Class 2 (Short): कंप्यूटर का इतिहास: Quick Revision Notes + 6 Practice Sets [PDF] | One Day Exam Special

Evolution of computer timeline from Abacus to UNICAC for competitive exams notes in Hindi

नमस्ते दोस्तों!

सरकारी नौकरी की तैयारी में क्या पढ़ना है से ज्यादा महत्वपूर्ण यह जानना है कि क्या छोड़ना हैकंप्यूटर के इतिहास (Computer History) बहुत विशाल है, लेकिन One Day Exams को क्रैक करने के लिए आपको पूरी किताब नहीं, बल्कि Smart Notes की जरूरत है।

इसीलिए, Rojgarbytes आपके लिए लाया है Class 2 (Computer History Short Notes + Practice Sets)। यह कोई साधारण आर्टिकल नहीं, बल्कि एक Quick Revision Package है। यह पोस्ट विशेष रूप से SSC, UPSSSC, Police और Railway जैसी One Day Competitive Exams को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। यहाँ हम लंबी-चौड़ी कहानियों की जगह Direct Facts, Tables और Timelines पर बात करेंगे, जिनसे सीधे परीक्षा में प्रश्न बनते हैं। इसमें हमने गागर में सागर भरने का काम किया है।

इस पोस्ट की खासियत (Highlights):

  • To-The-Point Notes: अबैकस से लेकर आधुनिक कंप्यूटर तक का सफर—सिर्फ तथ्यों में।
  • Printable PDF: ऑफलाइन पढ़ने के लिए नोट्स का प्रिंट निकालने की सुविधा।
  • Practice Sessions: 6 प्रैक्टिस सेट्स यह सुनिश्चित करेंगे कि एग्जाम हॉल में आप गलती न करें।

तो चलिए, समय बर्बाद किए बिना कंप्यूटर के इतिहास के पन्नों को पलटते हैं और अपनी सफलता की कहानी लिखना शुरू करते हैं!

कंप्यूटर का इतिहास (History of Computer in Hindi)

कंप्यूटर का इतिहास केवल मशीनों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह मानव मस्तिष्क की गणना करने की तीव्र इच्छा का परिणाम है। यह यात्रा हजारों साल पहले मोतियों (Beads) को गिनने से शुरू हुई और आज नैनो-सेकंड में अरबों गणनाएं करने वाले सिलिकॉन चिप्स तक आ पहुंची है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस खंड (Section) को समझने के लिए हमें इसे कालानुक्रमिक (Chronological) रूप से पढ़ना होगा।

1. प्रारंभिक गणना युग: जब मशीनों ने गिनना सीखा (Early Calculation Era)

मानव सभ्यता की शुरुआत में गणना (Calculation) के लिए उंगलियों, पत्थरों और हड्डियों का उपयोग होता था। लेकिन जैसे-जैसे व्यापार बढ़ा, सटीक और तेज गणना यंत्रों की आवश्यकता महसूस हुई। यहीं से कंप्यूटर के इतिहास की नींव पड़ी।

अबैकस (Abacus)

  • कंप्यूटर के इतिहास का पहला अध्याय अबैकस (Abacus) से शुरू होता है। इसे दुनिया का प्रथम यांत्रिक गणना यंत्र (First Mechanical Calculating Device) माना जाता है।
  • इसका आविष्कार लगभग 3000 वर्ष पूर्व संभवतः चीन (China) में हुआ था (हालांकि कुछ स्रोत मेसोपोटामिया भी मानते हैं, लेकिन परीक्षा में चीन को प्राथमिकता दी जाती है)।
  • यह एक लकड़ी का फ्रेम (Wooden Rack) होता है जिसमें तारें (Wires) लगी होती हैं और उन तारों में प्लास्टिक या लकड़ी के मोती (Beads) पिरोए होते हैं। मोतियों को ऊपर-नीचे खिसका कर जोड़ (Addition) और घटाव (Subtraction) किया जाता है।

नेपियर्स बोन्स (Napier’s Bones)

  • इस यंत्र का आविष्कार स्कॉटलैंड के महान गणितज्ञ जॉन नेपियर (John Napier) ने 1617 में किया था। यह अपनी बनावट के लिए प्रसिद्ध था, क्योंकि इसमें आयताकार छड़ें (Rods) इस्तेमाल होती थीं जो अक्सर हाथी दांत (Ivory) या जानवरों की हड्डियों से बनी होती थीं। इसी कारण इसका नाम 'नेपियर्स बोन्स' पड़ा।
  • यह यंत्र अबेकस से एक कदम आगे था। इसका मुख्य उद्देश्य गणनाओं, विशेषकर गुणा (Multiplication) और भाग (Division) को आसान बनाना था। जॉन नेपियर ने इसमें पहली बार लॉगरिदम (Logarithm) की तकनीक का उपयोग किया था, जिससे बड़ी संख्याओं की गणना करना बहुत तेज और सरल हो गया था।
  • यह दशमलव (Decimal) बिंदुओं की गणना करने में सक्षम पहली मशीन थी।

स्लाइड रूल (Slide Rule)

  • इसका आविष्कार 1620 में एक अंग्रेजी गणितज्ञ विलियम ओट्रेड (William Oughtred) ने किया था। यह आविष्कार जॉन नेपियर द्वारा खोजी गई लॉगरिदम (Logarithm) की तकनीक पर आधारित था। यह एनालॉग कंप्यूटर (Analog Computer) का एक प्रारंभिक रूप था। इसका उपयोग नासा (NASA) के अपोलो मिशन तक में इंजीनियरों द्वारा किया गया था।
  • इसकी संरचना में दो विशेष रूप से चिह्नित पट्टियां (Scales) होती थीं, जो एक-दूसरे के ऊपर सरकती (Slide) थीं। पट्टियों को सही स्थिति में खिसकाकर बहुत ही तेजी से गुणा, भाग, वर्गमूल और त्रिकोणमिति (Trigonometry) जैसी जटिल गणनाएं की जा सकती थीं। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसका उपयोग आमतौर पर जोड़ और घटाव के लिए नहीं किया जाता था।

2. यांत्रिक युग: गियर्स और लीवर की क्रांति (The Mechanical Era)

17वीं शताब्दी में विज्ञान ने करवट ली। अब केवल हड्डियों या मोतियों से काम नहीं चल रहा था। वैज्ञानिकों ने गियर्स (Gears), पहियों (Wheels) और लीवर्स का उपयोग करके स्वचालित मशीनों का निर्माण शुरू किया।

पास्कलाइन (Pascaline)

