीढ़ी की मुख्य तकनीक क्या थी? (What was the core technology of the 1st gen?)

    पहली पीढ़ी की मुख्य तकनीक वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) थी, जिसका उपयोग स्विचिंग (switching) और एम्प्लीफिकेशन (amplification) के लिए किया जाता था।

    Q3. दूसरी पीढ़ी की दो प्रमुख प्रोग्रामिंग भाषाएँ कौन सी थीं? (What were the two main programming languages of 2nd gen?)

    FORTRAN (वैज्ञानिक उपयोग के लिए) और COBOL (व्यावसायिक उपयोग के लिए)। ये पहली उच्च-स्तरीय भाषाएँ (High-Level Languages) थीं।

    Q4. मिनी-कंप्यूटर (Minicomputer) किस पीढ़ी में लोकप्रिय हुए?

    मिनी-कंप्यूटर तीसरी पीढ़ी (Third Generation) में लोकप्रिय हुए। DEC PDP-8 को पहला सफल मिनी-कंप्यूटर माना जाता है, जिसने कंप्यूटर को छोटे व्यवसायों (small businesses) और प्रयोगशालाओं (labs) के लिए सुलभ (accessible) बनाया।

    Q5: पर्सनल कंप्यूटर (PC) किस पीढ़ी में आए?

    पर्सनल कंप्यूटर (PC) या माइक्रो-कंप्यूटर चौथी पीढ़ी (Fourth Generation) में माइक्रोप्रोसेसर के आविष्कार के बाद आए।

    Q6: 'फादर ऑफ माइक्रोप्रोसेसर' किसे कहा जाता है?

    टेड हॉफ (Ted Hoff) को 'फादर ऑफ माइक्रोप्रोसेसर' कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने 1971 में इंटेल 4004 चिप की टीम का नेतृत्व किया था।

    Q7. क्या हम अभी पांचवीं पीढ़ी में हैं? (Are we in the 5th generation now?)

    हाँ। हमारे स्मार्टफोन (smartphones), आधुनिक पीसी (modern PCs), और AI असिस्टेंट (AI assistants) सभी पांचवीं पीढ़ी की कंप्यूटिंग के हिस्से हैं।

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