  • पास्कलाइन का आविष्कार 1642 में फ्रांस के प्रसिद्ध गणितज्ञ ब्लेज़ पास्कल (Blaise Pascal) ने किया था। इसे दुनिया का पहला मैकेनिकल कैलकुलेटर (First Mechanical Calculator) माना जाता है।
  • यह मशीन गियर्स और पहियों (Gears and Wheels) के सिद्धांत पर काम करती थी। इसमें लगी हुई दांतेदार चकरियां (Wheels) ठीक उसी तरह घूमती थीं जैसे आज की कारों या बाइक का ओडोमीटर (Odometer) या स्पीडोमीटर काम करता है। इसमें संख्याओं को डायल करके इनपुट दिया जाता था।
  • इसे 'एडिंग मशीन' (Adding Machine) भी कहा जाता है, क्योंकि यह मुख्य रूप से केवल जोड़ (Addition) और घटाव (Subtraction) करने में ही सक्षम थी। इसमें गुणा और भाग सीधे तौर पर नहीं किए जा सकते थे, बल्कि उन्हें बार-बार जोड़ने या घटाने की प्रक्रिया (Repeated Addition/Subtraction) द्वारा किया जाता था।

लेबनीज व्हील (Leibniz Wheel)

  • इसका आविष्कार 1671 में प्रसिद्ध जर्मन गणितज्ञ गॉटफ्राइड विल्हेम लेबनीज (Gottfried Wilhelm Leibniz) ने किया था। यह दुनिया का पहला ऐसा मैकेनिकल कैलकुलेटर था जो चारों मूलभूत गणितीय क्रियाओं (Addition, Subtraction, Multiplication, Division) को करने में सक्षम था। जहाँ पास्कलाइन केवल जोड़ और घटाव कर सकती थी, वहीं लेबनीज का यह यंत्र गुणा और भाग भी आसानी से कर सकता था।
  • इस मशीन का सबसे मुख्य भाग एक बेलनाकार ड्रम था जिसमें अलग-अलग लंबाई के दांते (Teeth) लगे थे, जिसे 'स्टेप ड्रम' (Stepped Drum) या 'लेबनीज व्हील' कहा जाता है। यह तकनीक इतनी प्रभावशाली थी कि आने वाले लगभग 300 वर्षों तक बनने वाले मैकेनिकल कैलकुलेटरों में इसी सिद्धांत का उपयोग किया गया।

जैक्वार्ड लूम (Jacquard Loom)

  • इसका आविष्कार 1801 में फ्रांस के बुनकर जोसेफ मैरी जैक्वार्ड (Joseph Marie Jacquard) ने किया था। यह वास्तव में कोई गणना यंत्र (Calculator) नहीं था, बल्कि कपड़े बुनने की एक मशीन (Power Loom) थी, जिसे कपड़ों पर जटिल और सुंदर पैटर्न बनाने के लिए तैयार किया गया था।
  • इस मशीन की क्रांतिकारी विशेषता यह थी कि इसमें डिजाइन को नियंत्रित करने के लिए छिद्रित कार्ड्स (Punched Cards) का उपयोग किया गया था। कार्ड पर छेद होना या न होना ही यह तय करता था कि कौन सा धागा इस्तेमाल होगा। यह तकनीक आधुनिक बाइनरी सिस्टम (0 और 1) के शुरुआती रूप जैसी थी।
  • कंप्यूटर के इतिहास में इसका नाम इसलिए दर्ज है क्योंकि यह पहली मशीन थी जिसने 'प्रोग्रामिंग' के विचार को जन्म दिया। जैक्वार्ड की इसी पंच कार्ड तकनीक ने आगे चलकर चार्ल्स बैबेज को एनालिटिकल इंजन और हर्मन होलेरिथ को टेबुलेटिंग मशीन विकसित करने की प्रेरणा दी।

3. कंप्यूटर के पितामह और आधुनिक अवधारणा (The Pioneers & Modern Concept)

19वीं सदी में कंप्यूटर के इतिहास में वह नाम जुड़ा जिसके बिना आधुनिक कंप्यूटर की कल्पना असंभव थी—चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage)। उन्होंने कंप्यूटर को केवल 'गणना' से आगे बढ़ाकर 'तर्क' (Logic) और 'स्टोरेज' (Storage) तक पहुँचाया।

डिफरेंस इंजन (Difference Engine)

  • इसका आविष्कार 1822 में आधुनिक कंप्यूटर के जनक चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) ने किया था। यह इतिहास का पहला ऐसा मैकेनिकल कंप्यूटर डिजाइन था, जिसे गणितीय गणनाओं को स्वचालित (Automatic) रूप से करने के लिए तैयार किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य जटिल गणितीय सारणियों (Mathematical Tables) को बिना किसी इंसानी गलती के हल करना था।
  • उस समय इंसान (जिन्हें 'Human Computers' कहा जाता था) गणना करने में अक्सर गलतियाँ करते थे, जो नेविगेशन और विज्ञान के लिए खतरनाक थीं। बैबेज ने इस समस्या को सुलझाने के लिए भाप (Steam) से चलने वाली इस विशाल मशीन की कल्पना की। यह मशीन गणना करने के लिए 'फाइनाइट डिफरेंस' (Method of Finite Differences) के गणितीय सिद्धांत का उपयोग करती थी, इसीलिए इसका नाम डिफरेंस इंजन पड़ा।
  • हालाँकि, यह मशीन अपने समय से बहुत आगे थी और इसे बनाने में भारी लागत आ रही थी। तकनीकी कठिनाइयों और ब्रिटिश सरकार द्वारा फंडिंग रोक देने के कारण यह प्रोजेक्ट बैबेज के जीवनकाल में कभी पूरा नहीं हो सका। फिर भी, यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास था जिसने आगे चलकर एनालिटिकल इंजन की नींव रखी।

एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine)

  • डिफरेंस इंजन की सीमाओं से आगे बढ़ते हुए, चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) ने 1833 में इस क्रांतिकारी मशीन की रूपरेखा तैयार की। यह इतिहास का पहला सामान्य-उद्देश्यीय कंप्यूटर (General-Purpose Computer) डिजाइन था। जहाँ डिफरेंस इंजन केवल गणितीय सारणियां बना सकता था, वहीं एनालिटिकल इंजन को किसी भी तरह की गणना करने के लिए प्रोग्राम किया जा सकता था।
  • इस मशीन की वास्तुकला (Architecture) ही इसे खास बनाती है, क्योंकि यह आज के आधुनिक कंप्यूटरों के "इनपुट-प्रोसेस-आउटपुट" सिद्धांत पर आधारित थी। इसमें गणना करने के लिए एक सेंट्रल यूनिट थी जिसे 'मिल' (The Mill - आज का CPU) कहा गया और डेटा सेव करने के लिए 'स्टोर' (The Store - आज की Memory) का प्रावधान था। इनपुट के लिए इसमें पंच कार्ड्स का उपयोग किया जाना था।
  • यही वह आविष्कार था जिसके कारण चार्ल्स बैबेज को 'कंप्यूटर का जनक' (Father of Computer) की उपाधि मिली। हालाँकि, यह मशीन उनके जीवनकाल में कभी पूरी तरह नहीं बन सकी, लेकिन इसके लॉजिक ने दुनिया को बदल दिया। इसी मशीन के लिए लेडी एडा लवलेस ने दुनिया का पहला एल्गोरिदम लिखा था, जिससे सॉफ्टवेयर युग की शुरुआत हुई।

4. इलेक्ट्रो-मैकेनिकल युग (The Electro-Mechanical Era)

अब तक मशीनें पूरी तरह यांत्रिक (Mechanical) थीं, यानी उन्हें हाथ से या भाप से चलाया जाता था। 19वीं सदी के अंत में बिजली (Electricity) और यांत्रिकी का संगम हुआ।

होलेरिथ टैबुलेटिंग मशीन (Hollerith Tabulating Machine)

  • इसका आविष्कार अमेरिकी सांख्यिकीविद् हर्मन होलेरिथ (Herman Hollerith) ने किया था। इसे विशेष रूप से 1890 की अमेरिकी जनगणना (US Census) को समय पर पूरा करने के लिए बनाया गया था। पारंपरिक तरीकों से गिनती करने में जहाँ 10 साल से ज्यादा का समय लगने वाला था वहीं इस मशीन की मदद से जनगणना मात्र 2 से 3 वर्षों में पूरी हो गई।
  • यह दुनिया का पहला सफल इलेक्ट्रो-मैकेनिकल (Electro-Mechanical) कंप्यूटर था। इसमें डेटा को इनपुट करने और स्टोर करने के लिए पंच कार्ड्स (Punch Cards) का क्रांतिकारी उपयोग किया गया था।
  • इस मशीन की सफलता ने डेटा प्रोसेसिंग के इतिहास को हमेशा के लिए बदल दिया। अपनी सफलता के बाद, हर्मन होलेरिथ ने 1896 में अपनी खुद की कंपनी 'Tabulating Machine Company' शुरू की। कई विलय (Mergers) के बाद, यही कंपनी 1924 में दुनिया की सबसे बड़ी कंप्यूटर कंपनी आई.बी.एम. (IBM - International Business Machines) के रूप में उभरी।

ज़्यूस Z3 (Zuse Z3)

  • इसका निर्माण 1941 में जर्मन इंजीनियर कोनराड ज़ूस (Konrad Zuse) ने किया था। इसे दुनिया का पहला कार्यशील प्रोग्राम-नियंत्रित कंप्यूटर (First Working Programmable Computer) माना जाता है। यह एक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंप्यूटर था, जिसमें लगभग 2,000 रिले (Relays) का उपयोग किया गया था।
  • Z3 का ऐतिहासिक महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि यह दुनिया का पहला ऐसा कंप्यूटर था जो बाइनरी फ्लोटिंग-पॉइंट अंकगणित (Binary Floating-point Arithmetic) पर आधारित था। यानी, ENIAC (जो दशमलव पर था) से पहले ही Z3 ने बाइनरी सिस्टम (0 और 1) की शक्ति को पहचान लिया था।
  • दुर्भाग्यवश, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1943 में बर्लिन पर हुई बमबारी में असली Z3 कंप्यूटर नष्ट हो गया था। इसकी तकनीक और उपलब्धियां दुनिया के सामने बहुत बाद में आईं, अन्यथा कंप्यूटर इतिहास में इसका नाम ENIAC से भी ऊपर हो सकता था।

मार्क-1 (Harvard Mark-I)

  • मार्क-1, जिसे आधिकारिक तौर पर ASCC (Automatic Sequence Controlled Calculator) कहा जाता था, का निर्माण 1944 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हावर्ड एइकेन (Howard Aiken) ने IBM के सहयोग से किया था। यह अमेरिका में निर्मित पहला पूर्ण स्वचालित इलेक्ट्रो-मैकेनिकल (Electro-Mechanical) कंप्यूटर था। यह आकार में एक विशाल दैत्य जैसा था—लगभग 50 फीट लंबा और 8 फीट ऊँचा, जिसमें लगभग 500 मील लंबे तार लगे थे।
  • तकनीकी रूप से यह आधुनिक कंप्यूटरों से काफी अलग था। इसमें वैक्यूम ट्यूब्स की जगह हजारों इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक रिले (Relays), स्विच और घूमने वाले शाफ्ट का इस्तेमाल किया गया था। जब यह चलता था, तो इसके रिले के स्विच होने से तेज खट-खट की आवाज़ आती थी। इसे निर्देश (Instructions) देने के लिए मेमोरी चिप की जगह छिद्रित पेपर टेप (Perforated Paper Tape) के लंबे रोल्स का उपयोग किया जाता था।
  • इतिहास में इसे अक्सर "चार्ल्स बैबेज के सपने का साकार रूप" कहा जाता है, क्योंकि यह काफी हद तक एनालिटिकल इंजन के सिद्धांतों पर ही काम करता था। इसका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अमेरिकी नौसेना द्वारा जटिल गणनाओं के लिए किया गया, जिसमें परमाणु बम परियोजना (Manhattan Project) के लिए की गई महत्वपूर्ण गणितीय गणनाएं भी शामिल थीं।

5. इलेक्ट्रॉनिक युग: आधुनिक कंप्यूटिंग का उदय (The Electronic Revolution)

1940 के दशक में, वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) के आविष्कार ने कंप्यूटर की दुनिया में भूचाल ला दिया। अब गियर्स और लीवर्स की जगह इलेक्ट्रॉन्स ने ले ली, जिससे गणना की गति कई हजार गुना बढ़ गई।

एबीसी (ABC - Atanasoff-Berry Computer)

  • इसका विकास 1939 में डॉ. जॉन विंसेंट एटानासॉफ (John Vincent Atanasoff) और उनके छात्र क्लिफोर्ड बेरी (Clifford Berry) ने आयोवा स्टेट कॉलेज (USA) में किया था। यह दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर (First Electronic Digital Computer) माना जाता है। इसने गणना करने के लिए पुराने यांत्रिक गियर्स और पहियों को हटाकर पहली बार वैक्यूम ट्यूब्स (Vacuum Tubes) और बिजली का इस्तेमाल किया, जो कंप्यूटर तकनीक में एक क्रांतिकारी बदलाव था।
  • तकनीकी रूप से यह आधुनिक कंप्यूटरों के बहुत करीब था क्योंकि इसने गणना के लिए बाइनरी नंबर सिस्टम (0 और 1) का उपयोग किया था, जबकि उस समय के अन्य कंप्यूटर दशमलव प्रणाली पर काम करते थे। हालाँकि, यह एक 'विशिष्ट उद्देश्य' (Special Purpose) वाला कंप्यूटर था, जिसे केवल जटिल गणितीय समीकरणों (Linear Equations) को हल करने के लिए बनाया गया था। यह ENIAC की तरह प्रोग्राम करने योग्य (Programmable) नहीं था।
  • इतिहास में इसे इसका सही हक बहुत बाद में मिला। कई दशकों तक ENIAC को ही पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर माना जाता रहा। लेकिन 1973 में एक ऐतिहासिक अदालती फैसले (US Federal Court) ने यह साबित किया कि ENIAC के आविष्कारकों ने ABC के विचारों का उपयोग किया था। इस फैसले ने आधिकारिक तौर पर ABC को "प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर" का दर्जा दिया।

कोलोसस (Colossus)

  • कोलोसस का निर्माण 1943 में ब्रिटिश इंजीनियर टॉमी फ्लावर्स (Tommy Flowers) और उनकी टीम ने लंदन के पास ब्लेचले पार्क (Bletchley Park) में किया था। यह दुनिया का पहला प्रोग्रामेबल इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था। इसका निर्माण एक ही गुप्त उद्देश्य के लिए किया गया था—द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना के 'लोरेंज' (Lorenz) कूट संदेशों (Codes) को तोड़ना।
  • इसमें वैक्यूम ट्यूब्स (Vacuum Tubes) का इस्तेमाल किया गया था, जो इसे इलेक्ट्रो-मैकेनिकल मशीनों की तुलना में बहुत तेज़ बनाती थीं। कोलोसस की मदद से मित्र राष्ट्रों (Allies) को युद्ध जीतने में बहुत मदद मिली क्योंकि वे हिटलर के जनरलों की गुप्त बातचीत सुन सकते थे।
  • चूंकि यह एक टॉप सीक्रेट (Top Secret) सैन्य प्रोजेक्ट था, इसलिए युद्ध के बाद ब्रिटिश सरकार ने इसे नष्ट कर दिया और इसके अस्तित्व को 1970 के दशक तक दुनिया से छिपाकर रखा। यही कारण है कि 'पहले इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर' का श्रेय काफी समय तक सिर्फ ENIAC को मिलता रहा।

एनिएक (ENIAC)

  • ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) का निर्माण 1946 में पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के जे. प्रेस्पर एकर्ट (J. Presper Eckert) और जॉन मौचली (John Mauchly) ने किया था। यह दुनिया का पहला सामान्य-उद्देश्यीय इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर (First General-Purpose Electronic Digital Computer) था। जहाँ ABC जैसे कंप्यूटर केवल समीकरण हल कर सकते थे, वहीं ENIAC को विभिन्न प्रकार की गणनाओं के लिए प्रोग्राम किया जा सकता था। इसका उपयोग मुख्य रूप से अमेरिकी सेना के लिए तोपखाने की फायरिंग टेबल (Artillery Firing Tables) बनाने और हाइड्रोजन बम की गणनाओं के लिए किया गया।
  • यह तकनीक का एक विशालकाय नमूना था, जिसमें लगभग 18,000 वैक्यूम ट्यूब्स (Vacuum Tubes), 70,000 रेसिस्टर्स और 10,000 कैपेसिटर लगे थे। इसका वजन लगभग 30 टन था और यह 1,800 वर्ग फीट के एक बड़े कमरे में फैला हुआ था। यह इतनी बिजली (150 kW) खपत करता था कि एक लोकप्रिय कहानी के अनुसार, जब इसे चालू किया जाता था, तो फिलाडेल्फिया शहर की लाइटें मद्धम (Dim) हो जाती थीं।
  • गति के मामले में यह अपने समय से बहुत आगे था; यह एक सेकंड में 5,000 जोड़ (Additions) कर सकता था, जो उस समय के किसी भी इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंप्यूटर से 1,000 गुना तेज था। हालाँकि, इसमें एक कमी थी कि यह दशमलव प्रणाली (Decimal System) पर काम करता था (आधुनिक बाइनरी पर नहीं) और इसे री-प्रोग्राम करने के लिए हज़ारों तारों और स्विचों को हाथ से बदलना पड़ता था, जिसमें कई दिन लग जाते थे। यहीं से कंप्यूटर की पहली पीढ़ी (First Generation) की आधिकारिक शुरुआत हुई।

एडवैक और स्टोर्ड प्रोग्राम की अवधारणा (EDVAC & Stored Program Concept)

  • EDVAC (Electronic Discrete Variable Automatic Computer) का विकास ENIAC की सबसे बड़ी तकनीकी खामी को दूर करने के लिए किया गया था। ENIAC को किसी नए कार्य के लिए तैयार करने में कई दिन लग जाते थे क्योंकि उसके तारों और स्विचों को भौतिक रूप से बदलना पड़ता था। इस समस्या का समाधान महान गणितज्ञ जॉन वॉन न्यूमैन (John von Neumann) ने दिया, जिन्होंने 1945 में अपनी रिपोर्ट में कंप्यूटर के डिजाइन का एक नया सिद्धांत प्रस्तुत किया।
  • वॉन न्यूमैन ने 'स्टोर्ड-प्रोग्राम कॉन्सेप्ट' (Stored-Program Concept) का क्रांतिकारी विचार दिया। इसके अनुसार, डेटा और उस डेटा पर प्रक्रिया करने वाले निर्देश (Program) दोनों को कंप्यूटर की एक ही मेमोरी में डिजिटल रूप में स्टोर किया जा सकता है। इसका अर्थ यह था कि कंप्यूटर को कोई नया काम सिखाने के लिए अब हार्डवेयर बदलने की जरूरत नहीं थी, बल्कि मेमोरी में केवल नया प्रोग्राम लोड करना ही काफी था।
  • EDVAC पहला ऐसा डिजाइन था जिसने बाइनरी नंबर सिस्टम (0 और 1) का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा, जबकि उससे पहले के कंप्यूटर दशमलव प्रणाली पर चलते थे। आज हम जिस लैपटॉप, मोबाइल या सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं, वे सभी इसी 'वॉन न्यूमैन आर्किटेक्चर' पर आधारित हैं, जिसमें CPU, मेमोरी और इनपुट/आउटपुट यूनिट्स एक साथ काम करती हैं।

मैनचेस्टर बेबी (Manchester Baby)

  • इसे आधिकारिक तौर पर SSEM (Small-Scale Experimental Machine) कहा जाता है। इसका निर्माण 1948 में इंग्लैंड की मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में फ्रेडरिक विलियम्स और टॉम किलबर्न ने किया था। यह इतिहास का पहला ऐसा कंप्यूटर था जिसने 'स्टोर्ड-प्रोग्राम' (Stored-Program) को अपनी मेमोरी में रखकर सफलतापूर्वक चलाया (Run) था।
  • भले ही स्टोर्ड-प्रोग्राम का विचार EDVAC (वॉन न्यूमैन) के लिए था, लेकिन उसे हकीकत में सबसे पहले मैनचेस्टर बेबी ने लागू किया। इसने 21 जून 1948 को अपना पहला प्रोग्राम चलाया था। इसमें मेमोरी के लिए विलियम्स ट्यूब (Williams Tube) का उपयोग किया गया था, जो एक प्रकार की कैथोड रे ट्यूब (CRT) थी।
  • यह कोई व्यावसायिक कंप्यूटर नहीं था, बल्कि एक प्रयोगात्मक मशीन थी जिसे यह साबित करने के लिए बनाया गया था कि वॉन न्यूमैन का आर्किटेक्चर वास्तव में काम करता है। इसी की सफलता के बाद EDSAC और Manchester Mark-1 जैसे पूर्ण कंप्यूटर बनाए गए।

एडसैक (EDSAC)

  • EDSAC (Electronic Delay Storage Automatic Calculator) का निर्माण 1949 में यूके की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर मौरिस विल्क्स (Maurice Wilkes) और उनकी टीम ने किया था। इसे दुनिया का पहला 'व्यावहारिक' (Practical) स्टोर्ड-प्रोग्राम कंप्यूटर माना जाता है। जहाँ 'मैनचेस्टर बेबी' केवल एक प्रयोगात्मक प्रोटोटाइप था, वहीं EDSAC एक पूर्ण विकसित मशीन थी जिसका उपयोग नियमित रूप से वैज्ञानिकों द्वारा वास्तविक शोध और जटिल गणनाओं को हल करने के लिए किया गया।
  • तकनीकी रूप से, यह जॉन वॉन न्यूमैन के आर्किटेक्चर पर आधारित था। इसमें मेमोरी के लिए मरकरी डिले लाइन्स (Mercury Delay Lines) का उपयोग किया गया था, जो पारे (Mercury) से भरी नलियों में ध्वनि तरंगों के माध्यम से डेटा स्टोर करती थीं। इसमें इनपुट के लिए पेपर टेप (Paper Tape) और आउटपुट के लिए टेलीप्रिंटर का इस्तेमाल होता था। यह बाइनरी सिस्टम पर काम करता था और इसकी गति उस समय के मानकों के अनुसार काफी तेज थी।
  • EDSAC का सबसे महत्वपूर्ण योगदान सॉफ्टवेयर विकास के क्षेत्र में था। इसने दुनिया को पहली बार 'सब-रूटीन्स' (Subroutines) और प्रोग्राम लाइब्रेरी की अवधारणा दी, जिससे कोडिंग करना व्यवस्थित और आसान हो गया। इतिहास का एक रोचक तथ्य यह भी है कि 1952 में इसी कंप्यूटर पर दुनिया का पहला ग्राफिकल कंप्यूटर गेम 'OXO' (Tic-Tac-Toe) बनाया गया था, जिसे कैथोड रे ट्यूब (CRT) स्क्रीन पर देखा जा सकता था।

यूनिवैक-I (UNIVAC-I)

  • UNIVAC-I (Universal Automatic Computer I) का निर्माण 1951 में जे. प्रेस्पर एकर्ट और जॉन मौचली ने किया था, जो ENIAC के भी निर्माता थे। यह अमेरिका में उत्पादित दुनिया का पहला व्यावसायिक कंप्यूटर (First Commercial Computer) था। इससे पहले के कंप्यूटर केवल वैज्ञानिक शोध या सेना के लिए होते थे, लेकिन UNIVAC ने कंप्यूटर को बाजार में उतारकर बिजनेस की दुनिया में क्रांति ला दी। इसका नाम "यूनिवर्सल" इसलिए रखा गया क्योंकि यह संख्याओं (Numbers) के साथ-साथ अक्षरों (Text) को भी संसाधित करने में सक्षम था।
  • तकनीकी रूप से इसने डेटा इनपुट और स्टोरेज के लिए धीमे पंच कार्ड्स (Punch Cards) की जगह पहली बार मैग्नेटिक टेप (Magnetic Tape) का उपयोग किया। यह निकल (Nickel) की परत चढ़ी हुई धातु की टेप थी जो डेटा को बहुत तेज गति से पढ़ और लिख सकती थी। मेमोरी के लिए इसमें मरकरी डिले लाइन्स (Mercury Delay Lines) का उपयोग किया गया था और इसमें लगभग 5,000 वैक्यूम ट्यूब्स लगी थीं, जो इसे ENIAC की तुलना में बहुत छोटा और कॉम्पैक्ट बनाती थीं।
  • इसकी पहली यूनिट अमेरिकी जनगणना ब्यूरो (US Census Bureau) को सौंपी गई थी। लेकिन यह कंप्यूटर रातों-रात दुनिया भर में तब मशहूर हुआ जब इसने 1952 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों की सटीक भविष्यवाणी की। जहाँ चुनावी पंडित कड़े मुकाबले की उम्मीद कर रहे थे, वहीं UNIVAC ने बहुत कम डेटा के आधार पर पहले ही बता दिया कि ड्वाइट आइजनहावर भारी मतों से जीतेंगे। इस ऐतिहासिक घटना ने कंप्यूटर की क्षमता पर दुनिया का भरोसा पक्का कर दिया।

कंप्यूटर इतिहास की सारांश तालिका (Quick Revision Table of Computer History)

एग्जाम से एक रात पहले रिवीजन के लिए यह टेबल आपकी 'संजीवनी बूटी' है:

आविष्कार (Device) वर्ष (Year) आविष्कारक (Inventor) मुख्य विशेषता (Key Feature)
Abacus ~3000 BC चीन (China) प्रथम यांत्रिक गणना यंत्र (First Mechanical Calculator)
Napier's Bones 1617 John Napier लॉगर्थिम (Logarithm) का उपयोग
Pascaline 1642 Blaise Pascal प्रथम यांत्रिक कैलकुलेटर (Add/Sub only)
Analytical Engine 1833 Charles Babbage आधुनिक कंप्यूटर का पूर्वज (IPO Cycle)
Tabulating Machine 1890 Herman Hollerith पंच कार्ड का जनगणना में उपयोग (Basis of IBM)
ABC 1939 Atanasoff & Berry प्रथम इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर
Zuse Z3 1941 Konrad Zuse दुनिया का पहला कार्यशील प्रोग्रामेबल कंप्यूटर (Electromechanical)
Colossus 1943 Tommy Flowers प्रथम प्रोग्रामेबल इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर (Code Breaker)
Mark-I 1944 Howard Aiken पहला इलेक्ट्रो-मैकेनिकल कंप्यूटर (ASCC)
ENIAC 1946 Eckert & Mauchly प्रथम जनरल पर्पस इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर
Manchester Baby 1948 Williams & Kilburn पहला स्टोर्ड-प्रोग्राम कंप्यूटर (First Software Run)
EDSAC 1949 Maurice Wilkes पहला व्यावहारिक स्टोर्ड-प्रोग्राम कंप्यूटर
UNIVAC 1951 Eckert & Mauchly प्रथम व्यावसायिक (Commercial) कंप्यूटर

अपनी तैयारी परखें (Computer History: Practice Questions)

साथियों, सिद्धांत (Theory) पढ़ना केवल आधी लड़ाई जीतने जैसा है। असली परीक्षा तब शुरू होती है जब आप उस ज्ञान को प्रश्नों में लागू करते हैं। यदि आप History of Computer Quick Revision Notes की तलाश में यहाँ आए हैं, तो यह अनुभाग आपके लिए किसी खजाने से कम नहीं है।

इस विशेष भाग में, हम Rojgarbytes Practice Strategy के तहत आपको 6 अलग-अलग स्तरों पर परखेंगे। यहाँ आपको यूपीएससी (UPSC), एसएससी (SSC) और बैंकिंग परीक्षाओं के स्तर के डाउट्स, फैक्ट्स, और क्विज़ मिलेंगे। यह सुनिश्चित करेगा कि परीक्षा हॉल में कोई भी प्रश्न आपको चौंका न सके।

Part 01 (महत्वपूर्ण तथ्य): Key Facts About Computer History (Hindi)

यहाँ हम History of Computer Notes PDF में अक्सर छूट जाने वाले उन 20 Hidden Gems को प्रस्तुत कर रहे हैं जो Examiner के पसंदीदा हैं। ये तथ्य आपको भीड़ से अलग खड़ा करेंगे।

  1. TIFRAC (Tata Institute of Fundamental Research Automatic Calculator) भारत में विकसित किया गया पहला कंप्यूटर था, जिसे 1960 में कमीशन किया गया था।
  2. प्राचीन यूनान का Antikythera Mechanism दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात एनालॉग कंप्यूटर माना जाता है, जिसका उपयोग खगोलीय स्थितियों की भविष्यवाणी के लिए किया जाता था।
  3. शब्द "Computer" का पहली बार प्रयोग 1613 में रिचर्ड ब्रैथवेट की पुस्तक में एक व्यक्ति (Person) के लिए किया गया था जो गणना करता था, न कि किसी मशीन के लिए।
  4. जर्मन इंजीनियर Konrad Zuse ने 1941 में Z3 बनाया था, जिसे दुनिया का पहला काम करने वाला प्रोग्रामेबल, पूरी तरह से स्वचालित कंप्यूटर माना जाता है (अक्सर अमेरिकी इतिहास में इसे नजरअंदाज किया जाता है)।
  5. ब्रिटिश कंप्यूटर Colossus का उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन कोड तोड़ने के लिए किया गया था।
  6. HEC-2M भारत में आयात (Import) किया गया पहला कंप्यूटर था, जिसे 1955 में कोलकाता के भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) में स्थापित किया गया।
  7. सुपरकंप्यूटिंग के पितामह Seymour Cray को माना जाता है।
  8. सिद्धार्थ (Siddharth) भारत में निर्मित (Electronics Corporation of India Limited द्वारा) पहला पर्सनल कंप्यूटर था।
  9. नेपियर्स बोन्स (Napier's Bones) हाथी दांत (Ivory) से बने होते थे, इसलिए इन्हें 'बोन्स' कहा जाता था।
  10. EDSAC पहला ऐसा कंप्यूटर था जिसने "Stored Program" अवधारणा को व्यावहारिक रूप से लागू किया (EDVAC से पहले बनकर तैयार हुआ)।
  11. होलेरिथ के पंच कार्ड का आकार उस समय के अमेरिकी डॉलर (US Dollar Bill) के आकार के बराबर था ताकि उन्हें स्टोर करने के लिए उपलब्ध बक्सों का उपयोग किया जा सके।
  12. Binary System (द्विआधारी संख्या) का वर्णन सबसे पहले भारतीय विद्वान पिंगला (Pingala) ने अपने 'छन्दशास्त्र' में किया था (शताब्दियों पूर्व)।
  13. Manchester Baby (SSEM) दुनिया का पहला स्टोर्ड-प्रोग्राम कंप्यूटर था जो 1948 में इंग्लैंड में चला था।
  14. IBM कंपनी का पुराना नाम Computing-Tabulating-Recording Company (CTR) था, जिसे 1924 में बदला गया।
  15. Transistor का आविष्कार 1947 में हुआ था, लेकिन इसका उपयोग कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी (1956 के बाद) में शुरू हुआ।
  16. UNIVAC ने 1952 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों की सटीक भविष्यवाणी करके कंप्यूटर की क्षमता को दुनिया के सामने साबित किया था।
  17. Cray-1 दुनिया का पहला सफल सुपरकंप्यूटर था (1976)।
  18. भारत के पहले सुपरकंप्यूटर PARAM 8000 को C-DAC द्वारा 1991 में विकसित किया गया था।
  19. FLOPS (Floating Point Operations Per Second) सुपरकंप्यूटर की गति मापने की इकाई है।
  20. एलन ट्यूरिंग (Alan Turing) ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 'Enigma' मशीन के कोड को क्रैक किया था, जिस पर 'The Imitation Game' फिल्म भी बनी है।

Part 02 (रिक्त स्थान भरें): Fill in the Blanks Related to Computer History (Hindi)

अपनी याददाश्त को चुनौती दें! नीचे दिए गए वाक्यों में सही उत्तर भरें। यह अभ्यास Computer History Short Notes को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका है।

  1. नेपियर्स बोन्स में गणना के लिए जिस तकनीक का उपयोग किया जाता था, उसे Rabdologia (रबडोलोगिया) कहा जाता है।
  2. विश्व का पहला व्यावसायिक कंप्यूटर (Commercial Computer) UNIVAC-1 था जिसे अमेरिकी जनगणना ब्यूरो को दिया गया था।
  3. कंप्यूटर के विकास में सर्वाधिक योगदान जॉन वॉन न्यूमैन (John Von Neumann) का माना जाता है।
  4. प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों में इनपुट के लिए पंच कार्ड (Punch Card) और पेपर टेप का उपयोग होता था।
  5. एनालिटिकल इंजन में गणना करने वाली इकाई (CPU की तरह) को Mill (मिल) कहा जाता था।
  6. 1642 में ब्लेज पास्कल द्वारा बनाई गई मशीन 'पास्कलाइन' केवल जोड़ और घटाव (Add & Subtract) कर सकती थी।
  7. एटानासॉफ-बेरी कंप्यूटर (ABC) दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था।
  8. प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटर केवल मशीनी भाषा (Machine Language) समझते थे जो 0 और 1 पर आधारित थी।

Part 03 (सही-गलत चुने): True/False Statements related to Computer History (Hindi)

क्या आपके कॉन्सेप्ट्स पूरी तरह स्पष्ट हैं? इन कथनों की सत्यता की जाँच करें। यह Computer History MCQ in Hindi को हल करने में मदद करेगा।

  1. ENIAC कंप्यूटर में डेटा स्टोर करने की क्षमता थी। [ False ]
  2. चार्ल्स बैबेज का 'डिफरेंस इंजन' बिजली से चलता था। [ False ]
  3. जैकार्ड लूम (Jacquard Loom) कंप्यूटर नहीं, बल्कि एक बुनाई मशीन थी। [ True ]
  4. 'मार्क-1' (Mark-I) कंप्यूटर पूर्णतः इलेक्ट्रॉनिक था। [ False ]
  5. लेडी एडा लवलेस को 'बाइनरी सिस्टम' का आविष्कारक माना जाता है। [ False ]
  6. प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों में असेंबली भाषा का प्रयोग होता था। [ False ]
  7. स्लाइड रूल (Slide Rule) एनालॉग कंप्यूटर का एक प्रारंभिक उदाहरण है। [ True ]
  8. ट्रांजिस्टर का उपयोग पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों की मुख्य विशेषता थी। [ False ]

Part 04 (विगत प्रश्नोत्तर): PYQs Asked from Computer History (Hindi)

ये प्रश्न सीधे UPSC, SSC, Banking और अन्य परीक्षाओं के पेपर्स से लिए गए हैं। देखें कि क्या आप उन्हें हल कर सकते हैं?

  1. वह लेडी जिसने चार्ल्स बैबेज के साथ काम किया और जिसे 'पहला कंप्यूटर प्रोग्रामर' माना जाता है? लेडी एडा लवलेस (Lady Ada Lovelace) - [SSC CGL]
  2. द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान एलन ट्यूरिंग द्वारा जर्मन कोड 'Enigma' को तोड़ने के लिए किस मशीन का उपयोग किया गया था? Colossus (कोलोसस) - [IBPS PO]
  3. वाणिज्यिक उपयोग (Commercial Use) के लिए उपलब्ध कराया गया पहला कंप्यूटर कौन सा था? UNIVAC - [SSC CHSL]
  4. भारत में सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) कहाँ स्थित है? बंगलुरु (Bengaluru) - [Railways NTPC]
  5. इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) चिप का विकास किसने किया? जे.एस. किल्बी (J.S. Kilby) - [BPSC]
  6. Stored Program की अवधारणा किसने दी थी जिसमें प्रोग्राम और डेटा एक ही मेमोरी में जमा होते हैं? जॉन वॉन न्यूमैन (John Von Neumann) - [SBI Clerk]
  7. कंप्यूटर की पहली पीढ़ी (First Generation) में किस सर्किट का उपयोग किया गया था? वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) - [UPSSSC]
  8. पहला कंप्यूटर माउस (Computer Mouse) किसने बनाया था? डगलस एंजेलबार्ट (Douglas Engelbart) - [SSC JE]

Part 05 (संदिग्ध प्रश्न): Doubts related to Computer History (Hindi)

अक्सर छात्र किताबों में अलग-अलग तथ्य देखकर भ्रमित हो जाते हैं। Computer History Questions in Hindi से संबंधित सबसे सामान्य और पेचीदा डाउट्स का समाधान यहाँ दिया गया है।

सर, Father of Computer और Father of Modern Computer में क्या अंतर है?

यह एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है। चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) को 'Father of Computer' कहा जाता है क्योंकि उन्होंने 'एनालिटिकल इंजन' के माध्यम से कंप्यूटर की बुनियादी वास्तुकला (Input-Process-Output) दी थी। वहीं, एलन ट्यूरिंग (Alan Turing) को 'Father of Modern Computer Science' माना जाता है, क्योंकि उन्होंने आधुनिक एल्गोरिदम और कंप्यूटेशन के सिद्धांत (Turing Machine) दिए, जिस पर आज के डिजिटल कंप्यूटर काम करते हैं।

पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर ENIAC था या ABC? कोर्ट ने किसे मान्यता दी है?

यह इतिहास का सबसे बड़ा विवाद है। दशकों तक ENIAC को ही पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर माना जाता रहा। लेकिन 1973 में अमेरिकी न्यायालय ने "Honeywell v. Sperry Rand" केस में यह फैसला सुनाया कि इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर का असली आविष्कारक ABC (Atanasoff-Berry Computer) है। हालांकि, परीक्षा में यदि विकल्प में ABC नहीं है, तो आप ENIAC को चुन सकते हैं क्योंकि वह पहला 'General Purpose' कंप्यूटर था।

क्या अबैकस (Abacus) का आविष्कार चीन में हुआ था या बेबीलोन में?

ऐतिहासिक रूप से मेसोपोटामिया (बेबीलोन) में इसके प्रारंभिक साक्ष्य मिलते हैं, लेकिन परीक्षा के दृष्टिकोण (Exam Perspective) से और इसके आधुनिक स्वरूप के लिए चीन (China) को ही इसका जनक माना जाता है।

स्टोर्ड प्रोग्राम कॉन्सेप्ट (Stored Program Concept) का जनक किसे माना जाए?

इस अवधारणा का श्रेय महान गणितज्ञ जॉन वॉन न्यूमैन (John Von Neumann) को जाता है। उन्होंने ही बताया था कि डेटा और निर्देश (Instructions) दोनों को बाइनरी फॉर्म में मेमोरी के अंदर स्टोर किया जा सकता है। इसी पर EDVAC का निर्माण हुआ था।

प्रथम पीढ़ी के कंप्यूटरों की गति (Speed) किस में मापी जाती थी?

प्रथम पीढ़ी (First Generation) के कंप्यूटरों में वैक्यूम ट्यूब्स का उपयोग होता था, इसलिए उनकी गति आज की तुलना में बहुत कम थी। इनकी गति को मिलीसेकंड (Milliseconds - 10-3 sec) में मापा जाता था। जबकि आज के कंप्यूटर नैनोसेकंड में काम करते हैं।

दुनिया की पहली प्रोग्रामर लेडी एडा लवलेस ने किस मशीन के लिए कोडिंग की थी?

कई छात्र सोचते हैं कि उन्होंने डिफरेंस इंजन के लिए कोड लिखा, जो गलत है। लेडी एडा लवलेस (Lady Ada Lovelace) ने चार्ल्स बैबेज के दूसरे आविष्कार, एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) के लिए 'बर्नौली नंबर्स' की गणना करने वाला एल्गोरिदम लिखा था।

Part 06 (क्विज सत्र): Quiz Based on Computer History (Hindi)

यह 'Rojgarbytes' का सबसे कठिन चरण है। यहाँ प्रश्न सामान्य नहीं हैं। यदि आप इन 10 में से 8 का सही उत्तर देते हैं, तो मान लीजिए कि History of Computer में आपकी तैयारी सर्वोच्च स्तर पर है।

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निष्कर्ष (Conclusion of Computer History Notes)

दोस्तों, अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र कंप्यूटर के इतिहास और पीढ़ियों से जुड़े बिखरे हुए तथ्यों और भ्रमित करने वाली तारीखों को लेकर परेशान रहते हैं। रटने की यह प्रक्रिया परीक्षा हॉल में कंफ्यूजन पैदा करती है। लेकिन आज, इस लेख को पढ़ने के बाद, आपकी वह समस्या हल हो चुकी है। हमने न केवल तथ्यात्मक जानकारी प्राप्त की बल्कि अभ्यास प्रश्नों के माध्यम से अपनी तैयारी को भी परखा है।

आपने क्या हासिल किया (Key Takeaways):

  • ऐतिहासिक नींव: हमने जाना कि कैसे 3000 साल पुराने लकड़ी के 'अबैकस' ने आज के डिजिटल युग की नींव रखी।
  • दिग्गजों का योगदान: चार्ल्स बैबेज और लेडी एडा लवलेस (पहली प्रोग्रामर) की भूमिका को गहराई से समझा।
  • इलेक्ट्रॉनिक क्रांति: हमने ENIAC, ABC और UNIVAC के बीच के सूक्ष्म अंतर और विवादों को स्पष्ट किया।
यह आर्टिकल आपके लिए केवल एक ब्लॉग पोस्ट नहीं, बल्कि एक Quick Revision Tool है, जो परीक्षा से ठीक पहले आपके लिए सबसे भरोसेमंद साबित होगा। अब आपको इस टॉपिक के लिए किसी और किताब को पलटने की जरूरत नहीं है।

अब आपकी बारी (What to do Next):

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आपके लिए सवाल (Question For You):

  • ❓ क्या आप जानते हैं कि कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी (Second Generation) में 'वैक्यूम ट्यूब' को किस छोटे से डिवाइस ने रिप्लेस किया था, जिससे कंप्यूटर का आकार एकदम छोटा हो गया? इसका जवाब और अगला टॉपिक आप क्या पढ़ना चाहते हैं—नीचे कमेंट में जरूर लिखें!

धन्यवाद, और अपनी तैयारी में जी-जान से लगे रहें। जय हिन्द/Jai Hind! 🇮🇳

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Frequently Asked Questions (FAQs)

कंप्यूटर का पितामह (Father of Computer) किसे कहा जाता है?

कंप्यूटर का पितामह चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage) को कहा जाता है। उन्होंने 1833 में 'एनालिटिकल इंजन' (Analytical Engine) का डिजाइन तैयार किया था, जो आधुनिक कंप्यूटर के बुनियादी सिद्धांत (Input-Process-Output) पर आधारित था।

कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी (First Generation) का समय काल और मुख्य घटक क्या था?

कंप्यूटर की प्रथम पीढ़ी का समय काल लगभग 1940 से 1956 तक माना जाता है। इस पीढ़ी के कंप्यूटरों में मुख्य घटक (Main Component) के रूप में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tubes) या वाल्व का उपयोग किया जाता था।

दुनिया का सबसे पहला गणना यंत्र (First Calculating Device) कौन सा था?

दुनिया का सबसे पहला यांत्रिक गणना यंत्र अबैकस (Abacus) था। इसका आविष्कार लगभग 3000 वर्ष पूर्व चीन (China) में हुआ था। इसे जापानी भाषा में 'Soroban' कहा जाता है।

दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर कौन सा था: ENIAC या ABC?

तकनीकी रूप से ABC (Atanasoff-Berry Computer) दुनिया का पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था। हालांकि, ENIAC को पहला 'General Purpose' इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर माना जाता है क्योंकि इसका उपयोग व्यापक स्तर पर किया गया था।

कंप्यूटर इतिहास में 'लेडी एडा लवलेस' (Lady Ada Lovelace) क्यों प्रसिद्ध हैं?

लेडी एडा लवलेस को दुनिया की प्रथम प्रोग्रामर (First Programmer) माना जाता है। उन्होंने चार्ल्स बैबेज के एनालिटिकल इंजन के लिए 'बर्नौली नंबर्स' की गणना करने वाला पहला एल्गोरिदम (Algorithm) लिखा था।

ENIAC (एनीयक) का फुल फॉर्म क्या है?

ENIAC का पूर्ण रूप Electronic Numerical Integrator and Computer है। इसका आविष्कार जे.पी. एकर्ट और जॉन मौचली ने 1946 में किया था।

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